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यंग टीम इंडिया को मिलेगा खुद को साबित करने का अवसर, अफगानिस्तान टेस्ट पर सबा करीम का बयान

नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान के बीच 6 जून से न्यू पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेले जाने वाले एकमात्र टेस्ट मैच को लेकर पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज सबा करीम ने अहम टिप्पणी की है। उनका मानना है कि यह मुकाबला टीम इंडिया के लिए केवल एक मैच नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत नींव रखने का बड़ा अवसर है। सबा करीम ने जियोहॉटस्टार पर बातचीत में कहा कि भले ही यह टेस्ट विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह शुभमन गिल की कप्तानी में बन रही नई टीम के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, इस मैच के जरिए टीम अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की कमजोरियों को पहचानकर सुधार सकती है। युवाओं को मौका देने का सही समयकरीम ने कहा कि भारतीय टीम को अब घरेलू मैदानों पर अपना दबदबा फिर से मजबूत करने की जरूरत है। ऐसे में यह टेस्ट मैच उभरते हुए खिलाड़ियों को परखने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने का सही मंच हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर युवा खिलाड़ी इस मौके पर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें आगे बड़ी सीरीज, खासकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मुकाबलों में जगह मिलने की संभावना मजबूत होगी। करीम के मुताबिक, भारतीय टेस्ट क्रिकेट इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां सिर्फ मैच जीतना ही लक्ष्य नहीं बल्कि एक संतुलित और मजबूत टीम तैयार करना भी जरूरी है। गेंदबाजी में जिम्मेदारी का केंद्र बने सिराजटीम इंडिया की गेंदबाजी पर बात करते हुए सबा करीम ने कहा कि जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में मोहम्मद सिराज पर जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। उन्होंने इंग्लैंड दौरे पर सिराज के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है। करीम ने कहा कि सिराज में गति, आक्रामकता और दोनों दिशाओं में स्विंग कराने की क्षमता है। ऐसे में वह न सिर्फ गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व कर सकते हैं, बल्कि युवा गेंदबाजों के लिए प्रेरणा भी बन सकते हैं। हालांकि, उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग की भी जरूरत होगी ताकि टीम बेहतर प्रदर्शन कर सके। नई टीम, नया संतुलन और बड़ा अवसरसबा करीम का मानना है कि यह टेस्ट मैच चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के लिए नए संयोजन आजमाने का बेहतरीन मौका है। इससे यह तय किया जा सकता है कि आने वाले समय में भारतीय टेस्ट टीम का संतुलन कैसा होगा और कौन से खिलाड़ी लंबे समय तक टीम का हिस्सा बन सकते हैं।

जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां

नई दिल्ली । फुटबॉल के सबसे बड़े मंच FIFA World Cup में जहां हर खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना सपना मानता है, वहीं कुछ परिवार ऐसे भी रहे हैं जिनमें यह सपना दो पीढ़ियों तक पूरा हुआ। कई दिग्गज खिलाड़ियों ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप में जगह बनाई। 1. लुइस और मारियो पेरेज (मेक्सिको)पिता लुइस पेरेज ने 1930 के विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया था। उनके बेटे मारियो पेरेज ने 1950 के वर्ल्ड कप में राष्ट्रीय टीम की ओर से खेला। हालांकि दोनों ही अपने-अपने विश्व कप में गोल नहीं कर सके। 2. मार्टी और जोस वैंटोलरा (स्पेन/मेक्सिको)मार्टी वैंटोलरा 1934 में स्पेन की टीम का हिस्सा थे, जबकि उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 में मेक्सिको के लिए विश्व कप खेला। दोनों ही खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो पाए। 3. डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राजील)डोमिंगोस ने 1938 में Brazil national football team की ओर से विश्व कप खेला। उनके बेटे अदेमिर दा गुइया 1974 में ब्राजील टीम का हिस्सा रहे, लेकिन सीमित अवसरों में उन्हें भी गोल नहीं मिला। 4. रोजर और पैट्रिस रियो (फ्रांस)रोजर रियो ने 1934 में France national football team के लिए विश्व कप खेला। उनके बेटे पैट्रिस रियो 1978 में फ्रांस की टीम में शामिल रहे, लेकिन वे भी गोल नहीं कर सके। 5. निकोले और इओन लुपस्कु (रोमानिया)निकोले लुपस्कु ने 1970 विश्व कप में रोमानिया का प्रतिनिधित्व किया। उनके बेटे इओन लुपस्कु 1990 और 1994 के वर्ल्ड कप में टीम का हिस्सा रहे और कुल 8 मैच खेले, लेकिन गोल नहीं कर पाए। विरासत की कहानीये सभी जोड़ियां इस बात का प्रतीक हैं कि विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली फुटबॉल परंपरा भी है, जहां एक ही परिवार का नाम दो अलग-अलग युगों में इतिहास बनाता है।

