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TATA.ev ने नए Punch.ev के साथ मेनस्ट्रीम EV अपनाने में तेज़ी लाई

मुंबई! ईवी को मेनस्ट्रीम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, भारत में जीरो एमिशन पर्सनलमोबिलिटी सॉल्यूशंस के लीडिंग प्रोवाइडर, TATA.ev ने आज अपने पॉपुलर Punch.ev का नया अवतार लॉन्च किया, जिससेभारत में बड़े पैमाने पर EV अपनाने की नई लहर शुरू हो गई है। एंट्री लेवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को डेमोक्रेटाइज़ करने के लिएडिजाइन की गई, नई Punch.ev उन सभी चीज़ों को एक साथ लाता है जो कस्टमर न सिर्फ अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार मेंबल्कि अपनी पहली घरेलू कार में भी चाहते हैं। यह EV ओनरशिप को रोकने वाली मुख्य रुकावटों – अफोर्डेबिलिटी, रेंजकॉन्फिडेंस, चार्जिंग सुविधा और बैटरी एश्योरेंस – को पूरी तरह से दूर करता है; जिससे बड़े पैमाने पर मेनस्ट्रीम EV अपनाने कापूरा समीकरण हल हो जाता है।सिर्फ़ ₹ 9.69 लाख (एक्स-शोरूम, मुंबई) की आकर्षक शुरुआती कीमत पर लॉन्च की गई, नई Punch.ev एंट्री-लेवल स्मॉल-कारसेगमेंट में ICE ऑफ़रिंग के साथ EV ओनरशिप को लगभग ऑन-रोड कीमत के बराबर लाता है।TATA.ev BaaS का ऑप्शन भी दे रहा है, जो ₹ 9.69 लाख से शुरू होता है और बैटरी EMI ₹2.6 /किमी है, जिससे कस्टमरके लिए एक दूसरा फाइनेंसिंग ऑप्शन मिलता है।नई Punch.ev को लॉन्च करते हुए टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल लिमिटेड और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड केमैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्रा ने कहा, “नई Punch.ev, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को हर घर के लिए सच में आसान, प्रैक्टिकल औरचिंता-मुक्त बनाती है। ~355 किमी की रियल-वर्ल्ड रेंज, फास्ट चार्जिंग कैपेबिलिटी, लाइफटाइम HV बैटरी वारंटी और बहुत हीकिफायती कीमत के साथ, यह उन मुख्य चिंताओं को दूर करती है जो अब तक ग्राहकों को अपनी मुख्य कार के रूप में एंट्रीलेवल EV चुनने से रोकती थीं। रोज़ाना और लंबी दूरी की यात्रा के लिए ग्राहक अपनी पसंदीदा कार में जो कुछ भी चाहते हैं, उसेएक साथ लाकर, नई Punch.ev भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के डेमोक्रेटाइजेशन में एक बड़ी छलांग है।” कीमतों का टेबल नई Punch.ev – बियॉन्ड लिमिट्स के बारे में एडवांस्ड acti.ev आर्किटेक्चर पर बनी नई Punch.ev प्योर EVs को अगले लेवल पर ले जाती है। सबकॉम्पैक्ट SUV कैटेगरीमें सबसे आगे रहने के साथ-साथ भारत की सबसे पसंदीदा SUV में से एक के तौर पर अपनी जगह बनाए रखने वाली, Punchअपने EV अवतार में कई खरीदारों के लिए एक पक्की पसंद है। ज्यादा रियल-वर्ल्ड रेंज और बड़े बैटरी पैक के साथ रेंज की चिंता दूर करनाबड़े 40 kWh LFP प्रिज़्मैटिक सेल बैटरी पैक के साथ, जो ज्यादा काम की रियल-वर्ल्ड C75 रेंज ~355 किमी* और ARAIसर्टिफाइड (P1+P2) रेंज 468 किमीs** देता है, नई Punch.ev रोज़ाना शहर में इस्तेमाल और छोटी इंटरसिटी यात्राओं के लिएबहुत अच्छी है, जिसमें बार-बार चार्जिंग स्टॉप की ज़रूरत कम होती है। इसके अलावा नई Punch.ev एक नए 30kWh बैटरीपैक ऑप्शन के साथ भी मिलेगी। इन दोनों ऑप्शन को मिलाकर नई Punch.ev ग्राहकों को ICE से इलेक्ट्रिक में आसानी सेबदलने में मदद करती है, जिससे बेहतर ड्राइव क्वालिटी, कम रनिंग और मेंटेनेंस कॉस्ट, और एक बार चार्ज करने पर रोजाना यालंबी दूरी की यात्रा में कोई समझौता नहीं होता है।फास्टर चार्जिंग, ज्यादा ड्राइविंग:फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ, बैटरी सिर्फ़ 26 मिनट* में 20% से 80% तक तेज़ी से चार्ज हो सकती है। इसके अलावा, यह सिर्फ 15 मिनट* में बैटरी को आसानी से 135 किमी की रियल-वर्ल्ड रेंज दे देती है, जो लगभग लंबी ड्राइव पर एक छोटीचाय या कॉफ़ी ब्रेक के समय के बराबर है।अनलिमिटेड किमी कवर करने वाली लाइफ़टाइम बैटरी वारंटी:नया Punch.ev अनलिमिटेड किमी*** कवर करने वाली लाइफ़टाइम HV बैटरी वारंटी के साथ आता है, जो सबसे जरूरी EVपार्ट्स पर लंबे समय तक कवरेज देता है, जिससे पहली बार मालिक बनने वाले ग्राहकों को मालिकाना हक के दौरान ज्यादाभरोसा मिलता है।तेजी से बढ़ता चार्जिंग इकोसिस्टम:TATA.ev का चार्जिंग नेटवर्क घर, कम्युनिटी और पार्टनर्स की पब्लिक चार्जिंग के ज़रिए 1,500 शहरों में 2.3 लाख से ज़्यादाचार्जिंग पॉइंट को कवर करता है। TATA.ev ने 30 से ज्यादा चार्ज पॉइंट ऑपरेटर के साथ मिलकर 30,000 से ज्यादा पब्लिकचार्जर जोड़े हैं। ग्राहक IRA.ev ऐप के जरिए एक्टिव चार्जर की रियल टाइम अवेलेबिलिटी/स्टेटस चेक कर सकते हैं ताकि आसानीसे नेविगेशन और एंड-टू-एंड पेमेंट हो सके। TATA.ev पब्लिक चार्जर कितने भरोसेमंद हैं, इस पर नजर रखता है और इसने एक‘.ev वेरिफाइड’ चार्जर नेटवर्क बनाया है, जिसमें 500 शहरों और कस्बों में 2,500+ तेज़, सुरक्षित और बहुत भरोसेमंद चार्जिंगपॉइंट हैं। चार्जिंग के अनुभव को वर्ल्ड क्लास लेवल तक ले जाते हुए, TATA.ev ने भारत का सबसे बड़ा सुपरफास्ट चार्जिंगनेटवर्क बनाया है – 80 हाईवे पर 130+ मेगा चार्जिंग हब पर 450+ चार्जिंग पॉइंट – यह संख्या FY26 तक 800 चार्जिंग पॉइंटतक बढ़ जाएगी। Share this:

