SanDisk Crayola Pen Drive लॉन्च: क्रेयॉन जैसी डिजाइन वाली नई USB ड्राइव, बच्चों को खेल-खेल में सिखाएगी टेक्नोलॉजी

नई दिल्ली। भारत में SanDisk ने अपनी नई Crayola USB-C Pen Drive लॉन्च की है, जिसका डिजाइन बिल्कुल क्रेयॉन (मोम पेंसिल) जैसा रखा गया है। यह पेन ड्राइव सिर्फ डेटा स्टोरेज के लिए नहीं, बल्कि बच्चों को टेक्नोलॉजी समझाने के लिए एक एजुकेशनल टूल के रूप में तैयार की गई है। क्यों बनाई गई यह पेन ड्राइव?SanDisk और Crayola की पार्टनरशिप में बनी यह डिवाइस खासतौर परबच्चों को टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिएस्टोरेज डिवाइस को डराने वाली चीज नहीं बल्कि मजेदार टूल बनाने के लिएपैरेंट्स और टीचर्स को पढ़ाई में मदद देने के लिएबच्चों को खेल-खेल में डिजिटल फाइल्स समझाने के लिएयानी इसका मकसद है “सीखना आसान और मजेदार बनाना। इसे कैसे डिजाइन किया गया है?अंदर: नॉर्मल हाई-स्पीड फ्लैश मेमोरी चिपक्रेयॉन (मोम पेंसिल) जैसा प्लास्टिक डिजाइनUSB-C कनेक्टर फ्रंट में दिया गया हैइसे इस तरह बनाया गया है कि यह खिलौने जैसा भी लगे और टेक डिवाइस भी रहे यही वजह है कि पहली नजर में यह पेन ड्राइव नहीं बल्कि क्रेयॉन जैसा लगता है। फीचर्स और टेक्नोलॉजीUSB 3.2 Gen 1 = 300 MB/s तक की हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर स्टैंडर्ड USB 3.2 Gen 1 इंटरफेसरीड स्पीड: 300 MB/s तकUSB-C सपोर्टस्टोरेज: 64GB, 128GB, 256GBलैपटॉप, iPad और Chromebook सपोर्टप्लग एंड प्ले (कोई सेटअप नहीं)5 साल की लिमिटेड वारंटी कीमत64GB → ₹2,769128GB → ₹3,939256GB → ₹6,029 सभी मॉडल ऑनलाइन (जैसे Amazon) पर उपलब्ध हैं डिजाइन और खास बातक्रेयॉन जैसा यूनिक डिजाइनMango, Tango, Blue और Lime कलर ऑप्शनकंप्यूटर में कनेक्ट करने पर आइकन भी क्रेयॉन जैसा दिखता हैहल्की और पोर्टेबल डिवाइस फायदेबच्चों के लिए आसान और मजेदार सीखने का तरीकातेज डेटा ट्रांसफरयूनिक और आकर्षक डिजाइनस्कूल प्रोजेक्ट और एजुकेशन में उपयोगीलैपटॉप और टैबलेट के बीच आसान फाइल शेयरिंग नुकसानसामान्य पेन ड्राइव से महंगीडिजाइन फोकस ज्यादा, प्रोफेशनल फीचर्स कमबच्चों के लिए होने के कारण हर यूजर के लिए जरूरी नहींखोने या नुकसान होने का रिस्क ज्यादा (खिलौने जैसी फीलिंग) बच्चों के लिए सीखने का साधनक्रेयोला पेन ड्राइव = स्टोरेज डिवाइस + बच्चों के लिए सीखने का साधनसैंडिस्क क्रेयोला पेन ड्राइव एक यूनिक कॉन्सेप्ट है जो टेक्नोलॉजी और एजुकेशन को जोड़ती है। यह बच्चों के लिए खास तौर पर बनाई गई है ताकि वे स्टोरेज डिवाइस और डिजिटल फाइल्स को खेल-खेल में समझ सकें, लेकिन इसकी कीमत और सीमित प्रोफेशनल उपयोग इसे हर किसी के लिए जरूरी गैजेट नहीं बनाते।
Honda NX500 E-Clutch भारत में लॉन्च: ₹7.44 लाख कीमत, बिना क्लच दबाए चलेगी बाइक

नई दिल्ली। होंडा ने भारत में अपनी नई एडवेंचर बाइक NX500 E-Clutch को लॉन्च कर दिया है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹7.44 लाख रखी गई है। यह बाइक अपनी नई E-Clutch टेक्नोलॉजी के कारण चर्चा में है, जिसमें राइडर को गियर बदलते समय क्लच लीवर दबाने की जरूरत नहीं पड़ती। क्या है खास E-Clutch टेक्नोलॉजी?इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणाली का उपयोग करके स्वचालित क्लच सक्रियण होंडा की E-Clutch सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक एक्चुएटर्स लगे होते हैं, जो गियर बदलने, बाइक स्टार्ट करने और रोकने के दौरान क्लच को अपने आप ऑपरेट करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि राइडर चाहे तो क्लच लीवर का मैनुअल कंट्रोल भी इस्तेमाल कर सकता है, यानी यह पूरी तरह ऑटोमैटिक नहीं बल्कि सेमी-ऑटोमैटिक अनुभव देता है। इंजन और परफॉर्मेंसNX500 E-Clutch में कोई मैकेनिकल बदलाव नहीं किया गया है471cc, पैरलल ट्विन, लिक्विड-कूल्ड इंजनपावर: 47 hp @ 8,500 rpm6-स्पीड गियरबॉक्सफ्रंट: USD फोर्क सस्पेंशनरियर: मोनोशॉकब्रेकिंग सेटअप:फ्रंट: 296mm डुअल डिस्करियर: 240mm सिंगल डिस्कडुअल चैनल ABS वजन और डिजाइनE-Clutch सिस्टम से बाइक का वजन सिर्फ 3 किलो बढ़ाकुल वजन: 199 किलोटेक्नोलॉजी कॉम्पैक्ट होने के बावजूद परफॉर्मेंस पर असर नहीं पड़ता कीमत और मुकाबलानई NX500 पहले वाले मॉडल से करीब ₹1.11 लाख महंगी है।मार्केट में इसका मुकाबला इन बाइक्स से होगा:BMW F 450 GS Trophy — ₹5.30 लाखKawasaki Versys 650 — ₹8.63 लाखहोंडा की यह बाइक अपनी बिल्ड क्वालिटी और कम मेंटेनेंस कॉस्ट के लिए जानी जाती है। फीचर्स और वेरिएंटदो कलर: व्हाइट और ब्लैक5-इंच TFT डिस्प्लेस्विचेबल ट्रैक्शन कंट्रोलबुकिंग सभी Honda BigWing डीलरशिप पर शुरूराइडिंग मोड्स नहीं दिए गए हैंE-Clutch उन राइडर्स के लिए खास है जो ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाने से थक जाते हैं। यह सिस्टम शहर और हाईवे दोनों तरह की राइडिंग को आसान बनाता है।
Realme 16T Launch Update: 8,000mAh बैटरी वाला दमदार 5G फोन इस दिन होगा लॉन्च

नई दिल्ली। स्मार्टफोन ब्रांड Realme ने अपने नए 5G फोन Realme 16T को लेकर आधिकारिक घोषणा कर दी है। कंपनी के अनुसार यह डिवाइस भारत में 22 मई को लॉन्च किया जाएगा। यह फोन खास तौर पर अपनी लंबी बैटरी लाइफ और पावरफुल परफॉर्मेंस के कारण चर्चा में है। 8,000mAh की बड़ी बैटरीRealme 16T की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8,000mAh बैटरी बताई जा रही है, जो इस सेगमेंट में काफी बड़ी मानी जाती है। इसके साथ ही इसमें 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलेगा, जिससे फोन जल्दी चार्ज हो सकेगा। बड़ा और स्मूथ डिस्प्लेफोन में 6.8-इंच का बड़ा डिस्प्ले दिया जाएगा, जो वीडियो देखने और गेमिंग के अनुभव को बेहतर बनाएगा। डिस्प्ले क्वालिटी और रिफ्रेश रेट को लेकर कंपनी की तरफ से अभी पूरी डिटेल नहीं आई है, लेकिन इसे एंटरटेनमेंट फोकस्ड डिवाइस माना जा रहा है। MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसरपरफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek Dimensity 6300 5G चिपसेट दिया जाएगा। यह प्रोसेसर मिड-रेंज 5G सेगमेंट में बैलेंस्ड स्पीड और पावर एफिशिएंसी देने के लिए जाना जाता है। पिछले मॉडल से अपग्रेडयह फोन पिछले साल आए Realme 15T का अपग्रेड माना जा रहा है, जिसमें छोटा डिस्प्ले और Dimensity 6400 चिपसेट दिया गया था। नए मॉडल में बैटरी और डिस्प्ले साइज दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। Realme 16T उन यूजर्स के लिए खास हो सकता है जो लंबी बैटरी लाइफ, 5G कनेक्टिविटी और बड़ी स्क्रीन वाला फोन चाहते हैं। अब देखना होगा कि लॉन्च के बाद इसकी कीमत और बाकी फीचर्स क्या होते हैं।22 मई को लॉन्च इवेंट के बाद फोन की पूरी स्पेसिफिकेशन और कीमत सामने आएगी।