जब टेस्ट क्रिकेट में आमने-सामने आए भारत और अफगानिस्तान, किसका रहा दबदबा?

नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान के बीच महामुकाबला: मुल्लांपुर टेस्ट में युवा जोश के साथ उतरेगी टीम इंडियाक्रिकेट प्रेमियों का इंतजार खत्म होने जा रहा है क्योंकि भारत और अफगानिस्तान की टीमें पूरे आठ साल बाद टेस्ट क्रिकेट के सबसे लंबे और पारंपरिक प्रारूप में एक बार फिर टकराने के लिए तैयार हैं। दोनों देशों के बीच यह एकमात्र टेस्ट मैच शनिवार से मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम इस मुकाबले में नए और युवा कप्तान शुभमन गिल की अगुआई में अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान क्रिकेट टीम इस बार मजबूत तैयारी के साथ इतिहास रचने की पुरजोर कोशिश करेगी। अगर दोनों टीमों के हेड टू हेड रिकॉर्ड और इतिहास पर नजर डालें, तो टेस्ट प्रारूप में भारत का पलड़ा पूरी तरह भारी रहा है। भारत और अफगानिस्तान के बीच अब तक टेस्ट इतिहास में केवल एक ही मुकाबला खेला गया है। यह ऐतिहासिक मैच वर्ष 2018 में बेंगलुरु के मैदान पर आयोजित हुआ था, जो अफगानिस्तान के क्रिकेट इतिहास का पहला टेस्ट मैच भी था। उस मुकाबले में भारतीय टीम ने खेल के हर विभाग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अफगानिस्तान को एक पारी और 262 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त दी थी। यह ऐतिहासिक जीत आज भी टेस्ट क्रिकेट में रनों और पारी के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी जीतों में शुमार की जाती है। हालांकि, तब से लेकर अब तक वक्त काफी बदल चुका है और अफगान टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई पहचान बनाई है। इस बार मुल्लांपुर टेस्ट के लिए भारतीय चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए टीम में कई नए और युवा चेहरों को शामिल किया है, जिन पर चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित करने का दारोमदार होगा। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी चमक बिखेरने वाले देवदत्त पडिक्कल को टीम में मौका मिला है। इसके अलावा पहली बार भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बने मानव सुथार, तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ और फिरकी गेंदबाज हर्ष दुबे जैसी नई प्रतिभाओं पर भी सभी खेल प्रेमियों और जानकारों की खास निगाहें टिकी रहेंगी। कागज पर भारतीय टीम का बल्लेबाजी क्रम बेहद मजबूत, संतुलित और आक्रामक नजर आ रहा है। टीम के पास यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, ऋषभ पंत और देवदत्त पडिक्कल जैसे मैच जिताऊ बल्लेबाज मौजूद हैं। पिछले कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के लिए यह टेस्ट मैच अपनी लय और पुरानी फॉर्म में वापस लौटने का एक बेहतरीन सुनहरा अवसर माना जा रहा है। इसके साथ ही युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल और साई सुदर्शन भी भारतीय सरजमीं पर एक बड़ी और यादगार पारी खेलने के प्रबल दावेदार के रूप में उतरेंगे। भले ही आंकड़े और परिस्थितियां टीम इंडिया के पक्ष में दिख रही हों, लेकिन भारतीय टीम अफगानिस्तान को किसी भी कीमत पर हल्के में लेने की भूल नहीं कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान ने सीमित ओवरों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बेहद तेजी से प्रगति की है। उनके कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी, आक्रामक ओपनर रहमानुल्लाह गुरबाज, अनुभवी रहमत शाह और ऑलराउंडर अजमतुल्लाह उमरजई जैसे धाकड़ खिलाड़ी किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं। हालांकि भारतीय टीम घरेलू परिस्थितियों में बेहद मजबूत है, लेकिन अफगानिस्तान के पास उलटफेर करने की पूरी क्षमता है, जिससे यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।

