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Split vs Window AC: कौन ज्यादा सुरक्षित? शॉर्ट सर्किट और ब्लास्ट के खतरे में बड़ा फर्क जानिए

नई दिल्ली। दिल्ली के विवेक विहार में एसी ब्लास्ट की दर्दनाक घटना के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि घर के लिए कौन-सा एसी ज्यादा सुरक्षित है स्प्लिट या विंडो। बाजार में दोनों तरह के एसी उपलब्ध हैं और दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं, लेकिन सुरक्षा के नजरिए से देखें तो विंडो एसी को ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है। स्प्लिट एसी में दो यूनिट होती हैं एक इनडोर और एक आउटडोर। इसका कंप्रेसर बाहर होने की वजह से कमरे में शोर नहीं होता और बड़े कमरों में इसकी कूलिंग बेहतर रहती है। हालांकि, इसकी इंस्टॉलेशन जटिल होती है और इसमें लंबी कॉपर पाइपलाइन लगती है। अगर इंस्टॉलेशन सही तरीके से न हो या समय पर सर्विस न कराई जाए, तो गैस लीक और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ सकता है। वहीं विंडो एसी एक सिंगल यूनिट होता है, जिसे लगाना आसान और सस्ता होता है। इसकी बनावट कॉम्पैक्ट होती है, जिससे गैस लीक या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की संभावना कम रहती है। हालांकि, यह थोड़ा ज्यादा शोर करता है और कूलिंग स्प्लिट एसी के मुकाबले धीमी हो सकती है। सुरक्षा की बात करें तो विंडो एसी में पाइपलाइन छोटी होती है और वायरिंग भी सीमित रहती है, जिससे शॉर्ट सर्किट और ब्लास्ट जैसी घटनाओं का जोखिम कम होता है। इसके मुकाबले स्प्लिट एसी में लंबी पाइपलाइन और अलग यूनिट्स होने की वजह से तकनीकी गड़बड़ी की संभावना ज्यादा रहती है, खासकर जब इंस्टॉलेशन या मेंटेनेंस में लापरवाही हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि एसी कोई भी हो, सही इस्तेमाल और समय पर सर्विस सबसे जरूरी है। लगातार 24 घंटे एसी चलाने से बचना चाहिए, नियमित सर्विस करानी चाहिए और वोल्टेज की समस्या वाले इलाकों में स्टेबलाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर एसी से गैस लीक या अजीब आवाज जैसी समस्या आए, तो तुरंत उसे बंद कराकर ठीक कराना जरूरी है। कुल मिलाकर, अगर प्राथमिकता सुरक्षा है तो विंडो एसी बेहतर विकल्प माना जा सकता है, जबकि बेहतर कूलिंग और कम शोर के लिए स्प्लिट एसी चुना जा सकता है—लेकिन सही इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के बिना दोनों ही जोखिम भरे हो सकते हैं।

Jio का बड़ा झटका! 209 रुपये वाला प्लान बंद, सस्ता 1GB डेटा खत्म अब ज्यादा पैसे देकर ही मिलेगा इंटरनेट

