सरूपी मीणा की प्रारंभिक जीवन की परिस्थितियां काफी कठिन थीं वे दसवीं तक शिक्षित थीं और उनके पति कृषि कार्य करते थे जिससे परिवार की आय सीमित थी आर्थिक तंगी के कारण वे आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं लेकिन उनके अंदर आगे बढ़ने और कुछ करने की इच्छा हमेशा बनी रही
कुछ वर्ष पहले गांव में आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों के गठन और महिलाओं को जोड़ने का अभियान चलाया गया इसी दौरान मिशन के कर्मचारियों ने उन्हें समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया शुरू में परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं लेकिन सरूपी मीणा ने हिम्मत दिखाते हुए समूह से जुड़ने का निर्णय लिया
समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत की आदत अपनाई और वहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई समूह से ऋण लेकर उन्होंने अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की और साथ ही सीआरपी यानी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य करना शुरू किया जिससे उन्हें मानदेय मिलने लगा धीरे धीरे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी और उनकी मासिक आय चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच गई
इसके बाद उन्होंने किराना दुकान शुरू की और बैंक सखी के रूप में भी काम किया जिससे उनकी पहचान और आय दोनों में वृद्धि हुई इन प्रयासों के साथ उन्होंने सीएससी सेंटर का संचालन भी शुरू किया जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होने लगी निरंतर मेहनत और लगन से उन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई भी पूरी कर ली
उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें सांची में रूरल मार्ट के संचालन की जिम्मेदारी मिली जहां वे स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री का कार्य करती हैं इससे उन्हें न केवल आर्थिक लाभ मिला बल्कि स्थानीय महिलाओं के उत्पादों को भी बाजार मिला
वर्ष 2023 24 में उन्हें नमो ड्रोन योजना के तहत एक महत्वपूर्ण अवसर मिला जिसके अंतर्गत उनका चयन किया गया और उन्हें ग्वालियर में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया प्रशिक्षण के बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन प्रदान किया गया साथ ही कंपनी के इंजीनियरों ने भी उन्हें तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया
इसके बाद उन्होंने खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशकों के छिड़काव का कार्य शुरू किया जिससे कृषि कार्य अधिक आसान और प्रभावी हो गया इस तकनीकी कार्य से उन्हें प्रति वर्ष लगभग तीन लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है
सरूपी मीणा आज न केवल आत्मनिर्भर हैं बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन चुकी हैं वे कहती हैं कि आजीविका मिशन ने उनके जीवन को नई दिशा दी है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं