भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा ताकतवर बेड़ा, ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस 8 नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट प्रोजेक्ट को 40,000 करोड़ की मंजूरी का इंतजार

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को नई दिशा देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट अंतिम मंजूरी के चरण में पहुंच गया है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी के बाद नौसेना को आठ आधुनिक युद्धपोतों का बेड़ा मिलेगा, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और सैन्य उपस्थिति को और मजबूत करेंगे। इस परियोजना के तहत दो प्रमुख सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनियों को निर्माण कार्य सौंपे जाने की संभावना है। इनमें Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) को पांच कॉर्वेट और Goa Shipyard Limited (GSL) को तीन युद्धपोत बनाने का दायित्व मिल सकता है। यह कदम देश में स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को भी मजबूती देगा और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाएगा। लगभग 3,500 टन विस्थापन वाले ये कॉर्वेट आधुनिक युद्ध तकनीक से लैस होंगे। इन्हें “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” अवधारणा के आधार पर डिजाइन किया जा रहा है, जिससे छोटे आकार के बावजूद ये युद्धपोत लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम होंगे। इनकी अधिकतम गति लगभग 32 नॉट्स होगी और ये बिना किसी बाहरी सहायता के लगभग 30 दिनों तक समुद्र में तैनात रह सकेंगे। इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी ताकत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें होंगी। प्रत्येक कॉर्वेट पर आठ एक्सटेंडेड-रेंज ब्रह्मोस मिसाइलें लगाई जाएंगी, जो दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी तक सटीक वार करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही वर्टिकल लॉन्च सिस्टम आधारित शॉर्ट-रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी सुरक्षा कवच प्रदान करेंगी। निकट दूरी के खतरों को निष्क्रिय करने के लिए AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी शामिल होगा। पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए इन जहाजों में हल-माउंटेड सोनार, टोव्ड ऐरे सोनार और टॉरपीडो लॉन्चर लगाए जाएंगे। इससे समुद्र के भीतर छिपे दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान और उन पर हमला करना आसान होगा। साथ ही हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे निगरानी और मिशन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इन कॉर्वेट्स में आधुनिक सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी होंगे, जिनमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट सिस्टम और उन्नत ट्रैकिंग तकनीक शामिल है। ये सिस्टम युद्ध के दौरान दुश्मन के रडार और मिसाइल हमलों का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि योजना समय पर आगे बढ़ती है, तो 2026 में CCS की मंजूरी के बाद निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। 2027 में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है और पहला युद्धपोत 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है। पूरी परियोजना 2036 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी होने का अनुमान है। इस परियोजना के पूरा होने पर भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में देश की रणनीतिक स्थिति और निगरानी क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
अदालतों में AI के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी, 20 जून तक आम जनता से सुझाव आमंत्रित