AI ALERT: AI कंटेंट के नए नियम आज से लागू, इंटरनेट पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

  AI ALERT: नई दिल्ली । एआई जेनरेटेड कंटेंट के नए नियम लागू द्र सरकार ने एआई जेनरेटेड कंटेंट को लेकर पिछले दिनों नियमों में संशोधन किया था। ये नियम आज यानी 20 फरवरी से लागू हो गए हैं। अब सोशल मीडिया या इंटरनेट पर एआई जेनरेटेड कंटेंट शेयर करना भारी पड़ सकता है। आईटी मिनिस्ट्री ने इस नए नियम को 10 फरवरी 2026 को नोटिफाई किया था। इस नए नियम को IT Digital Media Ethics Code Rules 2021 के अमेंटमेंट के तौर पर लागू किया गया है। सरकार ने इस नियम में सिंथेटिकली या AI द्वारा जनेरेटड कंटेंट को परिभाषित किया है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी तय की है। इस तरह के कंटेंट शेयर करने वाले यूजर्स पर भी एक्शन की बात इस नए नियम में स्पष्ट किए गए हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे AI Impact Summit के दौरान पीएम मोदी ने भी एआई सेफ्टी पर खुलकर अपनी बात रखी है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट की वजह से समाज प्रभावित हो रहे हैं। इस तरह के कंटेंट के लिए वाटरमार्किंग और क्लियर सोर्स स्टैंडर्ड सेट करने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी को लेकर भी और ज्यादा विजिलेंट होने की बात की है। क्या है सिंथेटिकली जेनरेटेड SGI कंटेंट? नए नियम के मुताबिक ऐसे कोई भी कम्प्यूटिकृत कंटेंट SGI माने जाएंगे जिन्हें एआई या कम्प्यूटर द्वारा मोडिफेकशन करके जेनरेट किया जाएगा। अगर वो कंटेंट किसी वास्तविक व्यक्ति घटना या स्थान जैसा प्रतीत हो रहा है। ऐसे कंटेंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या इंटरनेट पर शेयर करने से पहले वाटरमार्किंग या लेबलिंग जरूरी है ताकि लोग पहचान कर सके कि ये AI जेनरेटेड है। हालांकि बेसिक एडिटिंग वाले फोटो और वीडियो को SGI कंटेंट नहीं माना जाएगा। इसके लिए लेबलिंग या वाटरमार्किंग की जरूरत नहीं है। हुए तीन बड़े बदलाव डीपफेक वीडियो और इमेज को लेकर सरकार ने सख्ती दिखाते हुए तीन बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। इनमें एआई जेनरेटेड कंटेंट को शेयर करने से पहले लेबलिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। अगर किसी इमेज या वीडियो पर एक बार एआई वाला लेबल लग गया है तो उसे दोबारा नहीं हटाया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स द्वारा अपलोड किए जाने वाले एआई जेनरेटेड कंटेंट को वेरिफाई करने के लिए जरूरी टूल्स डेवलप करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बिना वेरिफिकेशन के ऐसे कंटेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं किए जा सके। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ये भी निर्देश दिया गया है कि वो अपने यूजर्स को हर तीन महीने में ये चेतावनी जारी करे कि एआई के मिसयूज पर जुर्माना या सजा हो सकता है। इसे एक सोशल मीडिया अवेयरनेस के तौर पर देखा जाना चाहिए। इन तीन बड़े बदलावों के अलावा सरकार ने कुछ कैटेगरी को No Go जोन में रखा है जिनमें बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट फर्जी डॉक्यूमेंट या फेक इलेक्ट्रॉनिक्स रिकॉर्ड हथियार गोला-बारूद से संबंधित जानकारी डीपफेक फोटो और वीडियो शामिल हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय MeitY ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए कहा कि किसी कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश जारी होने पर 3 घंटे में उसे हटाना होगा। पहले यह लिमिट 36 घंटों की थी। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक कोडिंग यूज करने के लिए कहा गया है ताकि यह पता चल सके कि एआई कंटेंट को किस प्लेटफॉर्म ने तैयार किया है। बच्चों से जुड़े हिंसक और अश्लील वीडियो पर तुरंत एक्शन लेने के लिए कहा है। इसके अलावा रिस्पॉन्स की टाइमलाइन को भी घटाकर 12 घंटा कर दिया गया है। AI कंटेंट अब जिम्मेदारी के दायरे में-बिना लेबल पोस्ट करना जोखिमभरा। नए नियमों के तहत 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट वरना सख्त कार्रवाई तय। कानूनी कार्रवाई का प्रावधान सरकार ने SGI या एआई जेनरेटेड कंटेंट के नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान रखा है। SGI के नए नियमों के उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता भारतीय नागरिकता सुरक्षा संहिता और POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑटोमैटेड टूल्स और तकनीक का इस्तेमाल करके SGI की पहुंच को हटाने को IT एक्ट के धारा 79 की शर्तों का उल्लंघन नहीं माना है। ऐसी कार्रवाई को नियमों के तहत माना जाएगा।