Google Search में अचानक दिक्कत? यूजर्स ने रिपोर्ट किया आउटेज, सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन Google Search को लेकर मंगलवार को कुछ यूजर्स ने तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें सर्च करने पर एरर मैसेज दिखाई दे रहा है और पेज लोड नहीं हो रहे हैं, जिससे सोशल मीडिया पर “Google down” की चर्चाएं तेज हो गई हैं। यूजर्स द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स में दावा किया जा रहा है कि सर्च रिक्वेस्ट प्रोसेस नहीं हो रही है और कुछ मामलों में सिस्टम की ओर से यह संकेत मिल रहा है कि इंजीनियर इस समस्या को ठीक करने में जुटे हैं। हालांकि, अभी तक इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह समस्या हर यूजर को प्रभावित नहीं कर रही है। कई लोगों के लिए Google Search सामान्य रूप से काम कर रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई पूरे सिस्टम का ग्लोबल आउटेज नहीं बल्कि सीमित या रीजनल तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है। इसी बीच आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector पर भी किसी बड़े स्तर की खराबी की पुष्टि नहीं दिखाई दी है, जो यह बताता है कि समस्या व्यापक नहीं है। वहीं, गूगल की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर सर्वर लोड, नेटवर्क गड़बड़ी या अस्थायी तकनीकी अपडेट वजह बन सकते हैं। Never thought @Google will go down. Condolences for the oncall engineers. — Manan (@_manan2005) May 12, 2026 फिलहाल स्थिति यह है कि कुछ यूजर्स प्रभावित हैं, जबकि कई लोगों के लिए सेवा सामान्य रूप से चल रही है। जैसे ही गूगल की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, तस्वीर और साफ हो जाएगी।Google Search को लेकर आई दिक्कतें पूरी तरह ग्लोबल आउटेज नहीं दिख रही हैं, बल्कि यह एक अस्थायी और आंशिक तकनीकी समस्या हो सकती है।
जापान में क्रांतिकारी कदम: इंसानों की जगह रोबोट कर रहे मेडिकल रिसर्च, पूरी लैब हुई ऑटोमेटेड

नई दिल्ली। जापान में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन के क्षेत्र में एक बड़ी और अनोखी पहल सामने आई है, जहां वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े काम अब इंसानों के बजाय पूरी तरह रोबोट्स के जरिए किए जा रहे हैं। टोक्यो विज्ञान संस्थान के युशिमा परिसर में स्थित “रोबोटिक्स इनोवेशन सेंटर” में एक ऐसी लैब विकसित की गई है, जिसमें शुरुआती चरण में लगभग 10 रोबोट काम कर रहे हैं और यहां किसी भी मानव कर्मचारी की प्रत्यक्ष मौजूदगी नहीं है। इस लैब का उद्देश्य मेडिकल रिसर्च और प्रयोगशाला से जुड़े उन कार्यों को ऑटोमेट करना है, जो अब तक वैज्ञानिकों द्वारा किए जाते थे। इसमें सैंपल हैंडलिंग, केमिकल मिक्सिंग, तापमान नियंत्रण और सेल कल्चर जैसे संवेदनशील प्रयोग शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि रोबोट अपने आप प्रोग्राम के आधार पर लगातार रिसर्च कार्यों को अंजाम दे सकें। इस लैब में मौजूद एक प्रमुख ह्यूमनॉइड रोबोट “Maholo LabDroid” है, जिसे विशेष रूप से जटिल और नाजुक प्रयोगों के लिए तैयार किया गया है। यह रोबोट अपने दो आर्टिफिशियल आर्म्स की मदद से केमिकल रिएक्टेंट्स की सटीक मात्रा को ट्रांसफर करने और लैब उपकरणों को नियंत्रित करने जैसे काम कर सकता है। इससे मानव त्रुटियों (human error) की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। जापान की यह पहल उन चुनौतियों के समाधान के रूप में देखी जा रही है, जहां रिसर्च लैब्स में कर्मचारियों की कमी और लंबे समय तक चलने वाले प्रयोगों में मानवीय सीमाएं एक बड़ी बाधा बनती हैं। इसी वजह से इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य भविष्य में और अधिक ऑटोमेशन लाना है, जिसमें अनुमान है कि 2040 