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कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठा विवाद, NDA ने चुनाव आयोग से की शिकायत; सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का लगाया आरोप

नई दिल्ली । कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत की है। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायत में कहा गया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने के बजाय सामुदायिक भवनों, अन्य सार्वजनिक स्थानों तथा कुछ निजी परिसरों में लोगों को बुलाकर सामूहिक रूप से फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इससे वास्तविक सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

NDA नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को व्हाट्सएप समूहों और अन्य माध्यमों से विशेष शिविरों में बुलाया गया, जहां एक साथ बड़ी संख्या में आवेदन पत्र भरे गए। उनका दावा है कि इस तरह की प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है और इससे मतदाता सूची में त्रुटियों या अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है।

ज्ञापन में नेताओं ने मांग की है कि अब तक भरे गए सभी गणना प्रपत्रों का दोबारा घर-घर जाकर सत्यापन कराया जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

प्रतिनिधिमंडल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उनका दावा है कि इन कथित अनियमितताओं से जुड़े कुछ वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर भी साझा की गई है। नेताओं ने आग्रह किया कि इन शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे।

शिकायत के दौरान NDA नेताओं ने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाए और कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया तो इसका असर चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही पंजीकरण सुनिश्चित करना और सूची को अद्यतन रखना होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर उठे आरोपों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अब नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर रहेगी कि शिकायतों की जांच किस प्रकार की जाती है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसके समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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