INDIA’S THIRD NUCLEAR SUBMARINE: भारत ने बनाई घातक मिसाइलों से लैस तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी, नौसेना के बेड़े में जल्द होगी शामिल

INDIA’S THIRD NUCLEAR SUBMARINE: नई दिल्ली। भारत (India) अपनी समुद्री सैन्य शक्ति और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार है। देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-सक्षम पनडुब्बी (Indigenous Nuclear-Capable Submarine) (SSBN), INS अरिधमन (S4) इस साल अप्रैल-मई तक नौसेना (Navy) में शामिल होने की संभावना है। भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता में बड़ा इजाफा भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी ने पिछले दिसंबर में संकेत दिया था कि INS अरिधमन को 2026 में कमीशन किया जाएगा। वर्तमान में यह पनडुब्बी अपने समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है। INS अरिधमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास पहली बार तीन परिचालन परमाणु पनडुब्बियां होंगी। यह भारत को ‘कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस’ की रणनीति हासिल करने के करीब ले जाएगा, जिसका अर्थ है कि साल के 365 दिन भारत की कम से कम एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में गश्त पर तैनात रहेगी। INS अरिधमन: क्यों है यह खास? एक रिपोर्ट के मुताबिक, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विशाखापत्तनम में निर्मित यह पनडुब्बी अपने पूर्ववर्तियों (INS अरिहंत और INS अरिघात) की तुलना में अधिक घातक और एडवांस है। बड़ा आकार और क्षमता: अरिधमन का वजन 7,000 टन है, जबकि पिछली पनडुब्बियां 6,000 टन की थीं। हथियार प्रणाली: यह पनडुब्बी K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस होगी, जिसकी मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर है। इसके अलावा, यह 24 K-15 ‘सागरिका’ मिसाइलों (750 किमी रेंज) को भी ले जा सकती है। इंजन और तकनीक: इसमें 83 मेगावाट का प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर लगा है। दुश्मन की नजरों से बचने के लिए इसमें उन्नत ‘एनेकोइक टाइल्स’ लगाई गई हैं, जो शोर को कम करती हैं और इसे रडार की पकड़ से दूर रखती हैं। स्वदेशी सेंसर: बेहतर लक्ष्य पहचान के लिए इसमें भारत में विकसित ‘उषस’ (USHUS) और ‘पंचेंद्रिय’ सोनार सिस्टम लगाए गए हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा जरूरी भारत की यह तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में सैन्य संतुलन बदल रहा है। पाकिस्तान की तैयारी: पाकिस्तान चीन से $5 बिलियन के सौदे के तहत आठ उन्नत ‘हंगोर-क्लास’ पनडुब्बियां खरीद रहा है। रूस से मदद: भारत रूस से एक अकुला-क्लास परमाणु हमलावर पनडुब्बी (चक्र-III) को भी लीज पर लेने की प्रक्रिया में है, जो 2027-28 तक आने की उम्मीद है। जर्मनी के साथ डील: भारत और जर्मनी के बीच $8-10 बिलियन का प्रोजेक्ट-75(I) समझौता अंतिम चरण में है, जिसके तहत एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक वाली छह अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। एक बार चालू होने के बाद, INS अरिधमन को विशाखापत्तनम के पास ‘प्रोजेक्ट वर्षा’ नामक एक उच्च-सुरक्षा वाले भूमिगत बेस पर तैनात किया जाएगा। यह विकास भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में मजबूती से खड़ा करता है जिनके पास समुद्र के नीचे से परमाणु हमले को विफल करने और उसका जवाब देने की अचूक क्षमता है।

S-400 से सस्ता लेजर कवच, अमेरिकी HELIOS ने हवा में पिघलाए ड्रोन, बिना गोला-बारूद का नया हथियार

