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कार की चाबी पर क्यों लपेट रहे लोग एल्युमिनियम फॉइल? जानिए कैसे बचा सकती है आपकी लाखों की गाड़ी

नई दिल्ली। कीलेस एंट्री फीचर वाली कारें आज लोगों की पहली पसंद बनती जा रही हैं, लेकिन यही आधुनिक सुविधा अब वाहन चोरी का नया हथियार भी बन रही है। यही वजह है कि इन दिनों कई लोग अपनी कार की चाबी को एल्युमिनियम फॉइल में लपेटकर रखने लगे हैं। सुनने में यह तरीका भले अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे कार सुरक्षा से जुड़ा बड़ा तकनीकी कारण है। दरअसल, कीलेस एंट्री सिस्टम वाली कारें वायरलेस सिग्नल के जरिए अपनी स्मार्ट चाबी से कनेक्ट रहती हैं। जैसे ही कार मालिक चाबी लेकर वाहन के पास पहुंचता है, कार अपने आप लॉक या अनलॉक हो जाती है। इसी तकनीक का फायदा उठाकर चोर अब “रिले अटैक” नाम की डिजिटल चोरी को अंजाम दे रहे हैं। इस तकनीक में चोर खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से कार की चाबी से निकलने वाले सिग्नल को दूर से पकड़ लेते हैं और उसे कार तक पहुंचा देते हैं। कार को लगता है कि असली चाबी पास में ही मौजूद है और वह बिना किसी नुकसान के खुल जाती है। कई मामलों में चोर कुछ ही सेकंड में गाड़ी स्टार्ट करके फरार हो जाते हैं। ऐसे में एल्युमिनियम फॉइल कार मालिकों के लिए एक आसान और सस्ता सुरक्षा उपाय बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एल्युमिनियम फॉइल “फैराडे केज” सिद्धांत पर काम करती है। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल्स को ब्लॉक कर देती है, जिससे चाबी का वायरलेस सिग्नल बाहर नहीं जा पाता। अगर चाबी को फॉइल में अच्छी तरह लपेट दिया जाए, तो रिले अटैक करने वाले चोर सिग्नल को कैच नहीं कर पाते और कार सुरक्षित रहती है। हालांकि, सिर्फ फॉइल पर निर्भर रहना पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जाता। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि कार की चाबी को घर के मुख्य दरवाजे या खिड़की के पास रखने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि चाबी को किसी दराज या घर के अंदर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, ताकि सिग्नल बाहर तक न पहुंच सके। इसके अलावा बाजार में खास “फैराडे पाउच” या सिग्नल ब्लॉकिंग कवर भी उपलब्ध हैं, जो फॉइल की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और प्रभावी माने जाते हैं। कई ऑटोमोबाइल कंपनियां अब मोशन सेंसर और एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स वाली स्मार्ट चाबियां भी लॉन्च कर रही हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर सिग्नल भेजना बंद कर देती हैं। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, अपराधी भी उतने ही आधुनिक तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में कार मालिकों के लिए जरूरी है कि वे केवल हाईटेक फीचर्स पर भरोसा न करें, बल्कि सुरक्षा के छोटे-छोटे उपाय भी अपनाएं। एक साधारण एल्युमिनियम फॉइल भी आपकी लाखों की कार को डिजिटल चोरी से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।

बिहार के 19 साल के लड़के ने AI की दुनिया में मचाई सनसनी, 11 लाख खर्च कर तैयार किया देसी मल्टीमॉडल मॉडल

नई दिल्ली। बिहार के एक 19 वर्षीय युवक ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब इंटरनेट और टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से हो रही है। आनंद नाम के इस युवा ने करीब 11 लाख रुपये खर्च कर एक मल्टीमॉडल AI मॉडल तैयार करने का दावा किया है। खास बात यह है कि यह पूरा प्रोजेक्ट बिना किसी बड़ी कंपनी या निवेशक की मदद के तैयार किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंद का AI मॉडल टेक्स्ट, इमेज और स्पीच जैसे कई फॉर्मेट में काम करने में सक्षम है। दावा किया गया है कि यह मॉडल 512×512 रेजोल्यूशन तक इमेज जनरेट कर सकता है और 24kHz क्वालिटी की स्पीच आउटपुट देने की क्षमता भी रखता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसकी तुलना दुनिया की बड़ी AI कंपनियों जैसे OpenAI और Google के मॉडल्स से की जा रही है। मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले आनंद ने बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर अपनी बचत और रनपॉड जैसी सेवाओं से मिले ग्रांट्स के सहारे काम किया। उनके पिता सरकारी अधिकारी हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। बताया जा रहा है कि केवल GPU कंप्यूटिंग पर ही परिवार के करीब 64 हजार रुपये खर्च हुए, जो एक सामान्य परिवार के लिए बड़ी रकम मानी जाती है। आनंद का कहना है कि भारत को भी अपना स्वदेशी AI सिस्टम विकसित करना चाहिए, ताकि देश विदेशी तकनीकों पर पूरी तरह निर्भर न रहे। उनका मानना है कि जैसे अमेरिका और चीन अपने AI मॉडल तैयार कर रहे हैं, वैसे ही भारत को भी तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस AI मॉडल ने OmniDocBench V1.5 टेस्टिंग में 93.45 का स्कोर हासिल किया है। इससे पहले आनंद अपने लैपटॉप पर टेक्स्ट-टू-वीडियो सिस्टम पर भी काम कर चुके हैं। अब वह अपने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 35 हजार डॉलर की फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर जहां बड़ी संख्या में लोग आनंद की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स इस प्रोजेक्ट की क्षमताओं और दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इतने बड़े AI मॉडल पर काम करना बड़ी उपलब्धि है, जबकि कुछ यूजर्स इसे AI-जनरेटेड कोड या “वाइब कोडिंग” का परिणाम बता रहे हैं। इन तमाम चर्चाओं के बीच आनंद अपने लक्ष्य पर पूरी तरह फोकस बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि वह भविष्य में अपने मॉडल के वेट्स को Hugging Face पर जारी करना चाहते हैं और बाद में पूरे कोडबेस को ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म GitHub पर उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं। बिहार के इस युवा की कहानी अब उन लाखों छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणा बनती जा रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

Vi Edu+ Pack: मोबाइल रिचार्ज में पढ़ाई का नया मॉडल, JEE-NEET-UPSC की तैयारी अब और आसान

नई दिल्ली। वोडाफोन-आइडिया (Vi) ने भारतीय टेलीकॉम और एडटेक सेक्टर में एक नया प्रयोग करते हुए “Vi Edu+ Pack” लॉन्च किया है। इस प्लान का उद्देश्य छात्रों को सिर्फ मोबाइल कनेक्टिविटी ही नहीं बल्कि पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराना है। कंपनी ने इसके लिए एडटेक प्लेटफॉर्म फिजिक्स वाला के साथ साझेदारी की है, जिससे छात्रों को एक ही रिचार्ज में इंटरनेट, कॉलिंग और उच्च गुणवत्ता वाली ऑनलाइन कोचिंग मिल सके। यह नया Edu+ Pack खासतौर पर उन छात्रों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस वहन नहीं कर सकते या जिनके पास बड़े शहरों तक पहुंच नहीं है। इस प्लान की शुरुआत फिलहाल चुनिंदा सर्कल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की गई है। इसमें राजस्थान में इसकी कीमत 375 रुपये और यूपी ईस्ट में 409 रुपये तय की गई है। इस पैक की वैधता 28 दिनों की है, जिसमें यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग, हाई-स्पीड डेटा और SMS की सुविधा मिलती है। Vi Edu+ Pack की सबसे बड़ी खासियत इसका एडटेक कंटेंट है। इसमें फिजिक्स वाला के “Pi Pro” प्लेटफॉर्म का एक्सेस दिया गया है, जो भारत के सबसे लोकप्रिय ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स में से एक है। इस प्लेटफॉर्म पर छात्रों को KG से लेकर 12वीं तक का पूरा कोर्स, JEE, NEET, UPSC, GATE और NDA जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विस्तृत अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसमें 30,000 से अधिक वीडियो लेक्चर्स, विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए नोट्स, रिविजन सीरीज और वन-शॉट लेक्चर्स शामिल हैं। इसके अलावा छात्रों को AI आधारित डाउट सॉल्विंग सिस्टम भी दिया गया है, जिससे वे अपने सवालों का तुरंत समाधान पा सकते हैं। यह फीचर छात्रों के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है क्योंकि यह व्यक्तिगत ट्यूटर जैसा अनुभव प्रदान करता है। इसके साथ ही इस प्लान में ऑफलाइन डाउनलोड सुविधा भी दी गई है, जिससे छात्र बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। यह सुविधा उन क्षेत्रों में बेहद मददगार साबित हो सकती है जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी कमजोर होती है। टेलीकॉम कंपनियां अब तक अपने रिचार्ज प्लान्स में मनोरंजन, OTT सब्सक्रिप्शन और गेमिंग जैसी सुविधाएं देती रही हैं, लेकिन Vi का यह कदम शिक्षा केंद्रित डिजिटल सेवाओं की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में टेलीकॉम और एडटेक सेक्टर के बीच नए सहयोग की शुरुआत कर सकता है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो Vi इसे पूरे देश में लागू कर सकता है। इससे लाखों छात्रों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। साथ ही अन्य टेलीकॉम कंपनियां भी इसी तरह के एजुकेशन-आधारित रिचार्ज प्लान लॉन्च कर सकती हैं। कुल मिलाकर Vi Edu+ Pack मोबाइल रिचार्ज को सिर्फ कनेक्टिविटी सेवा से आगे बढ़ाकर एक डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम में बदलने की कोशिश है, जो भारत में शिक्षा के भविष्य को एक नई दिशा दे सकता है।

