Chambalkichugli.com

EV Battery Recycling: ईवी बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए 169 करोड़ रुपए का फंड जारी, 15 सितंबर तक मांगे गए प्रस्ताव।

EV Battery Recycling: नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ ने अपनी रणनीतिक और स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाते हुए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरियों की रीसाइक्लिंग के लिए तीसरी संयुक्त पहल का आगाज किया है। भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (टीटीसी) के तत्वावधान में शुरू किया गया यह कार्यक्रम मुख्य रूप से ‘ग्रीन और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी’ पर केंद्रित है। इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य ईवी सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती यानी इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों के सुरक्षित निपटान और उनमें मौजूद कीमती खनिजों की रिकवरी का समाधान खोजना है। इस पहल के लिए करीब 169 करोड़ रुपए का विशाल फंड आवंटित किया गया है, जिसमें यूरोपीय संघ के ‘होराइजन यूरोप’ प्रोग्राम और भारत के भारी उद्योग मंत्रालय का महत्वपूर्ण सहयोग शामिल है।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी प्राथमिकता लिथियम, ग्रेफाइट और कोबाल्ट जैसे दुर्लभ और कीमती पदार्थों को बैटरी से निकालने के लिए आधुनिक और प्रभावी तकनीकों का विकास करना है। वर्तमान में इन खनिजों के लिए आयात पर भारी निर्भरता है, जिसे यह पहल कम करने में मददगार साबित होगी। योजना के तहत प्रस्ताव भेजने के इच्छुक नवाचारियों और शोधकर्ताओं के लिए 15 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इसके अलावा, सुरक्षित डिजिटल सिस्टम के जरिए बैटरियों के कलेक्शन को बेहतर बनाने और नई तकनीकों के व्यावहारिक परीक्षण के लिए विशेष पायलट प्रोजेक्ट्स को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

ASHOKNAGAR CENSUS: अशोकनगर में जनगणना कार्य की रफ्तार तेज, कलेक्टर ने किया औचक निरीक्षण

इस पहल का एक मुख्य आकर्षण भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट की स्थापना है। यहाँ नई रीसाइक्लिंग तकनीकों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा ताकि उन्हें जल्द से जल्द औद्योगिक स्तर पर लागू किया जा सके। यह कार्यक्रम न केवल उच्च रिकवरी दर हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, बल्कि बैटरियों के दोबारा उपयोग (सेकंड लाइफ) की संभावनाओं को भी तलाशेगा। इससे एक मजबूत ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ का निर्माण होगा, जहाँ संसाधनों की बर्बादी न्यूनतम होगी और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचेगा।

भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने इस कदम को भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का प्रतीक बताया है। उनका मानना है कि बढ़ते ईवी बाजार के साथ एक प्रभावी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाना समय की मांग है। वहीं, भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन और यूरोपीय आयोग के अनुसंधान महानिदेशक मार्क लेमैत्रे ने भी इस साझेदारी को वैश्विक हरित बदलाव के लिए अनिवार्य बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular News