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Galaxy S25 Ultra Discount: फ्लैगशिप फोन पर भारी छूट, 1 लाख से कम में मिल रहा Samsung का धांसू स्मार्टफोन

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स की सेल में इस समय सैमसंग गैलेक्सी S25 अल्ट्रा पर बड़ा डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है, जिससे यह प्रीमियम फ्लैगशिप फोन काफी कम कीमत में खरीदा जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैमसंग गैलेक्सी S25 अल्ट्रा जिसकी लॉन्च कीमत लगभग ₹1,29,999 थी, वह अब सेल में करीब ₹30,000 के फ्लैट डिस्काउंट के साथ ₹99,999 के आसपास उपलब्ध है। इसके अलावा बैंक ऑफर, कूपन और कैशबैक मिलाकर कुल मिलाकर करीब ₹35,000 से ज्यादा की बचत का फायदा भी ग्राहकों को मिल रहा है, जिससे इसकी प्रभावी कीमत ₹92,000 से नीचे आ जाती है। इस ऑफर को Amazon जैसी ई-कॉमर्स सेल में सीमित समय के लिए उपलब्ध बताया जा रहा है, जहां अलग-अलग बैंक कार्ड और कूपन ऑफर्स के जरिए अतिरिक्त छूट भी मिल रही है। फीचर्स की बात करें तो इस फोन में 6.9 इंच की QHD+ डायनामिक AMOLED 2X डिस्प्ले मिलती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर और 12GB RAM का कॉम्बिनेशन दिया गया है, जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को स्मूद बनाता है। कैमरा सेक्शन में 200MP का मेन सेंसर, 50MP अल्ट्रा-वाइड, 50MP टेलीफोटो और 10MP सपोर्ट लेंस दिया गया है, जबकि फ्रंट में 12MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है। फोन में 5000mAh बैटरी के साथ 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है। टेक मार्केट में यह ऑफर ऐसे समय आया है जब फ्लैगशिप स्मार्टफोन की कीमतें आमतौर पर ऊंची रहती हैं, ऐसे में यह डील प्रीमियम फोन चाहने वालों के लिए एक अच्छा मौका माना जा रहा है।

Google Chrome Privacy Update: अब वेबसाइट्स नहीं कर पाएंगी आपकी सटीक लोकेशन ट्रैक, मिलेगा यूजर्स को नया कंट्रोल फीचर

नई दिल्ली। गूगल क्रोम ने यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत बनाने के लिए एक नया अपडेट जारी किया है, जिसके बाद मोबाइल यूजर्स अब वेबसाइट्स को अपनी सटीक (Precise) लोकेशन की जगह अनुमानित (Approximate) लोकेशन शेयर कर सकेंगे। इस नए फीचर के तहत जब भी कोई वेबसाइट लोकेशन एक्सेस की अनुमति मांगेगी, यूजर के पास यह विकल्प होगा कि वह अपनी असली GPS लोकेशन साझा करे या केवल सामान्य एरिया की जानकारी दे। इसका मकसद यह है कि वेबसाइट्स को जरूरत से ज्यादा डिटेल्ड लोकेशन डेटा न मिल सके। अब तक होता यह था कि लोकेशन परमिशन देने पर वेबसाइट्स यूजर की बिल्कुल सटीक जगह तक पहुंच सकती थीं, जिससे कई बार प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ जाती थी। लेकिन नए अपडेट के बाद यह डेटा लिमिटेड रहेगा और सिर्फ क्षेत्रीय जानकारी ही शेयर होगी। हालांकि Google ने यह भी साफ किया है कि कुछ जरूरी सेवाओं जैसे नेविगेशन, कैब बुकिंग, फूड डिलीवरी या आसपास की सटीक लोकेशन खोजने वाले ऐप्स में Precise Location की जरूरत बनी रहेगी। ऐसे मामलों में यूजर को पहले की तरह पूरा लोकेशन एक्सेस देना होगा। कंपनी के मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल देना और अनावश्यक लोकेशन ट्रैकिंग को रोकना है। इससे उन वेबसाइट्स की मनमानी भी कम होगी जो बिना जरूरत यूजर्स का सटीक लोकेशन डेटा इकट्ठा करती थीं। फिलहाल यह फीचर मोबाइल यूजर्स के लिए शुरू किया गया है और आने वाले समय में इसे डेस्कटॉप वर्जन में भी लागू किए जाने की संभावना है।

हेडफोन 60-60 रूल: दिनभर हेडफोन यूज करने वालों के लिए जरूरी चेतावनी, नहीं तो सुनने की क्षमता हो सकती है प्रभावित

