स्पेस रेस में चीन की बढ़त पर अमेरिका चिंतित, अधिकारियों ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दौड़ एक बार फिर तेज हो गई है और इस बार मुकाबला सीधे तौर पर अमेरिका और चीन के बीच नजर आ रहा है। अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में चीन तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जिससे अमेरिका की स्पेस लीडरशिप को चुनौती मिल सकती है। आईएसएस के बाद का दौर बना चुनौतीइंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पिछले 25 सालों से मानव अंतरिक्ष मिशनों और रिसर्च का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह स्टेशन पुराना हो रहा है और इसके अगले चरण को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। हाउस साइंस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने कहा कि ISS अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब इसके बाद की योजना बेहद सावधानी से बनानी होगी। चीन की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी टेंशनचीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर ली है। 2022 में लॉन्च हुए इस स्टेशन पर लगातार अंतरिक्ष यात्री काम कर रहे हैं। अमेरिकी सांसद माइक हरिडोपोलोस ने कहा कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी लीड बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। सुरक्षा और तकनीकी जोखिम भी बड़ी चिंताएयरोस्पेस सेफ्टी एक्सपर्ट चार्ल्स जे. प्रीकोर्ट ने चेतावनी दी कि ISS अब अपने सबसे जोखिम भरे दौर में है। पुराने होते सिस्टम और तकनीकी घिसावट के कारण खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सुरक्षित ऑपरेशन के लिए कड़ी इंजीनियरिंग और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है। ‘स्पेस गैप’ का खतराविशेषज्ञों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ISS से कमर्शियल स्पेस प्लेटफॉर्म पर ट्रांजिशन के दौरान अमेरिका की मानव अंतरिक्ष क्षमता में गैप आ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर रिसर्च और भविष्य के मिशनों पर पड़ेगा। तेजी से बढ़ रहा स्पेस बिजनेसकमर्शियल स्पेस सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कमर्शियल स्पेस फेडरेशन के अध्यक्ष डेविड कैवोसा के मुताबिक, वैश्विक स्पेस मार्केट पहले ही 57,000 करोड़ डॉलर का हो चुका है और 2035 तक इसके 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इस क्षेत्र में देरी या नीति की अस्पष्टता निवेश को प्रभावित कर सकती है। नासा की नई रणनीतिनासा अब ISS के बाद के दौर के लिए कमर्शियल स्पेस स्टेशनों पर फोकस कर रहा है। स्पेस ऑपरेशंस के अधिकारी जोएल आर. मोंटालबानो ने कहा कि एजेंसी 2030 तक एक मजबूत कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जहां वह खुद भी एक ग्राहक के रूप में शामिल होगी। निर्णायक होंगे आने वाले सालअमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगले कुछ साल यह तय करेंगे कि लो अर्थ ऑर्बिट में किसकी बादशाहत होगी। दशकों तक लगातार अंतरिक्ष में मौजूदगी के बाद अगर अमेरिका के मिशनों में कोई गैप आता है, तो इसका सीधा फायदा चीन को मिल सकता है।
उबलता पानी और जहरीली गैसें: ‘डालोल’ क्यों है धरती का सबसे खतरनाक इलाका?

