ओप्पो इंडिया ने मिड रेंज में सेल्फी चैंपियनएफ33 सीरीज़ लॉन्च की

नई दिल्ली। आज ओप्पो इंडिया ने भारत में ओप्पो एफ33 सीरीज़ लॉन्च की है, जिसमें दो स्मार्टफोन, ओप्पो एफ33 प्रो 5जी और ओप्पो एफ33 5जी शामिल हैं। एफ 33 सीरीज़ ओप्पो की एफ लाईन में अभी तक की सबसे आधुनिक सीरीज़ है, जिसमें सेगमेंट में सबसे बेहतर 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाईड सेल्फी कैमरा, आईपी69के ड्यूरेबिलिटी, 7,000 एम.ए.एच की जबरदस्त बैटरी, कलरओएस16 और 5जी++ कनेक्टिविटी दी गई है। ओप्पो इंडिया के हेड ऑफ कम्युनिकेशंस, गोल्डी पटनायक ने बताया किएफ सीरीज़ भारत की सबसे ड्यूरेबल चैंपियन है। यह स्मार्टफोन जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के लिए बनाया गया है। एफ33 सीरीज़ में हमने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए 100 डिग्री एफ.ओ.वी (फील्ड ऑफ व्यू) के साथ 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाईड सेल्फी कैमरा और कई ए.आई इमेजिंग फीचर्स दिए हैं। हमारी कोशिश है कि ड्यूरेबिलिटी और शानदार फोटोग्राफी के लिए ग्राहकों को महंगी कीमत न चुकानी पड़े। ग्राहकों को मॉनसून की ट्रैकिंग पर जाने की ड्यूरेबिलिटी और ग्रुप में हर व्यक्ति को सेल्फी में कैप्चर करने जैसी खूबियाँ एक ही स्मार्टफोन में मिल सकें। एफ33 हमारे इस वादे को पूरा करता है और भारत की मोबाईल-फर्स्ट पीढ़ी को वो सभी खूबियाँ प्रदान करता है, जिनके वो हकदार हैं।’’ 0.6एक्स तक के स्मार्ट ऑटो-स्विच के साथ सेगमेंट का सबसे बेहतर सेल्फी कैमरा ओप्पो की सेल्फी चैंपियन एफ33 सीरीज़ में 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाईड फ्रंट कैमरा है। यह अपने सेगमेंट में सबसे बड़े स्पेस को कैप्चर करने वाला और सबसे ज्यादा रिज़ॉल्यूशन वाला कैमरा है। इसमें ई.आई.एस, ऑटोफोकस और जीसी50एफ6 सेंसर (एफ/2.0, 18 मिमी फोकल लैंथ, 5पी लेंस) जैसी खूबियाँ दी गई हैं। यह पिछली जनरेशन की फ्रेमिंग की तुलना में एक मीटर की दूरी से लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा क्षेत्र को कैप्चर करता है। इसलिए सेल्फी में और ज्यादा लोग, और अधिक कॉन्टैक्स्ट तथा ज्यादा मूमेंट आ सकते हैं, और किसी चेहरे को भी क्रॉप करने की जरूरत नहीं पड़ती है। एफ33 प्रो की कैमरा इंटैलिजेंस रिज़ॉल्यूशन से भी बढ़कर है। ओप्पो का ए.आई ग्रुपफी एक्सपर्ट फ्रेम में दो चेहरों का प्रवेश होते ही ऑटोमैटिक 0.6एक्स तक चौड़ा हो जाता है। इसके लिए न तो टैप करने की जरूरत पड़ती है, न ही ऐप टटोलना पड़ता है और न ही कोई मूमेंट चूकता है। फेस डिस्टॉर्शन करेक्शन एलगोरिद्म एक साथ छः सब्जेक्ट्स तक को ट्रैक कर सकती है, जिससे 100 डिग्री के फील्ड ऑफ व्यू तक किनारों पर प्राकृतिक अनुपात बने रहते हैं। इसलिए इस स्मार्टफोन से ग्रुप सेल्फी लेना बहुत आसान है, फिर चाहे आप जयपुर में रूफटॉप पर होंया फिर कूर्ग के विशाल व्यूपॉईंट में सेल्फी ले रहे हों। फ्रंट कैमरा सिस्टम के चारों ओर कलरफुल फ्रंट फिल लाईट दी गई है। व्हाईट फ्लैश की जगह दिए गए इस मल्टी-कलर फ्लैश से सॉफ्ट, स्किन-टोन-फ्रेंडली इल्युमिनेशन प्राप्त होता है, जो कम रोशनी में, जब अन्य कैमरा दिक्कत देने लगते हैं, तब भी