नई दिल्ली । न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में AI के औपचारिक उपयोग को लेकर “रेगुलेशन्स फॉर यूज ऑफ एआई इन कोर्ट 2026” का ड्राफ्ट जारी किया है और इस पर सभी हितधारकों तथा आम जनता से 20 जून 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इस ड्राफ्ट का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग को संतुलित और नियंत्रित ढंग से लागू करना है, ताकि आधुनिक तकनीक का लाभ भी मिले और न्यायिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता तथा मानवीय निर्णय की प्रधानता भी बनी रहे। प्रस्तावित ढांचे में यह स्पष्ट किया गया है कि AI सिस्टम केवल सहायक उपकरण के रूप में काम करेंगे और किसी भी स्थिति में न्यायाधीशों का स्थान नहीं लेंगे। ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास रहेगा। AI को किसी भी तरह से सजा सुनाने, कानूनी निष्कर्ष निकालने या मानवीय विवेक की जगह निर्णय देने की अनुमति नहीं होगी। इसका उपयोग केवल सहायता, विश्लेषण और प्रक्रियागत दक्षता बढ़ाने तक सीमित रहेगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा कर रहे हैं, में जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस राजा विजयराघवन वी., जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सूरज गोविंदराज शामिल हैं। इस समिति ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह ड्राफ्ट तैयार किया है और अब इसे अंतिम रूप देने से पहले व्यापक जनसुझाव की प्रक्रिया शुरू की गई है। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि न्यायिक प्रणाली में उपयोग होने वाले सभी AI सिस्टम को इस प्रकार डिजाइन और लागू किया जाएगा कि वे निष्पक्षता को बढ़ावा दें और किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकें। इसमें नस्ल, धर्म, जाति, लिंग, भाषा, आर्थिक स्थिति या किसी भी संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित आधार पर भेदभाव को रोकने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांग व्यक्तियों, अल्पसंख्यक समुदायों और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। यह सुनिश्चित करने की बात कही गई है कि AI आधारित किसी भी प्रणाली से इन समूहों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। प्रस्तावित ढांचे में डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को भी प्रमुख स्तंभों के रूप में शामिल किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक AI सिस्टम को उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा ताकि संवेदनशील न्यायिक डेटा सुरक्षित रह सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय न्याय प्रणाली में तकनीक के उपयोग को एक नए स्तर पर ले जा सकती है। हालांकि इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक का उपयोग मानव न्यायिक विवेक को प्रभावित न करे और न्याय की मूल भावना सुरक्षित रहे। आने वाले दिनों में प्राप्त सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर इसे न्यायालयों में AI के नियंत्रित उपयोग के लिए लागू किया जा सकता है। यह कदम न्यायिक प्रणाली में तकनीकी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है।
Instagram Reels का बढ़ता प्रभाव: मनोरंजन से आगे बढ़कर शॉपिंग और ब्रांड डिस्कवरी का बना नया केंद्र

नई दिल्ली । डिजिटल युग में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका तेजी से बदल रही है। जो मंच कभी केवल मनोरंजन और संवाद का माध्यम माने जाते थे, वे अब उपभोक्ताओं के खरीदारी व्यवहार को भी प्रभावित करने लगे हैं। हालिया अध्ययन में सामने आया है कि Instagram Reels अब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि नए प्रोडक्ट्स की खोज और खरीदारी संबंधी निर्णय लेने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। देशभर में किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण के अनुसार वीडियो कंटेंट देखने की आदत अब महानगरों तक सीमित नहीं रही है। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोग रोजाना वीडियो कंटेंट देख रहे हैं। अध्ययन में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों ने स्वीकार किया कि वे प्रतिदिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो देखते हैं और Reels उनके डिजिटल अनुभव का अहम हिस्सा बन चुका है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच वीडियो देखने की खाई लगातार कम हो रही है। जहां शहरों में लगभग सभी इंटरनेट उपयोगकर्ता नियमित रूप से वीडियो कंटेंट देखते हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि डिजिटल कंटेंट की पहुंच अब देश के हर हिस्से तक हो चुकी है। युवा वर्ग, विशेषकर Gen Z, Instagram Reels का सबसे बड़ा दर्शक समूह बनकर उभरा है। बड़ी संख्या में युवा प्रतिदिन Reels देखते हैं और नए