नई दिल्ली। वॉशिंगटन। आधुनिक युद्ध तकनीक तेजी से बदल रही है और अब मिसाइलों की जगह लेजर हथियार अपनी जगह बना रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने 2025 में समुद्र में तैनात अपने गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS Preble से हाई एनर्जी लेजर सिस्टम HELIOS का सफल परीक्षण किया, जिसकी जानकारी 2026 की शुरुआत में सार्वजनिक की गई। इस परीक्षण के दौरान जहाज पर तैनात लेजर प्रणाली ने हवा में उड़ रहे चार ड्रोन को मार गिराया। यह पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना ने ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन में जहाज पर लगे लेजर से हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने की पुष्टि की है। HELIOS का पूरा नाम हाई एनर्जी लेजर विद इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैजलर एंड सर्विलांस है। करीब 60 किलोवॉट क्षमता वाला यह सिस्टम लॉकहीड मार्टिन ने विकसित किया है। इसे Arleigh Burke क्लास डेस्ट्रॉयर के Aegis कॉम्बैट सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे यह जहाज के रडार और फायर कंट्रोल डेटा के आधार पर लक्ष्य की पहचान कर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है। यह प्रणाली दो तरह से काम करती है। पहली सॉफ्ट किल क्षमता जिसमें लेजर दुश्मन ड्रोन के ऑप्टिकल या इंफ्रारेड सेंसर को चकाचौंध कर उन्हें भ्रमित कर देता है, जिससे उनकी निगरानी और निशाना साधने की क्षमता प्रभावित होती है। दूसरी हार्ड किल क्षमता जिसमें केंद्रित थर्मल ऊर्जा लक्ष्य को भौतिक रूप से क्षतिग्रस्त कर देती है, यानी ड्रोन को जला या पिघला सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत है। पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर पर जहां लाखों डॉलर खर्च हो सकते हैं, वहीं लेजर शॉट की लागत बेहद कम मानी जाती है। इसमें गोला बारूद की आवश्यकता नहीं होती और लगातार फायर की क्षमता होती है। छोटे और मध्यम आकार के ड्रोन खासकर कम दूरी पर इसके लिए आसान लक्ष्य माने जा रहे हैं। हालांकि इसकी सीमाएं भी हैं। लेजर हथियार लाइन ऑफ साइट पर काम करता है यानी लक्ष्य सीधा दिखाई देना चाहिए। अधिक नमी, धूल, बादल या समुद्री छींटे बीम की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं। यही कारण है कि अब तक निर्देशित ऊर्जा हथियारों का व्यापक उपयोग सीमित रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत वाले ड्रोन के बढ़ते उपयोग के बीच ऐसे ऊर्जा आधारित हथियार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ईरान के शाहेद ड्रोन जैसे सस्ते लेकिन बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले सिस्टम के खिलाफ पारंपरिक एयर डिफेंस महंगा पड़ता है। ऐसे में लेजर आधारित प्रणाली कम खर्च में तेज प्रतिक्रिया देने वाला विकल्प बन सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग बहु स्तरीय समुद्री रक्षा में ऊर्जा आधारित हथियारों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है। भविष्य में HELIOS को अन्य युद्धपोतों पर भी तैनात किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए और परीक्षण किए जाएंगे। यह परीक्षण संकेत देता है कि लेजर हथियार प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक तैनाती के दौर में प्रवेश कर चुके हैं और आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति को बदल सकते हैं।

खबरदार! अब AI जनरेटेड वीडियो फैलाना पड़ेगा भारी, मोदी सरकार ने बदले IT नियम; अनिवार्य लेबलिंग और सख्त डेडलाइन लागू

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में जहां एक ओर तकनीक जीवन को सुगम बना रही है वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते दुरुपयोग ने सुरक्षा और नैतिकता के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद सख्त कदम उठाया है। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर AI जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को बिना पहचान के फैलाना लगभग नामुमकिन होगा। सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी फर्जी फोटो वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट डिस्क्लेमर या लेबल लगाना अनिवार्य होगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कार्रवाई की गति को लेकर है-अब किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को रिपोर्ट किए जाने के महज तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। यह नया प्रावधान 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा। दरअसल बीते कुछ समय में डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल समाज के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है। इस तकनीक के जरिए किसी भी व्यक्ति की आवाज या चेहरा बदलकर ऐसे सटीक नकली वीडियो तैयार किए जा रहे हैं जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगते हैं। इनका दुरुपयोग न केवल व्यक्तिगत छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है बल्कि राजनीतिक अस्थिरता सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और सामाजिक भ्रम पैदा करने के लिए भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसी आसन्न खतरे को भांपते हुए सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी IT नियमों में क्रांतिकारी संशोधन किया है। Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code 2021 में किए गए इस नए संशोधन के तहत AI आधारित सामग्री को लेकर लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है। अब यदि कोई फोटो वीडियो या ऑडियो कृत्रिम मेधा AI से निर्मित है या उसमें जरा सा भी तकनीकी बदलाव किया गया है तो प्लेटफॉर्म्स को उसे प्रमुखता से लेबल करना होगा। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि आम इंटरनेट यूजर पहली नजर में ही यह पहचान सके कि जो वह देख या सुन रहा है वह वास्तविक नहीं बल्कि सिंथेटिक मीडिया है। इससे भ्रम की स्थिति पैदा होने से पहले ही समाप्त हो जाएगी। सिर्फ पहचान ही नहीं बल्कि जवाबदेही को लेकर भी सरकार ने हथौड़ा चलाया है। अब तक सोशल मीडिया कंपनियों को अवैध सामग्री हटाने के लिए 36 घंटे की मोहलत मिलती थी जिसे अब घटाकर केवल 3 घंटे कर दिया गया है। यह समय सीमा इतनी सख्त है कि कंपनियों को अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को पूरी तरह से अपग्रेड करना होगा। यदि कोई प्लेटफॉर्म इस समय सीमा का उल्लंघन करता है तो उसे भारी कानूनी परिणाम और भारी-भरकम दंड भुगतना पड़ सकता है। नए नियमों के अंतर्गत अब जब भी कोई यूजर कंटेंट अपलोड करेगा तो प्लेटफॉर्म को तकनीकी तौर पर यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर से यह सवाल पूछा जाए कि क्या सामग्री AI द्वारा संशोधित है। यदि जवाब हाँ है तो सिस्टम स्वतः ही उस पर एक वाटरमार्क या लेबल चस्पा कर देगा। सरकार का मानना है कि यह कदम डिजिटल इकोसिस्टम में पारदर्शिता लाएगा और जवाबदेही तय करेगा। विशेषज्ञों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि तकनीक अपने आप में बुरी नहीं होती लेकिन उसका बिना जिम्मेदारी वाला उपयोग खतरनाक है। 20 फरवरी 2026 से लागू होने वाली यह व्यवस्था भारत को डिजिटल सुरक्षा के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा कर देगी।