वैभव के बल्ले ने जीता विदेशी स्टार का दिल, लिविंगस्टन ने की जमकर तारीफ

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से रिकॉर्ड बुक्स को हिला देने वाले युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi की तारीफ में अब विदेशी क्रिकेटर भी कसीदे पढ़ रहे हैं। इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर Liam Livingstone ने वैभव की बल्लेबाजी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने पूरे क्रिकेट करियर में ऐसी बल्लेबाजी पहले कभी नहीं देखी। लिविंगस्टन ने ‘स्टिक टू क्रिकेट’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि आईपीएल में यह उनका सातवां सीजन था और उन्होंने दुनिया के कई बेहतरीन बल्लेबाजों को करीब से देखा है, लेकिन वैभव की बल्लेबाजी कुछ अलग ही स्तर की थी। उन्होंने कहा, “मैंने इस तरह की बल्लेबाजी पहले कभी नहीं देखी। मैं कई महान खिलाड़ियों के साथ खेल चुका हूं, लेकिन वैभव जैसा प्रभाव किसी ने नहीं छोड़ा।” एलिमिनेटर में मचाया था तूफानवैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए एलिमिनेटर मुकाबले में Sunrisers Hyderabad के खिलाफ सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 5 चौके और 12 छक्के जड़कर विपक्षी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। उनकी इस पारी ने कई रिकॉर्ड तोड़े और क्रिकेट विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। यही मैच लिविंगस्टन के लिए भी सबसे यादगार अनुभवों में से एक बन गया। ‘मिस हिट नाम की चीज नहीं थी’लिविंगस्टन ने वैभव की तकनीक और शॉट चयन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वैभव गेंद को इतनी सफाई से मारते हैं कि उनके शॉट्स में मिस हिट लगभग देखने को नहीं मिलती। उन्होंने बताया, “शुरुआत में हमने उन्हें बाउंसर पर आउट किया था, लेकिन इसके बाद उन्होंने जिस तरह अपने खेल में सुधार किया, वह अविश्वसनीय था। जब हम बाउंसर डालते तो वह गेंद को थर्ड मैन की दिशा में भेज देते। फुल लेंथ गेंद डालते तो उसे भी बाउंड्री के पार पहुंचा देते। हमें समझ ही नहीं आता था कि आखिर उन्हें गेंद कहां फेंकी जाए।” आईपीएल 2026 में बनाया नया इतिहासवैभव के लिए आईपीएल 2026 सपनों जैसा रहा। उन्होंने 16 मुकाबलों में 776 रन बनाए और 237 के शानदार स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। इस प्रदर्शन के दम पर वह ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। इतना ही नहीं, उन्होंने टी20 दिग्गज Chris Gayle का बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। पूरे सीजन में 72 छक्के लगाकर वैभव आईपीएल के एक सीजन में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। महज 15 साल की उम्र में जिस तरह वैभव सूर्यवंशी ने घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी है, उसे देखते हुए क्रिकेट विशेषज्ञ उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सुपरस्टार मान रहे हैं।