नई दिल्ली। आज के समय में Headphones और ईयरबड्स का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है, लेकिन लंबे समय तक तेज आवाज में म्यूजिक सुनना कानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए विशेषज्ञ “60-60 रूल” अपनाने की सलाह देते हैं। 60-60 रूल का मतलब है कि हेडफोन की अधिकतम वॉल्यूम के लगभग 60 प्रतिशत स्तर पर सिर्फ 60 मिनट तक ही लगातार म्यूजिक सुनना चाहिए। इसके बाद कुछ समय का ब्रेक लेना जरूरी होता है, ताकि कानों पर लगातार दबाव न पड़े और सुनने की क्षमता सुरक्षित रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तेज आवाज में हेडफोन यूज करने से कानों की अंदरूनी सेंसरी सेल्स को नुकसान पहुंच सकता है, जो ध्वनि को मस्तिष्क तक पहुंचाने का काम करती हैं। एक बार ये सेल्स डैमेज हो जाएं तो इन्हें दोबारा ठीक करना संभव नहीं होता, जिससे सुनने की क्षमता पर स्थायी असर पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक 80 डेसिबल से ज्यादा आवाज लंबे समय तक सुनना खतरनाक हो सकता है। सामान्य बातचीत लगभग 60 डेसिबल होती है, जबकि ट्रैफिक और तेज शोर इससे कहीं ज्यादा होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोबाइल में वॉल्यूम लिमिट सेट करके और हर 60 मिनट पर ब्रेक लेकर हेडफोन का इस्तेमाल किया जाए। यह छोटी-सी सावधानी लंबे समय में सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।

AC Gas Leakage: बार-बार क्यों खत्म हो रही गैस, जानें असली वजह और बचाव के आसान तरीके

नई दिल्ली। गर्मियों में Air Conditioner (AC) की कूलिंग घटने की सबसे आम शिकायत “गैस खत्म हो गई” मानी जाती है, लेकिन तकनीकी रूप से AC की रेफ्रिजरेंट गैस सामान्य स्थिति में जल्दी खत्म नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बार-बार गैस भरवानी पड़ रही है तो इसका साफ मतलब है कि सिस्टम में कहीं न कहीं लीकेज मौजूद है। AC में गैस का मुख्य काम कमरे की गर्म हवा को बाहर निकालकर उसे ठंडी हवा में बदलना होता है। जब सिस्टम में गैस कम हो जाती है, तो कूलिंग धीरे-धीरे गिरने लगती है और AC सही तरीके से ठंडक नहीं दे पाता। गैस लीकेज के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं। सबसे आम वजह कॉपर पाइप में जंग लगना, माइक्रो क्रैक या छोटे-छोटे छेद होना है। इसके अलावा गलत इंस्टॉलेशन, ढीले जॉइंट्स या समय पर सर्विस न कराना भी लीकेज की संभावना बढ़ा देता है। नमी और धूल भी धीरे-धीरे पाइपलाइन और कनेक्शन को कमजोर कर देती है। अगर AC में गैस लीकेज हो रही हो तो कुछ संकेत साफ दिखते हैं कूलिंग कम होना, AC का ज्यादा देर तक चलने पर भी कमरे का ठंडा न होना, बिजली बिल का बढ़ना, इनडोर यूनिट पर बर्फ जमना, या AC से असामान्य आवाज आना। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ गैस भरवाना समाधान नहीं है, बल्कि असली लीकेज की मरम्मत कराना जरूरी है। अगर लीकेज को ठीक नहीं किया गया तो बार-बार गैस खत्म होगी और लंबे समय में कंप्रेसर पर भी असर पड़ सकता है, जिसकी मरम्मत काफी महंगी होती है। बचाव के लिए AC की नियमित सर्विस साल में 1-2 बार कराना, फिल्टर की सफाई करना और इंस्टॉलेशन हमेशा अनुभवी तकनीशियन से करवाना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ गैस लीकेज रोकी जा सकती है, बल्कि AC की लाइफ और परफॉर्मेंस भी बेहतर रहती है।

मदर्स डे स्पेशल: स्मार्ट गैजेट्स से आसान होगी मां की जिंदगी, किचन से लेकर सेहत तक मिलेगा स्मार्ट सपोर्ट