बेहतरीन सेल्फी प्रदान करता है। इस कैमरा सिस्टम से मिली सेल्फी फ्लैश की हुई नहीं, बल्कि बिल्कुल प्राकृतिक दिखाई देती हैं। एफ33 प्रो के रियर सिस्टम में ओवी50डी40 सेंसर के साथ 50 मेगापिक्सल का मेन कैमरा है, जो रोजमर्रा की शूटिंग में स्वाभाविक डिटेल बनाए रखता है। इसकी इमेज क्रॉप होने और रीफ्रेम होने के बाद भी प्राकृतिक बनी रहती हैं। इसलिए, यह कैमरा जहाँ क्लाईंट विज़िट के दौरान डॉक्युमेंट की समीक्षा करने के लिए उपयोगी है, वहीं वीकेंड ट्रिप पर शानदार फोटोग्राफी भी कर सकता है। इस कैमरा सिस्टम में 2 मेगापिक्सल का डेप्थ कैमरा भी दिया गया है, जो बैकग्राउंड में काम करता है। इससे आई.एस.पी (इमेज सिग्नल प्रोसेसर) को पर्याप्त डेटा मिलता है, जिसे रेंडर करके वह मैन्युअल इनपुट के बिना ही पोर्ट्रेट में बेहतरीन बोके इफेक्ट दे सकता है।
सरकार का अलर्ट फोन में क्यों नहीं बजा? Android की इस सेटिंग को ऑन कर बचें, भविष्य में तुरंत मिलेंगे इमरजेंसी मैसेज

नई दिल्ली। देशभर में हाल ही में सरकार की ओर से भेजा गया Cell Broadcast आधारित टेस्ट अलर्ट करोड़ों मोबाइल फोनों पर एक साथ पहुंचा। भारत सरकार ने इस indigenous Cell Broadcast सिस्टम को आपदा और इमरजेंसी अलर्ट के लिए तैयार किया है, जिसमें तय क्षेत्र के सभी मोबाइल डिवाइस पर एक साथ संदेश भेजे जा सकते हैं और नेटवर्क पर भी भारी दबाव नहीं पड़ता। कई यूजर्स के फोन में यह अलर्ट सुनाई नहीं दिया, और Android डिवाइस पर इसका एक बड़ा कारण “Wireless Emergency Alerts” सेटिंग का बंद होना हो सकता है। Google की आधिकारिक Android गाइड के मुताबिक, Android फोन में यह सेटिंग आमतौर पर Settings > Safety and emergency > Wireless emergency alerts के अंदर मिलती है। Pixel जैसे कुछ डिवाइस में यह Settings > Notifications > Wireless Emergency Alerts के रूप में भी दिख सकती है, और Google यह भी बताता है कि निर्माता के हिसाब से सेटिंग की जगह बदल सकती है। इसी मेन्यू में जाकर यूजर Extreme threats, Severe threats, AMBER alerts और Public safety messages जैसी श्रेणियां ऑन-ऑफ कर सकते हैं। अगर आपके फोन में भी शनिवार वाला अलर्ट नहीं बजा, तो इसका मतलब यह नहीं कि सिस्टम काम नहीं कर रहा था; संभव है कि आपके डिवाइस में यह फीचर बंद हो, या आपके फोन मॉडल पर इसका मेन्यू अलग जगह हो। Google के अनुसार, Wireless Emergency Alerts को चालू रखने से सरकारी इमरजेंसी संदेश, आपदा अलर्ट और सुरक्षा से जुड़े नोटिफिकेशन सीधे फोन पर मिलते हैं, यहां तक कि कई मामलों में साइलेंट मोड में भी। कैसे ऑन करें: अपने Android फोन में Settings खोलें, फिर Safety and emergency या Notifications में जाकर Wireless emergency alerts चुनें और ऊपर दिए गए अलर्ट टॉगल्स को ऑन कर दें। यही सेटिंग भविष्य में सरकारी इमरजेंसी अलर्ट समय पर पाने में मदद करेगी।
AI डिक्टेशन का नया दौर: कीबोर्ड होगा खत्म, बोलते ही तैयार होगा स्मार्ट टेक्स्ट