अफगानिस्तान सीरीज से विराट कोहली के बाहर होने की खबर, भारतीय टीम की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । अफगानिस्तान के खिलाफ 13 जून से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज Virat Kohli हैमस्ट्रिंग चोट के कारण सीरीज से बाहर हो सकते हैं। हालांकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार विराट कोहली फिलहाल हैमस्ट्रिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। चोट कब और कैसे लगी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान परेशानी हुई थी। फाइनल में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। कोहली की संभावित गैरमौजूदगी भारतीय टीम के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। खास बात यह है कि कप्तान Rohit Sharma की फिटनेस को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। रोहित और Hardik Pandya दोनों को वनडे टीम में शामिल किया गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें सीरीज से पहले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। 13 जून से शुरू होगी सीरीजभारत और Afghanistan national cricket team के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेला जाएगा। दूसरा मैच 17 जून को लखनऊ में होगा, जबकि तीसरा और अंतिम मुकाबला 20 जून को चेन्नई के M. A. Chidambaram Stadium में आयोजित किया जाएगा। यदि विराट कोहली वास्तव में सीरीज से बाहर होते हैं, तो टीम प्रबंधन को मध्यक्रम में नया संयोजन तैयार करना पड़ सकता है। चयनकर्ता युवा खिलाड़ियों को मौका देने पर भी विचार कर सकते हैं। आईपीएल 2026 में रहा शानदार प्रदर्शनविराट कोहली का आईपीएल 2026 सीजन बेहद शानदार रहा था। उन्होंने 16 मैचों में 675 रन बनाए और टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में चौथे स्थान पर रहे। उनका स्ट्राइक रेट 165 का रहा, जो उनके टी20 करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। फाइनल मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 42 गेंदों में नाबाद 75 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 25 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर आईपीएल फाइनल में अपनी सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड भी बनाया। उनकी शानदार बल्लेबाजी की बदौलत उनकी टीम लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने में सफल रही। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर भारतीय टीम प्रबंधन और मेडिकल अपडेट पर टिकी है। यदि कोहली पूरी तरह फिट नहीं होते हैं तो अफगानिस्तान सीरीज में भारत को अपने सबसे अनुभवी बल्लेबाज के बिना मैदान में उतरना पड़ सकता है।

वैभव सूर्यवंशी को लेकर आकाश चोपड़ा ने खोले पत्ते, बताया चयन में क्या है सबसे बड़ी बाधा

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचने वाले युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को भारतीय टी20 टीम में शामिल किए जाने की मांग लगातार उठ रही है। हालांकि पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर Aakash Chopra का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वैभव को राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने के लिए अभी कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है। आकाश चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि भारतीय टी20 टीम में ओपनिंग और टॉप ऑर्डर की जगहों के लिए पहले से ही कड़ा मुकाबला है। उनके अनुसार Sanju Samson और Abhishek Sharma लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे वैभव के लिए तत्काल अवसर बनना मुश्किल दिखाई देता है। चोपड़ा ने विशेष रूप से संजू सैमसन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने टी20 विश्व कप 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन किया और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे। ऐसे में उनकी जगह किसी युवा खिलाड़ी को मौका देना चयनकर्ताओं के लिए आसान फैसला नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभिषेक शर्मा पिछले काफी समय से टी20 क्रिकेट में निरंतर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों में गिने जा रहे हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन उनके स्थान पर भी बदलाव करने की जल्दी में नहीं होगा। हालांकि आकाश चोपड़ा ने वैभव की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि 15 वर्षीय बल्लेबाज असाधारण क्षमता रखते हैं और भविष्य में भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन सकते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर पाने के लिए उन्हें थोड़ा धैर्य रखना होगा और लगातार प्रदर्शन जारी रखना होगा। आईपीएल 2026 में बनाया इतिहासवैभव सूर्यवंशी का आईपीएल 2026 सीजन बेहद शानदार रहा। उन्होंने 16 मैचों में 237 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए और ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। पूरे टूर्नामेंट में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी चर्चा का विषय रही। इतना ही नहीं, वैभव ने टी20 दिग्गज Chris Gayle का एक बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा 72 छक्के लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। एलिमिनेटर और दूसरे क्वालिफायर में उनकी मैच जिताऊ पारियों ने उनकी लोकप्रियता और बढ़ा दी। अब श्रीलंका दौरे पर नजरेंवैभव को श्रीलंका में होने वाली त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। 9 जून से शुरू होने वाली इस प्रतियोगिता में उनका प्रदर्शन चयनकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। यदि वे यहां भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं, तो निकट भविष्य में राष्ट्रीय टी20 टीम के दरवाजे उनके लिए और मजबूती से खुल सकते हैं। फिलहाल क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का भविष्य हैं, लेकिन टीम इंडिया में स्थायी जगह बनाने के लिए उन्हें अपने प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखनी होगी।