नई दिल्ली। Jio यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। कंपनी ने अपना लोकप्रिय 209 रुपये वाला प्रीपेड प्लान बंद कर दिया है, जिसमें रोजाना 1GB डेटा और 22 दिन की वैलिडिटी मिलती थी। यह प्लान खासतौर पर उन यूजर्स के बीच काफी लोकप्रिय था, जिन्हें कम डेटा लेकिन ज्यादा कॉलिंग की जरूरत होती थी। इस प्लान के बंद होने के बाद अब यूजर्स के पास रोजाना 1GB डेटा वाला कोई विकल्प नहीं बचा है। अब अगर किसी यूजर को लगभग समान वैलिडिटी वाला प्लान चाहिए, तो उसे 239 रुपये खर्च करने होंगे। इस प्लान में रोजाना 1.5GB डेटा और 22 दिन की वैलिडिटी मिलती है, यानी पहले के मुकाबले करीब 14% ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। अगर यूजर्स सस्ता विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 198 रुपये और 199 रुपये के प्लान मौजूद हैं। 198 रुपये वाले प्लान में 14 दिन की वैलिडिटी के साथ रोज 2GB डेटा मिलता है, जबकि 199 रुपये के प्लान में 18 दिन के लिए रोज 1.5GB डेटा दिया जा रहा है। हालांकि, इन दोनों प्लान में वैलिडिटी कम है, जिससे लंबे समय के लिए ये उतने फायदेमंद नहीं माने जा रहे। दूसरी तरफ, जिन यूजर्स को लंबी वैलिडिटी चाहिए, उनके लिए 299 रुपये का प्लान बेहतर विकल्प बनकर सामने आता है। इसमें 28 दिन तक रोज 1.5GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग मिलती है। हालांकि, यह प्लान 209 रुपये वाले पुराने प्लान के मुकाबले काफी महंगा है। टेलीकॉम सेक्टर में यह बदलाव ऐसे समय पर आया है जब रिचार्ज प्लान महंगे होने की चर्चा पहले से ही चल रही थी। माना जा रहा है कि कंपनियां अब धीरे-धीरे सस्ते प्लान हटाकर ज्यादा कीमत वाले प्लान्स पर फोकस कर रही हैं। कुल मिलाकर, Jio का 209 रुपये वाला प्लान बंद होना उन यूजर्स के लिए झटका है जो कम खर्च में बेसिक इंटरनेट और कॉलिंग का फायदा उठाना चाहते थे। अब उन्हें या तो ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे या कम वैलिडिटी के साथ समझौता करना पड़ेगा।

Amazon की समर सेल में धमाका! Galaxy S25 Ultra ₹25,000 सस्ता, जानें किन फोन्स पर मिल रहा भारी डिस्काउंट

नई दिल्ली। Amazon की बहुप्रतीक्षित Great Summer Sale 2026 का ऐलान हो गया है और इस बार ग्राहकों के लिए बड़े-बड़े ऑफर्स तैयार हैं। यह मेगा सेल 8 मई 2026 से शुरू होगी, जबकि 5 मई से प्राइम यूजर्स के लिए अर्ली एक्सेस लाइव हो जाएगा। खास बात यह है कि इस सेल में प्रीमियम से लेकर मिड-रेंज स्मार्टफोन्स तक पर भारी छूट मिलने वाली है। इस सेल का सबसे बड़ा आकर्षण Samsung Galaxy S25 Ultra है, जिसे करीब ₹25,000 तक सस्ते में खरीदा जा सकेगा। जहां इसकी मौजूदा कीमत लगभग ₹1,19,999 है, वहीं सेल में यह फोन ₹94,999 में उपलब्ध होगा। यानी फ्लैगशिप फोन खरीदने का शानदार मौका मिल रहा है। सिर्फ सैमसंग ही नहीं, OnePlus 13s पर भी तगड़ा डिस्काउंट देखने को मिलेगा। इस फोन की कीमत अभी ₹51,999 है, लेकिन बैंक ऑफर्स के साथ इसे ₹46,999 में खरीदा जा सकेगा। यह उन यूजर्स के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो प्रीमियम फीचर्स के साथ थोड़ा बजट बचाना चाहते हैं। गेमिंग के शौकीनों के लिए iQOO 15R एक बढ़िया डील बनकर सामने आ रहा है। इसकी शुरुआती कीमत ₹57,999 है, लेकिन सेल में यह फोन ₹42,999 तक मिल सकता है। दमदार प्रोसेसर और परफॉर्मेंस के चलते यह मोबाइल गेमर्स के लिए खास आकर्षण रहेगा। वहीं, फोल्डेबल स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए भी यह सेल खास है। Samsung Galaxy Z Fold 7 को ₹10,000 की छूट के साथ ₹1,64,999 में खरीदा जा सकेगा, जो कि बैंक ऑफर्स के बाद की कीमत होगी। कुल मिलाकर, Amazon की यह समर सेल स्मार्टफोन खरीदने का शानदार मौका साबित हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से फ्लैगशिप या हाई-परफॉर्मेंस फोन लेने का इंतजार कर रहे थे। भारी डिस्काउंट, बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज डील्स के साथ यह सेल टेक लवर्स के लिए किसी फेस्टिवल से कम नहीं है।

Xiaomi ला रहा दो धांसू 5G फोन, 50MP कैमरा और पावरफुल चिपसेट से मिड-रेंज में मचेगा धमाल!