1 लाख रुपये से कम में धांसू गेमिंग लैपटॉप की रेस: Acer, Asus, Lenovo और Dell दे रहे पावरफुल परफॉर्मेंस का कॉम्बो

नई दिल्ली। भारत में 1 लाख रुपये से कम बजट में गेमिंग लैपटॉप का मार्केट तेजी से मजबूत हो रहा है, जहां अब यूजर्स को हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर, डेडिकेटेड ग्राफिक्स कार्ड और हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले वाले कई दमदार विकल्प मिल रहे हैं। Acer, Asus, Lenovo और Dell जैसे बड़े ब्रांड इस रेंज में ऐसे लैपटॉप पेश कर रहे हैं जो गेमिंग के साथ-साथ स्टडी, वर्क और मल्टीटास्किंग के लिए भी बेहतरीन परफॉर्मेंस देते हैं। Acer Nitro V 15 इस सेगमेंट में एक पावरफुल विकल्प है, जिसमें 13th Gen Intel Core i7 प्रोसेसर, 16GB रैम और 165Hz FHD डिस्प्ले मिलता है, जो स्मूद गेमिंग एक्सपीरियंस देता है। Asus TUF Gaming A15 में AMD Ryzen 7 प्रोसेसर और NVIDIA RTX 3050 GPU के साथ मजबूत बिल्ड क्वालिटी और बेहतर थर्मल मैनेजमेंट दिया गया है, जिससे लंबे गेमिंग सेशन में भी परफॉर्मेंस स्थिर रहता है। Lenovo LOQ में Intel 12th Gen i5 प्रोसेसर और RTX 3050 GPU के साथ AI बेस्ड परफॉर्मेंस ट्यूनिंग, 144Hz डिस्प्ले और एडवांस कूलिंग सिस्टम मिलता है। वहीं Dell G15 Gaming Laptop में 13th Gen Intel i5 प्रोसेसर, RTX 3050 ग्राफिक्स और Dolby Audio सपोर्ट के साथ बैलेंस्ड गेमिंग परफॉर्मेंस मिलता है। Asus ROG Strix G15 में Ryzen 7 प्रोसेसर और RGB लाइटिंग के साथ प्रीमियम गेमिंग एक्सपीरियंस दिया गया है। ये सभी लैपटॉप बजट सेगमेंट में गेमर्स के लिए एक मजबूत विकल्प हैं, जो हाई-ग्राफिक्स गेमिंग के साथ-साथ मल्टीटास्किंग और डेली यूज में भी बेहतरीन परफॉर्मेंस प्रदान करते हैं।

