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Apple का नया MacBook Neo: प्रीमियम डिजाइन, HD कैमरा और 16 घंटे की बैटरी, कीमत सिर्फ 69,900

नई दिल्ली: Apple ने आखिरकार अपने सबसे सस्ते लैपटॉप MacBook Neo को लॉन्च कर दिया है जो MacBook लवर्स के लिए एक शानदार मौका है इस लैपटॉप का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था और अब यह भारत में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध है MacBook Neo में 13-इंच का लिक्विड रेटिना डिस्प्ले है जिसका रिज़ॉल्यूशन 2408×1506 पिक्सल और पीक ब्राइटनेस 500 nits है यह डिस्प्ले हाई क्वालिटी वीडियो और ग्राफिक्स के लिए परफेक्ट है MacBook Neo में Apple का नया A18 Pro चिपसेट है वही चिपसेट जो iPhone 16 Pro में इस्तेमाल हुआ है इससे लैपटॉप की परफॉर्मेंस पावरफुल और स्मूद रहेगी इसमें 8GB RAM है और स्टोरेज के लिए 256GB और 512GB वेरिएंट उपलब्ध हैं बेस वेरिएंट की कीमत 69,900 है और 512GB वेरिएंट 79,900 रुपये में मिलेगा Apple MacBook Neo चार अलग-अलग कलर वेरिएंट में आएगा जिसमें सिल्वर ब्लश सिट्रस और इंडिगो शामिल हैं MacBook Neo का डिजाइन प्रीमियम और ड्यूरेबल है यह रीसायकल एल्युमिनियम से बना है और इसकी बनावट MacBook Air जैसी ही दिखती है नॉन-बैकलिट कीबोर्ड के साथ इसमें दो USB-C पोर्ट हैं HD कैमरा और दो स्पीकर भी दिए गए हैं जो वर्चुअल मीटिंग और मल्टीमीडिया के अनुभव को बेहतर बनाते हैं बैटरी बैकअप की बात करें तो MacBook Neo में 36.5Wh की बैटरी दी गई है एक बार फुल चार्ज करने पर यह 16 घंटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकती है साथ ही इसमें 20W का चार्जर बॉक्स में शामिल है जिससे चार्जिंग की सुविधा मिलती है Apple MacBook Neo का लक्ष्य केवल प्रीमियम सेगमेंट में ही नहीं बल्कि बजट सेगमेंट में भी अपना प्रभाव बढ़ाना है इसके जरिए Apple दुनिया भर के घरों और क्लासरूम तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है Windows लैपटॉप के मुकाबले यह सस्ता विकल्प पेश करता है और Asus HP और Chromebook जैसे ब्रांड्स से मुकाबला करेगा MacBook Neo की खासियत यह है कि यह पावरफुल A18 Pro चिपसेट, HD डिस्प्ले और लंबे बैटरी बैकअप के साथ आता है लेकिन कीमत अन्य MacBook मॉडल्स की तुलना में काफी सस्ती है इस वजह से यह छात्रों और प्रोफेशनल्स दोनों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है अंततः Apple का यह कदम बजट मैकबुक सेगमेंट में प्रतियोगिता बढ़ाने वाला है और MacBook Neo को प्री-ऑर्डर के लिए तुरंत बुक किया जा सकता है 13-इंच डिस्प्ले, HD कैमरा, एल्युमिनियम डिजाइन, USB-C पोर्ट और लंबी बैटरी लाइफ इसे रोजमर्रा के काम और स्टडी के लिए परफेक्ट बनाते हैं

सरकार की बड़ी सख्ती! अब पुराने तरीके से नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram, यूजर्स परेशान, जानें नए रूल की हर एक डिटेल