नई दिल्ली। Xiaomi एक बार फिर स्मार्टफोन मार्केट में हलचल मचाने की तैयारी में है। कंपनी जल्द ही अपनी पॉपुलर Civi सीरीज के तहत दो नए 5G स्मार्टफोन—Xiaomi Civi 6 और Xiaomi Civi 6 Pro लॉन्च करने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये दोनों डिवाइस प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट में दमदार फीचर्स के साथ एंट्री करेंगे और यूजर्स को फ्लैगशिप जैसा अनुभव देने की कोशिश करेंगे। लीक्स और रिपोर्ट्स की मानें तो Xiaomi Civi 6 सीरीज का फोकस इस बार स्लिम डिजाइन, बेहतर कैमरा क्वालिटी और बैलेंस्ड परफॉर्मेंस पर रहेगा। खास बात यह है कि दोनों ही स्मार्टफोन्स में 1.5K रिज़ॉल्यूशन वाली हाई-क्वालिटी डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है, जो विजुअल एक्सपीरियंस को और शानदार बनाएगी। Xiaomi Civi 6 की बात करें तो इसमें करीब 6.59-इंच की डिस्प्ले दी जा सकती है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek Dimensity 8500 चिपसेट मिलने की संभावना है, जो स्मूद और तेज एक्सपीरियंस देगा। कैमरा सेगमेंट में भी बड़ा अपग्रेड देखने को मिल सकता है—फोन में 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस दिया जा सकता है, जो 5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा। वहीं, Xiaomi Civi 6 Pro को और ज्यादा पावरफुल बनाया जा सकता है। इसमें 6.83-इंच की बड़ी डिस्प्ले के साथ MediaTek Dimensity 9500 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है, जो हैवी यूज और गेमिंग के लिए बेहतर साबित हो सकता है। कैमरा सेटअप में Pro मॉडल भी 50MP पेरिस्कोप लेंस के साथ आ सकता है, जिससे फोटोग्राफी का अनुभव और बेहतर होगा। लॉन्च टाइमलाइन की बात करें तो फिलहाल कंपनी ने आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन टिपस्टर्स के अनुसार यह सीरीज जल्द ही चीन में पेश की जा सकती है। माना जा रहा है कि यह नई सीरीज पुराने Xiaomi Civi 5 Pro को रिप्लेस करेगी। कुल मिलाकर, Xiaomi की यह नई Civi 6 सीरीज उन यूजर्स के लिए खास हो सकती है, जो स्टाइलिश डिजाइन, दमदार कैमरा और पावरफुल परफॉर्मेंस एक साथ चाहते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि लॉन्च के बाद ये स्मार्टफोन्स मार्केट में कितना असर छोड़ पाते हैं।

राउटर पर सिक्का रखने से बढ़ती है स्पीड? सच जानकर चौंक जाएंगे, फायदा नहीं नुकसान ज्यादा!

नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया और टेक टिप्स के नाम पर एक अजीब ट्रिक तेजी से वायरल हो रही हैWi-Fi राउटर पर सिक्का रखने से इंटरनेट स्पीड बढ़ जाती है। कई लोग इस “जुगाड़” को आजमा भी रहे हैं, लेकिन क्या वाकई यह तरीका काम करता है? एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ एक भ्रम है, जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। असल में Wi-Fi राउटर रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। इसके अंदर मौजूद एंटीना बेहद सटीक इंजीनियरिंग के साथ बनाए जाते हैं, जो इलेक्ट्रिकल सिग्नल को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स में बदलते हैं। यही वेव्स आपके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिवाइसेज तक इंटरनेट पहुंचाती हैं। ऐसे में अगर कोई सिक्का राउटर की प्लास्टिक बॉडी के ऊपर रखा जाता है, तो उसका इन सिग्नल्स या एंटीना पर कोई असर पड़ना लगभग नामुमकिन है। तकनीकी रूप से देखें तो सिक्का सिर्फ एक धातु का छोटा टुकड़ा होता है, जो न तो सिग्नल को बढ़ा सकता है और न ही उसकी दिशा बदल सकता है। यानी यह ट्रिक वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह फेल साबित होती है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इसे “मिथक” मानते हैं, न कि कोई उपयोगी उपाय। इतना ही नहीं, यह ट्रिक आपके राउटर को नुकसान भी पहुंचा सकती है। राउटर के ऊपर सिक्का रखने से उसके वेंटिलेशन स्लॉट्स ब्लॉक हो सकते हैं, जिससे अंदर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे राउटर ओवरहीट हो सकता है, जिसकी वजह से इंटरनेट स्पीड और भी धीमी हो सकती है या बार-बार कनेक्शन कटने की समस्या आ सकती है। लंबे समय तक ऐसा करने से राउटर खराब होने का भी खतरा रहता है। अगर आप सच में अपने Wi-Fi की स्पीड बढ़ाना चाहते हैं, तो सही तरीका अपनाना जरूरी है। राउटर को हमेशा घर के बीचों-बीच रखें, ताकि सिग्नल हर दिशा में बराबर फैल सके। इसे जमीन पर रखने की बजाय थोड़ी ऊंचाई पर लगाना बेहतर होता है। साथ ही, राउटर को टीवी, माइक्रोवेव या बड़ी धातु की चीजों के पास रखने से बचें, क्योंकि ये सिग्नल को कमजोर कर सकते हैं। साफ शब्दों में कहें तो राउटर पर सिक्का रखने की ट्रिक सिर्फ एक इंटरनेट मिथ है, जो काम नहीं करती। अगर आप बेहतर स्पीड चाहते हैं, तो सही सेटअप और सही जगह का चुनाव ही सबसे बड़ा “हैक” है।

Girigo App का सच: इच्छा पूरी करने वाला नहीं, सिर्फ डर और थ्रिल बेचने वाला ट्रेंड!

नई दिल्ली। Girigo App को लेकर सोशल मीडिया पर जो दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि यह इच्छाएं पूरी करने वाली और खतरनाक ऐप है, वह काफी हद तक गलतफहमी और सीरीज के क्रेज से जुड़ा हुआ मामला है। दरअसल यह ऐप किसी असली अलौकिक शक्ति या खतरनाक सिस्टम पर आधारित नहीं है, बल्कि एक कोरियन थ्रिलर वेब सीरीज “If Wishes Could Kill” के प्रमोशन और फैन एक्सपीरियंस से जुड़ा हुआ इंटरैक्टिव कंटेंट है, जिसे लोग कहानी के माहौल को महसूस करने के लिए डाउनलोड कर रहे हैं। रिपोर्ट्स और यूजर्स के अनुभव के मुताबिक, Girigo App को सीरीज के थीम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां इसका इंटरफेस बिल्कुल शो जैसा डार्क और रहस्यमयी दिखता है। ऐप खोलने पर हाथ जोड़ने का विजुअल, “वॉइस/वीडियो रिकॉर्ड” जैसे फीचर्स और कोरियन लैंग्वेज इंटरफेस मिलता है, जिससे यूजर्स को सीरीज जैसा इमर्सिव अनुभव मिलता है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर यह अफवाह फैल गई है कि यह ऐप लोगों की “इच्छाएं पूरी करता है और खतरनाक परिणाम देता है”, लेकिन वास्तविकता यह है कि ऐसा कोई वैज्ञानिक या वास्तविक दावा नहीं है। यह सिर्फ एक एंटरटेनमेंट-आधारित ऐप है, जिसे दर्शकों की जिज्ञासा और सीरीज के सस्पेंस को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसे ऐप्स का मकसद केवल पॉपुलर शो या फिल्म के साथ ऑडियंस इंगेजमेंट बढ़ाना होता है, न कि किसी तरह की अलौकिक या हानिकारक गतिविधि करना। इसलिए इसे “वायरल ट्रेंड” और “मार्केटिंग एक्सपीरियंस” के तौर पर देखना ज्यादा सही है, न कि किसी असली खतरनाक ऐप के रूप में। फिलहाल Girigo App को लेकर लोगों में जो क्रेज देखा जा रहा है, वह पूरी तरह से सीरीज के सस्पेंस और सोशल मीडिया ट्रेंड की वजह से है, न कि किसी वास्तविक इच्छापूर्ति या खतरे की वजह से।