नई दिल्ली। दुनिया में कई जगहें अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन कुछ स्थान ऐसे भी हैं जो रहस्य और खतरे का अनोखा संगम हैं। डालोल ऐसा ही एक इलाका है, जो इथियोपिया के डानाकिल डिप्रेशन में स्थित है। यह जगह पृथ्वी के सबसे गर्म, अम्लीय और खतरनाक स्थानों में गिनी जाती है, जहां प्रकृति अपने सबसे भयावह रूप में नजर आती है। ज्वालामुखी के मुंह पर बसा ‘नरक जैसा’ इलाकाडालोल दरअसल नमक से भरे एक ज्वालामुखी क्रेटर के ऊपर बसा है। यहां लगातार हाइड्रोथर्मल गतिविधियां होती रहती हैं, जिससे उबलता पानी, जहरीली गैसें और खनिज सतह पर निकलते रहते हैं। जमीन से निकलते ये उबलते झरने किसी उबलते हुए “पृथ्वी के जख्म” जैसे लगते हैं। तापमान इतना ज्यादा होता है कि कई जगह पानी 90 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच जाता है। रंगों का मायाजाल, लेकिन बेहद खतरनाकNASA के अनुसार, डालोल का इलाका देखने में बेहद रंगीन और आकर्षक लगता है—पीला रंग सल्फर से, लाल आयरन ऑक्साइड से और हरा कॉपर सॉल्ट से बनता है। लेकिन यह खूबसूरती बेहद खतरनाक है, क्योंकि यहां का पानी अत्यधिक अम्लीय (pH 0.25 तक) और बेहद नमकीन है। जमीन पर बनी नमक की चिमनियां और रंग-बिरंगे झरने इसे किसी दूसरे ग्रह जैसा बना देते हैं। जहरीली हवा, जहां इंसानों का रहना लगभग नामुमकिनइस क्षेत्र की हवा में क्लोरीन और सल्फर जैसी जहरीली गैसें मौजूद रहती हैं। यही कारण है कि यहां लंबे समय तक इंसानों का रहना लगभग असंभव माना जाता है। इसके बावजूद, यह इलाका पूरी तरह निर्जीव नहीं है। मौत के बीच जीवन की खोजवैज्ञानिकों के लिए डालोल किसी खजाने से कम नहीं है। स्पेन के एस्ट्रोबायोलॉजी सेंटर के डॉ. फेलिप गोमेज की टीम ने यहां ऐसे सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया) खोजे हैं जो अत्यधिक गर्मी, अम्लता और नमक के बीच भी जीवित रह सकते हैं। ये बैक्टीरिया सामान्य जीवों से 20 गुना तक छोटे हैं और बेहद कठिन परिस्थितियों में भी पनपते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जीवन कितनी चरम परिस्थितियों में संभव हो सकता है। मंगल ग्रह से कनेक्शनवैज्ञानिक डालोल को मंगल ग्रह के पुराने वातावरण का मॉडल मानते हैं। यहां की हाइड्रोथर्मल गतिविधियां, खनिज और अम्लीय स्थितियां मंगल के कुछ क्षेत्रों से काफी मिलती-जुलती हैं। इसी वजह से इस इलाके का अध्ययन अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं को समझने में मदद करता है। पृथ्वी का सबसे गर्म और अनोखा इलाकासमुद्र तल से 125 मीटर नीचे स्थित डालोल का औसत तापमान सालभर 34-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। यह पृथ्वी के सबसे गर्म बसे हुए इलाकों में से एक माना जाता है। यहां जिंक, मैंगनीज, सल्फाइड और रॉक सॉल्ट जैसे खनिज लगातार बनते रहते हैं, जो इसे भूवैज्ञानिक रूप से बेहद खास बनाते हैं। रहस्य और खतरे का अनोखा संगमडालोल सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि प्रकृति की चरम सीमाओं का जीवंत उदाहरण है। जहां एक तरफ यह इलाका जीवन के लिए लगभग असंभव है, वहीं दूसरी ओर यहां मौजूद सूक्ष्म जीव यह साबित करते हैं कि जीवन हर मुश्किल परिस्थिति में अपना रास्ता खोज ही लेता है।
Meta: मेटा पर 3100 करोड़ का जुर्माना, कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने का ठहराया दोषी

वाशिंगटन। अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक जूरी ने मंगलवार को मेटा को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण से जुड़े खतरों को छिपाने का दोषी ठहराया। करीब सात हफ्ते चले इस ट्रायल के बाद आए इस फैसले को टेक कंपनियों के खिलाफ सख्ती के बढ़ते रुझान के रूप में देखा जा रहा है। जूरी ने राज्य के अभियोजकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि मेटा (इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप का मालिक) ने सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को प्राथमिकता दी। जूरी ने माना कि कंपनी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और यौन शोषण के खतरों को