नई दिल्ली। मदर्स डे के मौके पर लोग अब पारंपरिक गिफ्ट्स की जगह ऐसे स्मार्ट और उपयोगी टेक गैजेट्स चुन रहे हैं, जो मां की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना सकें। टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब घर के कई काम स्मार्ट डिवाइस की मदद से तेजी से और सुरक्षित तरीके से किए जा सकते हैं। आजकल बाजार में ऐसे कई स्मार्ट होम डिवाइस उपलब्ध हैं, जो खासतौर पर घरेलू कामों में मदद करते हैं। इनमें स्मार्ट डोरबेल जैसे डिवाइस शामिल हैं, जो घर के दरवाजे पर आने वाले व्यक्ति की जानकारी मोबाइल पर दिखाते हैं। इससे सुरक्षा भी बढ़ती है और बिना दरवाजा खोले बातचीत भी संभव हो जाती है। किचन के काम को आसान बनाने के लिए एयर फ्रायर और ऑटोमैटिक कुकिंग डिवाइसेज का चलन बढ़ रहा है। ये गैजेट्स कम समय में खाना तैयार करने में मदद करते हैं और लंबे समय तक किचन में खड़े रहने की परेशानी को कम करते हैं। सेहत को ध्यान में रखते हुए स्मार्टवॉच और हेल्थ ट्रैकिंग डिवाइस भी एक बेहतर गिफ्ट विकल्प बन गए हैं। ये डिवाइस हार्ट रेट, नींद और रोजमर्रा की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, जिससे स्वास्थ्य की निगरानी आसान हो जाती है। इसके अलावा डिजिटल फोटो फ्रेम जैसे गैजेट्स परिवार की यादों को लगातार जीवित रखने का काम करते हैं, जबकि नए स्मार्टफोन भी एक प्रैक्टिकल और उपयोगी गिफ्ट साबित हो सकते हैं। टेक विशेषज्ञों के अनुसार, ये स्मार्ट गैजेट्स सिर्फ सुविधा ही नहीं बढ़ाते बल्कि मां की दिनचर्या को ज्यादा आरामदायक, सुरक्षित और आधुनिक बनाते हैं।

iPhone 18 Pro Leak: क्या सच में सस्ता होगा अगला iPhone? कीमत स्थिर रखने की तैयारी में Apple, नए फीचर्स को लेकर बड़े दावे

नई दिल्ली। टेक जगत में इस समय Apple Inc. के अपकमिंग फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro सीरीज को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ताज़ा लीक्स रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इस बार कीमतों में बड़ा इजाफा करने की बजाय उन्हें लगभग स्थिर रखने की रणनीति पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनियाभर में मेमोरी चिप्स और कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ने के बावजूद Apple सप्लाई कॉस्ट को खुद मैनेज कर यूजर्स पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहता। अनुमान है कि iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत लगभग 1,099 डॉलर और iPhone 18 Pro Max की कीमत करीब 1,199 डॉलर के आसपास रह सकती है। हालांकि भारत में टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी के कारण कीमतें ज्यादा हो सकती हैं। लीक्स में यह भी दावा किया गया है कि Apple सितंबर 2026 में iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च कर सकता है। इन डिवाइसेज में 6.3 इंच और 6.9 इंच OLED डिस्प्ले मिलने की संभावना है, साथ ही डायनामिक आइलैंड का आकार पहले से छोटा किया जा सकता है, जिससे स्क्रीन एक्सपीरियंस और बेहतर होगा। परफॉर्मेंस के लिए इस बार नया 2nm A20 Pro चिपसेट मिलने की चर्चा है, जो ज्यादा तेज प्रोसेसिंग और बेहतर बैटरी एफिशिएंसी दे सकता है। इसके अलावा Apple अपने पुराने मॉडेम की जगह नया इन-हाउस C2 मॉडेम भी इस्तेमाल कर सकता है, जिससे नेटवर्क और बैटरी परफॉर्मेंस में सुधार संभव है। कलर ऑप्शंस में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, जिनमें डार्क ब्लू, मिस्ट ब्लू, डार्क ग्रे और डार्क चेरी जैसे नए प्रीमियम शेड्स शामिल हो सकते हैं। हालांकि ये सभी जानकारियां अभी लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, इसलिए आधिकारिक पुष्टि लॉन्च के समय ही सामने आएगी।

UPPCL का बड़ा बदलाव: प्रीपेड मीटर से पोस्टपेड सिस्टम की ओर, जून 2026 से डिजिटल तरीके से मिलेगा बिजली बिल