तक इस केंद्र में करीब 2000 रोबोट्स काम कर सकते हैं। रोबोट Maholo को पहले जापान के कोबे स्थित एक नेत्र अस्पताल में भी परीक्षण के तौर पर इस्तेमाल किया गया था, जहां इसने लैब और मेडिकल प्रक्रियाओं में अपनी क्षमता साबित की थी। अब इस तकनीक को रिसर्च लैब्स में विस्तार दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत हो सकता है, जहां भविष्य में लैब्स पूरी तरह ऑटोमेटेड हो सकती हैं और रिसर्च की गति व सटीकता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
Oppo Find X10 Pro Max: डुअल 200MP कैमरा और 2nm चिपसेट के साथ आने वाला अगला सुपर फ्लैगशिप फोन

नई दिल्ली। ओप्पो अपनी अगली फ्लैगशिप स्मार्टफोन सीरीज Find X10 पर काम कर रहा है, जिसे लेकर टेक मार्केट में अभी से काफी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन लीक्स और टिपस्टर रिपोर्ट्स के आधार पर इसके टॉप मॉडल Oppo Find X10 Pro Max को बेहद पावरफुल कैमरा और हाई-एंड फीचर्स के साथ पेश किए जाने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस अपकमिंग फोन में डुअल 200 मेगापिक्सल कैमरा सेटअप देखने को मिल सकता है, जिसमें प्राइमरी सेंसर और पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस दोनों हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग क्षमता के साथ आ सकते हैं। इसके साथ अल्ट्रा-वाइड कैमरा भी दिया जा सकता है, जिससे यह फोन फोटोग्राफी के मामले में एक अल्ट्रा-फ्लैगशिप डिवाइस बन सकता है। डिस्प्ले की बात करें तो इसमें 6.89 इंच की बड़ी 2K LTPO फ्लैट स्क्रीन मिलने की संभावना है, जो बेहतर रिफ्रेश रेट और पावर एफिशिएंसी के साथ आएगी। परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek का अगली पीढ़ी का 2nm आधारित फ्लैगशिप चिपसेट दिए जाने की चर्चा है, जिसे फिलहाल Dimensity सीरीज का अपग्रेडेड वर्जन माना जा रहा है। कैमरा सेंसर टेक्नोलॉजी को और मजबूत बनाने के लिए Samsung के नए HPC सेंसर के इस्तेमाल की भी संभावना जताई जा रही है। इससे फोन की लो-लाइट और ज़ूम फोटोग्राफी क्षमता और बेहतर हो सकती है। हालांकि अभी यह सभी जानकारियां लीक और शुरुआती रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, इसलिए अंतिम स्पेसिफिकेशन लॉन्च के समय बदल भी सकते हैं। Oppo Find X10 सीरीज के इस साल के अंत तक लॉन्च होने की उम्मीद जताई जा रही है, और यह सीधे तौर पर Samsung और अन्य प्रीमियम फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स को टक्कर दे सकता है।
Algae Tree Machine: भारत का पहला लिक्विड पेड़, जो 25 पेड़ों जितनी साफ हवा देता है

नई दिल्ली। भोपाल एक बार फिर पर्यावरण तकनीक के क्षेत्र में सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश की राजधानी स्थित स्वामी विवेकानंद पार्क में देश का पहला शैवाल वृक्ष मशीन स्थापित किया गया है, जिसे “लिक्विड पेड़” भी कहा जा रहा है। यह तकनीक दिखने में भले ही किसी आधुनिक साइंस इंस्टॉलेशन जैसी लगे, लेकिन इसका काम बेहद महत्वपूर्ण है वायु प्रदूषण को कम करना और ऑक्सीजन बढ़ाना। क्या है Algae Tree Machine?शैवाल वृक्ष मशीन असल में कोई प्राकृतिक पेड़ नहीं, बल्कि एक उन्नत फोटो-बायोरिएक्टर (Photo-Bioreactor) तकनीक पर आधारित मशीन है। यह एक पारदर्शी टैंक जैसा ढांचा होता है, जिसमें पानी और सूक्ष्म शैवाल (Algae) भरे होते हैं। इस मशीन के ऊपरी हिस्से में सोलर पैनल लगे होते हैं, जो इसे ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसके अंदर मौजूद अल्गी (काई) सूर्य की रोशनी की मदद से फोटोसिंथेसिस करती है और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ती है। कैसे काम करता है यह “लिक्विड पेड़”?