टेलीकॉम सेक्टर का नया गेम: 5G से आगे सॉवरेन क्लाउड और AI डेटा सेंटर की जंग तेज, जियो-एयरटेल समेत कंपनियों का बड़ा दांव

नई दिल्ली। टेलीकॉम इंडस्ट्री अब सिर्फ 5G और ब्रॉडबैंड तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सॉवरेन क्लाउड और AI डेटा सेंटर इसके नए और सबसे बड़े ग्रोथ इंजन बनते जा रहे हैं। टेलीनॉर से लेकर एयरटेल, जियो और अडानी तक सभी कंपनियां डेटा सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता और क्लाउड सेवाओं के जरिए नए बिजनेस मॉडल पर तेजी से काम कर रही हैं। यूरोप में टेलीनॉर और BT जैसी कंपनियां विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर्स पर निर्भरता कम करने के लिए सॉवरेन क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं। वहीं AWS, Microsoft Azure और Google Cloud जैसी बड़ी कंपनियों पर बैंकिंग, हेल्थ और सरकारी सेवाओं का भारी दबाव पहले से मौजूद है। इसी वजह से कई देश अब अपने संवेदनशील डेटा को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखने पर जोर दे रहे हैं। AI के तेजी से बढ़ते उपयोग ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बड़े डेटा और हाई-पावर प्रोसेसिंग की जरूरत होती है। इसी को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियां अब खुद को सिर्फ नेटवर्क ऑपरेटर से बदलकर क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर के रूप में स्थापित कर रही हैं। भारत में भी एयरटेल अपनी Nxtra डेटा सेंटर यूनिट के जरिए सॉवरेन क्लाउड और AI सेवाओं का विस्तार कर रही है, जबकि जियो का AI क्लाउड प्लेटफॉर्म तेजी से यूजर्स जोड़ रहा है। दूसरी तरफ अडानी ग्रुप भी बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रहा है। आने वाले समय में टेलीकॉम सेक्टर की असली ताकत इसी बात पर निर्भर करेगी कि कौन कंपनी डेटा, AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी पर सबसे मजबूत पकड़ बना पाती है।

JioHotstar का बड़ा धमाका: लाइव मैच के दौरान ऐप से सीधे खाना ऑर्डर करने का नया फीचर लॉन्च, Swiggy के साथ पार्टनरशिप

नई दिल्ली। जियो हॉटस्टार ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक बड़ा और यूजर-फ्रेंडली अपडेट लॉन्च किया है, जिसके तहत अब दर्शक लाइव मैच देखते हुए सीधे ऐप के अंदर से खाना ऑर्डर कर सकेंगे। इस नए फीचर के लिए कंपनी ने Swiggy के साथ साझेदारी की है, जिससे स्ट्रीमिंग और फूड डिलीवरी का अनुभव एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगा। यह सुविधा फिलहाल भारत के 690 से ज्यादा शहरों में शुरू की गई है और इसे खासतौर पर क्रिकेट फैंस के लिए डिजाइन किया गया है, जो मैच देखते समय बीच में खाना ऑर्डर करना चाहते हैं। इस फीचर की मदद से यूजर्स जियो हॉटस्टार ऐप छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे ऐप के अंदर ही रेस्टोरेंट ब्राउज़ कर सकते हैं, ऑर्डर प्लेस कर सकते हैं और डिलीवरी को ट्रैक भी कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि यह फीचर लाइव स्पोर्ट्स देखने के अनुभव को और ज्यादा इंटरैक्टिव और सुविधाजनक बनाएगा। लाइव मैचों के दौरान यूजर्स की ओर से फूड ऑर्डरिंग में तेजी देखी गई है, जिसमें बर्गर जैसे फास्ट फूड आइटम सबसे ज्यादा ऑर्डर किए जा रहे हैं। खासकर बड़े मैचों और लोकप्रिय टीमों के मुकाबलों के दौरान ऑर्डर में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह साफ है कि लोग अब एंटरटेनमेंट के साथ-साथ फूड डिलीवरी का भी एकीकृत अनुभव पसंद कर रहे हैं। जियो हॉटस्टार  का यह कदम भारत में डिजिटल स्ट्रीमिंग को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां अब केवल वीडियो कंटेंट ही नहीं बल्कि उससे जुड़ी लाइफस्टाइल सर्विसेज भी एक ही जगह उपलब्ध हो रही हैं।