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव करते हुए प्रीपेड मीटर सिस्टम को पोस्टपेड मॉडल में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बदलाव के बाद उपभोक्ताओं को अब बिजली रिचार्ज की टेंशन से राहत मिलेगी और हर महीने खपत के आधार पर बिल जारी किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मई 2026 का बिजली बिल जून 2026 में 1 से 10 तारीख के बीच उपभोक्ताओं तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाया जाएगा। UPPCL ने साफ किया है कि अब बिल एसएमएस और व्हाट्सएप  के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के मोबाइल पर भेजे जाएंगे, जिससे पेपर बिल की प्रक्रिया धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। उपभोक्ताओं को बिजली बिल प्राप्त करने के चार प्रमुख तरीके दिए गए हैंपहला तरीका SMS अलर्ट है, जिसमें रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर बिल की जानकारी भेजी जाएगी। दूसरा तरीका WhatsApp है, जहां डिस्कॉम के आधिकारिक नंबर पर मैसेज भेजकर बिल प्राप्त किया जा सकता है। तीसरा विकल्प Google Pay और PhonePe जैसे पेमेंट ऐप्स हैं, जहां कस्टमर ID डालकर बिल देखा और भुगतान किया जा सकता है। चौथा तरीका टोल-फ्री हेल्पलाइन 1912 है, जहां कॉल करके बिल की पूरी जानकारी ली जा सकती है। यूपीपीसीएल  के अनुसार, यह बदलाव स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शी और आसान बिलिंग सुविधा मिल सके। इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को समय पर बिल की जानकारी और भुगतान की सुविधा मोबाइल पर ही उपलब्ध होगी।

Power Off vs Restart: फोन बंद करने के दोनों ऑप्शन में क्या फर्क है और कब कौन सा इस्तेमाल करें?

नई दिल्ली। आज के समय में हर स्मार्टफोन में एंड्रॉइड और आईओएस  डिवाइस में दो अहम ऑप्शन मिलते हैं पावर बंद करें (स्विच बंद करें) और पुनः आरंभ करें दोनों का काम दिखने में एक जैसा लगता है, लेकिन इनका इस्तेमाल अलग परिस्थितियों में किया जाता है। तकनीकी रूप से दोनों ही प्रोसेस फोन के सभी चल रहे सिस्टम और बैकग्राउंड ऐप्स को पूरी तरह बंद कर देते हैं और डिवाइस को “फ्रेश स्टार्ट” स्थिति में ले आते हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि दोनों का मकसद सिस्टम को रीफ्रेश करना ही है। फर्क कहां होता है? रिस्टार्ट में फोन बंद होकर तुरंत अपने आप दोबारा चालू हो जाता है, जबकि Power Off में डिवाइस पूरी तरह बंद रहता है और उसे दोबारा यूजर को मैन्युअली ऑन करना पड़ता है। यही सबसे बड़ा व्यवहारिक अंतर है। कब Restart बेहतर है?अगर फोन स्लो हो रहा है, हैंग कर रहा है या छोटी-मोटी दिक्कतें आ रही हैं, तो बेहतर माना जाता है। यह कम समय लेता है और सिस्टम को जल्दी रीफ्रेश कर देता है। कब Power Off जरूरी है?अगर फोन ज्यादा गर्म हो रहा हो, बैटरी बदलनी हो, या कोई हार्डवेयर रिपेयर करना हो, तो Power Off करना जरूरी होता है ताकि डिवाइस पूरी तरह सुरक्षित रूप से बंद हो जाए और ठंडा हो सके। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों विकल्पों में कोई “बेहतर या खराब” नहीं है, बल्कि यह स्थिति पर निर्भर करता है कि किस समय कौन सा विकल्प ज्यादा उपयोगी है। फोन को बेहतर परफॉर्मेंस में रखने के लिए समय-समय पर Restart करना पर्याप्त माना जाता है, जबकि लंबे समय तक उपयोग न होने या तकनीकी काम के दौरान Power Off जरूरी हो जाता है।