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हमारे लिखने के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है। भारत में Wispr Flow जैसे नए AI डिक्टेशन टूल के लॉन्च के साथ अब कीबोर्ड की जरूरत तेजी से कम होती जा रही है। यूजर सिर्फ बोलते हैं और AI उसे साफ, व्यवस्थित और प्रोफेशनल टेक्स्ट में बदल देता है। खास बात यह है कि ये टूल्स सिर्फ शब्दों को नहीं, बल्कि आपकी भावनाओं और बातचीत के संदर्भ को भी समझते हैं, जिससे आउटपुट पहले से ज्यादा स्मार्ट और उपयोगी बनता है। क्लेवरटिप की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40% स्मार्टफोन यूजर्स अब कंटेंट बनाने के लिए वॉइस इनपुट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो एक बड़े डिजिटल बदलाव का संकेत है। पहले जहां वॉइस टाइपिंग सिर्फ बोले गए शब्दों को टेक्स्ट में बदलती थी, वहीं अब AI डिक्टेशन टूल्स उस टेक्स्ट को एडिट, सुधार और प्रोफेशनल फॉर्मेट में ढाल देते हैं। ये टूल्स अधूरे वाक्यों को पूरा करते हैं, भाषा की टोन सुधारते हैं और बातचीत को नोट्स, ईमेल या आर्टिकल में बदलने में सक्षम हैं। इस रेस में Wispr Flow, Google AI Edge Eloquent, Otter AI और Monologue जैसे ऐप्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। Wispr Flow जहां 100 से ज्यादा भाषाओं को सपोर्ट करता है और हर ऐप में काम करता है, वहीं Google AI Edge Eloquent ऑफलाइन प्रोसेसिंग के साथ प्राइवेसी को मजबूत बनाता है। Otter AI मीटिंग्स और इंटरव्यू के लिए ऑटो ट्रांसक्रिप्शन और समरी देता है, जबकि Monologue स्क्रीन पर चल रही गतिविधियों को समझकर संदर्भ के अनुसार भाषा बदल सकता है। हालांकि, इन एडवांस्ड टूल्स के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। प्राइवेसी सबसे बड़ा मुद्दा है, क्योंकि यूजर की आवाज और डेटा का इस्तेमाल कैसे हो रहा है, यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता। इसके अलावा, लोकल भाषाओं में एक्युरेसी और तेज इंटरनेट की जरूरत भी कई बार परेशानी बनती है। फिर भी, यह साफ है कि AI डिक्टेशन टेक्नोलॉजी आने वाले समय में हमारी डिजिटल आदतों को पूरी तरह बदलने वाली है, जहां टाइपिंग की जगह बोलकर काम करना नया नॉर्म बन सकता है।
अब Amazon पर ‘बातचीत करके’ खरीदारी: AI ऑडियो फीचर से पूछो सवाल, तुरंत मिलेगा जवाब

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग को और आसान और इंटरैक्टिव बनाने के लिए Amazon ने नया AI ऑडियो फीचर लॉन्च किया है, जो खरीदारी के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। इस फीचर के तहत यूजर्स अब सिर्फ प्रोडक्ट देखने या पढ़ने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उससे जुड़ी जानकारी को सुन सकेंगे और उसी दौरान सवाल पूछकर बातचीत भी कर पाएंगे। कंपनी ने अपने “Hear the Highlights” फीचर में “Join the Chat” विकल्प जोड़ा है, जिससे यूजर प्रोडक्ट की ऑडियो समरी सुनते समय टेक्स्ट या वॉइस के जरिए सवाल पूछ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर पूछे कि “क्या यह कॉफी मशीन बच्चों के लिए सुरक्षित है?” तो AI तुरंत प्रोडक्ट डिटेल, कस्टमर रिव्यू और उपलब्ध डेटा के आधार पर जवाब देता है। इस फीचर की खास बात यह है कि यह सिर्फ एक साधारण चैटबॉट नहीं है, बल्कि एक वर्चुअल ऑडियो होस्ट की तरह काम करता है। AI रियल-टाइम में स्क्रिप्ट को अपडेट करता है और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक के जरिए उसी टोन में जवाब देता है, जिससे यूजर को ऐसा महसूस होता है जैसे वह किसी इंसान से बातचीत कर रहा हो। यह सिस्टम प्रोडक्ट की जानकारी, यूजर रिव्यू और वेब पर मौजूद डेटा को मिलाकर जवाब तैयार करता है। अगर किसी सवाल का जवाब पहले दिया जा चुका है, तो AI कोशिश करता है कि वह नया और अलग जवाब दे, ताकि यूजर को बेहतर अनुभव मिल सके। फिलहाल यह फीचर अमेरिका में उपलब्ध है और जल्द ही अन्य देशों में भी लॉन्च किया जा सकता है। इसे iOS और Android दोनों प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। यूजर को सिर्फ प्रोडक्ट पेज पर जाकर “Hear the Highlights” बटन पर क्लिक करना होगा। गौरतलब है कि Amazon पहले से ही Rufus नाम का AI शॉपिंग असिस्टेंट पेश कर चुका है, जो यूजर्स को प्रोडक्ट चुनने में मदद करता है। अब नया ऑडियो फीचर इस अनुभव को और ज्यादा इंटरैक्टिव और स्मार्ट बना रहा है। कुल मिलाकर, यह तकनीक ऑनलाइन शॉपिंग को एकतरफा प्रक्रिया से निकालकर बातचीत आधारित अनुभव में बदल रही है, जहां यूजर सिर्फ खरीदारी नहीं करता बल्कि समझकर फैसला लेता है।
ईयरबड्स का नया दौर: अब सिर्फ म्यूजिक नहीं, हेल्थ, ट्रांसलेशन और AI असिस्टेंट सब कुछ एक साथ

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में ईयरबड्स अब सिर्फ गाने सुनने का साधन नहीं रहे, बल्कि तेजी से पर्सनल AI असिस्टेंट में बदलते जा रहे हैं। नए दौर के स्मार्ट ईयरबड्स आपके आसपास के माहौल को समझते हैं, बातचीत को प्रोसेस करते हैं और यहां तक कि आपकी सेहत से जुड़े संकेतों पर भी नजर रखते हैं। Apple, Google और JBL जैसी कंपनियां ऐसे डिवाइस तैयार कर रही हैं जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हो रहा है। ये ईयरबड्स न सिर्फ एडाप्टिव नॉइज कैंसलेशन देते हैं, बल्कि वॉइस कमांड, लाइव ट्रांसक्रिप्शन, रियल टाइम ट्रांसलेशन और हेल्थ मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं भी देते हैं। दरअसल, इन AI ईयरबड्स में लगे माइक्रोफोन और सेंसर लगातार आपके आसपास की आवाज, लोकेशन और एक्टिविटी को समझते रहते हैं। जैसे ही आप किसी से बात करते हैं, म्यूजिक खुद-ब-खुद धीमा हो जाता है या बैकग्राउंड शोर कम कर दिया जाता है। छोटे-छोटे फैसले ये डिवाइस खुद लेते हैं, जिससे यूजर को बेहतर और स्मार्ट अनुभव मिलता है। मार्केट में मौजूद कई डिवाइस इस बदलाव को दिखा रहे हैं। Apple AirPods Pro ट्रांसपेरेंसी और नॉइज बैलेंसिंग को ऑटोमैटिक तरीके से मैनेज करते हैं। Google Pixel Buds Pro 2 40 से ज्यादा भाषाओं में लाइव ट्रांसलेशन की सुविधा देते हैं। वहीं JBL Live Beam 3 फिटनेस और एक्टिव यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं, जिनमें मल्टी-माइक सिस्टम शामिल है। इसके अलावा Samsung Galaxy Buds 3 Pro जरूरी आवाजों जैसे सायरन या ट्रैफिक को सुनने देते हैं, जबकि Beats Powerbeats Pro 2 में PPG सेंसर लगे हैं जो हार्ट रेट को मॉनिटर करते हैं—और कई मामलों में यह डेटा स्मार्टवॉच जितना सटीक माना जा रहा है। इन AI ईयरबड्स की सबसे बड़ी खासियत है इंटेलिजेंट नॉइज मैनेजमेंट, जिससे भीड़ में भी साफ आवाज सुनाई देती है। रियल टाइम ट्रांसलेशन भाषा की दीवार