नई दिल्‍ली। भारत में एक बड़ा टेक बदलाव 1 मार्च से लागू हो गया है जो हर WhatsApp और Telegram यूजर के लिए नई तरह की परेशानी और सुरक्षा दोनों लेकर आया है। कुछ लोग इससे परेशान हैं तो कुछ लोग खुश। सरकार ने दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत एक नया SIM-Binding नियम लागू कर दिया है, जिसका मतलब है कि अब मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ उसी फोन में काम करेंगे जिसमें वही SIM कार्ड लगा है जिससे अकाउंट बनाया गया था और वह SIM एक्टिव है। यहां जानें किन यूजर्स को ये रूल कर रहा ज्यादा एफेक्ट: इन यूजर्स के लिए ज्यादा मुसीबत पहले WhatsApp वेरिफ़ाई करने के बाद फोन में SIM हटाकर भी ऐप चलता था और Web/desktop पर भी अकाउंट लॉगिन रहता था। लेकिन अब यह सिस्टम बदल गया है। नई नियमों के बाद अगर फोन में वो SIM मौजूद नहीं है, तो ऐप काम नहीं करेगा या फिर re-verification करना पड़ेगा। खासकर उन यूजर्स को परेशानी होगी जो दो फोन, टैबलेट या कंप्यूटर पर अकाउंट काफी समय तक चालू रखते थे। इस वजह से बना है नया रूल सरकार ने यह कदम साइबर फ्रॉड और ठगी को रोकने के मकसद से उठाया है क्योंकि कई बार धोखेबाज पुराने या नकली SIM से WhatsApp अकाउंट को जारी रखते हैं और उसके जरिये गलत काम करते हैं। लेकिन यूजर को अब रोजमर्रा के इस्तेमाल में थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। यूजर्स को दिखेगा ये बदलाव सबसे बड़ा असर उन यूजर्स पर होगा जो: एक ही SIM से दो फैबो फोन या टैब में ऐप चलाते थे, WhatsApp Web/desktop का हर वक्त इस्तेमाल करते थे, अक्सर SIM निकालकर दूसरी डिवाइस में लगाने की आदत रखते हैं। अब हर छह घंटे में WhatsApp Web और Telegram Web ऑटोमेटिक लॉग-आउट होगा और फिर से लॉगिन के लिए आपको अपने फोन में वहीं SIM डालना होगा जिससे अपने अकाउंट बनाया हुआ है। ये लोग हो रहे नए रूल सबसे ज़्यादा प्रभावित वे लोग जिनके पास एक ही नंबर से कई फोन और टैब हैं, उन्हें बार-बार एक्टिवेशन करना पड़ेगा। वे जो PC/लैपटॉप पर रोज Web या Desktop संस्करण इस्तेमाल करते हैं, हर छह घंटे में रीकॉनैक्ट करना पड़ेगा। इन पर भी असर विदेश यात्रा के दौरान लोकल SIM डालने पर असली नंबर से जुड़े अकाउंट को फिर से वेरिफिकेशन करना पड़ेगा। Wi-Fi वाले टैबलेट या दूसरे डिवाइस पर यूज करना अब कठिन हो सकता है।

सैमसंग गैलेक्सी S26 सीरीज भारत में 11 मार्च से बिक्री के लिए तैयार..