इस तकनीक की कार्यप्रणाली बेहद रोचक है: मशीन आसपास की प्रदूषित हवा को अंदर खींचती है अंदर मौजूद पानी और काई (Algae) हवा को फिल्टर करते हैं काई कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करती है फोटोसिंथेसिस के माध्यम से ऑक्सीजन बाहर छोड़ती है धूल और हानिकारक कण भी इसमें फंस जाते हैं यानी यह मशीन एक साथ हवा साफ करने और ऑक्सीजन बढ़ाने का काम करती है। 25 पेड़ों के बराबर क्षमताविशेषज्ञों के अनुसार एक Algae Tree Machine: साल में लगभग 1.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड सोख सकती है यह लगभग 20 से 25 बड़े पेड़ों के बराबर प्रभाव देती है कम जगह में भी यह अधिक प्रदूषण को नियंत्रित कर सकती है इसी कारण इसे “लिक्विड फॉरेस्ट टेक्नोलॉजी” भी कहा जा रहा है। इसे कहाँ और क्यों लगाया गया?भोपाल के स्वामी विवेकानंद पार्क में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाया गया है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है, जहाँ पेड़ों के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। क्या यह असली पेड़ों का विकल्प है?यह बहुत जरूरी सवाल है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक पेड़ों का विकल्प नहीं है। असली पेड़ मिट्टी की सेहत सुधारते हैं छाया और जैव विविधता प्रदान करते हैं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं जबकि Algae Tree केवल हवा को शुद्ध करने में मदद करता हैशहरी प्रदूषण के लिए एक अतिरिक्त समाधान है। इस तकनीक की खास बातेंसोलर पावर से चलने वाली तकनीकLED लाइट और बैटरी बैकअप सिस्टम24 घंटे काम करने की क्षमतासीमित जगह में अधिक प्रभावशैवाल वृक्ष मशीन एक आधुनिक पर्यावरण तकनीक है जो शहरी प्रदूषण से लड़ने में नई उम्मीद जगाती है। यह दिखाता है कि विज्ञान और प्रकृति मिलकर कैसे नए समाधान दे सकते हैंहालांकि यह असली पेड़ों का विकल्प नहीं है, लेकिन यह उन जगहों के लिए एक प्रभावी सहायक तकनीक है जहाँ हरियाली बढ़ाना मुश्किल होता है। भोपाल में इसकी शुरुआत भारत के पर्यावरण तकनीक क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
Apps Scam: 73 लाख डाउनलोड, कॉल-व्हाट्सऐप हिस्ट्री के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा! Google Play Store पर 28 खतरनाक ऐप्स का खुलासा

नई दिल्ली। साइबर सुरक्षा फर्म ESET की रिपोर्ट ने एक बड़े ऑनलाइन स्कैम का पर्दाफाश किया है, जिसमें Google Play Store पर मौजूद 28 फर्जी एंड्रॉयड ऐप्स यूजर्स को कॉल हिस्ट्री, SMS रिकॉर्ड और WhatsApp कॉल लॉग निकालने का झूठा दावा करके ठग रहे थे। इन ऐप्स को मिलाकर करीब 73 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, ये ऐप्स “CallPhantom” नाम से जाने जा रहे हैं। इनका दावा था कि कोई भी यूजर किसी भी नंबर की पूरी कॉल डिटेल, मैसेज और व्हाट्सऐप कॉल हिस्ट्री देख सकता है। लेकिन असलियत में ये ऐप्स पूरी तरह फर्जी डेटा बनाते थे और यूजर्स से उसे देखने के लिए पैसे या सब्सक्रिप्शन वसूलते थे। कैसे हुआ खुलासा?यह मामला तब सामने आया जब Reddit पर “Call History of Any Number” नाम के एक ऐप की चर्चा शुरू हुई। ऐप को “Indian gov.in” जैसे फर्जी डेवलपर नाम से पेश किया गया था, जिससे यह सरकारी या भरोसेमंद लग सके। ESET रिसर्चर्स ने जांच में पाया कि ऐप द्वारा दिखाया गया कॉल डेटा पूरी तरह नकली था। यह ऐप खुद ही रैंडम नंबर, नाम, कॉल टाइम और ड्यूरेशन बनाकर स्क्रीन पर दिखाता था, ताकि यूजर को लगे कि असली डेटा मिल रहा है। असली स्कैम कैसे चलता था?