लेकर भ्रामक जानकारी दी और अनुचित व्यापारिक तरीकों का इस्तेमाल किया। मेटा पर लगा 3100 करोड़ रुपये का जुर्माना जूरी ने पाया कि हजारों उल्लंघन हुए हैं, जिनके आधार पर 375 मिलियन डॉलर यानी करीब 3100 करोड़ भारतीय रुपये का जुर्माना तय किया गया, जो अभियोजन पक्ष की मांग से काफी कम है। हालांकि, कंपनी का बाजार मूल्य लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर है और फैसले के बाद उसके शेयरों में करीब 5% की बढ़त देखी गई। फिलहाल मेटा को तुरंत अपने कामकाज में बदलाव करने के लिए बाध्य नहीं किया गया है। अब यह तय करना एक जज के ऊपर होगा कि क्या मेटा के प्लेटफॉर्म्स सार्वजनिक नुकसान का कारण बने और क्या कंपनी को इससे जुड़े नुकसान की भरपाई करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई मई में होगी। मेटा ने फैसले पर जताई असहमति मेटा के प्रवक्ता ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि कंपनी इसके खिलाफ अपील करेगी। उन्होंने कहा कि मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स पर लोगों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम करती है और हानिकारक कंटेंट को हटाने की कोशिश करती है। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ बढ़ते कानूनी मामलों में से एक है। 2023 में न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज द्वारा दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि मेटा ने सोशल मीडिया के खतरों और लत से जुड़े मुद्दों को पूरी तरह उजागर नहीं किया। जूरी ने यह भी जांचा कि कंपनी ने 13 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध लागू करने, किशोर आत्महत्या से जुड़े कंटेंट और एल्गोरिदम के जरिए हानिकारक सामग्री को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर क्या जानकारी साझा की। मेटा के वकीलों ने कहा कि कंपनी जोखिमों को उजागर करती है और हानिकारक सामग्री को हटाने का प्रयास करती है, हालांकि कुछ सामग्री सुरक्षा तंत्र से बच निकलती है।
OnePlus Nord 6 में मिलेगा 9000mAh बैटरी और Snapdragon 8 Gen 4 जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली:स्मार्टफोन बाजार में एक और बड़ा धमाका करने की तैयारी में OnePlus अपना नया मिड-प्रीमियम डिवाइस OnePlus Nord 6 जल्द ही भारत में लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी ने पुष्टि की है कि इस फोन के पूरे स्पेसिफिकेशंस 7 अप्रैल को शाम 7 बजे जारी किए जाएंगे, जिससे टेक लवर्स के बीच इसका इंतजार और बढ़ गया है OnePlus Nord 6 को खास तौर पर मॉडर्न यूजर्स और गेमिंग एक्सपीरियंस को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसमें क्वालकॉम का लेटेस्ट Snapdragon 8 Gen 4 chipset दिया गया है, जो 4nm प्रोसेस पर आधारित है और हाई-एंड परफॉर्मेंस देने में सक्षम है। यह प्रोसेसर एडवांस कोर आर्किटेक्चर के साथ आता है, जिससे फोन तेज और स्मूद काम करता है गेमिंग के शौकीनों के लिए यह फोन खास साबित हो सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह BGMI, Call of Duty Mobile और Free Fire MAX जैसे पॉपुलर गेम्स में लगातार 165FPS तक का गेमप्ले दे सकता है, जो इसे अपने सेगमेंट में अलग बनाता है। साथ ही एड्रेनो GPU और नई एज टेक्नोलॉजी गेमिंग को और बेहतर बनाती है डिस्प्ले की बात करें तो इसमें 165Hz रिफ्रेश रेट के साथ 1.5K AMOLED सनबर्स्ट HDR डिस्प्ले दी गई है, जो बेहद स्मूद विजुअल्स और शानदार ब्राइटनेस प्रदान करती है। इसमें 1800 निट्स तक हाई ब्राइटनेस मोड और 3600 निट्स तक पीक HDR ब्राइटनेस मिलती है, जिससे आउटडोर और HDR कंटेंट देखने का अनुभव शानदार हो जाता है इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9000mAh की विशाल बैटरी है, जो इस सेगमेंट में सबसे बड़ी मानी जा रही है। कंपनी के अनुसार यह बैटरी एक बार चार्ज करने पर सामान्य उपयोग में 2.5 दिन तक चल सकती है। इसके अलावा यह 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है, जिससे फोन लगभग 70 मिनट में फुल चार्ज हो सकता है। इसमें 27W रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया गया है, जिससे आप दूसरे डिवाइसेस को भी चार्ज कर सकते हैं कनेक्टिविटी के लिए इसमें G2 वाई-फाई चिप दी गई है, जो बेहतर नेटवर्क परफॉर्मेंस सुनिश्चित करती है। इसके अलावा फोन तीन कलर ऑप्शन होलोग्राफिक क्विक सिल्वर, फ्रेश मिंट और पिच ब्लैक में उपलब्ध होगा, जो यूजर्स को स्टाइलिश डिजाइन का विकल्प देता है OnePlus Nord 6 एक पावरफुल ऑलराउंडर स्मार्टफोन के रूप में सामने आ रहा है, जो बैटरी, गेमिंग और परफॉर्मेंस के मामले में नए स्टैंडर्ड सेट कर सकता है TagsOnePlus, Nord6, Smartphone, TechNews, GamingPhone
चांद मिशन में नई टेक्नोलॉजी NASA ट्रैक करेगा एस्ट्रोनॉट्स की हेल्थ और बिहेवियर

नई दिल्ली: अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग कर रहा NASA अब अपने आने वाले Artemis II मिशन को और भी खास बनाने जा रहा है। यह मिशन केवल चांद की यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत और व्यवहार को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण रिसर्च भी शामिल की गई है। Artemis II mission को 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च करने की तैयारी है और यह Apollo मिशनों के बाद पहली बार होगा जब इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर डीप स्पेस में जाएगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री Orion कैप्सूल के जरिए चांद के आसपास की यात्रा करेंगे और करीब 10 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे। यह मिशन भविष्य में इंसानों की चांद पर वापसी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मिशन की सबसे खास बात है “Archer” स्टडी, जिसका पूरा नाम Artemis Research for Crew Health and Readiness है। इसके तहत सभी अंतरिक्ष यात्रियों को एक खास रिस्टबैंड पहनाया जाएगा। यह बैंड उनकी नींद, स्ट्रेस लेवल, मूवमेंट और व्यवहार से जुड़ा डेटा रियल-टाइम में रिकॉर्ड करेगा। इस डेटा के जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि डीप स्पेस का वातावरण इंसानों के दिमाग और शरीर पर किस तरह असर डालता है। मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों में Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen शामिल हैं। इन सभी के डेटा को मिशन से पहले, मिशन के दौरान और मिशन के बाद इकट्ठा किया जाएगा, जिससे उनके काग्निटिव परफॉर्मेंस, टीमवर्क और बिहेवियर को बेहतर तरीके से समझा जा सके। डीप स्पेस मिशन लो-अर्थ ऑर्बिट मिशनों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते हैं। लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहना, सीमित संसाधन और अलग-थलग वातावरण अंतरिक्ष यात्रियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव डाल सकता है। ऐसे में यह स्टडी भविष्य के मिशनों, खासकर Mars मिशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। NASA के Human Research Program के तहत जुटाया गया यह डेटा आने वाले समय में नई टेक्नोलॉजी और बेहतर सेफ्टी प्रोटोकॉल तैयार करने में मदद करेगा। इससे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और उनकी कार्यक्षमता दोनों को बेहतर बनाया जा सकेगा। NASA की साइकोलॉजिस्ट Suzanne Bell के अनुसार यह रिसर्च यह समझने में मदद करेगी कि अंतरिक्ष यात्री टीम के रूप में कैसे काम करते हैं और मिशन कंट्रोल के साथ उनका तालमेल कैसा रहता है।Artemis II मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि इंसानी क्षमता और व्यवहार को समझने की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम है, जो भविष्य में लंबी अंतरिक्ष यात्राओं को सुरक्षित और सफल बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है
Vivo X300s के फीचर्स लीक दमदार कैमरा और बड़ी बैटरी के साथ आएगा नया फोन

