सरकार का अलर्ट आया… लेकिन क्या आपका फोन भी हो सकता है कंट्रोल? जानिए पूरा सच

नई दिल्ली। 2 मई की सुबह देशभर में अचानक मोबाइल फोन पर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट बजा तो कई लोग चौंक गए। यह मैसेज भारत सरकार के नए ‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ का ट्रायल था, जिसका मकसद आपदा या खतरे के समय लोगों तक तुरंत सूचना पहुंचाना है। लेकिन इस अलर्ट के बाद लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठा क्या सरकार या कोई भी एजेंसी ऐसे ही दूर बैठकर हमारे फोन में बदलाव भी कर सकती है? असल में यह अलर्ट Cell Broadcast Technology के जरिए भेजा गया था। यह एक वन-वे कम्युनिकेशन सिस्टम है, जिसमें मोबाइल टावर अपनी रेंज में मौजूद सभी फोन पर एक साथ मैसेज भेजते हैं। इसमें न तो इंटरनेट की जरूरत होती है और न ही किसी यूजर का मोबाइल नंबर। यही वजह है कि नेटवर्क कमजोर होने या फोन साइलेंट होने के बावजूद भी अलर्ट की तेज बीप सुनाई देती है और स्क्रीन पर पॉप-अप दिखता है। अब सबसे अहम सवालक्या इस तकनीक से आपके फोन में कोई बदलाव किया जा सकता है? जवाब साफ है नहीं। यह तकनीक सिर्फ मैसेज भेजने तक सीमित है। इसे ‘रीड-ओनली’ चैनल माना जाता है, यानी इससे न तो आपके फोन की सेटिंग्स बदली जा सकती हैं, न ही ऐप्स, फोटो या पर्सनल डेटा तक पहुंचा जा सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आपका फोन पूरी तरह सुरक्षित है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली खतरा Spyware जैसे खतरनाक सॉफ्टवेयर से होता है। अगर किसी तरह आपके फोन में स्पाईवेयर इंस्टॉल हो जाए, तो हैकर दूर बैठकर आपके फोन को कंट्रोल कर सकता है—चाहे वह कैमरा हो, माइक्रोफोन हो या आपकी निजी फाइल्स। यानी साफ है सरकारी इमरजेंसी अलर्ट से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सिर्फ आपकी सुरक्षा के लिए है। लेकिन असली सावधानी आपको संदिग्ध लिंक, अनजान ऐप्स और फर्जी कॉल्स से बरतनी होगी, क्योंकि खतरा वहीं छिपा होता है।
AI से नौकरी छीनना गैरकानूनी! कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence के बढ़ते दखल के बीच दुनिया भर में नौकरियों पर संकट गहराता जा रहा है, लेकिन अब इस ट्रेंड के बीच एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद जगा दी है। चीन की एक अदालत ने साफ कर दिया है कि केवल इस आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता कि उसका काम अब AI कर सकता है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब ‘Zhou’ सरनेम वाले एक कर्मचारी को एक AI कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया। Zhou 2022 में क्वालिटी एश्योरेंस सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे, जहां उनकी जिम्मेदारी AI मॉडल के आउटपुट की जांच करना, यूजर्स के सवालों का मिलान करना और गलत कंटेंट को फिल्टर करना था। कुछ समय बाद कंपनी ने दावा किया कि उनका ज्यादातर काम AI सिस्टम संभाल सकता है और उन्हें कम सैलरी पर काम करने का प्रस्ताव दिया गया। Zhou ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद कंपनी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। मामला Hangzhou Intermediate People’s Court पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद अदालत ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि AI के बढ़ते उपयोग को नौकरी से निकाले जाने का वैध आधार नहीं माना जा सकता। साथ ही, कंपनी यह साबित करने में भी नाकाम रही कि कर्मचारी की भूमिका पूरी तरह अप्रासंगिक या असंभव हो चुकी थी। अदालत ने कम वेतन पर काम करने का प्रस्ताव भी अनुचित माना और टर्मिनेशन को गलत करार दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब Meta, Google, Amazon और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियां ऑटोमेशन और AI के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी कर चुकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ इस साल के शुरुआती महीनों में ही हजारों नौकरियां AI के चलते प्रभावित हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे कंपनियों को यह संदेश गया है कि वे AI का इस्तेमाल तो कर सकती हैं, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकतीं। यानी तकनीक आगे बढ़ेगी, लेकिन इंसानी नौकरियों की कीमत पर नहीं—कम से कम कानून अब इस संतुलन को बनाए रखने की कोशिश करता नजर आ रहा है।
आधार-एआई स्कैम का बड़ा खुलासा: मोबाइल नंबर बदलकर खाते साफ, OTP से लेकर लोन तक पर ठगों का कब्जा

नई दिल्ली। देश में साइबर ठगी का खेल अब नए और ज्यादा खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जहां आधार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को साफ कर दिया है, जिसमें ठगों ने बिना जानकारी के आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलकर पूरे डिजिटल सिस्टम पर कब्जा जमा लिया। मामला तब खुला जब एक कारोबारी को पता चला कि उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर बदल चुका है। जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड था। आरोपियों ने पहले आधार रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर अपना नंबर जोड़ लिया, जिससे OTP सीधे उनके पास पहुंचने लगे। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग ऐप्स और DigiLocker जैसे संवेदनशील प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बना ली और KYC डिटेल्स बदलकर पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। इस ठगी की सबसे खतरनाक कड़ी AI का इस्तेमाल है। ठगों ने पीड़ित की फोटो से छोटे-छोटे वीडियो क्लिप तैयार किए, जो बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए इस्तेमाल हुए। यानी अब सिर्फ OTP ही नहीं, बल्कि फेस वेरिफिकेशन भी सुरक्षित नहीं रहा। यही वजह है कि इस तरह के फ्रॉड को बेहद एडवांस और खतरनाक माना जा रहा है। ठग यहीं नहीं रुके—उन्होंने e-KYC के जरिए कई बैंक अकाउंट खोलने की कोशिश की और Jio Payments Bank से पीड़ित के नाम पर लोन तक ले लिया। जांच में यह भी सामने आया कि आधार अपडेट किट, जो आमतौर पर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में इस्तेमाल होती है, उसका भी दुरुपयोग किया गया। ऐसे मामलों से साफ है कि साइबर अपराधी अब टेक्नोलॉजी का बेहद चालाकी से इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर आपके मोबाइल पर OTP, KYC या आधार अपडेट से जुड़ा कोई संदिग्ध मैसेज आए या अचानक सेवाएं बंद हो जाएं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसी स्थिति में 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें, साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और अपने बैंक से तुरंत संपर्क कर अकाउंट सुरक्षित करें। सावधानी ही इस नए AI स्कैम से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।
सोशल मीडिया से कमाई का नया रास्ता: Instagram-YouTube के अलावा इन ऐप्स पर भी बरस रहा पैसा

नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दुनिया अब सिर्फ Instagram और YouTube तक सीमित नहीं रही, बल्कि नए-नए प्लेटफॉर्म्स ने कमाई के दरवाजे और ज्यादा खोल दिए हैं। आज के डिजिटल दौर में शॉर्ट वीडियो यानी रील्स सिर्फ टाइमपास नहीं बल्कि एक मजबूत इनकम सोर्स बन चुके हैं। खास बात यह है कि अब Moj, Josh, Snapchat, Facebook और Chingari जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी क्रिएटर्स तेजी से उभर रहे हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं। इन ऐप्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कॉम्पिटिशन अपेक्षाकृत कम है, जिससे नए यूजर्स को जल्दी ग्रो करने का मौका मिलता है और उनके वीडियो ज्यादा लोगों तक पहुंचते हैं। कमाई का तरीका भी अब सिर्फ व्यूज तक सीमित नहीं रहा। क्रिएटर्स ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप, एफिलिएट मार्केटिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए कई सोर्स से पैसा कमा रहे हैं। जैसे-जैसे फॉलोअर्स बढ़ते हैं, ब्रांड्स खुद संपर्क करने लगते हैं और प्रमोशन के लिए अच्छी रकम ऑफर करते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स तो बोनस और रिवॉर्ड सिस्टम भी देते हैं, जिससे इनकम और बढ़ जाती है। अगर तेजी से ग्रो करना है तो सिर्फ ट्रेंड फॉलो करना काफी नहीं, बल्कि कंटेंट में अपनी अलग पहचान बनानी होगी। नियमित पोस्टिंग, सही टाइमिंग, ट्रेंडिंग म्यूजिक और ऑडियंस से जुड़ाव—ये सभी फैक्टर मिलकर आपके वीडियो को वायरल बना सकते हैं। साथ ही, कॉपी या भ्रामक कंटेंट से बचना जरूरी है क्योंकि अब एल्गोरिदम ओरिजिनल और क्रिएटिव कंटेंट को ज्यादा प्रमोट करता है। दरअसल, यही वजह है कि अब क्रिएटर्स सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि कई ऐप्स पर एक साथ एक्टिव रहकर अपनी कमाई और पहचान दोनों बढ़ा रहे हैं। अगर सही रणनीति और लगातार मेहनत की जाए, तो आज का डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी आम यूजर को बड़ा कंटेंट क्रिएटर बना सकता है
अब लंबे नाखून भी बनेंगे स्मार्ट: नई ‘टच पॉलिश’ से फोन चलाना होगा आसान

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी और ब्यूटी का दिलचस्प मेल अब एक नई क्रांति की ओर बढ़ता दिख रहा है। लंबे नाखून रखने वालों के लिए स्मार्टफोन चलाना अब परेशानी नहीं रहेगा, क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खास नेल पॉलिश विकसित की है, जो नाखूनों को स्टाइलस की तरह काम करने में सक्षम बना सकती है। दरअसल, टचस्क्रीन डिवाइस आमतौर पर हमारी उंगलियों के जरिए काम करते हैं, क्योंकि उंगलियों में मौजूद नमी और कंडक्टिव गुण स्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित करते हैं। लेकिन नाखून कंडक्टिव नहीं होते, इसलिए उनसे स्क्रीन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। यही वजह है कि लंबे नाखून रखने वालों को टाइपिंग और नेविगेशन में दिक्कत होती है। इस समस्या का समाधान Centenary College of Louisiana की रिसर्च टीम ने खोजा है। वैज्ञानिकों ने एक खास एडिटिव तैयार किया है, जिसे नेल पॉलिश में मिलाकर लगाया जा सकता है। इस मिश्रण में एथेनोलामाइन और टॉरिन जैसे तत्व शामिल हैं, जो टचस्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित कर सकते हैं। जब इस पॉलिश को नाखूनों पर लगाया जाता है, तो नाखून भी स्क्रीन के साथ उसी तरह इंटरैक्ट करने लगते हैं जैसे उंगलियां या स्टाइलस करते हैं। यानी अब लंबे नाखून रखने वाले लोग भी बिना किसी परेशानी के स्मार्टफोन चला सकेंगे हे मैसेज टाइप करना हो या ऐप्स इस्तेमाल करना। हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे बाजार में आने से पहले और परीक्षणों की जरूरत है। लेकिन अगर यह सफल होती है, तो यह न केवल ब्यूटी इंडस्ट्री बल्कि मोबाइल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के तरीके को भी बदल सकती है।
YouTube का बड़ा अपग्रेड: अब वीडियो देखते-देखते कर सकेंगे मल्टीटास्किंग, PiP फीचर होगा ज्यादा यूजर्स के लिए उपलब्ध