को खत्म कर रहा है, वहीं एडाप्टिव ऑडियो पर्सनलाइजेशन आपके कान के हिसाब से साउंड को सेट करता है। इसके साथ ही हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स हार्ट रेट, बॉडी सिग्नल्स और यहां तक कि मीटिंग ट्रांसक्रिप्शन को नोट्स में बदलने तक का काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर, ईयरबड्स अब सिर्फ ऑडियो डिवाइस नहीं रहे—ये आपकी जेब में मौजूद एक छोटा लेकिन बेहद ताकतवर AI असिस्टेंट बन चुके हैं, जो आने वाले समय में टेक्नोलॉजी की दिशा ही बदल सकते हैं।
AI का नया ट्रेंड: ब्रेकअप के बाद ‘डिजिटल एक्स’ बना रहे युवा, सुकून भी…खतरा भी

नई दिल्ली। चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं का नया सहारा बनता जा रहा है। एक नया और चौंकाने वाला ट्रेंड तेजी से सामने आया है, जिसमें युवा ब्रेकअप के बाद अपने पुराने पार्टनर को भुलाने की बजाय उसका “डिजिटल अवतार” तैयार कर रहे हैं। ये AI आधारित “डिजिटल एक्स” इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे बोलने के अंदाज, बातचीत के तरीके और भावनात्मक प्रतिक्रिया तक की नकल कर सकें, जिससे यूजर्स को ऐसा महसूस हो कि उनका रिश्ता अब भी खत्म नहीं हुआ है। इस ट्रेंड में लोग खास AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां वे अपने एक्स पार्टनर की चैट हिस्ट्री, फोटो, सोशल मीडिया पोस्ट और निजी यादों को अपलोड करते हैं। इसके बाद सिस्टम एक वर्चुअल मॉडल तैयार करता है, जो उसी व्यक्ति की तरह जवाब देता है। कई यूजर्स इसमें अपनी पुरानी यादें, घूमने-फिरने के अनुभव और रिश्ते की खास बातें जोड़कर इसे और ज्यादा “रियल” बनाने की कोशिश करते हैं। इस तकनीक की जड़ें Colleague.skill जैसे ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट से जुड़ी मानी जा रही हैं, जिसे मूल रूप से कार्यस्थल की बातचीत को दोबारा उपयोग करने के लिए बनाया गया था। बाद में इसे निजी रिश्तों में अपनाया जाने लगा। कुछ लोगों ने प्रयोग के तौर पर Elon Musk और Steve Jobs जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों के AI वर्जन भी बनाए। जहां कुछ लोग इसे भावनात्मक राहत का जरिया मान रहे हैं कहते हैं कि इससे वे अपने अधूरे जज्बात व्यक्त कर पाते हैं वहीं कई विशेषज्ञ इसे खतरनाक ट्रेंड मान रहे हैं। उनका तर्क है कि यह लोगों को वास्तविकता से दूर कर सकता है और पुराने रिश्तों में उलझाकर आगे बढ़ने से रोक सकता है। सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी को लेकर है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना अनुमति किसी व्यक्ति के डेटा का इस्तेमाल कर उसका डिजिटल अवतार बनाना कानून का उल्लंघन हो सकता है। इससे न सिर्फ व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि डेटा सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं
Netflix का नया “Clips” फीचर लॉन्च: अब रील्स की तरह देख सकेंगे फिल्मों-वेब सीरीज के शॉर्ट ट्रेलर