Samsung Mini LED TV: सैमसंग ने लॉन्च किया 100 इंच तक का AI Mini LED TV, 42,990 रुपये से शुरू कीमत में मिलेगा प्रीमियम स्मार्ट एक्सपीरियंस

 Samsung Mini LED TV: नई दिल्ली। सैमसंग ने अपनी नई Mini LED TV सीरीज लॉन्च कर दी है, जो प्रीमियम डिस्प्ले और AI फीचर्स के साथ स्मार्ट टीवी सेगमेंट में नया अनुभव देने का दावा करती है। इस सीरीज में 43 इंच से लेकर 100 इंच तक के बड़े स्क्रीन टीवी शामिल हैं, जिनकी शुरुआती कीमत लगभग 42,990 रुपये रखी गई है। कंपनी के अनुसार, ये टीवी फिलहाल सैमसंग की आधिकारिक वेबसाइट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। नई सीरीज में Mini LED बैकलाइट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे बेहतर ब्राइटनेस, गहरा कंट्रास्ट और ज्यादा रियलिस्टिक कलर आउटपुट मिलता है। डिजाइन की बात करें तो इसमें मेटलस्ट्रीम फिनिश दिया गया है, जो एयरक्राफ्ट डिजाइन से प्रेरित है। इसका अल्ट्रा-स्लिम बॉडी और पतले बेजल्स इसे प्रीमियम लुक देते हैं। Stock Market Crash todayवैश्विक तनाव की मार से डगमगाया बाजार: सेंसेक्स 516 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर इन टीवी को कंपनी के NQ4 AI Gen2 प्रोसेसर से पावर किया गया है, जो 20 न्यूरल नेटवर्क की मदद से पिक्चर और साउंड को रियल टाइम में ऑप्टिमाइज करता है। इसमें AI अपस्केलिंग, मोशन Xcelerator 144Hz और AI साउंड कंट्रोल जैसी एडवांस्ड तकनीकें दी गई हैं, जो गेमिंग और स्पोर्ट्स व्यूइंग अनुभव को और स्मूद बनाती हैं। सिक्योरिटी के लिए Samsung Knox Security सिस्टम दिया गया है, जो यूजर डेटा और कनेक्टेड डिवाइसेज को सुरक्षित रखता है। ये टीवी SmartThings सपोर्ट के साथ आते हैं और One UI Tizen पर चलते हैं, जिसमें 7 साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलने का दावा किया गया है। लॉन्च ऑफर के तहत कंपनी 5% तक कैशबैक और नो-कॉस्ट EMI जैसे फायदे भी दे रही है, जिससे ग्राहक इसे आसान किस्तों में खरीद सकते हैं। साथ ही, यूजर्स को Samsung TV Plus का फ्री एक्सेस भी मिलेगा, जिसमें कई लाइव चैनल और कंटेंट उपलब्ध हैं।

Google Chrome Alert: बिना बताए 4GB की AI फाइल डाउनलोड कर रहा ब्राउजर? स्टोरेज और डेटा पर बड़ा खतरा!