ट्रेंड्स, उत्पादों तथा सेवाओं की जानकारी प्राप्त करते हैं। महिलाओं और प्रीमियम उपभोक्ता वर्ग में भी Reels की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और आकर्षक वीडियो फॉर्मेट ने दर्शकों की पसंद को बदल दिया है, जिसके कारण यह प्लेटफॉर्म तेजी से प्रभावशाली बनता जा रहा है। व्यापारिक दृष्टि से भी Reels का महत्व लगातार बढ़ रहा है। कंपनियां और ब्रांड अब इसे केवल विज्ञापन दिखाने का मंच नहीं मान रहे, बल्कि उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंचने और उन्हें खरीदारी के लिए प्रेरित करने के प्रभावी माध्यम के रूप में देख रहे हैं। वीडियो के माध्यम से उत्पादों की प्रस्तुति, उपयोग के तरीके और वास्तविक अनुभव उपभोक्ताओं के बीच विश्वास पैदा करने में मदद कर रहे हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि बड़ी संख्या में लोग नए उत्पादों की जानकारी सबसे पहले Reels के माध्यम से प्राप्त करते हैं। कई उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उससे संबंधित वीडियो देखते हैं और उसके बाद निर्णय लेते हैं। यह बदलाव बताता है कि डिजिटल कंटेंट अब पारंपरिक विज्ञापन माध्यमों की तुलना में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। फैशन, ब्यूटी, लाइफस्टाइल, फिटनेस, कॉमेडी और स्पोर्ट्स जैसी श्रेणियां दर्शकों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय बनी हुई हैं। इन विषयों से जुड़े कंटेंट को बड़ी संख्या में देखा और साझा किया जा रहा है। इसके साथ ही क्रिएटर्स को भी बेहतर पहुंच और अधिक एंगेजमेंट मिल रहा है, जिससे उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोशल मीडिया आधारित कॉमर्स और भी मजबूत होगा। Instagram Reels जैसे प्लेटफॉर्म न केवल मनोरंजन प्रदान करेंगे बल्कि उपभोक्ताओं की पसंद, खरीदारी के तरीके और बाजार की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अब वॉइस मैसेज सुनना नहीं पड़ेगा, WhatsApp की ट्रांसक्रिप्ट सुविधा से सीधे पढ़ें मैसेज और बचाएं प्राइवेसी

नई दिल्ली । WhatsApp दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है। इसके जरिए यूजर्स टेक्स्ट चैट, वॉइस और वीडियो कॉल करने के साथ स्टेटस शेयरिंग और वॉइस नोट भेजने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, कई बार वॉइस मैसेज ऐसे समय पर आते हैं जब उन्हें सुनना सार्वजनिक जगहों, ऑफिस या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मुश्किल हो जाता है। ऐसे में WhatsApp का Voice Message Transcript फीचर बेहद उपयोगी साबित होता है। यह फीचर वॉइस मैसेज को सीधे लिखित टेक्स्ट में बदल देता है। इसका मतलब है कि यूजर को ऑडियो सुनने की जरूरत नहीं होती और मैसेज की सामग्री तुरंत पढ़ी जा सकती है। इससे न केवल प्राइवेसी बनी रहती है, बल्कि समय की बचत भी होती है। फीचर Android और iPhone दोनों डिवाइस पर उपलब्ध है और इसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है। इस सुविधा का उपयोग करने के लिए सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में WhatsApp खोलें। इसके बाद Settings में जाएं और Chat विकल्प चुनें। यहां आपको Voice Message Transcripts का ऑप्शन दिखाई देगा। इसे ऑन कर दें और अपनी पसंदीदा भाषा का चयन करें। वर्तमान में अंग्रेजी भाषा सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है। जब फीचर एक्टिव हो जाता है, तो किसी भी चैट में मौजूद वॉइस मैसेज पर टैप करें। अब Transcribe विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करने के बाद WhatsApp ऑडियो को कुछ ही सेकंड में टेक्स्ट में बदल देता है। पूरा संदेश आपकी स्क्रीन पर लिखित रूप में दिखाई देने लगता है। WhatsApp ने यह Voice Message Transcript फीचर वर्ष 2024 में पेश किया था। शुरुआत में यह सुविधा केवल सीमित यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे व्यापक रूप से रोलआउट कर दिया गया है। आज अधिकांश यूजर्स अपने स्मार्टफोन पर इस फीचर का लाभ उठा सकते हैं और वॉइस मैसेज सुनने के बजाय आसानी से पढ़ सकते हैं। विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर यह सुविधा प्राइवेसी बनाए रखने में मदद करती है। यदि आप सार्वजनिक परिवेश में WhatsApp का उपयोग करते हैं, तो इस फीचर की मदद से आप बिना किसी परेशानी के मैसेज पढ़ सकते हैं। साथ ही, यह समय की बचत भी