इंदौर। शहर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अब एक नया मामला सामने आया है, जिसमें एक निजी बैंक की फाइनेंस रिलेशनशिप मैनेजर युवती को क्रेडिट कार्ड बंद कराने के नाम पर 2 लाख 47 हजार रुपये की चपत लगा दी गई। आरोपी ने खुद को बैंक का कर्मचारी बताकर बेहद शातिर तरीके से उसे अपने जाल में फंसा लिया।
मामला मल्हारगंज थाना क्षेत्र का है, जहां 25 वर्षीय युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता का कहना है कि उसका एचडीएफसी बैंक में खाता है और उसे जनवरी 2026 में क्रेडिट कार्ड जारी किया गया था। हालांकि कार्ड की जरूरत नहीं होने के कारण उसने उसे बंद कराने का निर्णय लिया था।
इसी दौरान उसने अप्रैल महीने में गूगल पर बैंक का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया। यहीं से ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया। 14 अप्रैल को आए एक कॉल में आरोपी ने खुद को एचडीएफसी बैंक का अधिकारी बताया और बड़ी चालाकी से युवती का भरोसा जीत लिया। बातचीत के दौरान आरोपी ने उससे क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर ली।
इसके बाद आरोपी ने कार्ड बंद कराने की प्रक्रिया का हवाला देते हुए युवती को एक मोबाइल एप ‘पे जिप’ डाउनलोड करने के लिए कहा और उसे लॉगिन करवाया। आरोपी ने दावा किया कि 48 घंटे के भीतर उसका कार्ड बंद हो जाएगा, जिससे पीड़िता को कोई शक नहीं हुआ।
लेकिन कॉल खत्म होते ही उसके खाते से एक-एक कर पांच ट्रांजेक्शन हुए और कुल 2 लाख 47 हजार रुपये कट गए। कुछ ही देर बाद जब मोबाइल पर मैसेज आए, तब जाकर युवती को ठगी का एहसास हुआ और उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
घबराई हुई युवती ने तुरंत बैंक से संपर्क किया, लेकिन वहां से तत्काल कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उसने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और मल्हारगंज थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई।
घबराई हुई युवती ने तुरंत बैंक से संपर्क किया, लेकिन वहां से तत्काल कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उसने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और मल्हारगंज थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित बैंक ट्रांजेक्शन व मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ठगों ने फर्जी कॉल सेंटर स्टाइल में पूरी योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऐप पर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। बैंक कभी भी ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड बंद करने के लिए इस तरह की जानकारी या ऐप डाउनलोड नहीं करवाते।
यह घटना लोगों के लिए एक बड़ा सबक है कि गूगल से मिले किसी भी नंबर पर आंख बंद कर भरोसा न करें और किसी भी वित्तीय जानकारी को साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोत से ही पुष्टि करें।