Google Chrome Alert: नई दिल्ली। Google Chrome को लेकर सामने आई नई रिपोर्ट ने करोड़ों यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि Chrome कुछ डिवाइसेज में बिना किसी स्पष्ट अनुमति के लगभग 4GB का AI मॉडल डाउनलोड कर रहा है। यह फाइल Chrome के नए ऑन-डिवाइस AI फीचर्स से जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि कंपनी की तरफ से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस खुलासे ने प्राइवेसी, डेटा खपत और सिस्टम स्टोरेज को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। सिक्योरिटी रिसर्चर Alexander Hanff ने दावा किया कि Chrome यूजर के सिस्टम हार्डवेयर की जांच करने के बाद अपने आप AI मॉडल डाउनलोड करना शुरू कर देता है। अगर कंप्यूटर या लैपटॉप इस मॉडल को रन करने में सक्षम होता है, तो ब्राउजर बैकग्राउंड में भारी फाइल डाउनलोड कर लेता है। कई यूजर्स को इसका पता तब चलता है, जब उनकी स्टोरेज अचानक कम होने लगती है या इंटरनेट डेटा तेजी से खत्म हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर ने macOS सिस्टम पर टेस्टिंग के दौरान पाया कि Chrome ने बिना किसी नोटिफिकेशन के “OptGuideOnDeviceModel” नाम का फोल्डर बनाया और करीब 14 मिनट में लगभग 4GB डेटा डाउनलोड कर लिया। बताया जा रहा है कि यह फाइल Chrome के AI फीचर्स जैसे स्मार्ट राइटिंग असिस्टेंट और ऑन-डिवाइस सर्च प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि Chrome के कई AI फीचर्स अब भी क्लाउड सर्वर पर निर्भर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह भारी AI मॉडल हर यूजर के लिए जरूरी भी है या नहीं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीमित स्टोरेज वाले सिस्टम में यह फाइल डिवाइस की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती है। Windows 11 यूजर्स अपने सिस्टम में इस फाइल को %LOCALAPPDATA%GoogleChromeUser DataOptGuideOnDeviceModel लोकेशन पर खोज सकते हैं। हालांकि केवल फोल्डर डिलीट करने से समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि Chrome इसे दोबारा डाउनलोड कर सकता है। इससे बचने के लिए यूजर्स Chrome में chrome://flags खोलकर “optimization-related on-device AI” सेटिंग को Disable कर सकते हैं। कुछ साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूरी तरह बचने का सबसे सख्त तरीका Chrome को अनइंस्टॉल करना हो सकता है। यह मामला खासतौर पर उन यूजर्स के लिए चिंता का विषय बन गया है, जो सीमित इंटरनेट डेटा प्लान या कम स्टोरेज वाले लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं। बैकग्राउंड में होने वाला यह डाउनलोड न सिर्फ डेटा खत्म कर सकता है, बल्कि बैटरी और सिस्टम रिसोर्स पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है। फिलहाल यूजर्स Google की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

Google Fitbit Air Launch: 5 मिनट चार्ज में दिनभर चलेगा ट्रैकर, 7 दिन की बैटरी और AI हेल्थ फीचर्स ने बढ़ाई हलचल

Google Fitbit Air Launch: नई दिल्ली। Google Fitbit ने ग्लोबल मार्केट में अपना नया फिटनेस ट्रैकर Fitbit Air लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है, जो हल्का, आरामदायक और लंबे समय तक पहनने लायक स्मार्ट फिटनेस ट्रैकर चाहते हैं। शानदार बैटरी लाइफ, एडवांस स्लीप ट्रैकिंग और Google Health सपोर्ट जैसे फीचर्स इसे खास बनाते हैं। Fitbit Air को बेहद हल्के डिजाइन के साथ पेश किया गया है, ताकि यूजर्स इसे दिन और रात दोनों समय आराम से पहन सकें। खासतौर पर यह उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जो दिन में स्मार्टवॉच और रात में स्लीप ट्रैकिंग के लिए अलग डिवाइस इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। कंपनी के मुताबिक यह डिवाइस रनिंग, रिकवरी और हेल्थ डेटा को काफी सटीक तरीके से ट्रैक करता है। Google ने अपनी पुरानी Fitbit App को अब Google Health App के रूप में रीब्रांड किया है और नया Fitbit Air इसी प्लेटफॉर्म के साथ काम करेगा। बैटरी के मामले में भी यह डिवाइस काफी दमदार बताया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, एक बार फुल चार्ज करने पर यह ट्रैकर लगभग 7 दिनों तक चलता है। वहीं इसकी फास्ट चार्जिंग तकनीक यूजर्स को सिर्फ 5 मिनट चार्ज में पूरे दिन का बैकअप देने का दावा करती है। यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने इसके साथ कई तरह के बैंड ऑप्शन भी पेश किए हैं। वर्कआउट और फिटनेस एक्टिविटी के लिए Performance Loop और Active Loop दिए गए हैं, जबकि रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए Elevated Loop बैंड उपलब्ध कराया गया है। कीमत की बात करें तो Fitbit Air को 99.99 डॉलर यानी करीब 8,300 रुपये में लॉन्च किया गया है। फिलहाल अमेरिका में इसकी प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है। यह डिवाइस Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म को सपोर्ट करता है। कंपनी यूजर्स को 3 महीने का Google Health Premium सब्सक्रिप्शन भी मुफ्त दे रही है, जिसके जरिए हेल्थ कोचिंग और एडवांस फिटनेस फीचर्स का फायदा उठाया जा सकेगा। फिटनेस और हेल्थ गैजेट्स के बढ़ते बाजार में Google का यह नया ट्रैकर सीधे तौर पर स्मार्ट फिटनेस बैंड सेगमेंट में बड़ी कंपनियों को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।