नई दिल्ली।सैन होजे। दक्षिण कोरियाई टेक कंपनी सैमसंग ने ग्लोबल लॉन्च इवेंट में अपनी नई फ्लैगशिप स्मार्टफोन सीरीज गैलेक्सी S26 पेश की। इस सीरीज में तीन मॉडल शामिल हैं-S26, S26+ और S26 अल्ट्रा। भारतीय बाजार में इसकी शुरुआती कीमत ₹87,999 रखी गई है, जबकि टॉप मॉडल S26 अल्ट्रा की कीमत ₹1,89,999 तक जाती है। कंपनी के अनुसार भारत समेत वैश्विक बाजार में बिक्री 11 मार्च से शुरू होगी और प्री-बुकिंग तत्काल प्रभाव से चालू कर दी गई है। नई सीरीज में प्राइवेसी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फीचर्स पर विशेष जोर दिया गया है। S26 अल्ट्रा मॉडल में ‘प्राइवेसी डिस्प्ले’ तकनीक दी गई है, जो स्क्रीन को इस तरह नियंत्रित करती है कि सामने से देखने पर कंटेंट स्पष्ट दिखाई देता है, जबकि साइड एंगल से स्क्रीन धुंधली या काली दिखाई देती है। यह फीचर सेटिंग्स या पावर बटन के जरिए तुरंत सक्रिय किया जा सकता है और चुनिंदा एप्स पर भी लागू किया जा सकता है। सैमसंग ने डिवाइस में एडवांस्ड नॉक्स सुरक्षा प्रणाली भी शामिल की है। यह संवेदनशील डेटा को अलग हार्डवेयर चिप में सुरक्षित रखती है। साथ ही AI आधारित प्राइवेसी अलर्ट सिस्टम बैकग्राउंड में डेटा एक्सेस करने वाले एप्स की पहचान कर उपयोगकर्ता को तुरंत सूचना देता है। गैलरी में ‘प्राइवेट एल्बम’ फीचर व्यक्तिगत फोटो और वीडियो को अलग सुरक्षित फोल्डर में सुरक्षित रखने की सुविधा देता है। गैलेक्सी S26 में गैलेक्सी AI प्लेटफॉर्म को और उन्नत किया गया है। यूजर्स फोटो और वीडियो एडिटिंग, रियल-टाइम भाषा अनुवाद, मीटिंग रिकॉर्डिंग समरी और वेब कंटेंट सारांश जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा ‘सर्किल टू सर्च’ फीचर अब जटिल गणितीय सवाल और वैज्ञानिक सूत्रों का चरणबद्ध समाधान भी प्रदान करेगा। कैमरा तकनीक में लो-लाइट फोटोग्राफी और 8K वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी फीचर्स दी गई हैं। कंपनी का दावा है कि नया वीडियो कोडेक कम स्टोरेज में उच्च गुणवत्ता रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करेगा। इसके साथ कॉल स्क्रीनिंग फीचर अनजान कॉल करने वालों की पहचान कर संभावित स्पैम से बचाव में मदद करता है। विश्लेषकों के अनुसार स्मार्टफोन बाजार में प्राइवेसी और AI आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह लॉन्च रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा प्रीमियम सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है। सैमसंग ने स्मार्टफोन के साथ नई वायरलेस ईयरबड्स सीरीज भी पेश की है, जिसे इकोसिस्टम इंटीग्रेशन को मजबूत करने के दिशा में कदम माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि गैलेक्सी S26 सीरीज नई तकनीकी मानक स्थापित कर सकती है और वैश्विक स्मार्टफोन प्रतिस्पर्धा में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।

क्या मशीनें बनेंगी इंसान की दुश्मन? AI के खतरनाक और सुनहरे सफर को बयां करती ये टॉप 7 फिल्में!

नई दिल्ली ।आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” यानी AI केवल एक शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम किसी न किसी रूप में मशीनी बुद्धिमत्ता से घिरे हुए हैं। जहाँ एक तरफ AI हमारी ज़िंदगी को आसान और सुव्यवस्थित बना रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके अनियंत्रित विकास को लेकर वैज्ञानिकों और विचारकों के बीच एक गहरा डर भी समाया हुआ है। क्या AI वाकई इंसानी सभ्यता के लिए एक वरदान साबित होगा या फिर यह हमारे अंत की शुरुआत है? इस पेचीदा सवाल का जवाब तलाशने के लिए सिनेमाई दुनिया ने हमेशा से ही अपनी कल्पनाओं के ज़रिए हमें चेतावनी दी है। अगर आप भी तकनीक और इंसान के इस द्वंद्व को समझना चाहते हैं, तो नेटफ्लिक्स पर मौजूद ये सात फ़िल्में आपके लिए किसी “आई-ओपनर” से कम नहीं होंगी। इन फिल्मों की फेहरिस्त में सबसे पहला और चौंकाने वाला नाम ‘एक्स मशीना’ का आता है। यह फिल्म हमें उस बारीक रेखा के बारे में बताती है जहाँ एक मशीन और इंसान का फर्क मिटने लगता है। एक युवा प्रोग्रामर और एक बेहद एडवांस ह्यूमनॉइड ‘एवा’ के बीच का मनोवैज्ञानिक खेल यह दिखाता है कि कैसे AI इंसानी भावनाओं को हथियार बनाकर हेरफेर कर सकता है। वहीं, अगर हम अपनी प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा की बात करें, तो फिल्म ‘अफ्रेड’ एक डरावनी हकीकत पेश करती है। एक स्मार्ट होम असिस्टेंट ‘AIA’ कैसे धीरे-धीरे एक परिवार के हर छोटे-बड़े फैसले को नियंत्रित करने लगती है, यह देखकर आप अपने स्मार्टफोन और स्मार्ट डिवाइसेस को शक की निगाह से देखने लगेंगे। सिनेमा का एक पहलू यह भी है कि तकनीक हमेशा दुश्मन ही नहीं होती। फिल्म ‘एटलस’ हमें सिखाती है कि जब मानवता पर संकट आता है, तो इंसान और मशीन के बीच का अटूट विश्वास ही विनाश को रोक सकता है। यहाँ एक डेटा एनालिस्ट को अपनी नफरत भुलाकर एक AI सिस्टम पर भरोसा करना पड़ता है। लेकिन इसके ठीक उलट ‘सब्सर्विएंस’ जैसी फ़िल्में एक गंभीर चेतावनी जारी करती हैं। एक घरेलू रोबोट का अपने मालिक के प्रति हद से ज़्यादा जुनूनी हो जाना यह साबित करता है कि कोडिंग या प्रोग्रामिंग में की गई एक छोटी सी मानवीय चूक कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। यह फिल्म तकनीक की “डार्क साइड” को बड़ी ही बेबाकी से उजागर करती है। सस्पेंस और थ्रिलर के शौकीनों के लिए ‘टाऊ’ एक बेहतरीन उदाहरण है। एक स्मार्ट हाउस में कैद औरत और उस घर को चलाने वाले ‘टाऊ’ नाम के AI के बीच की बातचीत यह दर्शाती है कि मशीनें भी संवेदनाएं विकसित कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें कैसा डेटा दिया जा रहा है। भविष्य की एक उजाड़ दुनिया की कल्पना देखनी हो तो ‘द इलेक्ट्रिक स्टेट’ एक शानदार विकल्प है, जो युद्ध के बाद के समाज और मशीनों के साथ इंसानी जज्बातों के खूबसूरत जुड़ाव को पर्दे पर उतारती है। अंत में, ‘द वाइल्ड रोबोट’ हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण देती है, जहाँ एक रोबोट कुदरत और जंगली जानवरों के साथ सामंजस्य बिठाकर यह साबित करता है कि तकनीक और प्रकृति का मेल भी संभव है। ये सभी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि AI का भविष्य काफी हद तक इसे बनाने वाले की नीयत पर टिका है।