AI ALERT: AI से इंसानों की 99% नौकरियों पर संकट, बेरोज़गारी का स्तर होगा अभूतपूर्व: एक्सपर्ट की चेतावनी..

  AI ALERT: नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि इंसानी जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस, हेल्थकेयर और रोजमर्रा के कामों में AI की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। लेकिन इसी तेजी के बीच अब AI को लेकर एक ऐसी चेतावनी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया में चिंता बढ़ा दी है। मशहूर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर और कंप्यूटर साइंटिस्ट डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने दावा किया है कि आने वाले महज एक साल के भीतर AI इंसानों की करीब 99 फीसदी नौकरियों को खत्म कर सकता है। डॉ. याम्पोल्स्की का कहना है कि AI अब सिर्फ इंसानों की मदद करने वाला टूल नहीं रहेगा, बल्कि वह तेजी से इंसानों को रिप्लेस करने की दिशा में बढ़ रहा है। उनके मुताबिक ऐसा कोई भी इंसानी काम नजर नहीं आता, जिसे पूरी तरह ऑटोमेट न किया जा सके। जिस रफ्तार से AI विकसित हो रहा है, वह नौकरी बाजार में अभूतपूर्व उथल-पुथल ला सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि आईटी, कस्टमर सपोर्ट, डेटा एनालिसिस, कंटेंट क्रिएशन, अकाउंटिंग और यहां तक कि रिसर्च जैसे सेक्टर्स भी AI के प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में इंसानी भूमिका तेजी से कम हो सकती है। डॉ. याम्पोल्स्की के अनुसार, वर्ष 2045 तक दुनिया एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां से वापस लौटना संभव नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और AI के दीर्घकालिक प्रभावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले बदलाव पिछले सभी इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन से बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा गहरे होंगे। AI सिर्फ नौकरियों को नहीं बदलेगा, बल्कि समाज की पूरी संरचना को प्रभावित करेगा। उन्होंने यह भी आगाह किया कि तकनीक जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, वह रोजगार, अर्थव्यवस्था और इंसानी नियंत्रण को लेकर बड़े सवाल खड़े कर सकती है। डॉ. याम्पोल्स्की ने इसे ऐसा दौर बताया, जहां तकनीकी फैसले इंसानी फैसलों से कहीं आगे निकल सकते हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. याम्पोल्स्की लातविया के मूल निवासी हैं और वर्तमान में अमेरिका की लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। AI सेफ्टी और संभावित जोखिमों पर वे दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञों में शामिल हैं और इस विषय पर 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले पांच वर्षों में लगभग हर तरह के फिजिकल लेबर को ऑटोमेट किया जा सकता है। उनके मुताबिक हम एक ऐसी दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं, जहां बेरोज़गारी का स्तर पहले कभी नहीं देखा गया होगा। यह सिर्फ 10 या 20 फीसदी बेरोज़गारी की बात नहीं, बल्कि 99 फीसदी तक पहुंचने की आशंका है। हालांकि डॉ. याम्पोल्स्की ने यह भी बताया कि भविष्य में कुछ नौकरियां बच सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे काम जहां इंसानी मौजूदगी जरूरी मानी जाती है, वे पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। उदाहरण के तौर पर, कुछ लोग व्यक्तिगत भरोसे या पसंद के कारण इंसानी अकाउंटेंट या सलाहकार रखना चाहेंगे। इसके अलावा हाथ से बनाए गए उत्पादों और कारीगरी का एक सीमित लेकिन खास बाजार बना रहेगा।उन्होंने यह भी कहा कि AI की निगरानी और रेगुलेशन से जुड़ी नौकरियां भविष्य में बनी रह सकती हैं, हालांकि लंबे समय में AI को पूरी तरह नियंत्रित कर पाना बेहद मुश्किल होगा।

OPPO Reno 15c: मिड-प्रीमियम सेगमेंट का नया किंग? 5 साल के अपडेट और एडवांस AI टूल्स के साथ हुई एंट्री"