करता है क्योंकि किसी भी ऑडियो को पूरा सुनने की आवश्यकता नहीं होती। इस फीचर के इस्तेमाल से न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ती है बल्कि सामाजिक शिष्टाचार भी बना रहता है। हेडफोन न होने या आसपास का माहौल शांत रखने की आवश्यकता होने पर यह सुविधा और भी उपयोगी साबित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के ट्रांसक्रिप्शन फीचर्स आने वाले समय में मैसेजिंग एप्स की नई पहचान बन सकते हैं। सारांश यह है कि WhatsApp का Voice Message Transcript फीचर यूजर्स को पब्लिक जगहों पर वॉइस मैसेज सुनने से बचाता है, प्राइवेसी को सुरक्षित रखता है और समय की बचत करता है। यह फीचर सरल, तेज और सभी स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए सहज रूप से उपलब्ध है।
AC के साथ सीलिंग फैन चलाने से क्यों बढ़ जाती है ठंडक, जानिए बिजली बिल कम करने का आसान और वैज्ञानिक तरीका

नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर का उपयोग लगभग हर घर में बढ़ जाता है। तेज गर्मी से राहत पाने के लिए लोग अक्सर AC का तापमान काफी कम कर देते हैं, लेकिन इसके साथ ही बिजली का बिल भी तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सीलिंग फैन और AC का संयुक्त उपयोग बेहतर कूलिंग के साथ-साथ बिजली बचत का भी प्रभावी उपाय साबित हो सकता है। अधिकांश लोगों के बीच यह धारणा होती है कि पंखा कमरे का तापमान कम करता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। सीलिंग फैन सीधे तौर पर कमरे को ठंडा नहीं करता, बल्कि हवा के प्रवाह को बढ़ाकर शरीर को अधिक ठंडक का एहसास कराता है। जब हवा त्वचा से टकराती है तो पसीना तेजी से सूखता है और शरीर की गर्मी बाहर निकलती है। इसी कारण व्यक्ति को वास्तविक तापमान की तुलना में अधिक ठंडक महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, AC चलाने के दौरान कमरे में ठंडी हवा नीचे की ओर जमा होने लगती है जबकि गर्म हवा ऊपर बनी रहती है। इससे कमरे के अलग-अलग हिस्सों में तापमान का अंतर पैदा हो जाता है। ऐसे में एयर कंडीशनर को पूरे कमरे को समान रूप से ठंडा करने के लिए अधिक समय तक काम करना पड़ता है। सीलिंग फैन इस समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। फैन ठंडी और गर्म हवा को पूरे कमरे में समान रूप से फैलाता है, जिससे हर हिस्से में एक जैसी ठंडक महसूस होती है। इसका फायदा यह होता है कि AC का थर्मोस्टेट अपेक्षाकृत जल्दी निर्धारित तापमान तक पहुंच जाता है और कंप्रेसर को कम समय तक चलना पड़ता है। इससे बिजली की खपत में कमी आती है। ऊर्जा विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि AC को पहले 22 डिग्री सेल्सियस पर चलाया जाता था, तो फैन के साथ इसे 24 या 25 डिग्री सेल्सियस पर सेट करने के बाद भी लगभग समान स्तर का आराम प्राप्त किया जा सकता है। तापमान में यह छोटा बदलाव बिजली की खपत पर बड़ा असर डाल सकता है। अनुमान है कि AC का तापमान हर एक डिग्री बढ़ाने पर ऊर्जा खपत में लगभग 4 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। एक सामान्य एयर कंडीशनर जहां 1000 से 2000 वॉट तक बिजली की खपत करता है, वहीं अधिकांश सीलिंग फैन केवल 15 से 70 वॉट के बीच बिजली लेते हैं। ऐसे में फैन का अतिरिक्त खर्च बहुत कम होता है, जबकि AC पर पड़ने वाला दबाव घटने से कुल बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत संभव हो जाती है। तकनीकी रूप से उन्नत BLDC फैन इस बचत को और बढ़ा सकते हैं। ये फैन पारंपरिक पंखों की तुलना में काफी कम बिजली खर्च करते हैं और फुल स्पीड पर भी बेहद कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि ऊर्जा दक्ष उपकरणों की मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि कमरे में कोई मौजूद न हो तो पंखे को बंद कर देना चाहिए। खाली कमरे में चलता हुआ फैन केवल बिजली खर्च करता है। इसके अलावा AC के फिल्टर और पंखे के ब्लेड की नियमित सफाई भी जरूरी है, क्योंकि धूल जमा होने पर दोनों उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और बिजली की खपत बढ़ सकती है।
एक टैप में रुक जाएगा गलत मैसेज! Google Messages का नया सेफ्टी फीचर यूजर्स के लिए राहत