जब अनुभव ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप में गोल दागने वाले सबसे उम्रदराज फुटबॉलरों की कहानी

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता है। यहां गोल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होता है। कई खिलाड़ी अपने करियर के शुरुआती दौर में चमकते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने बढ़ती उम्र के बावजूद विश्व मंच पर शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया। आइए जानते हैं फीफा विश्व कप के इतिहास में सबसे अधिक उम्र में गोल करने वाले पांच खिलाड़ियों के बारे में। 1. Roger Milla (कैमरून) – 42 वर्ष, 39 दिनफीफा विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक उम्र में गोल करने का रिकॉर्ड कैमरून के महान फुटबॉलर रोजर मिला के नाम दर्ज है। उन्होंने 1994 विश्व कप में रूस के खिलाफ मुकाबले में 42 वर्ष और 39 दिन की उम्र में गोल किया था। हालांकि यह मैच कैमरून 6-1 से हार गया था, लेकिन रोजर मिला का यह रिकॉर्ड आज भी कायम है। उनकी उपलब्धि को विश्व फुटबॉल के सबसे यादगार रिकॉर्ड्स में गिना जाता है। 2. Pepe (पुर्तगाल) – 39 वर्ष, 283 दिनपुर्तगाल के अनुभवी डिफेंडर पेपे ने 2022 फीफा विश्व कप में स्विट्जरलैंड के खिलाफ शानदार गोल कर इतिहास रच दिया था। 39 वर्ष और 283 दिन की उम्र में किया गया उनका यह गोल उन्हें विश्व कप में गोल करने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनाता है। उस मुकाबले में पुर्तगाल ने स्विट्जरलैंड को 6-1 से हराया था। 3. Cristiano Ronaldo (पुर्तगाल) – 37 वर्ष, 292 दिविश्व फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में से एक क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी इस सूची में शामिल हैं। उन्होंने 2022 विश्व कप में घाना के खिलाफ ग्रुप चरण के मैच में 37 वर्ष और 292 दिन की उम्र में गोल किया था। यह गोल मैच का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और पुर्तगाल ने मुकाबला 3-2 से अपने नाम किया। रोनाल्डो विश्व कप के पांच अलग-अलग संस्करणों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी हैं। 4. Gunnar Gren (स्वीडन) – 37 वर्ष, 236 दिनस्वीडन के दिग्गज खिलाड़ी गुन्नार ग्रेन ने 1958 फीफा विश्व कप में पश्चिमी जर्मनी के खिलाफ 37 वर्ष और 236 दिन की उम्र में गोल किया था। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत स्वीडन ने वह मुकाबला 3-1 से जीता। गुन्नार अपने दौर के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। 5. Cuauhtémoc Blanco (मेक्सिको) – 37 वर्ष, 151 दिनमेक्सिको के अनुभवी स्टार कुआउतेमोक ब्लैंको ने 2010 विश्व कप में फ्रांस के खिलाफ 37 वर्ष और 151 दिन की उम्र में गोल किया था। उनके गोल ने मेक्सिको की 2-0 की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ब्लैंको अपनी तकनीकी क्षमता और नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। क्या मेसी या रोनाल्डो तोड़ पाएंगे रिकॉर्ड?2026 फीफा वर्ल्ड कप में सभी की निगाहें Lionel Messi और Cristiano Ronaldo पर रहेंगी। यदि दोनों खिलाड़ी टूर्नामेंट में गोल करते हैं, तो उम्र के आधार पर कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड उनके नाम हो सकते हैं। हालांकि रोजर मिला का 42 वर्ष की उम्र में बनाया गया रिकॉर्ड अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

निसांका-मेंडिस का बल्ला गरजा, श्रीलंका ने पहले वनडे में वेस्टइंडीज को 41 रन से हराया