नई दिल्ली :स्मार्टफोन निर्माता कंपनी ओप्पो OPPO ने अपनी लोकप्रिय रेनो सीरीज का विस्तार करते हुए OPPO Reno 15c को भारतीय बाजार में पेश कर दिया है। यह डिवाइस उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो स्टाइल के साथ-साथ परफॉर्मेंस और लंबी सॉफ्टवेयर सपोर्ट की तलाश में रहते हैं। कंपनी ने इस बार “डिज़ाइन और ड्यूरेबिलिटी” पर विशेष ध्यान दिया है, जिसके चलते फोन को ‘ऑल-राउंड आर्मर बॉडी’ और IP66, IP68 एवं IP69 जैसी उच्चतम रेटिंग्स दी गई हैं, जो इसे पानी और धूल से पूरी तरह सुरक्षित बनाती हैं। परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें Qualcomm Snapdragon 6 Gen 1 प्रोसेसर दिया गया है, जो ColorOS 16 पर आधारित Trinity Engine के साथ मिलकर फोन को एक सुपर-स्मूथ अनुभव प्रदान करता है। ओप्पो ने इस बार सॉफ्टवेयर अपडेट के मामले में बड़ा दांव खेला है। कंपनी इस फोन के लिए 5 साल के ओएस OS अपडेट और 6 साल के सुरक्षा अपडेट का वादा कर रही है, जो इस बजट में एक दुर्लभ उपलब्धि है। इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी यूएसपी USP इसमें दी गई 7,000mAh की विशाल बैटरी है। इतनी बड़ी बैटरी होने के बावजूद फोन की मोटाई सिर्फ 8.14mm है। 80W की सुपरवूक SUPERVOOC फास्ट चार्जिंग की मदद से यह फोन मात्र 64 मिनट में शून्य से सौ प्रतिशत तक चार्ज हो जाता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इसके रियर में 50MP का मेन कैमरा और फ्रंट में 50MP का अल्ट्रा-वाइड सेल्फी कैमरा दिया गया है। यह फ्रंट कैमरा 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू और 4K HDR वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है, जो कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बेहतरीन है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में OPPO Reno 15c में ‘AI Mind Space’, ‘AI Recording Summary’ और ‘AI Writer’ जैसे टूल्स दिए गए हैं। साथ ही, Google Gemini इंटीग्रेशन की मदद से आप सिर्फ अपनी आवाज से कैलेंडर सेट करने या सेटिंग्स बदलने जैसे काम कर सकते हैं। 8GB+256GB वेरिएंट की कीमत 34,999 रुपये और 12GB+256GB वेरिएंट की कीमत 37,999 रुपये रखी गई है। लॉन्च ऑफर्स के तहत बैंकों के क्रेडिट कार्ड पर 10% तक का कैशबैक और एक्सचेंज बोनस की सुविधा भी उपलब्ध है।

Galaxy F70e 5G भारत में लॉन्च प्रीमियम डिजाइन और लंबी बैटरी लाइफ के साथ Flipkart और Samsung स्टोर पर बिक्री

नई दिल्ली :Samsung ने भारत में अपना नया स्मार्टफोन Galaxy F70e 5G लॉन्च कर दिया है। यह फोन कंपनी की नई Galaxy F70 सीरीज का पहला मॉडल है और मिड रेंज यूजर्स को टारगेट करेगा। फोन की बिक्री Flipkart और Samsung India online store के जरिए की जाएगी। लॉन्च से पहले कंपनी ने फोन के डिजाइन, डिस्प्ले, कैमरा, बैटरी और सॉफ्टवेयर सपोर्ट से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की हैं। लीक्स और अनुमान के अनुसार इसकी कीमत 10000 से 15000 रुपये के बीच हो सकती है। Galaxy F70e 5G को Limelight Green और Spotlight Blue कलर ऑप्शन में पेश किया गया है। फोन का बैक vegan leather फिनिश के साथ आता है जो प्रीमियम लुक देता है। फोन की मोटाई 8.2 एमएम है और वजन 199 ग्राम रखा गया है। फ्लैट साइड डिजाइन से फोन हाथ में मजबूत पकड़ महसूस कराता है। यह डिजाइन लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है। डिस्प्ले की बात करें तो फोन में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला स्क्रीन दिया गया है। इसकी पीक ब्राइटनेस 800 निट्स तक पहुंचती है, जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ दिखती है। लेदर पैटर्न फिनिश ग्रिप बेहतर बनाने में मदद करता है। बड़ी स्क्रीन वीडियो देखने, गेम खेलने और रोजमर्रा के कामों के लिए आदर्श है। कैमरा सेटअप में Galaxy F70e 5G में ड्यूल रियर कैमरा मिलेगा। प्राइमरी कैमरा 50MP का है और दूसरा डेप्थ सेंसर 2MP का है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 8MP का फ्रंट कैमरा वाटरड्रॉप नॉच डिजाइन में दिया गया है। यह सेटअप सामान्य फोटोग्राफी और वीडियो कॉल जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। फोन में 6000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है। कंपनी का दावा है कि यह फोन एक बार चार्ज करने पर दिन और रात तक चल सकता है। इसमें 25W वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट भी है। बड़ी बैटरी और लंबे बैकअप की वजह से हेवी यूजर्स को बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। परफॉर्मेंस के लिए Galaxy F70e 5G में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है। अनुमानित AnTuTu स्कोर करीब 623000 है। फोन 8GB तक RAM और 128GB तक स्टोरेज सपोर्ट करता है। सॉफ्टवेयर के मामले में यह Android 16 पर आधारित One UI 8 पर काम करेगा। सैमसंग ने 6 साल तक Android और सिक्योरिटी अपडेट देने की पुष्टि की है। कंपनी ने इस फोन के जरिए मिड रेंज में प्रीमियम लुक, लंबी बैटरी लाइफ और स्मूद परफॉर्मेंस देने पर फोकस किया है। 120Hz डिस्प्ले और बड़ी बैटरी के साथ Galaxy F70e 5G एंटरटेनमेंट और रोजमर्रा के काम दोनों के लिए उपयुक्त साबित होगा। फ्लिपकार्ट और Samsung ऑनलाइन स्टोर के जरिए फोन उपलब्ध होगा। कीमत और लॉन्च ऑफर की पूरी जानकारी लॉन्च वाले दिन सामने आएगी। Galaxy F70e 5G मिड रेंज स्मार्टफोन मार्केट में सैमसंग का एक मजबूत विकल्प बनने के लिए तैयार है।