नई दिल्ली: स्मार्टफोन मार्केट में लगातार नए और एडवांस फीचर्स के साथ कंपनियां अपने डिवाइसेज पेश कर रही हैं और इसी कड़ी में Vivo अपना नया स्मार्टफोन Vivo X300s लॉन्च करने की तैयारी में है। यह फोन कंपनी की X सीरीज का हिस्सा होगा और इसमें कई हाई-एंड स्पेसिफिकेशंस देखने को मिल सकते हैं, जो इसे प्रीमियम कैटेगरी में मजबूती से खड़ा करते हैं लीक्स और रिपोर्ट्स के अनुसार इस फोन में 200 मेगापिक्सल का दमदार रियर कैमरा दिया जा सकता है, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बड़ा आकर्षण होगा। इसके अलावा 50 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा भी मिलने की संभावना है, जिससे सेल्फी और वीडियो कॉलिंग का अनुभव और बेहतर हो जाएगा। कैमरा सेगमेंट में यह फोन काफी पावरफुल साबित हो सकता है और यह हाई-क्वालिटी इमेज और वीडियो कैप्चर करने में सक्षम हो सकता है Vivo X300s की एक और बड़ी खासियत इसकी 7,100mAh की विशाल बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। इसके साथ 90W फास्ट चार्जिंग और 40W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट भी मिल सकता है, जिससे फोन को जल्दी चार्ज किया जा सकेगा। यह फीचर खासकर उन यूजर्स के लिए उपयोगी होगा जो दिनभर फोन का अधिक उपयोग करते हैं डिस्प्ले की बात करें तो इसमें 6.78 इंच की बड़ी स्क्रीन मिलने की उम्मीद है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट के साथ आएगी। इसका मतलब है कि यूजर्स को बेहद स्मूद स्क्रॉलिंग और बेहतर गेमिंग एक्सपीरियंस मिलेगा। साथ ही 1.5K रेजोल्यूशन वाली BOE Q10+ फ्लैट स्क्रीन इसे और भी प्रीमियम बनाती है सुरक्षा के लिहाज से भी यह फोन काफी एडवांस होगा, जिसमें 3D अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट 2.0 तकनीक दी जा सकती है। इसके अलावा फोन को IP68 और IP69 रेटिंग मिल सकती है, जिससे यह धूल और पानी से सुरक्षित रहेगा परफॉर्मेंस और अन्य फीचर्स की बात करें तो इसमें USB 3.2 पोर्ट, 1511 सिमेट्रिकल ड्यूल स्पीकर और 751440 X-एक्सिस मोटर जैसे फीचर्स भी शामिल हो सकते हैं, जो यूजर्स को एक प्रीमियम और इमर्सिव अनुभव देंगे फोन के लॉन्च की बात करें तो इसे चीन में 30 मार्च को पेश किए जाने की उम्मीद है, जहां यह Vivo X300 Ultra और Vivo Pad 6 Pro के साथ लॉन्च हो सकता है। यह फोन कई स्टोरेज और RAM वेरिएंट्स में उपलब्ध हो सकता है, जिससे यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे Vivo X300s एक पावरफुल और फीचर-रिच स्मार्टफोन साबित हो सकता है, जो कैमरा, बैटरी और परफॉर्मेंस के मामले में यूजर्स को बेहतरीन अनुभव देने का वादा करता है
AI डेवलपमेंट पर रोक की मांग Stop the AI Raceप्रोटेस्ट ने छेड़ी बड़ी बहस

नई दिल्ली:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच अब इसके खिलाफ विरोध की आवाजें भी तेज होती जा रही हैं। हाल ही में अमेरिका के San Francisco में Stop the AI Raceनाम के एक समूह ने बड़ा प्रदर्शन किया, जहां दर्जनों लोगों ने प्रमुख AI कंपनियों के दफ्तरों के बाहर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। इस प्रदर्शन में Anthropic, OpenAI और xAI जैसी कंपनियों के खिलाफ आवाज उठाई गई और इनके मुख्यालयों के बाहर मार्च भी किया गया प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह थी कि एडवांस्ड या फ्रंटियर AI सिस्टम्स के विकास पर अस्थायी रूप से रोक लगाई जाए। उनका मानना है कि इस तरह की तकनीक तेजी से विकसित हो रही है और इसके संभावित खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समूह के लीडर Michael Trazzi के अनुसार उनका उद्देश्य कंपनियों को एक कंडीशनल पॉजपर सहमत कराना है, जिससे AI के विकास को कुछ समय के लिए रोका जा सके और इसके प्रभावों का बेहतर आकलन किया जा सके प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अत्याधुनिक AI सिस्टम्स भविष्य में ऐसे स्तर तक पहुंच सकते हैं जहां वे खुद को सुधारने और AI रिसर्च को ऑटोमेट करने में सक्षम होंगे। यह स्थिति इंसानों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। उनका दावा है कि यह चिंता केवल एक्टिविस्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि कई AI विशेषज्ञ और इंडस्ट्री के लीडर्स भी इन जोखिमों को लेकर चेतावनी दे चुके हैं यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में