यूजर्स को पहले फ्री में सीमित जानकारी दिखाई जाती थी, लेकिन जैसे ही वे “फुल रिपोर्ट” देखने के लिए क्लिक करते थे, उन्हें सब्सक्रिप्शन खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। पैसे देने के बाद भी असली डेटा नहीं, बल्कि वही नकली रिकॉर्ड दिखाया जाता था। 27 और ऐप्स भी मिलेजांच में पता चला कि इसी तरह के 27 और फर्जी ऐप्स भी Play Store पर मौजूद थे, जो इसी पैटर्न पर काम कर रहे थे। ESET ने 16 दिसंबर 2025 को Google को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद सभी ऐप्स को स्टोर से हटा दिया गया। बड़ा खतरा क्या है?ऐसे ऐप्स सिर्फ पैसे की ठगी ही नहीं करते, बल्कि यूजर्स का भरोसा भी तोड़ते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसकी रेटिंग, रिव्यू और परमिशन जरूर चेक करनी चाहिए।
टेक्नोलॉजी और एआई: बुजुर्गों के लिए नई उम्मीद, लेकिन संतुलन जरूरी

नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के जीवन को भी आसान, सक्रिय और खुशहाल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हाल के शोध बताते हैं कि सही तरीके से डिजिटल टूल्स का उपयोग बुजुर्गों की मानसिक सेहत, याददाश्त और सामाजिक जुड़ाव को बेहतर कर सकता है। डिजिटल सीखने से बढ़ती है दिमाग की ताकतअमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के एक शोध के अनुसार, जब बुजुर्ग नई डिजिटल स्किल्स सीखते हैं तो उनकी मानसिक क्षमता में सुधार होता है। अध्ययन में पाया गया कि डिजिटल तकनीक सीखने से उनकी याददाश्त लगभग 30% तक बेहतर हो सकती है। जो बुजुर्ग नए ऐप्स सीखते हैंवीडियो ट्यूटोरियल से अभ्यास करते हैंग्रुप क्लास या ऑनलाइन कोर्स जॉइन करते हैंउनकी सोचने और समझने की क्षमता अधिक सक्रिय रहती है। AI बन रहा है पर्सनल ब्रेन कोचआज के समय में AI आधारित ऐप्स बुजुर्गों के लिए एक तरह से “पर्सनल ब्रेन कोच” की तरह काम कर रहे हैं। ये सिस्टम मानसिक क्षमता का आकलन करते हैंयाददाश्त बढ़ाने के लिए गेम और पहेलियाँ देते हैंसीखने की प्रक्रिया को आसान बनाते हैंइससे दिमाग में “डोपामाइन” रिलीज होता है, जिससे खुशी और आत्मविश्वास बढ़ता है। टेक्नोलॉजी से स्वास्थ्य पर निगरानीस्मार्टवॉच और हेल्थ डिवाइस अब केवल गैजेट नहीं रहे, बल्कि स्वास्थ्य सहायक बन गए हैं। ये डिवाइस दिल की धड़कन को मॉनिटर करते हैंनींद के पैटर्न को ट्रैक करते हैं सांस और शरीर में बदलाव पहचानते हैंAI सिस्टम इन डाटा को विश्लेषित करके बीमारी के शुरुआती संकेत भी पहचान सकते हैं। अकेलापन कम करने में मददगार टेक्नोलॉजीडिजिटल प्लेटफॉर्म बुजुर्गों के लिए सामाजिक जुड़ाव का जरिया बन रहे हैं: वीडियो कॉल से परिवार से संपर्क व्हाट्सएप और सोशल मीडिया से बातचीत ऑनलाइन ग्रुप्स से जुड़ाव इससे अकेलापन और तनाव दोनों में कमी आती है। नई चीजें सीखने से दिमाग रहता है सक्रियजब बुजुर्ग ऑनलाइन बैंकिंग सीखते हैंयूट्यूब या डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैंनई स्किल्स अपनाते हैंतो उनके दिमाग के न्यूरल नेटवर्क सक्रिय रहते हैं, जिससे डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। विशेषज्ञों की रायन्यूरोलॉजी और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टेक्नोलॉजी बुजुर्गों के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका उपयोग संतुलित होना चाहिए। अत्यधिक स्क्रीन टाइम नुकसान भी पहुंचा सकता है, इसलिए जागरूकता जरूरी है। टेक्नोलॉजी और AI बुजुर्गों के जीवन को न केवल आसान बना रहे हैं, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से सक्रिय और सामाजिक रूप से जुड़ा भी रख रहे हैं। हालांकि, इसका सही और सीमित उपयोग ही सबसे महत्वपूर्ण है। सही दिशा में इस्तेमाल करने पर डिजिटल तकनीक बुजुर्गों के लिए “स्वस्थ, खुश और सक्रिय जीवन” की कुंजी बन सकती है।