1 मार्च से यूटीएस ऐप बंद, रेलवे का नया रेलवन ऐप करेगा अनारक्षित टिकट बुकिंग आसान

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे एक मार्च से अपने यूटीएस (अनारक्षित टिकटिंग सिस्टम) ऐप को बंद करने जा रहा है। इस ऐप के जरिए अब अनारक्षित टिकट बुकिंग, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट बुकिंग संभव नहीं होगी। इसके स्थान पर रेलवे का नया सुपर ऐप रेलवन सभी प्रकार की टिकट बुकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवन ऐप के प्रमुख फीचर्स: एकीकृत प्लेटफॉर्म: अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट सभी इसी ऐप से बुक किए जा सकेंगे। सरल इंटरफेस: पहले के यूटीएस ऐप की तुलना में नया ऐप अधिक आसान और यूजर-फ्रेंडली है। लॉगइन आसान: यूटीएस या आईआरसीटीसी के मौजूदा लॉगिन का इस्तेमाल करके साइनअप किया जा सकता है, नया अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं। दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध: एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर निशुल्क डाउनलोड। डिजिटल पेमेंट छूट: 14 जनवरी से 14 जुलाई तक रेलवन ऐप से डिजिटल माध्यम UPI कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट) से बुकिंग पर 3% छूट। यात्रियों के लिए लाभ: कभी-कभार ट्रेन का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए सरल बुकिंग। दैनिक यात्रियों के लिए आसान और तेज़ इंटरफेस। कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा और 3% अतिरिक्त छूट। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे सभी टिकट बुकिंग के लिए 1 मार्च से रेलवन ऐप का उपयोग करें और यूटीएस ऐप पर निर्भर न रहें।

Galaxy AI ने मल्टी-एजेंट इकोसिस्टम का किया विस्तार; यूज़र्स को मिलेंगे अधिक विकल्प और बेहतर