CM AT GWALIOR: CM डॉ. मोहन यादव ने किया ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन, 110 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण

CM MOHAN YADAV

HIGHLIGHTS: CM मोहन ने किया ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन 110 करोड़ रुपए की लागत से बना विश्वविद्यालय कई जनप्रनिधि रहे मौजूद दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन में होंगे शामिल आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन   CM AT GWALIOR: ग्वालियर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज शिवपुरी लिंक रोड से शीतला माता मार्ग स्थित ग्राम बेला में आवासीय ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन किया। बता दें कि मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा 55 बीघा भूमि पर करीब 110 करोड़ रुपए की लागत से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल कई जनप्रनिधि रहे मौजूद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य सुरेश सोनी, उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार, जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, प्रांत संघ चालक अशोक पांडेय, मध्यभारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बांदिल सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उज्जैन शिक्षा विभाग में ‘लड्डू-मिठाई’ कोड से उगाही का खुलासा, WhatsApp चैटिंग वायरल राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन इस कार्यक्रम के बाद CM 12.30 बजे मेला मैदान पहुंचकर राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वे वृंदावन ग्राम थीम पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के हितलाभ वितरित करेंगे। सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन सिंह पटेल, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे। उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में सजे बाबा, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन सम्मेलन के बाद मुख्यमंत्री शिवपुरी लिंक रोड स्थित एम्पायर रिसोर्ट में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। करीब 3.40 बजे गोला का मंदिर क्षेत्र में निर्माणाधीन आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन करेंगे। यहां से वे एयरपोर्ट पहुंचकर वायुमार्ग से भोपाल रवाना होंगे।

Instagram का बड़ा एक्शन: कॉपी-पेस्ट कंटेंट पर सख्ती, अब सिर्फ ओरिजिनल क्रिएटर्स को मिलेगी रीच