AI के लिए पॉलिसी और रेगुलेशन पर व्यापक चर्चा चल रही है। हाल ही में व्हाइट हाउस ने AI को लेकर एक नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति तैयार करना है। इस फ्रेमवर्क में बच्चों की सुरक्षा और कंपनियों की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है टेक एक्सपर्ट Ahmed Banafa ने इस मुद्दे की तुलना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के पुराने रेगुलेशन से की, जहां पहले कंपनियों को काफी छूट दी गई थी और अब उसके परिणाम सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि अगर AI के मामले में समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं वहीं California के स्टेट सीनेटर Scott Wiener ने इस तरह के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि AI जैसे संवेदनशील क्षेत्र में संतुलित नीति की जरूरत है। उनका मानना है कि इनोवेशन को रोकना समाधान नहीं है, बल्कि मजबूत और जिम्मेदार रेगुलेशन के जरिए इसे सुरक्षित बनाया जा सकता है इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया था, जिसमें राज्यों को अपने अलग-अलग AI कानून बनाने से रोका गया और राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नियम बनाने पर जोर दिया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि AI को लेकर सरकार और समाज दोनों स्तरों पर गंभीर चर्चा चल रही हैStop the AI Raceप्रोटेस्ट यह संकेत देता है कि AI अब केवल टेक्नोलॉजी का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सामाजिक, नैतिक और पॉलिसी से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिस पर दुनिया भर में बहस तेज होती जा रही है
Xiaomi का नया Air Fryer Pro 6.5L कैपेसिटी और स्मार्ट फीचर्स के साथ आया बाजार में

नई दिल्ली:टेक्नोलॉजी और स्मार्ट होम अप्लायंसेज के क्षेत्र में लगातार इनोवेशन कर रही Xiaomi ने एक और नया प्रोडक्ट पेश किया है Mijia Smart Air Fryer Pro Steam & Bake Edition 6.5L, जिसे कंपनी ने अपने Youpin प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया है। यह नया एयर फ्रायर आधुनिक कुकिंग को और भी आसान और हेल्दी बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है, जिससे घर पर बिना गैस और कम तेल में स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जा सकता है इस स्मार्ट एयर फ्रायर की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6.5 लीटर की बड़ी कैपेसिटी है, जिससे एक बार में पूरे परिवार के लिए खाना तैयार किया जा सकता है। Xiaomi ने इसे इस तरह डिजाइन किया है कि इसमें एक साथ कई डिश तैयार की जा सकती हैं। इसके ड्यूल लेयर रैक के जरिए यूजर्स एक साथ अलग-अलग चीजें कुक कर सकते हैं, जिससे समय की बचत होती है और कुकिंग प्रक्रिया ज्यादा सुविधाजनक बन जाती है डिवाइस में 900W का स्टीम जनरेटर दिया गया है जो 130°C तक तापमान पर काम कर सकता है, जिससे खाना जल्दी और समान रूप से पकता है। इसमें स्टीम, स्टीम-फ्राई और लो टेम्परेचर कुकिंग जैसे 11 अलग-अलग मोड दिए गए हैं, जो यूजर्स को कई तरह की रेसिपी आजमाने की सुविधा देते हैं। इसके अलावा 31 प्रीसेट रेसिपी और Mi Home ऐप के जरिए 100 से ज्यादा क्लाउड बेस्ड रेसिपी का सपोर्ट भी मिलता है, जिससे नए-नए व्यंजन बनाना बेहद आसान हो जाता है Xiaomi ने इस एयर फ्रायर को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए 304 स्टेनलेस स्टील की इनर कैविटी का इस्तेमाल किया है, जो ड्यूरेबिलिटी के साथ-साथ हाइजीन को भी सुनिश्चित करता है। इसमें फ्लोरीन-फ्री नॉन-स्टिक कोटिंग दी गई है, जिससे खाना चिपकता नहीं है और सफाई करना भी आसान हो जाता है। साथ ही इसमें 1.5 लीटर का वाटर टैंक है, जिससे लंबे समय तक स्टीम कुकिंग की जा सकती है और बिना बार-बार पानी डाले कई डिश तैयार की जा सकती हैं इस एयर फ्रायर में 360-डिग्री हॉट एयर सर्कुलेशन सिस्टम और डायनामिक स्टीम इंजेक्शन तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे खाना बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट और जूसी