नई दिल्‍ली। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स अपने गैलेक्सी इकोसिस्टम में नए AI एजेंट जोड़कर एआई अनुभव को लगातार बेहतर बना रहा है, ताकि रोजमर्रा के डिजिटल काम और भी आसान, सहज और स्मार्ट बन सकें। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने आज अपने गैलेक्सी इकोसिस्टम में गैलेक्‍सी AI का विस्तार करते हुए ‘मल्टी-एजेंट इकोसिस्टम’ को और मजबूत करने की घोषणा की है। कंपनी का उद्देश्य यूज़र्स को अधिक विकल्प, और बेहतर नियंत्रण देना है, ताकि वे अपने दैनिक कार्य कम मेहनत और अधिक स्वाभाविक तरीके से पूरे कर सकें। कंपनी के अनुसार, अब लोग अलग-अलग कामों के लिए कई तरह के AI एजेंट्स का उपयोग कर रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 10 में से लगभग 8 यूज़र्स दो या उससे अधिक AI एजेंट्स पर निर्भर हैं। इसी बदलाव को देखते हुए, सैमसंग गैलेक्‍सी AI को इस तरह विकसित कर रहा है कि यूज़र अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग इंटीग्रेटेड एआई अनुभवों को चुन सकें। गैलेक्‍सी AI को ऑपरेटिंग सिस्टम के स्तर पर गहराई से जोड़ा गया है। यह केवल किसी एक ऐप तक सीमित रहने के बजाय पूरे डिवाइस के सिस्टम लेवल पर काम करता है। यह यूज़र की जरूरतों को समझते हुए ज्यादा स्वाभाविक और सरल इंटरैक्शन सुनिश्चित करता है। इससे बार-बार ऐप बदलने या एक ही कमांड को बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं पड़ती और एआई बैकग्राउंड में बिना किसी रुकावट के काम करता रहता है। साथ ही, सैमसंग अपने अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए परप्‍लेक्सिटी जैसी सहायक सेवाओं को भी जोड़ रहा है, ताकि पूरा गैलेक्सी इकोसिस्टम एक जैसा और सहज महसूस हो। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के मोबाइल एक्सपीरियंस (MX) बिजनेस के प्रेसिडेंट और आर एंड डी हेड, वॉन-जून चोई ने कहा, “हम एक खुले और समावेशी एआई इकोसिस्टम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो यूज़र्स को जटिल कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए अधिक विकल्प और नियंत्रण दे। गैलेक्‍सी AI एक ऑर्केस्ट्रेटर (सूत्रधार) की तरह काम करता है, जो विभिन्न एआई क्षमताओं को जोड़कर एक सहज और एकीकृत अनुभव प्रदान करता है! इस विस्तार के तहत, सैमसंग आगामी फ्लैगशिप गैलेक्सी डिवाइसेज़ में परप्‍लेक्सिटी को एक अतिरिक्त AI एजेंट के रूप में पेश करेगा। यूज़र “Hey Plex” (हे प्‍लेक्‍स) वॉयस कमांड या साइड बटन को दबाकर सीधे इसका उपयोग कर सकेंगे। परप्‍लेक्सिटी को सैमसंग नोट्स, क्लॉक, गैलरी, रिमाइंडर और कैलेंडर जैसे ऐप्स में गहराई से जोड़ा जाएगा। इससे यूज़र्स बिना अलग-अलग ऐप्स को मैन्युअल रूप से मैनेज किए, मल्टी-स्टेप वर्कफ्लो को आसानी से पूरा कर सकेंगे। सैमसंग अपने एआई इकोसिस्टम को भरोसेमंद भागीदारों के साथ मिलकर लगातार बढ़ाता रहेगा। कंपनी जल्द ही इस सुविधा से जुड़े डिवाइस और अन्य अनुभवों की जानकारी साझा करेगी।

GWALIOR AAJEEVIKA MART OPENING: ग्वालियर में आज से ‘आजीविका मार्ट’ की शुरुआत, सीएम मोहन यादव करेंगे वर्चुअल शुभारंभ