AI बनाम माँ की ममता: तकनीक कर रही भावनाओं की नकल, लेकिन इंसानी अहसास अब भी अनमोल

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence आज तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। यह तकनीक बच्चों की देखभाल से लेकर आवाज, चेहरा और यादों को डिजिटल रूप में सहेजने तक सक्षम हो चुकी है। कई स्मार्ट सिस्टम और ऐप्स बच्चों के रोने, मुस्कुराने और उनकी जरूरतों को समझने का दावा भी करते हैं। आज AI आधारित रोबोट और सिस्टम न सिर्फ कहानियां सुनाते हैं, बल्कि कुछ हद तक इंसानी व्यवहार की नकल भी करने लगे हैं। यहां तक कि पुरानी तस्वीरों और आवाजों को फिर से जीवंत करने वाली तकनीकें भी विकसित हो चुकी हैं, जिससे बिछड़े अपनों की डिजिटल मौजूदगी का अहसास कराया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी प्रगति के बावजूद AI सिर्फ डेटा और प्रोग्रामिंग पर आधारित सिस्टम है, जबकि माँ का रिश्ता भावनाओं, त्याग और अनुभवों से जुड़ा होता है। माँ की ममता, देखभाल और निस्वार्थ प्रेम को किसी भी तकनीक से पूरी तरह दोहराया नहीं जा सकता। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, AI भावनाओं का अनुकरण कर सकता है, लेकिन वह उन्हें महसूस नहीं कर सकता। माँ का प्यार सिर्फ व्यवहार नहीं, बल्कि एक गहरी भावनात्मक अनुभूति है, जो बच्चे के जीवन में सुरक्षा और अपनापन पैदा करती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तकनीक जीवन को आसान और सुविधाजनक जरूर बना रही है, लेकिन इंसानी रिश्तों की जगह नहीं ले सकती। AI भले ही “मां जैसा व्यवहार” दिखा सके, लेकिन झुर्रियों भरे हाथों की गर्माहट और त्याग का सुकून आज भी केवल इंसान ही दे सकता है।

BEE स्टार रेटिंग के नए सख्त नियम लागू: 1 जनवरी 2026 से बदला सिस्टम, UPPCL ने बताया 1 से 5 स्टार का पूरा गणित

नई दिल्ली। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ने 1 जनवरी 2026 से स्टार रेटिंग सिस्टम के नियमों को और सख्त कर दिया है। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो घर के लिए एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदते हैं। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने भी लोगों को जागरूक करते हुए बताया है कि 1 से 5 स्टार रेटिंग का सही मतलब समझना अब बेहद जरूरी हो गया है, ताकि बिजली बिल में अनावश्यक खर्च से बचा जा सके। स्टार रेटिंग का असली मतलब क्या है?BEE स्टार रेटिंग यह बताती है कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कितनी ऊर्जा (बिजली) की खपत करता है। जितनी ज्यादा स्टार रेटिंग होगी, उतनी ही कम बिजली की खपत और बेहतर ऊर्जा दक्षता मानी जाती है। अक्सर लोग सस्ते ऑफर देखकर उपकरण खरीद लेते हैं, लेकिन लंबे समय में ज्यादा बिजली बिल का बोझ उठाना पड़ता है। 1 स्टार रेटिंग: सबसे कम ऊर्जा दक्षताUPPCL के अनुसार 1 स्टार रेटिंग वाले उपकरण सबसे कम बिजली बचत करते हैं। ये शुरुआती कीमत में सस्ते हो सकते हैं, लेकिन इस्तेमाल के दौरान बिजली बिल को काफी बढ़ा देते हैं। ऐसे उपकरण केवल कम उपयोग या सीमित जरूरत के लिए ही बेहतर माने जाते हैं। 2 और 3 स्टार रेटिंग: औसत श्रेणी के उपकरण2 स्टार रेटिंग वाले उपकरण ऊर्जा बचत के मामले में कमजोर माने जाते हैं, जबकि 3 स्टार रेटिंग सामान्य या औसत दक्षता को दर्शाती है। ये उपकरण प्रदर्शन और बिजली खपत के बीच संतुलन रखते हैं, लेकिन लंबी अवधि में ज्यादा बचत नहीं कर पाते। 4 स्टार रेटिंग: बेहतर और किफायती विकल्प4 स्टार रेटिंग वाले उपकरण उच्च ऊर्जा दक्षता की श्रेणी में आते हैं। ये कम बिजली में बेहतर प्रदर्शन देते हैं। शुरुआती कीमत थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन समय के साथ बिजली बिल में होने वाली बचत इस खर्च को पूरा कर देती है। लगातार इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है। 5 स्टार रेटिंग: सबसे ज्यादा बचत वाला विकल्प5 स्टार रेटिंग को सर्वोच्च ऊर्जा दक्षता माना जाता है। ये उपकरण सबसे कम बिजली की खपत करते हैं और लंबे समय में सबसे ज्यादा बचत कराते हैं। UPPCL के अनुसार, बड़े और लगातार उपयोग होने वाले घरेलू उपकरणों में 5 स्टार रेटिंग लेना सबसे समझदारी भरा फैसला होता है। BEE स्टार रेटिंग सिस्टम उपभोक्ताओं को सही और किफायती उपकरण चुनने में मदद करता है। UPPCL की सलाह है कि खरीदारी करते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि स्टार रेटिंग को जरूर देखें, क्योंकि यही आगे चलकर आपके बिजली बिल को तय करती है। 2026 से लागू हुए नए नियमों के बाद यह और जरूरी हो गया है कि लोग ऊर्जा दक्षता को प्राथमिकता दें और समझदारी से खरीदारी करें।