तमिलनाडु में टाटा मोटर्स के नए प्लांट में 'रेंज रोवर इवोक' बनी यहाँ पहली गाड़ी

पनापक्कम!  भारत की अग्रणी कार और एसयूवी निर्माता, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (TMPV) और उसकी सहयोगी कंपनी जगुआर लैंड रोवर ऑटोमोटिव पीएलसी (जेएलआर/JLR), ने आज तमिलनाडु के रानीपेट जिले के पनापक्कम में अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के संचालन की घोषणा की।   यह सुविधा टाटामोटर्सपैसेंजरव्हीकल्सलिमिटेड(टीएमपीवी)और जेएलआर दोनों ब्रांडों के लिए अगली पीढ़ी के वाहनों (इलेक्ट्रिक वाहनों सहित) के उत्पादन हेतु विकसित किए जा रहे एक ‘ग्रीनफील्ड प्लांट‘ के पहले चरण को दर्शाती है। इस प्लांट से बाहर निकलने वाला पहला वाहन जेएलआर की स्थानीय स्तर पर निर्मित ‘रेंज रोवर इवोक‘ है, जो अपनी आधुनिक लग्जरी और बेहतरीन कारीगरी के लिए दुनिया भर में मशहूर है।   इस प्लांट का औपचारिक उद्घाटन तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री थिरू एम.के. स्टालिन और टाटा संस व टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के चेयरमैन श्री एन. चंद्रशेखरन ने किया। इस अवसर पर कई गणमान्य मंत्री, जन प्रतिनिधि, वरिष्ठ नौकरशाह, सरकारी अधिकारी और टाटामोटर्सपैसेंजरव्हीकल्स, जेएलआर व टाटा समूह के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।   टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स–जेएलआर संयंत्र का उद्घाटन करते हुएतमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री थिरू एम.के. स्टालिनने कहा, “टाटा समूह ने राष्ट्र निर्माण में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और तमिलनाडु के साथ इसकी गहरी ऐतिहासिक साझेदारी रही है। पनापक्कम (रानीपेट) में इस नई मैन्युफैक्चरिंग सुविधा की शुरुआत और पहली रेंज रोवर इवोक के रोल–आउट के साथ, राज्य को विश्व स्तरीय ऑटोमोटिव निर्माण के विस्तार का साक्षी बनने पर गर्व है। तमिलनाडु इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का स्वागत करता है और उन उद्योगों को निरंतर समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है जो रोजगार पैदा करते हैं, नवाचार को बढ़ावा देते हैं और मैन्युफैक्चरिंग व मोबिलिटी के अग्रणी केंद्र के रूप में हमारी स्थिति को मजबूत करते हैं।”   इस अवसर परटाटा संस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड के चेयरमैन श्री एन. चंद्रशेखरनने कहा, “पनापक्कम प्लांट का उद्घाटन टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार मैन्युफैक्चरिंग में भारत के नेतृत्व को गति देने की टाटा समूह की यात्रा में एक अहम पड़ाव है। हमें तमिलनाडु के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को और गहरा करने पर गर्व है, जो एक ऐसा राज्य है जो औद्योगिक उत्कृष्टता, नवाचार और समावेशी विकास को लगातार आगे बढ़ा रहा है। इस सुविधा के माध्यम से हम भारत और दुनिया भर के ग्राहकों के लिए असाधारण गुणवत्ता, कारीगरी और तकनीक वाले वाहन तैयार करने के लिए तत्पर हैं।”   पनापक्कम प्लांट के बारे में टाटामोटर्सपैसेंजरव्हीकल्सका पनापक्कम प्लांट विश्व स्तरीय वाहन बनाने के लिए उन्नत मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों और कुशल कार्यबल को एक साथ लाता है। इस प्लांट का संचालन पूरे तमिलनाडु के शॉपफ्लोर तकनीशियनों की एक विविध टीम द्वारा किया जा रहा है। ये कर्मचारी टाटा मोटर्स के ‘लक्ष्य‘ कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो एक “कमाई के साथ पढ़ाई” पहल है। यह कार्यक्रम तकनीशियनों को शॉपफ्लोर से इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की भूमिकाओं तक पहुँचने में मदद करता है। इन युवाओं को पॉलिटेक्निक स्नातकों के राज्य–व्यापी कड़े मूल्यांकन के माध्यम से चुना गया था, जिसके बाद उन्होंने जेएलआर की यूनिट्स में पांच महीने का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण पूरा किया, जिससे उन्हें विश्व स्तरीय परिचालन और तकनीकी दक्षता हासिल हुई।   काम के दौरान एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से कंपनी–प्रायोजित बी.टेक डिग्री हासिल करने के अवसर के साथ, ये युवा अपने परिवार की देखभाल करते हुए अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक उन्नति कर सकते हैं। इनकी यह यात्रा दर्शाती है कि कैसे केंद्रित कौशल विकास और स्थानीय प्रतिभा को बढ़ावा देने से आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग को गति मिल सकती है और स्थायी आर्थिक व सामाजिक प्रभाव पैदा किया जा सकता है।   कामकाज शुरू होने के साथ ही वाहनों का उत्पादन चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। अगले 5-7 वर्षों में यह प्लांट अपनी पूरी क्षमता यानी सालाना 2,50,000 वाहनों के उत्पादन तक पहुँच जाएगा, जो भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों की जरूरतों को पूरा करेगा।   टाटामोटर्सपैसेंजरव्हीकल्सअपनी दीर्घकालिक विकास योजनाओं के समर्थन में इस आधुनिक प्लांट को तैयार करने के लिए लगभग 9,000 करोड़ रुपये का निवेश करने का इरादा रखती है। इस प्लांट में 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता है, साथ ही यह कौशल वृद्धि और एक मजबूत सहायक इकोसिस्‍टम के विकास को बढ़ावा देगा।   पनापक्कम प्लांट टाटामोटर्सपैसेंजरव्हीकल्सके ‘सस्टेनेबिलिटी–फर्स्ट‘ दर्शन का भी उदाहरण है, जिसमें हर स्तर पर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार कामकाज को शामिल किया गया है। यह प्लांट पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा (रीन्‍यूएबल एनर्जी) पर संचालित होने और ‘वॉटर पॉजिटिव‘ बनने के लिए डिजाइन किया गया है, जो ऑटोमोटिव क्षेत्र में ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा। इसे दक्षता बढ़ाने, उत्सर्जन को न्यूनतम करने और कड़े वैश्विक पर्यावरणीय मानदंडों के पालन के लिए तैयार किया गया है।  