मध्य प्रदेश । Sri Lanka national cricket team ने वेस्टइंडीज दौरे का आगाज शानदार जीत के साथ किया। किंग्स्टन के Sabina Park में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में श्रीलंका ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन करते हुए West Indies cricket team को 41 रन से मात दी। इस जीत के साथ श्रीलंका ने वनडे सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 303 रन बनाए। टीम की शुरुआत भले ही जल्दी झटका लगने से हुई, लेकिन इसके बाद Pathum Nissanka और Kusal Mendis ने पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 136 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। निसांका ने 103 गेंदों पर 79 रन की संयमित पारी खेली, जिसमें 9 चौके और एक छक्का शामिल रहा। वहीं कुशल मेंडिस ने सिर्फ 62 गेंदों में 72 रन ठोकते हुए रनगति को तेज बनाए रखा। कप्तान Charith Asalanka ने 45 रन का उपयोगी योगदान दिया, जबकि अंत में Janith Liyanage ने 29 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाकर टीम का स्कोर 300 के पार पहुंचाया। 304 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत ठीक रही। John Campbell और Justin Greaves ने पहले विकेट के लिए 50 रन जोड़े। हालांकि इसके बाद नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। कप्तान Shai Hope ने जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 56 रन बनाए और टीम को मुकाबले में बनाए रखने की कोशिश की। Roston Chase ने 33 रन और जस्टिन ग्रीव्स ने 45 रन का योगदान दिया, लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। श्रीलंका की ओर से तेज गेंदबाज Dushmantha Chameera जीत के सबसे बड़े नायक साबित हुए। उन्होंने 67 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट झटके और वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। Maheesh Theekshana ने दो विकेट हासिल किए, जबकि Wanindu Hasaranga को एक सफलता मिली। वेस्टइंडीज की पूरी टीम 49.2 ओवर में 262 रन पर सिमट गई और श्रीलंका ने 41 रन की प्रभावशाली जीत दर्ज कर सीरीज में बढ़त बना ली। निसांका और मेंडिस की साझेदारी तथा चमीरा की घातक गेंदबाजी इस जीत की सबसे बड़ी वजह रही।

T20 कप्तानी पर बड़ा संकट: सूर्यकुमार यादव पर खतरा, श्रेयस अय्यर रेस में सबसे आगे

नई दिल्ली । टीम इंडिया की टी20 कप्तानी को लेकर बड़ा बदलाव चर्चा में आ गया है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 और आईपीएल 2026 के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव के प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते उनके नेतृत्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार अब चयनकर्ता भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए नए कप्तान की तलाश में हैं। इस रेस में सबसे आगे नाम सामने आ रहा है Shreyas Iyer का, जिन्हें एक मजबूत नेतृत्व विकल्प माना जा रहा है। वहीं उप-कप्तानी के लिए तिलक वर्मा और ईशान किशन जैसे युवा खिलाड़ियों के नाम भी चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि टीम मैनेजमेंट केवल मौजूदा सीरीज ही नहीं, बल्कि अगले दो टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए लंबे समय के लिए कप्तान चुनने की योजना पर काम कर रहा है। इसी कारण चयनकर्ता ऐसे खिलाड़ी को जिम्मेदारी देना चाहते हैं जो लगातार प्रदर्शन के साथ टीम को स्थिर नेतृत्व दे सके। श्रेयस अय्यर के पक्ष में सबसे बड़ा कारण उनका आईपीएल में कप्तानी अनुभव और लगातार बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। उन्होंने घरेलू और लीग क्रिकेट में अपनी लीडरशिप क्षमता साबित की है। साथ ही उन्हें टी20 टीम में मध्यक्रम की अहम जिम्मेदारी देने पर भी विचार किया जा रहा है। इस बीच मौजूदा कप्तान Suryakumar Yadav की खराब फॉर्म चिंता का विषय बनी हुई है। टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के कारण उनकी कप्तानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। चयन प्रक्रिया को लेकर मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar और हेड कोच Gautam Gambhir के बीच चर्चा की भी खबरें हैं। दोनों के बीच रणनीतिक दृष्टिकोण को लेकर मतभेद की बातें सामने आ रही हैं, हालांकि अंतिम फैसला चयन समिति की सहमति से ही लिया जाएगा। टीम इंडिया के लिए आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, जहां कप्तानी को लेकर अंतिम संकेत मिल सकते हैं। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि क्या सूर्यकुमार यादव अपनी कप्तानी बचा पाएंगे या फिर भारतीय टी20 क्रिकेट में एक नए नेतृत्व युग की शुरुआत श्रेयस अय्यर के हाथों होगी।