Google Translate के 20 साल पूरे: सबसे ज्यादा ट्रांसलेट होने वाला शब्द जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली। गूगल अनुवाद ने अपने 20 साल पूरे कर लिए हैं और इस मौके पर कंपनी ने एक दिलचस्प जानकारी साझा की है। आज यह प्लेटफॉर्म दुनिया भर में भाषा की सबसे बड़ी बाधा को आसान बना चुका है और करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल रोज़ाना करते हैं। गूगल के मुताबिक, पिछले दो दशकों में इस प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा ट्रांसलेट किया जाने वाला वाक्य कोई तकनीकी या जटिल शब्द नहीं, बल्कि बेहद सरल और भावनात्मक शब्द है — “Thank You” यानी धन्यवाद। यह दिखाता है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में लोग सबसे ज्यादा आभार और विनम्रता व्यक्त करने के लिए भाषा का इस्तेमाल करते हैं। कंपनी ने बताया कि लोग अलग-अलग भाषाओं में “Thank You” लिखकर या बोलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। यही वजह है कि यह शब्द गूगल अनुवाद पर सबसे ज्यादा बार ट्रांसलेट किया गया। सोशल मीडिया पर भी इस जानकारी के सामने आने के बाद लोगों ने अलग-अलग भाषाओं में धन्यवाद लिखकर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। लोगों का कहना है कि यह छोटी-सी बात बहुत बड़ा संदेश देती है कि चाहे भाषा कोई भी हो, इंसानी भावनाएं एक जैसी होती हैं। आभार, सम्मान और विनम्रता जैसी चीजें हर संस्कृति में समान महत्व रखती हैं। गूगल अनुवाद की शुरुआत साल 2006 में हुई थी। शुरुआती दौर में यह सिर्फ शब्दों और छोटे वाक्यों का सीधा अनुवाद करता था, लेकिन समय के साथ इसमें कई बड़े बदलाव हुए। अब यह केवल शब्दों का अर्थ ही नहीं बताता, बल्कि पूरे वाक्य का संदर्भ, भाव और बातचीत का तरीका भी समझने लगा है। आज यह टूल सिर्फ अनुवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पढ़ाई, बिजनेस, यात्रा और कंटेंट क्रिएशन जैसे कई क्षेत्रों में उपयोग किया जाता है। लोग इसे विदेशी भाषा समझने, बातचीत करने और नई भाषाएं सीखने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं। गूगल अनुवाद ने इस 20वीं सालगिरह पर एक नया AI फीचर भी लॉन्च किया है। इस फीचर का नाम “Pronounce” है, जो यूजर्स को सही उच्चारण सीखने में मदद करता है। इसमें यूजर किसी शब्द या वाक्य को बोलकर अभ्यास कर सकता है और सिस्टम बताता है कि उसका उच्चारण कितना सही है और कहां सुधार की जरूरत है। इस फीचर का उद्देश्य लोगों को किसी भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ दूसरी भाषा बोलने में मदद करना है। ऐप गलतियों को सुधारते समय एक आसान और सकारात्मक तरीका अपनाता है ताकि सीखने की प्रक्रिया सरल रहे। फिलहाल यह नया फीचर भारत और अमेरिका में उपलब्ध कराया गया है और यह अंग्रेजी, हिंदी और स्पेनिश जैसी भाषाओं को सपोर्ट करता है। कुल मिलाकर, गूगल अनुवाद का यह 20 साल का सफर दिखाता है कि तकनीक ने सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ने का काम किया है।