नई दिल्ली। Netflix ने अपने प्लेटफॉर्म पर यूजर्स के एक्सपीरियंस को और आसान और तेज बनाने के लिए एक नया और दमदार फीचर लॉन्च किया है, जिसका नाम है “Clips”। यह फीचर 1 मई 2026 को जारी किया गया है और इसे सबसे पहले भारत समेत अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया, पाकिस्तान, फिलीपींस और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में रोलआउट किया गया है। इस नए फीचर के जरिए अब यूजर्स को फिल्मों और वेब सीरीज के छोटे-छोटे शॉर्ट क्लिप्स एक वर्टिकल फीड में देखने को मिलेंगे, ठीक वैसे ही जैसे Instagram Reels या TikTok पर वीडियो स्क्रॉल किए जाते हैं। कैसे काम करेगा Netflix का “Clips” फीचर?Netflix का यह फीचर पूरी तरह से पर्सनलाइज्ड हाइलाइट रील की तरह काम करेगा। इसमें यूजर्स को उनकी पसंद और देखने के इतिहास के आधार पर शॉर्ट वीडियो क्लिप्स दिखाए जाएंगे। यूजर बस स्क्रीन पर ऊपर-नीचे स्क्रॉल करके अलग-अलग मूवी और सीरीज के छोटे हिस्से देख सकता है। अगर कोई क्लिप पसंद आती है तो उसी समय उसे: अपनी Watchlist में जोड़ सकता है दोस्तों के साथ शेयर कर सकता है या तुरंत उस कंटेंट को देखना शुरू कर सकता है इससे सबसे बड़ी समस्या खत्म हो जाएगी कि “क्या देखें?” और “क्या चुनें?” Netflix का नया फोकस: तेज डिस्कवरी और कम समय में फैसलाNetflix का कहना है कि आज के समय में यूजर्स कंटेंट देखने से ज्यादा समय यह तय करने में खर्च कर देते हैं कि क्या देखें। “Clips” फीचर इसी समस्या का समाधान है। कंपनी का मानना है कि यह फीचर यूजर्स को तेजी से कंटेंट डिस्कवर करने में मदद करेगा और उनका देखने का अनुभव और भी आसान बनाएगा। आगे और भी बड़ा बदलाव संभवNetflix ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में यह फीचर सिर्फ फिल्मों और सीरीज तक सीमित नहीं रहेगा। इसे आगे चलकर: पॉडकास्ट लाइव शो और जॉनर-बेस्ड कलेक्शन (कॉमेडी, रोमांस आदि) के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर फीचर नहीं दिख रहा तो क्या करें?अगर आपके Netflix ऐप में यह नया फीचर अभी दिखाई नहीं दे रहा है, तो: ऐप को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें फिर भी न मिले तो कुछ दिन इंतजार करें क्योंकि इसे धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंचाया जा रहा है।
iPhone हो सकता है महंगा: टिम कुक ने दिए बड़े संकेत, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमत से बढ़ेगा Apple का दबाव

नई दिल्ली। iPhone की कीमतों में जल्द बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि Apple के CEO टिम कुक ने हालिया Q2 2026 अर्निंग्स कॉल में कंप्यूटर मेमोरी की बढ़ती लागत को कंपनी के मुनाफे पर दबाव डालने वाला बताया है। उन्होंने संकेत दिया कि इस लागत का असर अब पहले से ज्यादा महसूस किया जा रहा है और आने वाले महीनों में यह और बढ़ सकता है। टिम कुक के मुताबिक, पिछले साल तक मेमोरी की कीमतों का असर सीमित था, लेकिन मार्च तिमाही में इसमें बढ़ोतरी शुरू हो गई थी, जिसे कंपनी ने अपने मौजूदा स्टॉक और इन्वेंट्री के जरिए कुछ हद तक संभाल लिया। अब यह “बफर” खत्म होने की कगार पर है, जिससे वास्तविक लागत दबाव सामने आ सकता है। कुक ने साफ कहा कि जून तिमाही में मेमोरी की लागत में और तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि Apple फिलहाल इस असर को पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाल रहा