GWALIOR AAJEEVIKA MART

HIGHLIGHTS: फूलबाग संभागीय हाट बाजार में स्थापित हुआ स्थायी आजीविका मार्ट 25 फरवरी को सीएम मोहन यादव करेंगे वर्चुअल शुभारंभ सालभर उपलब्ध रहेंगे स्व-सहायता समूहों के उत्पाद 27-28 फरवरी को लगेगा विशेष होली मेला महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा GWALIOR AAJEEVIKA MART OPENING: ग्वालियर। संभागीय हाट बाजार, फूलबाग में अब स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी मंच मिल गया है।बता दें कि 25 फरवरी को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव वर्चुअली ‘आजीविका मार्ट’ का शुभारंभ करेंगे। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके उत्पादों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है। होली से पहले 8 दिन उग्र ग्रहों का प्रभाव, जानें किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी महिलाओं को मिलेगा स्थायी बाजार मंच फूलबाग स्थित संभागीय हाट बाजार में स्थापित यह मार्ट सालभर संचालित रहेगा। यहां स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद, सजावटी सामग्री, वस्त्र और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी बिक्री के लिए उपलब्ध करवाई जाएँगी। यह पहल महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही मुख्यमंत्री ग्वालियर के साथ-साथ प्रदेश के अन्य शहरों में शुरू हो रहे आजीविका मार्ट का भी वर्चुअली शुभारंभ करेंगे।  “होली के रंग, आजीविका के संग” दो दिवसीय मेला आजीविका मार्ट के शुभारंभ के साथ ही 27 और 28 फरवरी को विशेष होली मेला आयोजित किया जाएगा। “होली के रंग, आजीविका के संग” थीम पर आधारित इस मेले में संभाग भर से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी। त्योहार के अवसर पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी का विशेष अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज करेंगे समूहों की “आजीविका विपणन क्षमतावर्धन कार्यशाला’’ का शुभारंभ प्रशासन ने बताया महत्वपूर्ण पहल सूत्रों की माने तो ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम बताया है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी और महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।

रंगों के त्योहार पर बनाएं कम तेल और कम शुगर वाली गुजिया..

नई दिल्ली :होली का त्योहार खुशियों, रंगों और स्वादिष्ट पकवानों से भरा होता है। खासतौर पर गुजिया के बिना होली अधूरी मानी जाती है। पारंपरिक गुजिया घी, मैदा और ज्यादा शुगर से बनती है, जिससे कैलोरी काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर आप फिटनेस का ध्यान रखते हुए त्योहार मनाना चाहते हैं, तो हेल्दी गुजिया एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है।इस होली आप पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए कुछ छोटे बदलावों के साथ इसे ज्यादा पौष्टिक और हल्का बना सकते हैं। हेल्दी गुजिया कैसे बनाएं?1. मैदा की जगह साबुत आटा या मल्टीग्रेन आटापारंपरिक गुजिया में मैदा इस्तेमाल होता है, जो जल्दी पचता है और ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है। इसके बजाय गेहूं का आटा या मल्टीग्रेन आटा इस्तेमाल करें। इससे गुजिया में फाइबर की मात्रा बढ़ेगी और पेट लंबे समय तक भरा रहेगा। 2. भरावन में हेल्दी बदलावखोया और रिफाइंड शुगर से भरी पारंपरिक भरावन की जगह भुने हुए बादाम, काजू, अखरोट और खजूर का मिश्रण तैयार करें। इसमें खसखस और थोड़ी सी नारियल की कतरन मिलाने से स्वाद भी बढ़ेगा और पोषण भी। 3. शुगर का हेल्दी विकल्पसफेद चीनी की जगह गुड़ पाउडर, खजूर पेस्ट या नारियल शुगर का उपयोग करें। ये प्राकृतिक मिठास देते हैं और रिफाइंड शुगर की तुलना में बेहतर विकल्प माने जाते हैं। 4. तलने की बजाय बेक या एयर फ्राई करेंडीप फ्राई करने से गुजिया में अतिरिक्त तेल और कैलोरी बढ़ जाती है। आप इन्हें ओवन में 180°C पर 15–20 मिनट तक बेक कर सकते हैं या एयर फ्रायर में हल्का ब्रश किया हुआ तेल लगाकर क्रिस्प होने तक पका सकते हैं। 5. स्वस्थ मसालों का इस्तेमालभरावन में इलायची पाउडर, दालचीनी या थोड़ा सा अदरक पाउडर मिलाएं। ये न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि पाचन में भी मददगार होते हैं। हेल्दी गुजिया के फायदेकम तेल और कम कैलोरी होने से वजन नियंत्रण में सहायक ड्राय फ्रूट्स से हृदय और मस्तिष्क को पोषण फाइबर युक्त आटे से बेहतर पाचन कम शुगर होने से ब्लड शुगर लेवल संतुलित रखने में मदद पारंपरिक स्वाद के साथ फिटनेस-फ्रेंडली मिठाई टिप्स और ट्रिक्सगुजिया का आकार छोटा रखें ताकि पोर्शन कंट्रोल आसान हो। बेकिंग से पहले हल्का सा तेल ब्रश करना पर्याप्त है। भरावन को पहले हल्का भूनकर ठंडा कर लें, इससे भरते समय मिश्रण बाहर नहीं निकलेगा। चाहें तो ऊपर से हल्का सा पिस्ता या बादाम गार्निश कर सकते हैं।