नई दिल्ली । स्मार्टफोन पर चैटिंग करते समय कई बार एक छोटी सी गलती बड़ी शर्मिंदगी का कारण बन जाती है। खासकर तब, जब किसी जरूरी या प्रोफेशनल बातचीत के दौरान गलती से AI द्वारा सुझाए गए Smart Reply पर उंगली पड़ जाए और मैसेज बिना सोचे-समझे सामने वाले व्यक्ति तक पहुंच जाए। अब Google ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। कंपनी ने Google Messages ऐप में एक नया सुरक्षा फीचर पेश किया है, जो यूजर्स को अनजाने में गलत मैसेज भेजने से बचाएगा। Google Messages का नया फीचर ‘Tap to Draft’ नाम से लॉन्च किया गया है। यह फीचर खास तौर पर उन एंड्रॉयड यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है जो अक्सर Smart Reply की वजह से गलत संदेश भेजने की परेशानी का सामना करते हैं। नए अपडेट के बाद अब किसी भी AI-सुझावित रिप्लाई पर टैप करने से वह मैसेज तुरंत सेंड नहीं होगा, बल्कि पहले ड्राफ्ट के रूप में मैसेज बॉक्स में दिखाई देगा। अब तक Google Messages में Smart Reply पर टैप करते ही मैसेज सीधे सामने वाले यूजर को भेज दिया जाता था। कई बार यूजर किसी अन्य विकल्प को चुनना चाहता था या केवल सुझाव देखना चाहता था, लेकिन एक टैप से मैसेज भेजा जाता था। इससे व्यक्तिगत, प्रोफेशनल और ऑफिस चैट्स में असहज स्थिति पैदा हो सकती थी। Google का नया फीचर इसी समस्या को खत्म करने के उद्देश्य से लाया गया है। ‘Tap to Draft’ फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यूजर को अब संदेश भेजने से पहले उसे पढ़ने, एडिट करने और अपनी जरूरत के अनुसार बदलने का पूरा मौका मिलेगा। यदि AI द्वारा सुझाया गया जवाब पूरी तरह सही नहीं है, तो यूजर उसमें बदलाव कर सकता है या उसे हटाकर नया संदेश लिख सकता है। अंतिम निर्णय पूरी तरह यूजर के हाथ में रहेगा। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब AI आधारित फीचर्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि AI कई बार उपयोगी सुझाव देता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में उसके जवाब बातचीत के संदर्भ से मेल नहीं खाते। ऐसे में बिना समीक्षा के संदेश भेजा जाना परेशानी का कारण बन सकता है। नया फीचर इस जोखिम को काफी हद तक कम कर देगा। इस फीचर को सक्रिय करना भी बेहद आसान है। यूजर्स को Google Messages ऐप की Settings में जाकर ‘Suggestions & Actions’ विकल्प चुनना होगा। इसके बाद ‘Suggestions’ सेक्शन में जाकर ‘Tap to Draft’ फीचर को ऑन किया जा सकता है। फिलहाल यह फीचर Opt-in मोड में उपलब्ध है, यानी इसे उपयोग करने के लिए यूजर को स्वयं सक्रिय करना होगा। डिफॉल्ट रूप से ऐप अभी भी पुराने ‘Tap to Send’ मोड पर काम करेगा। Google ने इस फीचर को Google Messages के लेटेस्ट स्टेबल वर्जन v20260522_00_RC00 के साथ जारी करना शुरू कर दिया है। मार्च 2026 में इसकी टेस्टिंग शुरू हुई थी और करीब तीन महीने के परीक्षण के बाद अब इसे आम यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। तकनीक के इस नए कदम को यूजर अनुभव और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह फीचर लाखों एंड्रॉयड यूजर्स को अनजाने में होने वाली मैसेजिंग गलतियों से बचाने में मदद करेगा।
तमिलनाडु को EV हब बनाने की तैयारी, ह्युंडै लगाएगी 26,000 करोड़ रुपये का बड़ा दांव

नई दिल्ली । भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को नई गति देने की दिशा में ह्युंडै मोटर इंडिया ने बड़ा निवेश और विस्तार कार्यक्रम घोषित किया है। कंपनी ने तमिलनाडु को देश के प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और कौशल विकास पर व्यापक योजना का खाका पेश किया है। इस पहल को भारत के तेजी से बढ़ते ईवी बाजार और घरेलू विनिर्माण को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023 से 2032 के बीच तमिलनाडु में 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। यह निवेश ह्युंडै द्वारा घोषित कुल 45,000 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक निवेश योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस राशि का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ईवी इकोसिस्टम विकसित करने और स्थानीय आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाने में किया जाएगा। ह्युंडै का लक्ष्य अगले पांच से छह वर्षों में स्थानीयकरण का स्तर 82 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि अधिक स्थानीय उत्पादन से लागत में कमी आएगी, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का प्रभाव घटेगा और आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम होगी। इससे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। कंपनी तमिलनाडु स्थित आपूर्तिकर्ताओं से खरीदारी का मूल्य भी बढ़ाने जा रही है। अनुमान है कि स्थानीय खरीद में लगभग 4,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त वृद्धि होगी। इस विस्तार का सीधा लाभ राज्य के लघु और मध्यम उद्योगों को मिलेगा, जो ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके साथ ही अगले पांच से छह वर्षों में करीब 2,000 नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है। ह्युंडै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी इस वर्ष चेन्नई संयंत्र से दो नए मॉडल लॉन्च करेगी। इनमें आम ग्राहकों के लिए तैयार किया गया पहला इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल होगा। कंपनी का मानना है कि यह कदम भारत में ईवी अपनाने की गति बढ़ाने और व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा। ह्युंडै पहले ही तमिलनाडु में ईवी बैटरी सब-असेंबली सुविधा स्थापित कर चुकी है। इसके अलावा पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य संपूर्ण ईवी उत्पादन श्रृंखला को भारत में विकसित करना है, जिससे देश वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण मानचित्र पर अपनी स्थिति और मजबूत कर सके। कंपनी ने राज्य सरकार के साथ मिलकर कौशल विकास कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी है। इस पहल के तहत युवाओं को आधुनिक ऑटोमोबाइल तकनीकों और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम 2027 तक शुरू होने की संभावना है और इसका उद्देश्य युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ह्युंडै का यह निवेश न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे भारतीय ईवी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। स्थानीय उत्पादन, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन के जरिए यह पहल भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक बन सकती है।
AI पर बढ़ा वैश्विक खतरे का अलार्म, विशेषज्ञों की चेतावनी- कहीं इंसानों के हाथ से न निकल जाए भविष्य की सबसे ताकतवर तकनीक

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में नई बहस शुरू हो गई है। तकनीक के क्षेत्र में तेजी से हो रही प्रगति के बीच कई विशेषज्ञ अब इस संभावना पर गंभीर चिंता जता रहे हैं कि भविष्य में AI प्रणालियां इतनी उन्नत हो सकती हैं कि उन पर मानव नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाए। इसी संदर्भ में वैश्विक स्तर पर AI के विकास और उपयोग को लेकर नए नियमों तथा सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में AI केवल इंसानों द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर कार्य करता है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसकी क्षमताएं कहीं अधिक व्यापक हो सकती हैं। चिंता का मुख्य कारण यह है कि भविष्य की उन्नत AI प्रणालियां स्वयं को बेहतर बनाने और अधिक सक्षम संस्करण विकसित करने की क्षमता हासिल कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो तकनीकी विकास की गति इंसानी निगरानी और नियंत्रण से आगे निकल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार AI का सबसे बड़ा जोखिम उसकी सीखने और अनुकूलन करने की क्षमता में छिपा है। आज यह तकनीक चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालांकि यही शक्ति भविष्य में नई चुनौतियां भी पैदा कर सकती है। यदि अत्यधिक उन्नत AI प्रणालियां स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने लगें तो उनके प्रभावों का अनुमान लगाना कठिन हो सकता है। इसी वजह से कई तकनीकी संस्थान और शोधकर्ता AI विकास के लिए वैश्विक सुरक्षा ढांचे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार परमाणु तकनीक और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियम बनाए गए हैं, उसी प्रकार AI के लिए भी साझा मानक और निगरानी व्यवस्था आवश्यक है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि तकनीक का विकास मानव हितों और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप बना रहे। AI के समर्थकों का तर्क है कि यह तकनीक मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक, उत्पादक और सुरक्षित