है, लेकिन कंपनी के पास मौजूद पुरानी इन्वेंट्री का फायदा अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। इसी कारण बाजार में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि जून के बाद या आने वाले महीनों में iPhone की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि Apple ने अभी तक किसी भी आधिकारिक कीमत वृद्धि की घोषणा नहीं की है, लेकिन टिम कुक ने यह जरूर संकेत दिया कि कंपनी लगातार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मेमोरी और कंपोनेंट्स की वैश्विक कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो Apple को भी अपने अन्य प्रतिस्पर्धियों की तरह प्रोडक्ट की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल iPhone मौजूदा कीमतों पर ही बिक रहे हैं, लेकिन आने वाला समय महंगा पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया का सख्त कदम: Google और Meta को अब न्यूज के लिए देना होगा भुगतान, मीडिया को मिला बड़ा अधिकार

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने एक नया और कड़ा कानून पेश किया है, जिसका नाम ‘न्यूज बार्गेनिंग इन्सेंटिव’ रखा गया है। इस नियम के तहत अब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां जैसे Google और Meta (Facebook) न्यूज कंटेंट का उपयोग मुफ्त में नहीं कर सकेंगी। चाहे वे न्यूज दिखाएं या उसे ब्लॉक करें, उन्हें मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को भुगतान करना ही होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य पत्रकारों और मीडिया हाउसेस को उनका उचित हक दिलाना है, क्योंकि वही असली कंटेंट तैयार करते हैं, जबकि टेक प्लेटफॉर्म उस पर भारी मुनाफा कमाते हैं। पहले का कानून और टकराव की शुरुआतइस पूरी बहस की शुरुआत पुराने ‘News Media Bargaining Code’ से हुई थी। उस समय सरकार ने माना था कि टेक कंपनियों और मीडिया के बीच शक्ति का संतुलन बिगड़ चुका है। Google और Facebook को न्यूज कंटेंट चाहिए था ताकि यूजर्स प्लेटफॉर्म पर बने रहें लेकिन मीडिया कंपनियों को अपनी पहुंच के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर रहना पड़ता था जब पहली बार कानून आया तो मामला काफी गरमा गया था। Google ने सेवाएं बंद करने की धमकी दी, जबकि Meta ने अपने प्लेटफॉर्म से न्यूज कंटेंट ही हटा दिया था। बाद में हुआ समझौतातनाव बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। सरकार ने कंपनियों को स्वतंत्र रूप से मीडिया हाउसेस के साथ डील करने की छूट दी। इस मॉडल का असर भी सकारात्मक रहा:5 साल में मीडिया कंपनियों को 1 अरब डॉलर से ज्यादा भुगतान मिला छोटे और बड़े दोनों मीडिया संस्थानों को फायदा हुआ Meta के इनकार से फिर बढ़ी समस्यातीन साल बाद स्थिति फिर बदल गई जब Meta ने पुरानी डील्स रिन्यू करने से इनकार कर दिया। कंपनी का कहना था कि उसे न्यूज की जरूरत नहीं है। यही घटना सरकार के लिए चेतावनी बन गई कि पुराने कानून में खामियां थीं, जिनका फायदा टेक कंपनियां उठा सकती हैं। नया कानून क्यों है खास?