Apple India Policy: भारत में iPhone खरीदते ही फंस जाते हैं ग्राहक! अमेरिका में 14 दिन तक मिलता है रिटर्न का अधिकार

Apple India Policy: नई दिल्ली। Apple की भारत और अमेरिका में अलग-अलग रिटर्न पॉलिसी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अगर आप भारत में iPhone, MacBook या कोई दूसरा Apple प्रोडक्ट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो कंपनी की रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी जानना बेहद जरूरी है। भारत में Apple Store से खरीदे गए प्रोडक्ट्स पर कंपनी की नीति अमेरिका के मुकाबले काफी सख्त मानी जाती है। यही वजह है कि कई ग्राहक इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। भारत में Apple ने सबसे पहले अपने ऑनलाइन स्टोर के जरिए एंट्री की थी। इसके बाद कंपनी ने मुंबई, दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में अपने आधिकारिक रिटेल स्टोर खोले। अब देश में Apple की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ग्राहकों को यहां वह सुविधा नहीं मिलती जो अमेरिका में आम बात है। भारत में Apple Store से खरीदा गया कोई भी प्रोडक्ट सिर्फ पसंद न आने या मन बदलने की स्थिति में वापस नहीं किया जा सकता। कंपनी की स्पष्ट पॉलिसी है कि सामान्य परिस्थितियों में रिफंड और एक्सचेंज की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। Google Chrome Alert: बिना बताए 4GB की AI फाइल डाउनलोड कर रहा ब्राउजर? स्टोरेज और डेटा पर बड़ा खतरा! हालांकि, अगर खरीदा गया डिवाइस डिफेक्टिव निकलता है या वारंटी के दायरे में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो ग्राहक को राहत मिल सकती है। ऐसे मामलों में Apple अधिकृत सर्विस सेंटर के जरिए रिपेयर या कुछ परिस्थितियों में रिप्लेसमेंट की सुविधा देता है। जिन ग्राहकों ने Apple Care+ लिया है, उन्हें अतिरिक्त सर्विस सपोर्ट भी मिलता है। दूसरी तरफ अमेरिका में Apple की नीति कहीं ज्यादा ग्राहक-अनुकूल मानी जाती है। वहां ग्राहक डिलीवरी मिलने के 14 दिनों के भीतर प्रोडक्ट को वापस कर सकते हैं या एक्सचेंज करा सकते हैं, बशर्ते उनके पास खरीद की रसीद और प्रोडक्ट सही स्थिति में हो। यही वजह है कि भारत और अमेरिका की नीतियों के बीच बड़ा अंतर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया कि दोनों देशों में अलग-अलग नियम क्यों लागू किए गए हैं, लेकिन माना जाता है कि बाजार की प्रकृति, ग्राहकों के व्यवहार, लॉजिस्टिक लागत और व्यापारिक रणनीति इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती है। फिर भी भारतीय ग्राहक लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि Apple को भारत में भी अमेरिका जैसी आसान रिटर्न और एक्सचेंज सुविधा शुरू करनी चाहिए, ताकि ग्राहकों का भरोसा और अनुभव दोनों बेहतर हो सकें।