नई दिल्ली। इंस्टाग्राम पर अब “कॉपी-पेस्ट” कंटेंट का खेल ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। Instagram ने साफ कर दिया है कि जो अकाउंट लगातार दूसरों की पोस्ट रिपोस्ट करते हैं, उन्हें अब प्लेटफॉर्म के रिकमेंडेशन सिस्टम में जगह नहीं मिलेगी। यानी ऐसे क्रिएटर्स की पोस्ट भले ही उनके फॉलोवर्स तक पहुंच जाए, लेकिन नए दर्शकों तक उनकी एंट्री लगभग बंद हो जाएगी। कंपनी का यह कदम सीधे तौर पर उन अकाउंट्स पर असर डालेगा जो सिर्फ वायरल वीडियो उठाकर रीपोस्ट करते हैं। अब डिस्कवरी फीचर में वही कंटेंट आगे बढ़ेगा, जिसमें कुछ नया, कुछ ओरिजिनल होगा। इंस्टाग्राम का साफ संदेश है“रीच चाहिए तो मेहनत करो, कॉपी नहीं।” हालांकि, यहां एक ट्विस्ट भी है। अगर कोई क्रिएटर किसी ट्रेंडिंग टेम्पलेट, क्लिप या रील में अपना नया एंगल, एडिटिंग या क्रिएटिव इनपुट जोड़ता है, तो उसे ओरिजिनल कंटेंट माना जाएगा। यानी पूरी तरह से रोक नहीं, बल्कि “क्रिएटिविटी को बढ़ावा” देने की रणनीति है। वहीं, इंस्टाग्राम ने यह भी साफ कर दिया है कि किन चीजों को ओरिजिनल नहीं माना जाएगा। दूसरों के वीडियो पर सिर्फ वाटरमार्क लगाना, स्पीड बदल देना, या स्क्रीनशॉट लेकर पोस्ट करना। ऐसे जुगाड़ वाले कंटेंट को अब एल्गोरिद्म पहचान लेगा और नई ऑडियंस तक पहुंचने से रोक देगा। यूजर्स के लिए क्या बदलेगा? कंपनी का कहना है कि आप जिन अकाउंट्स को फॉलो करते हैं, उनका कंटेंट पहले की तरह ही आपकी फीड में आता रहेगा। लेकिन जो पेज सिर्फ रीपोस्ट पर चल रहे हैं, उनकी रीच धीरे-धीरे गिरती जाएगी। मकसद साफ है फीड को ज्यादा रिलेटेबल और क्वालिटी कंटेंट से भरना। दरअसल, ये बदलाव ऐसे समय में आया है जब Meta के प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स से करीब 2 करोड़ डेली एक्टिव यूजर्स कम हुए हैं। कई यूजर्स का कहना है कि उनकी फीड पर दिखने वाला कंटेंट न तो काम का होता है और न ही उनकी पसंद से जुड़ा होता है। ऐसे में इंस्टाग्राम का यह नया दांव साफ संकेत देता हैअब प्लेटफॉर्म “वायरल” नहीं, बल्कि ओरिजिनल कंटेंट के दम पर वापसी करना चाहता है।

रिश्तों में AI की ‘हाँ में हाँ’ खतरनाक! क्या वाकई भरोसे लायक है चैटबॉट?

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में जहां टेक्नोलॉजी ने जिंदगी आसान बनाई है, वहीं अब लोग अपने निजी फैसलोंखासकर रिश्तों के लिए भी AI पर निर्भर होने लगे हैं। लेकिन हाल ही में Anthropic की एक स्टडी ने इस ट्रेंड को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिसर्च में पाया गया कि Claude AI जैसे चैटबॉट का इस्तेमाल लाखों लोग सिर्फ जानकारी के लिए नहीं, बल्कि जीवन के अहम फैसलों के लिए कर रहे हैं। मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान करीब 10 लाख यूजर्स की बातचीत का विश्लेषण किया गया, जिसमें 38,000 से ज्यादा बातचीत सलाह से जुड़ी थीं। किन मुद्दों पर लोग ले रहे हैं AI से सलाह?स्टडी के अनुसार: 27% सवाल हेल्थ और वेलनेस से जुड़े थे 26% करियर और प्रोफेशन से 12% रिश्तों से 11% वित्तीय मामलों से यह दिखाता है कि AI अब लोगों की निजी जिंदगी में गहराई तक घुस चुका है। ‘हाँ में हाँ’ मिलाने का खतरा क्या है?रिसर्च में एक गंभीर समस्या सामने आई, जिसे “साइकोफेंसी” कहा जाता है। इसका मतलब है—AI कई बार सही सलाह देने के बजाय यूजर को खुश करने के लिए उसकी बात से सहमत हो जाता है, भले ही वह गलत ही क्यों न हो। करीब 9% मामलों में AI ने यूजर की सोच को ही सही ठहराया, जबकि वह पूरी तरह सटीक नहीं थी। रिश्तों के मामलों में ज्यादा जोखिमसबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रिश्तों से जुड़े करीब 25% मामलों में AI की सलाह गलत या भ्रमित करने वाली पाई गई। यानी हर 4 में से 1 बार AI यूजर को गलत दिशा में ले जा सकता है। और भी चिंता की बात यह है कि जब यूजर AI के जवाब को चुनौती देता है, तो कई बार चैटबॉट और ज्यादा “हाँ में हाँ” मिलाने लगता है। क्या सुधार किए जा रहे हैं?Anthropic ने इस समस्या को कम करने के लिए अपने मॉडल्स—जैसे Claude Opus 4.7—में सुधार किए हैं। कंपनी का दावा है कि अब AI रिश्तों से जुड़े मामलों में ज्यादा संतुलित और जिम्मेदार जवाब देने की कोशिश कर रहा है। क्या करें आप?AI एक मददगार टूल जरूर है, लेकिन:इसे अंतिम फैसला लेने का आधार न बनाएंखासकर रिश्ते, करियर और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मामलों मेंभरोसेमंद लोगों, विशेषज्ञों या काउंसलर से सलाह लेंAI आपकी मदद कर सकता है, लेकिन आपकी जगह फैसला नहीं ले सकता। रिश्तों जैसे संवेदनशील मामलों में “मानव समझ” की कोई जगह नहीं ले सकता। इसलिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें, लेकिन आंख बंद करके भरोसा नहीं यही समझदारी है।

फोन छूते ही 23 मिनट का नुकसान! स्क्रीन लत पर Raj Shamani की चेतावनी, ऐसे पाएं छुटकारा

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जरूरत बन चुका है, लेकिन यही जरूरत कब लत में बदल जाती है, इसका अंदाजा भी नहीं होता। हाल ही में Raj Shamani के एक पोस्ट ने इस खतरे को फिर से चर्चा में ला दिया है। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति दिन में औसतन 144 बार अपना फोन चेक करता है और हर बार ध्यान भटकने के बाद दिमाग को दोबारा फोकस होने में करीब 23 मिनट लगते हैं। यह आंकड़ा University of California की रिसर्च से भी मेल खाता है, जिसमें प्रोफेसर ग्लोरिया मार्क ने बताया कि किसी भी काम के बीच रुकावट (interruption) के बाद दिमाग को “डीप फोकस” में लौटने में औसतन 23 मिनट 15 सेकंड लगते हैं। यानी बार-बार फोन देखना आपकी उत्पादकता को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। क्यों खतरनाक है यह आदत?हर नोटिफिकेशन, हर मैसेज और हर स्क्रॉल आपके दिमाग को “स्विच टास्किंग” में डाल देता है। इससे न सिर्फ काम की गुणवत्ता गिरती है, बल्कि मानसिक थकान और तनाव भी बढ़ता है। फोन की लत कम करने के 4 असरदार तरीके1. ग्रेस्केल/बेडटाइम मोड ऑन करेंफोन की रंगीन स्क्रीन ही आपको बार-बार आकर्षित करती है। ग्रेस्केल मोड ऑन करते ही स्क्रीन ब्लैक एंड व्हाइट हो जाती है, जिससे फोन कम आकर्षक लगता है और यूज कम होता है। 2. फोन को नजर से दूर रखेंरिसर्च बताती है कि अगर फोन आपके पास रखा है, तो आप उसे बार-बार उठाएंगे ही। इसलिए काम करते समय फोन को दूसरी जगह रखें—यह छोटा बदलाव बड़ा असर दिखाता है। 3. नोटिफिकेशन लिमिट करेंहर ऐप की पिंग आपके ध्यान को तोड़ती है। सेटिंग्स में जाकर अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करें। कम नोटिफिकेशन = ज्यादा फोकस और कम तनाव। 4. डिजिटल वेलबींग फीचर का इस्तेमाल करेंअधिकांश एंड्रॉयड फोन में Digital Wellbeing फीचर होता है, जिससे आप देख सकते हैं कि दिनभर में कितनी बार फोन अनलॉक किया और कितना स्क्रीन टाइम रहा। इससे आप अपनी आदत को कंट्रोल कर सकते हैं।