नई दिल्ली। वीडियो स्ट्रीमिंग का तरीका अब और स्मार्ट होने जा रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube अपने लोकप्रिय Picture-in-Picture (PiP) मोड को ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने की तैयारी में है।इस बदलाव के बाद यूजर्स वीडियो देखते हुए भी दूसरे ऐप्स इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे मोबाइल पर मल्टीटास्किंग पहले से कहीं आसान हो जाएगी। क्या है YouTube PiP फीचर?Picture-in-Picture (PiP) एक ऐसा फीचर है जिसमें वीडियो आपकी स्क्रीन पर एक छोटे फ्लोटिंग विंडो में चलता रहता है। इसका मतलब आप YouTube से बाहर निकल सकते हैंवीडियो चलता रहेगा एक छोटे बॉक्स मेंऔर आप WhatsApp, Chrome या किसी भी ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैंयह फीचर खासतौर पर मल्टीटास्किंग के लिए बनाया गया है। पहले किन्हें मिलता था यह फीचर?अब तक PiP फीचर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं था:अमेरिका में कुछ नॉन-प्रीमियम यूजर्स को सीमित सपोर्ट मिलता थाबाकी देशों में यह सुविधा ज्यादातर YouTube Premium यूजर्स तक सीमित थीलेकिन अब Google ने पुष्टि की है कि यह फीचर धीरे-धीरे दुनिया भर के अधिकतर यूजर्स तक पहुंचाया जाएगा। नए अपडेट में क्या बड़ा बदलाव हुआ?नए बदलाव के बाद नॉन-प्रीमियम यूजर्सअब लंबे वीडियो (नॉन-म्यूजिक कंटेंट) को PiP मोड में देख सकेंगेAndroid और iOS दोनों पर यह सुविधा धीरे-धीरे रोलआउट होगी प्रीमियम यूजर्स:म्यूजिक और नॉन-म्यूजिक दोनों वीडियोबैकग्राउंड और PiP प्लेबैक का पूरा सपोर्टPiP मोड कैसे काम करता है?PiP फीचर बेहद आसान तरीके से काम करता है:वीडियो प्ले करते समय आप Home बटन दबाते हैंवीडियो अपने आप एक छोटे फ्लोटिंग विंडो में आ जाता है यह विंडो स्क्रीन पर कहीं भी मूव की जा सकती है और अन्य ऐप्स के ऊपर भी दिखाई देती है आप चाहें तो इसे रोक भी सकते हैं या वापस फुल स्क्रीन में ले जा सकते हैं। PiP फीचर कैसे ऑन करें?Android यूजर्स:Settings → Apps → YouTube → Picture-in-Picture → Enable करेंiPhone (iOS) यूजर्सSettings → General → Picture in Picture → Allow करेंYouTube ऐप में भी Playback सेटिंग्स से इसे मैनेज किया जा सकता है। क्यों खास है यह अपडेट?आज के समय में लोग सिर्फ वीडियो नहीं देखते, बल्कि साथ-साथ कई काम करते हैं।इस फीचर से यूजर्स को मिलेगा:बिना रुके वीडियो देखने का अनुभवआसान मल्टीटास्किंगबेहतर मोबाइल प्रोडक्टिविटीयह बदलाव खासकर छात्रों, ऑफिस यूजर्स और कंटेंट देखने वालों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। ध्यान देने वाली बातPiP फीचर का रोलआउट धीरे-धीरे किया जा रहा है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि सभी यूजर्स को यह तुरंत मिल जाए।Google इसे स्टेप-बाय-स्टेप सभी क्षेत्रों में उपलब्ध करा रहा है।YouTube का यह नया कदम साफ दिखाता है कि कंपनी यूजर एक्सपीरियंस को और ज्यादा फ्लेक्सिबल और मॉडर्न बना रही है।अब वीडियो सिर्फ देखने की चीज नहीं रहेगा, बल्कि यह आपकी रोजमर्रा की डिजिटल लाइफ का हिस्सा बन जाएगा बिना किसी रुकावट के।
AI Photo Trend: एक ही तस्वीर में बचपन से मुलाकात! सोशल मीडिया पर छाया ‘Meet Your Younger Self’ ट्रेंड