बना सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं में रोगों की पहचान से लेकर जलवायु परिवर्तन के अध्ययन तक, AI अनेक जटिल समस्याओं के समाधान में योगदान दे रही है। वहीं आलोचकों का कहना है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए तो यही तकनीक गलत हाथों में जाकर साइबर हमलों, सूचना हेरफेर और स्वचालित निर्णय प्रणालियों से जुड़े जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि AI को पूरी तरह रोकना न तो व्यावहारिक है और न ही आवश्यक। आवश्यकता इस बात की है कि इसके विकास की गति के साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों को भी समान महत्व दिया जाए। सरकारों, तकनीकी कंपनियों और शोध संस्थानों को मिलकर ऐसे नियम विकसित करने होंगे जो नवाचार को प्रोत्साहित करें, लेकिन संभावित खतरों को भी नियंत्रित रखें। वर्तमान बहस इस बात का संकेत है कि AI केवल एक तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक महत्व का वैश्विक मुद्दा बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह तय करेगा कि मानव समाज तकनीकी प्रगति का लाभ किस प्रकार उठाता है और उससे जुड़े जोखिमों का सामना कैसे करता है।
SOCIAL MEDIA SECURITY: WhatsApp, Facebook और Instagram पर लॉगिन का बदलेगा तरीका, OTP के बिना होगा मोबाइल वेरिफिकेशन

SOCIAL MEDIA SECURITY: नई दिल्ली । डिजिटल प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वोडाफोन आइडिया (Vi) और मेटा ने नई साझेदारी की घोषणा की है। इस सहयोग के तहत WhatsApp, Facebook और Instagram जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन सुविधा शुरू की जाएगी। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं को कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के दौरान वन-टाइम पासवर्ड (OTP) दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी।कंपनियों के अनुसार यह नेटवर्क आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली उपयोगकर्ताओं की पहचान को मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से स्वतः सत्यापित करेगी। इससे रजिस्ट्रेशन, मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन, लॉगिन, री-लॉगिन, अकाउंट रिकवरी और सुरक्षा जांच जैसी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक तेज और सहज हो जाएंगी। पूरी प्रक्रिया बैकग्राउंड में पूरी होगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। MP PRE-MONSOON: MP में प्री-मानसून का असर, 40 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश; जानें आपके जिले का हाल! नई तकनीक विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी मानी जा रही है जहां ओटीपी प्राप्त होने में देरी होती है या साइबर अपराधी फर्जी संदेशों और लिंक के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को धोखा देने की कोशिश करते हैं। साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन प्रणाली में प्रमाणीकरण सीधे नेटवर्क स्तर पर होता है, जिससे फिशिंग, ओटीपी चोरी और डिजिटल पहचान से जुड़े कई जोखिम कम हो सकते हैं। कंपनियों ने बताया कि जब कोई Vi ग्राहक अपने मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से WhatsApp, Facebook या Instagram का उपयोग करेगा, तब सत्यापन अनुरोध स्वतः नेटवर्क द्वारा मान्य किया जाएगा। इससे उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होगा और विभिन्न सेवाओं तक पहुंचने में लगने वाला समय भी घटेगा। तकनीक का उद्देश्य सुरक्षा और सुविधा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना है। भारत मेटा के प्लेटफॉर्म के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। करोड़ों भारतीय रोजाना WhatsApp, Facebook और Instagram का उपयोग करते हैं। ऐसे में नई प्रमाणीकरण व्यवस्था का प्रभाव बड़े स्तर पर देखने को मिल सकता है। अप्रैल 2026 तक वोडाफोन आइडिया के लगभग 19.85 करोड़ ग्राहक थे, जिन्हें इस नई सुविधा का लाभ मिलने की संभावना है। CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित वोडाफोन आइडिया के मुख्य कार्य अधिकारी अभिजीत किशोर ने कहा कि मेटा के साथ यह साझेदारी उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित डिजिटल अनुभव प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन तकनीक न केवल साइबर सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि धोखाधड़ी के जोखिम को भी कम करेगी। साथ ही उपयोगकर्ताओं को बिना किसी बाधा के तेज और सुविधाजनक प्रमाणीकरण प्रक्रिया उपलब्ध कराएगी। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में डिजिटल सेवाओं में पारंपरिक ओटीपी आधारित सत्यापन की जगह नेटवर्क आधारित और स्वचालित प्रमाणीकरण प्रणालियां अधिक लोकप्रिय हो सकती हैं। इससे उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा मानकों में भी सुधार आएगा। हालांकि यह सुविधा फिलहाल Vi नेटवर्क के उपयोगकर्ताओं के लिए शुरू की जा रही है, लेकिन इसके सफल होने पर अन्य दूरसंचार कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसी प्रकार की तकनीकों को अपनाने पर विचार कर सकते हैं। इससे भारत में डिजिटल सेवाओं के उपयोग का अनुभव और अधिक सुरक्षित, तेज तथा आधुनिक बनने की उम्मीद है।
इंतजार खत्म! WhatsApp ला रहा नया फीचर, निजी चैट्स होंगी पहले से ज्यादा सुरक्षित..

नई दिल्ली । लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक नया और महत्वपूर्ण प्राइवेसी फीचर लेकर आ रहा है। इस अपडेट का उद्देश्य निजी बातचीत को पहले से अधिक सुरक्षित बनाना और यूजर्स को उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करना है। डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कंपनी लगातार ऐसे फीचर्स विकसित कर रही है जो यूजर्स की गोपनीयता को मजबूत करें। नया फीचर विशेष रूप से उन संदेशों और मीडिया फाइल्स के लिए उपयोगी होगा जिन्हें यूजर्स सीमित समय के लिए साझा करना चाहते हैं। यह सुविधा निजी बातचीत के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और संवेदनशील जानकारी को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक उपलब्ध रहने से बचाने में मदद करेगी। इससे व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों तरह की बातचीत अधिक सुरक्षित हो सकेगी। आज के समय में ऑनलाइन संचार लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़े मुद्दे भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। यूजर्स चाहते हैं कि उनकी निजी तस्वीरें, वीडियो और संदेश केवल निर्धारित व्यक्ति तक ही सीमित रहें। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए WhatsApp लगातार अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में प्लेटफॉर्म ने चैट लॉक, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, डिसअपीयरिंग मैसेज और अन्य सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इन फीचर्स ने यूजर्स को अपनी चैट्स और डेटा पर अधिक नियंत्रण दिया है। नया अपडेट इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे निजी संचार और अधिक सुरक्षित बन सकेगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर खतरों और डेटा लीक की बढ़ती घटनाओं के बीच प्राइवेसी आधारित फीचर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और गोपनीयता को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है। WhatsApp का नया फीचर इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया माना जा रहा है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है जो नियमित रूप से संवेदनशील दस्तावेज, निजी तस्वीरें या गोपनीय जानकारी साझा करते हैं। अतिरिक्त सुरक्षा उपायों से डेटा के दुरुपयोग और अनधिकृत पहुंच की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे यूजर्स का भरोसा भी मजबूत होगा और डिजिटल संचार का अनुभव बेहतर बनेगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में प्राइवेसी-केंद्रित फीचर्स मैसेजिंग सेवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाएंगे। यूजर्स अब केवल तेज और आसान संचार नहीं चाहते, बल्कि अपने डेटा की सुरक्षा को भी उतना ही महत्व देते हैं। यही कारण है कि तकनीकी कंपनियां लगातार नए सुरक्षा समाधान विकसित कर रही हैं। WhatsApp का यह नया फीचर भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके व्यापक रूप से उपलब्ध होने के बाद यूजर्स को निजी चैटिंग के दौरान अधिक सुरक्षा और सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे डिजिटल दुनिया में सुरक्षित संचार को बढ़ावा मिलेगा और प्राइवेसी को लेकर लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।