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इलाज के लिए दुनिया की पहली पसंद बन रहा भारत, मेडिकल टूरिज्म में तेज़ी से बढ़ोतरी का अनुमान

नई दिल्ली। भारत का हेल्थकेयर सेक्टर एक नए आर्थिक और वैश्विक विस्तार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के हालिया आकलन के अनुसार देश का मेडिकल टूरिज्म यानी मेडिकल वैल्यू ट्रैवल सेक्टर आने वाले वर्षों में बड़ी छलांग लगाने वाला है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह बाजार लगभग 16.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान स्तर की तुलना में लगभग दोगुना होगा।

यह वृद्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ती लागत, इलाज के लिए लंबा इंतजार और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता प्रभाव प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। दुनिया के कई देशों के मरीज अब बेहतर और किफायती इलाज की तलाश में अन्य देशों की ओर रुख कर रहे हैं, और भारत इस सूची में तेजी से प्रमुख विकल्प बनता जा रहा है।

भारत में मेडिकल टूरिज्म का विकास दो प्रमुख क्षेत्रों के माध्यम से हो रहा है। पहला, आधुनिक चिकित्सा पर आधारित गंभीर बीमारियों का इलाज, और दूसरा, योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक पद्धतियों पर आधारित वेलनेस टूरिज्म। इन दोनों क्षेत्रों का संयोजन भारत को एक संतुलित और व्यापक स्वास्थ्य गंतव्य बनाता है, जहां इलाज के साथ-साथ स्वास्थ्य सुधार और जीवनशैली संतुलन पर भी ध्यान दिया जाता है।

भारत की इस बढ़ती लोकप्रियता का एक बड़ा कारण देश की मजबूत स्वास्थ्य अवसंरचना भी है। यहां के कई अस्पताल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मान्यता प्राप्त हैं और मरीज सुरक्षा तथा इलाज की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ सिस्टम, वीजा सुविधाओं में सुधार और विभिन्न चिकित्सा केंद्रों के विकास ने भी इस सेक्टर को गति दी है।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत में लाखों विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा चिकित्सा सेवाओं का लाभ लेने के लिए आया था। यह दर्शाता है कि भारत केवल पर्यटन नहीं, बल्कि इलाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण वैश्विक गंतव्य बनता जा रहा है। विभिन्न देशों से आने वाले मरीजों में बांग्लादेश, अफ्रीकी और मध्य एशियाई देशों की भागीदारी अधिक देखी गई है।

वैश्विक स्तर पर भी मेडिकल टूरिज्म का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान के अनुसार 2030 तक यह उद्योग कई सौ अरब डॉलर के स्तर को पार कर सकता है, जिसमें भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की किफायती स्वास्थ्य सेवाएं, अनुभवी डॉक्टर और आधुनिक तकनीक इसे अन्य देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।

सरकार की योजनाओं में भी इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित किए जाने की योजना है, जहां आधुनिक चिकित्सा, शोध और पारंपरिक उपचार सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इसका उद्देश्य विदेशी मरीजों को एकीकृत और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।

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