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नया और दिलचस्प AI ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग अपनी बचपन की यादों को तकनीक के जरिए फिर से जीवंत कर रहे हैं। इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ‘Meet Your Younger Self’ नाम से चल रहे इस ट्रेंड में यूजर्स अपनी वर्तमान और बचपन की तस्वीरों को मिलाकर एक खास फोटो तैयार कर रहे हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक और भावनात्मक लगती है। इस ट्रेंड की खास बात यह है कि इसमें एक ही फ्रेम में व्यक्ति का बचपन और वर्तमान दोनों रूप दिखाई देते हैं। फोटो इतनी रियलिस्टिक होती है कि ऐसा लगता है मानो दो अलग-अलग लोग आमने-सामने खड़े हैं, लेकिन असल में दोनों एक ही व्यक्ति के अलग-अलग समय के रूप होते हैं। यही वजह है कि यह ट्रेंड लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लाखों यूजर्स इसे ट्राई कर रहे हैं। इस तरह की फोटो बनाने के लिए यूजर्स ChatGPT या अन्य AI इमेज जनरेशन टूल्स का सहारा ले रहे हैं। इसमें यूजर को अपनी एक वर्तमान फोटो और एक बचपन की फोटो अपलोड करनी होती है। इसके बाद एक डिटेल्ड प्रॉम्प्ट दिया जाता है, जिसमें सीन, लाइटिंग और एक्सप्रेशन जैसी डिटेल्स बताई जाती हैं। AI उसी के आधार पर एक नई इमेज तैयार कर देता है, जिसमें दोनों टाइमलाइन एक साथ नजर आती हैं। यह ट्रेंड सिर्फ एक फोटो बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को अपने अतीत से जोड़ने और समय के साथ आए बदलाव को महसूस करने का मौका भी देता है। कई यूजर्स इस फोटो के साथ इमोशनल कैप्शन लिखकर अपनी यादें साझा कर रहे हैं, जिससे यह ट्रेंड और भी खास बन गया है। अगर आप भी इस ट्रेंड को ट्राई करना चाहते हैं, तो बस अपनी एक क्लियर वर्तमान फोटो और बचपन की फोटो चुनें, किसी AI टूल में जाकर सही प्रॉम्प्ट डालें और कुछ ही सेकंड में आपकी यूनिक फोटो तैयार हो जाएगी। इसके बाद आप इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं और इस वायरल ट्रेंड का हिस्सा बन सकते हैं।
जनगणना के नाम पर ठगी का जाल! OTP-बैंक डिटेल मांगने वालों से रहें सावधान

नई दिल्ली। देश में जनगणना प्रक्रिया के शुरू होते ही साइबर ठगों ने भी नया तरीका अपना लिया है। जनगणना अधिकारी बनकर लोग घर-घर या ऑनलाइन संपर्क कर रहे हैं और नागरिकों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपको बड़े फ्रॉड का शिकार बना सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, असली जनगणना कर्मचारी केवल सामान्य घरेलू और जनसांख्यिकीय जानकारी ही पूछते हैं, जैसे परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, लिंग, पेशा या घर से जुड़ी बेसिक जानकारी। लेकिन अगर कोई व्यक्ति आपसे बैंक अकाउंट डिटेल, आधार नंबर, पैन नंबर या OTP जैसी जानकारी मांगता है, तो यह साफ संकेत है कि सामने वाला फर्जी है और आपको ठगने की कोशिश कर रहा है। साइबर अपराधी अब सिर्फ सीधे सवाल नहीं पूछते, बल्कि डिजिटल जाल भी बिछाते हैं। कई मामलों में लोगों को लिंक भेजकर ‘डिटेल कंफर्म’ करने के लिए कहा जाता है, या कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ मामलों में QR कोड स्कैन करवाकर भी डेटा चुराने की कोशिश की जा रही है। ऐसे किसी भी लिंक, ऐप या QR कोड से तुरंत दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित तरीका है। सरकार से जुड़े प्लेटफॉर्म Sanchar Saathi के तहत मौजूद Chakshu portal पर ऐसे संदिग्ध मामलों की शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह ठगी का शिकार हो चुका है, तो उसे तुरंत अपने बैंक से संपर्क करना चाहिए और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। साथ ही 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी तुरंत मदद ली जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। जनगणना के नाम पर हो रहे इस नए फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी है कि लोग सही जानकारी पहचानें, अनजान लोगों पर भरोसा न करें और अपनी निजी व वित्तीय जानकारी को हर हाल में सुरक्षित रखें।
एक फोटो से साफ हो सकता है बैंक अकाउंट! AEPS फ्रॉड का नया खेल, तुरंत लॉक करें आधार बायोमेट्रिक्स

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में ठगी के तरीके भी हाईटेक होते जा रहे हैं और अब साइबर अपराधियों ने बैंक खातों पर सेंध लगाने का नया रास्ता खोज लिया है। UIDAI के आधार सिस्टम से जुड़े AEPS को निशाना बनाकर स्कैमर्स सिर्फ एक फोटो के जरिए लोगों के खाते खाली कर रहे हैं। यह नया “फेस ऑथेंटिकेशन फ्रॉड” पारंपरिक OTP या कॉल फ्रॉड से भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें ठगों को पीड़ित से सीधे संपर्क की भी जरूरत नहीं पड़ती। दरअसल, AEPS सिस्टम को आधार नंबर और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या फेस) के जरिए आसान बैंकिंग के लिए बनाया गया था, लेकिन अब अपराधी इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कैमर्स सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म से आपकी एक साफ फोटो हासिल कर लेते हैं और फिर AI तकनीक की मदद से आपका नकली चेहरा (डीपफेक) तैयार कर लेते हैं। इसके जरिए वे सिस्टम को धोखा देकर आपके बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में अकाउंट खाली हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए सबसे जरूरी है सतर्कता और सही सेटिंग्स का इस्तेमाल। यूजर्स को तुरंत अपने आधार का बायोमेट्रिक लॉक कर देना चाहिए, ताकि कोई भी बिना अनुमति आपके फिंगरप्रिंट या फेस डेटा का उपयोग न कर सके। इसके लिए mAadhaar ऐप या UIDAI की वेबसाइट का सहारा लिया जा सकता है। इसके अलावा, अगर आप AEPS सेवा का नियमित उपयोग नहीं करते हैं तो अपने बैंक से इसे बंद या सीमित कराने की सलाह दी जाती है। साइबर एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि सोशल मीडिया पर अपनी हाई-क्वालिटी तस्वीरें शेयर करते समय सावधानी बरतें, क्योंकि यही फोटो स्कैमर्स के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकती है। अगर आपके खाते से कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन होता है, तो तुरंत कार्रवाई करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
नितिन गडकरी ने किया MLFF टोलिंग लॉन्च; FASTag और AI कैमरों से होगी ऑटोमैटिक वसूली, जाम से मिलेगी राहत

नई दिल्ली। देश के हाईवे सफर को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन (NH-48) पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लॉन्च किया। यह देश का पहला ऐसा टोल है, जहां वाहन बिना रुके 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरते हुए भी टोल चुका सकेंगे। नई तकनीक के तहत पारंपरिक टोल प्लाजा की तरह बैरियर नहीं होंगे। इसकी जगह ओवरहेड स्ट्रक्चर पर लगे हाई-टेक कैमरे और सेंसर गाड़ियों की पहचान करेंगे। FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए वाहन की जानकारी तुरंत पढ़ी जाएगी और टोल की रकम सीधे लिंक्ड खाते से कट जाएगी। खास बात यह है कि अगर किसी वाहन में FASTag नहीं लगा है या काम नहीं कर रहा, तो भी टोल वसूली नहीं रुकेगी। AI कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर वाहन मालिक को ई-नोटिस भेज देंगे, जिससे भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से हाईवे पर लगने वाले जाम में बड़ी कमी आएगी। वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे यात्रा समय घटेगा और ईंधन की भी बचत होगी। साथ ही प्रदूषण में कमी और टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। मंत्री गडकरी ने कहा कि यह अत्याधुनिक सिस्टम देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस तकनीक को देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जाएगा। इस पहल को भारत के टोल सिस्टम के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आम लोगों के सफर को ज्यादा तेज, सुविधाजनक और झंझटमुक्त बना सकता है।