नया News Bargaining Incentive पहले से ज्यादा सख्त और प्रभावी है: टेक कंपनियों को न्यूज ब्लॉक करने पर भी भुगतान करना होगा अब अलग-अलग मीडिया हाउसेस से डील की जरूरत नहीं, सिर्फ 4 मुख्य समझौते पर्याप्त नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा अगर कंपनियां नियम नहीं मानतीं, तो उन्हें संभावित डील वैल्यू का 50% अतिरिक्त जुर्माना देना होगा। मीडिया और लोकतंत्र के लिए बड़ा कदमसरकार का मानना है कि यह कानून सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संतुलन के लिए भी जरूरी है। इससे: पत्रकारों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा छोटे मीडिया संस्थानों को भी फायदा होगा और टेक कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी
स्मार्टफोन खरीदना हुआ महंगा: Nothing, Realme और OnePlus ने बढ़ाए दाम, जानें नई कीमतें

नई दिल्ली। स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे ग्राहकों के लिए यह खबर जेब ढीली करने वाली है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स और टिप्स्टर्स के मुताबिक, Nothing, Realme और OnePlus ने अपने कई मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। इस बदलाव के बाद मिड-रेंज से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक के फोन अब पहले से ज्यादा महंगे हो गए हैं। टिप्स्टर के अनुसार, कीमतों में यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। खास बात यह है कि Nothing के CEO कार्ल पेई ने पहले ही संकेत दिया था कि आने वाले समय में प्राइसिंग में बदलाव देखने को मिल सकता है। Nothing Phones की नई कीमतेंNothing के कुछ मॉडल्स में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है: Nothing Phone (3a) Liteपहले: ₹24,999 → अब: ₹27,999256GB वेरिएंट: ₹29,999 तक पहुंचा Nothing Phone (4a)बेस मॉडल: ₹31,999 → अब ₹34,999टॉप वेरिएंट ₹40,999 तक पहुंचा https://x.com/yabhishekhd/status/2050075175668900236?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2050075175668900236%7Ctwgr%5Ee699978096dbda8fb5d72842bb046a67b0983665%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.tv9hindi.com%2Ftechnology%2Fnothing-realme-oneplus-smartphones-price-increased-says-tipster-check-out-new-price-3770965.html Nothing Phone (4a Pro)अब कीमत ₹44,999 से शुरू होकर ₹50,999 तक जा रही है Realme Phones में भी बढ़ोतरीRealme ने अपने बजट और मिड-रेंज दोनों सेगमेंट के फोन्स महंगे कर दिए हैं: Realme C71 4G: ₹10,999 → ₹11,999 Realme 15T, 15x, C85, 16 Pro सीरीज: ₹1000 तक की बढ़ोतरी https://twitter.com/yabhishekhd/status/2050086310988366101 OnePlus Phones हुए और महंगेOnePlus ने अपने प्रीमियम मॉडल्स की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की है: OnePlus 15₹72,999 → ₹77,999 (12/256GB)टॉप वेरिएंट ₹85,999 तक OnePlus 15Rकीमत में ₹2,500 तक की बढ़ोतरीअब ₹52,999 से शुरू ग्राहकों पर असरलगातार बढ़ती कीमतों ने स्मार्टफोन बाजार में दबाव बढ़ा दिया है। खासकर मिड-रेंज सेगमेंट में खरीदारी करने वाले यूजर्स को अब पहले से ज्यादा खर्च करना होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में और कंपनियां भी कीमतों में बदलाव कर सकती हैं।