बनता है। इसका टेम्परेचर 30°C से 230°C तक कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे हर तरह के फूड को सही तरीके से पकाया जा सकता है यूजर्स इसे रोटरी नॉब या Mi Home ऐप के जरिए आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। यह डिवाइस HyperOS Connect और XiaoAI वॉयस असिस्टेंट के साथ भी काम करता है, जिससे इसे वॉयस कमांड से भी ऑपरेट किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें विजिबल कुकिंग विंडो, ऑटोमैटिक पावर ऑफ, ड्राइंग मोड, डिओडोराइजेशन और 30 मिनट तक फूड को गर्म रखने जैसी कई स्मार्ट सुविधाएं भी शामिल हैं कीमत की बात करें तो Xiaomi Mijia Smart Air Fryer Pro की कीमत 559 युआन है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 7,500 रुपये के आसपास बैठती है। इस कीमत पर यह एक किफायती और फीचर से भरपूर स्मार्ट किचन डिवाइस साबित हो सकता हैXiaomi का यह नया एयर फ्रायर आधुनिक तकनीक और हेल्दी कुकिंग का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है, जो आज के समय में स्मार्ट किचन की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है
Apple WWDC 2026 डेट फाइनल iOS 27 और नए AI फीचर्स पर रहेगा फोकस..

नई दिल्ली: टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे चर्चित इवेंट्स में से एक Apple का Worldwide Developers Conference यानी WWDC 2026 अब आधिकारिक रूप से घोषित हो चुका है। यह आयोजन 8 जून से 12 जून तक चलेगा और इसकी शुरुआत 8 जून को होने वाले कीनोट से होगी। हर साल की तरह इस बार भी Apple अपने नए सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी इनोवेशन को दुनिया के सामने पेश करेगा, जिससे डेवलपर्स और टेक प्रेमियों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में WWDC का फोकस हार्डवेयर से हटकर सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ज्यादा केंद्रित हो गया है। इस बार भी यही ट्रेंड जारी रहने की संभावना है, जहां Apple अपने ऑपरेटिंग सिस्टम्स के नए वर्जन जैसे iOS 27, macOS 27, iPadOS 27, watchOS 27, visionOS 27 और tvOS 27 को पेश कर सकता है। इन अपडेट्स के जरिए यूजर्स को बेहतर परफॉर्मेंस, नए फीचर्स और अधिक स्मूद एक्सपीरियंस मिलने की उम्मीद है। WWDC 2026 में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय Apple का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI रहने वाला है। कंपनी अपने लंबे समय से इंतजार किए जा रहे Siri अपग्रेड को पेश कर सकती है, जिसमें स्मार्ट और ज्यादा एडवांस फीचर्स शामिल होंगे। इसके साथ ही Apple Intelligence को और मजबूत बनाने की दिशा में भी कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन नए AI फीचर्स में Google के Gemini AI का भी सपोर्ट देखने को मिल सकता है, जिससे Apple का इकोसिस्टम और भी पावरफुल बन सकता है। इवेंट के तुरंत बाद डेवलपर्स को नए सॉफ्टवेयर के शुरुआती बीटा वर्जन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अपने ऐप्स को नए सिस्टम के अनुसार तैयार कर सकें। यह प्रक्रिया हर साल Apple के डेवलपर कम्युनिटी को नई टेक्नोलॉजी के साथ अपडेट रहने का अवसर देती है। आम यूजर्स के लिए ये सभी अपडेट्स साल के अंत तक रिलीज किए जाने की संभावना रहती है, जिससे वे नए फीचर्स का फायदा उठा सकें। Apple की वाइस प्रेसिडेंट Susan Prescott ने कहा कि WWDC कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां दुनिया भर के डेवलपर्स एक साथ आकर इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाते हैं। यह इवेंट न केवल नए प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन है, बल्कि एक ग्लोबल कम्युनिटी को जोड़ने का भी माध्यम है। इसके अलावा Apple अपने Swift Student Challenge के जरिए छात्रों को भी प्रोत्साहित करता है, जिसमें विजेताओं को Apple Park में खास अनुभव दिया जाता है। इस पहल का उद्देश्य युवा डेवलपर्स को प्रेरित करना और उन्हें भविष्य की टेक्नोलॉजी से जोड़ना है।
जीएसटी पोर्टल गाइड टैक्स रिफंड रिटर्न और शिकायत का पूरा समाधान..