वैभव सूर्यवंशी के ‘साये’ में कौन है यह शख्स? मैदान से लेकर डगआउट तक निभा रहा बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपने धमाकेदार प्रदर्शन से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। लेकिन उनके रिकॉर्ड्स और सफलता के पीछे एक ऐसा शख्स भी है, जो कैमरों की चमक से दूर रहकर लगातार उनके साथ एक साये की तरह खड़ा रहा। यह शख्स है Romy Bhinder, जो न सिर्फ राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर हैं, बल्कि वैभव के गार्जियन और मेंटर की भूमिका भी निभा रहे हैं। आईपीएल के पूरे सीजन के दौरान रोमी भिंडर को अक्सर डगआउट, बाउंड्री लाइन, टीम बस और पोस्ट मैच इवेंट्स में वैभव के साथ देखा गया। जब भी युवा खिलाड़ी मैदान पर उतरे या किसी बड़े पल का हिस्सा बने, रोमी हमेशा उनके आसपास मौजूद रहे। यही वजह है कि फैंस के बीच यह सवाल लगातार उठता रहा कि आखिर यह शख्स कौन है जो हर जगह उनके साथ नजर आता है। असल में, नाबालिग खिलाड़ी होने के चलते BCCI और IPL नियमों के तहत वैभव सूर्यवंशी के लिए एक आधिकारिक गार्जियन का होना जरूरी था। बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव से निकलकर अचानक क्रिकेट की दुनिया में सुर्खियां बटोरने वाले इस युवा खिलाड़ी के लिए रोमी भिंडर वही सहारा बने, जिन्होंने उन्हें आईपीएल की तेज रफ्तार, दबाव और ग्लैमर के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद की। रोमी भिंडर का क्रिकेट से जुड़ा अनुभव भी काफी लंबा है। वे इंग्लैंड में क्लब क्रिकेट खेल चुके हैं और भारत में विदर्भ, महाराष्ट्र तथा नागपुर यूनिवर्सिटी स्तर पर क्रिकेट से जुड़े रहे हैं। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट मैनेजमेंट और टैलेंट डेवलपमेंट में अपनी पहचान बनाई। वर्ल्ड क्रिकेट अकादमी से जुड़े रहने के साथ-साथ वे ग्रासरूट क्रिकेट और युवा खिलाड़ियों के विकास में भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। आईपीएल में भी उनका अनुभव करीब दो दशक पुराना है। राजस्थान रॉयल्स से उनका जुड़ाव पहले सीजन से ही रहा है, जहां उन्होंने लायजन ऑफिसर और असिस्टेंट मैनेजर जैसी भूमिकाएं निभाई हैं। हालांकि आईपीएल 2026 में एक मैच के दौरान उनका मोबाइल इस्तेमाल करते हुए एक वीडियो सामने आने के बाद वे विवादों में भी आए थे। बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट ने उन्हें नोटिस जारी किया और बाद में जुर्माना भी लगाया गया, हालांकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मामला गंभीर नियम उल्लंघन का नहीं था। इसके बावजूद, मैदान के अंदर और बाहर रोमी भिंडर ने वैभव के लिए एक मजबूत सहारा बनकर काम किया। जब युवा खिलाड़ी शतक से चूककर भावुक हुए, तब भी रोमी ने उन्हें संभाला और हौसला बढ़ाया। आज जब वैभव सूर्यवंशी अपने प्रदर्शन से नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, तब उनके पीछे खड़े इस गुमनाम लेकिन महत्वपूर्ण शख्स की भूमिका भी उतनी ही बड़ी मानी जा रही है, जो उन्हें हर कदम पर मार्गदर्शन और सुरक्षा देता नजर आता है।