आर्टेमिस मिशन में नया अध्याय: नासा पहली बार चंद्रमा पर भेजेगा iPhone

नई दिल्ली। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नासा एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत इस महीने चंद्रमा की यात्रा पर जाने वाले वैज्ञानिक पहली बार अपने साथ iPhone लेकर जाएंगे। इन स्मार्टफोन्स की मदद से अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की तस्वीरें लेंगे, वीडियो रिकॉर्ड करेंगे और वहां बिताए गए पलों को दस्तावेज़ करेंगे। नासा की ओर से वैज्ञानिकों को ये iPhone उपलब्ध कराए जाएंगे। इस फैसले की जानकारी नासा के प्रशासक जैरेड आइज़ैकमैन ने सोशल मीडिया के जरिए दी। उन्होंने बताया कि क्रू मेंबर्स को एक ऐसा विशेष टूल दिया जा रहा है, जिससे वे अपने ऐतिहासिक अनुभवों को न सिर्फ सुरक्षित रख सकें, बल्कि अपने परिवार और दुनिया भर के लोगों के साथ साझा भी कर सकें। अब तक नहीं थी अनुमति अब तक नासा के अंतरिक्ष यानों में किसी भी प्रकार के मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, नासा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह सुविधा सिर्फ मून मिशन के लिए दी जा रही है, लेकिन भविष्य में अन्य डिवाइसों को भी मंजूरी मिल सकती है। नासा की प्रवक्ता बेथनी स्टीवेन्स ने गुरुवार को कहा कि यह एजेंसी के लिए पहली बार है जब किसी मिशन में स्मार्टफोन को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले करीब दस वर्षों से कमर्शियल स्पेस फ्लाइट्स में सुरक्षित रूप से स्मार्टफोन का उपयोग किया जा रहा है। पहले भी तोड़ी जा चुकी हैं परंपराएं गौरतलब है कि जैरेड आइज़ैकमैन 2024 में एक कमर्शियल स्पेस फ्लाइट के दौरान स्मार्टफोन अपने साथ ले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नासा ने लंबे समय से चली आ रही प्रक्रियाओं को चुनौती देते हुए आधुनिक हार्डवेयर को कम समय में अंतरिक्ष उड़ान के लिए योग्य बनाया है। अंतरिक्ष में कमर्शियल उत्पादों का दुर्लभ उपयोग अंतरिक्ष मिशनों में आमतौर पर कमर्शियल उत्पादों का इस्तेमाल बेहद कम होता है, क्योंकि वहां उपयोग होने वाले उपकरणों के लिए परीक्षण मानक बेहद सख्त होते हैं। इससे पहले ओमेगा स्पीडमास्टर प्रोफेशनल घड़ी को अपोलो मिशनों में इस्तेमाल किया गया था, जो चंद्रमा पर पहनी गई पहली घड़ी बनी। आज यह घड़ी स्मिथसोनियन के नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में प्रदर्शित है और इसका व्यावसायिक संस्करण करीब 7,500 डॉलर में उपलब्ध है।