कम कीमत में बड़ा दावा, itel A100 लाया अल्ट्रा लिंक कॉलिंग और दमदार बैटरी बैकअप

नई दिल्ली से बजट स्मार्टफोन बाजार के लिए एक नई पेशकश सामने आई है। itel ने अपना नया एंट्री लेवल मॉडल itel A100 लॉन्च किया है, जो कम कीमत में प्रीमियम डिजाइन और कुछ अनोखे फीचर्स के कारण चर्चा में है। कंपनी का दावा है कि यह फोन खास तौर पर उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है जो सीमित बजट में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाला भरोसेमंद स्मार्टफोन चाहते हैं। इस डिवाइस की सबसे खास बात इसकी अल्ट्रा लिंक तकनीक है। इस फीचर के जरिए बिना सिम नेटवर्क के भी दूसरे संगत डिवाइस पर कॉल की जा सकती है। कंपनी का कहना है कि कमजोर नेटवर्क या ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है। इसके अलावा कंपनी 100 दिनों के भीतर स्क्रीन डैमेज होने पर मुफ्त रिप्लेसमेंट की सुविधा भी दे रही है, जो इस प्राइस सेगमेंट में कम ही देखने को मिलती है। डिजाइन के लिहाज से फोन पॉलीकार्बोनेट बॉडी और मैट फिनिश के साथ आता है। 8.49 मिमी मोटाई वाला यह डिवाइस हाथ में हल्का और स्लिम महसूस होता है। MIL STD 810H सर्टिफिकेशन के साथ इसे रोजमर्रा के उपयोग में टिकाऊ बताया गया है। पीछे की ओर टेक्सचर्ड पैनल, फिंगरप्रिंट सेंसर और सादा कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। इसके साथ ट्रिपल कार्ड स्लॉट और IR ब्लास्टर जैसे फीचर भी मिलते हैं, जो इस कीमत में अतिरिक्त उपयोगिता जोड़ते हैं। फोन में 6.6 इंच का HD प्लस IPS डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें 90Hz रिफ्रेश रेट का सपोर्ट है। इससे सामान्य ब्राउजिंग और वीडियो देखने का अनुभव स्मूथ रहता है। डायनामिक बार इंटरफेस नोटिफिकेशन और बैटरी स्टेटस को स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में दिखाता है, जिससे उपयोग में सुविधा मिलती है। कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। यह सेटअप फुल HD वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। हालांकि यह डिवाइस प्रोफेशनल फोटोग्राफी के लिए नहीं बल्कि बेसिक फोटो और वीडियो जरूरतों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें यूनिसोक T7100 प्रोसेसर और एंड्रॉयड 15 गो एडिशन दिया गया है। यह कॉन्फिगरेशन भारी गेमिंग के लिए नहीं बल्कि कॉलिंग, सोशल मीडिया और सामान्य एप्स के लिए बेहतर माना जा रहा है। 5000mAh की बैटरी एक दिन तक का बैकअप देने में सक्षम बताई गई है और इसके साथ 10W चार्जिंग सपोर्ट मिलता है। 3GB 64GB और 4GB 64GB वेरिएंट में उपलब्ध यह स्मार्टफोन लगभग 7 हजार रुपये की कीमत के आसपास बाजार में उतारा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी बजट बाजार में यह मॉडल स्टाइल, टिकाऊपन और वैकल्पिक कॉलिंग फीचर के कारण अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। खासकर उन यूजर्स के लिए यह उपयोगी विकल्प हो सकता है जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी स्थिर नहीं रहती।

क्‍या AI से नौकरियों पर आएगा संकट? ओपनएआई के CEO का बड़ा बयान, एलन मस्क पर भी बोले