नई दिल्ली: भारत में जीएसटी एक एकीकृत कर प्रणाली है जिसने कई प्रकार के केंद्रीय और राज्य करों को समाप्त कर एक सिंगल टैक्स सिस्टम की व्यवस्था बनाई है यह प्रणाली 2017 में लागू की गई थी और इसके बाद से टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाएं काफी आसान और पारदर्शी हो गई हैं जीएसटी पोर्टल इस पूरे सिस्टम का डिजिटल माध्यम है जहां से टैक्स से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं जीएसटी पोर्टल का उद्देश्य टैक्सपेयर्स को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां वे बिना किसी कागजी प्रक्रिया के अपने टैक्स संबंधित कार्य ऑनलाइन कर सकें इस पोर्टल के माध्यम से रिटर्न फाइल करना टैक्स का भुगतान करना रिफंड के लिए आवेदन करना और किसी भी तरह की शिकायत दर्ज करना बहुत आसान हो गया है यह पोर्टल व्यवसायियों प्रोफेशनल्स और आम टैक्सपेयर्स के लिए एक सिंगल विंडो की तरह कार्य करता है यदि आप जीएसटी पोर्टल में लॉगिन करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा इसके बाद होमपेज पर आपको लॉगिन का विकल्प दिखाई देगा जिस पर क्लिक करने के बाद आपको अपना यूजरनेम और पासवर्ड दर्ज करना होगा इसके साथ ही एक कैप्चा कोड भी भरना आवश्यक होता है सही जानकारी दर्ज करने के बाद लॉगिन पर क्लिक करते ही आप अपने जीएसटी डैशबोर्ड में पहुंच जाते हैं पहली बार उपयोग करने वाले यूजर्स को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है इसके लिए उन्हें पोर्टल पर रजिस्टर विकल्प का चयन करना होता है और अपनी आवश्यक जानकारी भरनी होती है रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक अस्थायी यूजरनेम और पासवर्ड प्राप्त होता है जिसे उपयोग करके आप पहली बार लॉगिन कर सकते हैं पहली बार लॉगिन करते समय सिस्टम आपसे पासवर्ड बदलने के लिए कहता है जिससे आपके अकाउंट की सुरक्षा सुनिश्चित होती है अगर किसी कारणवश आप अपना यूजरनेम या पासवर्ड भूल जाते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है पोर्टल पर फॉर्गेट यूजरनेम और फॉर्गेट पासवर्ड का विकल्प दिया गया है इसके माध्यम से आप अपने GSTIN या अन्य पहचान विवरण दर्ज करके ओटीपी वेरिफिकेशन के जरिए अपनी लॉगिन जानकारी को पुनः प्राप्त कर सकते हैं यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को बिना किसी बाधा के अपने अकाउंट तक पहुंचने में मदद करती है जीएसटी पोर्टल केवल लॉगिन तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह टैक्स से जुड़े सभी कार्यों को एक ही जगह पर पूरा करने की सुविधा देता है आप यहां से अपने टैक्स की गणना कर सकते हैं रिटर्न फाइल कर सकते हैं और भुगतान भी कर सकते हैं इसके अलावा रिफंड के लिए आवेदन करना और उसकी स्थिति को ट्रैक करना भी आसान है अगर आपको किसी प्रकार की समस्या होती है तो जीएसटी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है जिससे आप सीधे संबंधित अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं डिजिटल प्रणाली होने के कारण यह प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होती है इस प्रकार जीएसटी पोर्टल ने टैक्स सिस्टम को सरल और सुविधाजनक बना दिया है जिससे न केवल समय की बचत होती है बल्कि गलतियों की संभावना भी कम हो जाती है यह एक आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो भारत के टैक्स ढांचे को मजबूत और अधिक प्रभावी बनाता है