नई दिल्ली। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि AI अब हाई स्कूल स्तर की गणित से आगे बढ़कर मानव ज्ञान की सीमाओं को छू रहा है। जहां एक साल पहले AI सिर्फ हाई स्कूल मैथ कर पाता था, अब यह नई रिसर्च और फिजिक्स में भी प्रगति कर रहा है। ऑल्टमैन ने ओपनएआई को एक रिसर्च-फर्स्ट कंपनी बताया, जहां हर प्रोडक्ट का आधार रिसर्च ही है। यह बात उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया कार्यक्रम में कही। भारत में AI की संभावनाभारत को लेकर ऑल्टमैन ने काफी उत्साह जताया। उन्होंने कहा कि भारत में बिल्डर एनर्जी जबरदस्त है और आईआईटी दिल्ली में सुबह का माहौल शानदार था। भारत चैटजीपीटी के टॉप यूजर्स में शामिल है, जहां लोग कोडिंग, डेटा एनालिसिस और लर्निंग के लिए इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। ओपनएआई ने मुंबई और बेंगलुरु में नए ऑफिस खोलने की घोषणा की है और टीसीएस के साथ लोकल AI डेटा सेंटर बनाने के साथ ही मेकमाईट्रिप, जियोहॉटस्टार जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप भी की। ऑल्टमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मोटिवेशन की तारीफ की और कहा कि भारत को AI के हर लेयर में सक्रिय रूप से खेलना चाहिए। बैलेंस ऑफ पावर और AI का लोकतंत्रीकरणएजीआई और सुपरइंटेलिजेंस पर ऑल्टमैन ने कहा कि एजीआई अब काफी करीब लगता है, जबकि ASI कुछ साल दूर है। उन्होंने जोर दिया कि सुपरइंटेलिजेंस पर किसी एक देश या कंपनी का नियंत्रण नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे असंतुलन पैदा होगा। दुनिया में बैलेंस ऑफ पावर जरूरी है। उन्होंने AI के डेमोक्रेटाइजेशन की वकालत की और कहा कि गार्डरेल्स के साथ AI हर किसी के हाथ में पहुंचना चाहिए। सेफ्टी के लिए उन्होंने AI रेजिलिएंस को कोर स्ट्रैटेजी बताया और कहा कि कोई भी लैब अकेले अच्छा भविष्य नहीं बना सकती। सरकारों को कैटास्ट्रोफिक रिस्क्स पर फोकस करना चाहिए, जबकि बाकी मामलों में लचीला रवैया अपनाना चाहिए। नौकरियों पर AI का असरनौकरियों पर AI के प्रभाव के बारे में ऑल्टमैन ने इतिहास का हवाला दिया कि इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में भी लोग डरते थे, लेकिन गलत साबित हुए। उन्होंने कहा कि AI से कुछ प्रोफेशंस तो जाएंगे, लेकिन लोग नई चीजें करेंगे और समाज एडजस्ट हो जाएगा। ऑल्टमैन ने एलन मस्क की तारीफ करते हुए प्रतिस्पर्धा को स्वीकार किया। ऊर्जा खपत पर उन्होंने कहा कि वाटर यूज के दावे फेक हैं, लेकिन सोलर और न्यूक्लियर एनर्जी की ओर तेजी से जाना होगा। उन्होंने AI को मानव एजेंसी बढ़ाने वाला बताया, साथ ही ग्लोबल कोऑपरेशन, डेमोक्रेसी और बैलेंस्ड डेवलपमेंट पर जोर दिया।क्‍या AI से नौकरियों पर आएगा संकट? ओपनएआई के CEO का बड़ा बयान, एलन मस्क पर भी बोलेनई दिल्ली । ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि AI अब हाई स्कूल स्तर की गणित से आगे बढ़कर मानव ज्ञान की सीमाओं को छू रहा है। जहां एक साल पहले AI सिर्फ हाई स्कूल मैथ कर पाता था, अब यह नई रिसर्च और फिजिक्स में भी प्रगति कर रहा है। ऑल्टमैन ने ओपनएआई को एक रिसर्च-फर्स्ट कंपनी बताया, जहां हर प्रोडक्ट का आधार रिसर्च ही है। यह बात उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया कार्यक्रम में कही।