सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल जोन को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई खतरों को बीच में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबा गिरने से कुछ जगहों पर नुकसान हुआ और भारतीय नागरिक घायल हो गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि निर्दोष लोगों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हिंसा तुरंत रोकने की अपील की है।
भारत सरकार ने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बिना किसी बाधा के जारी रहना चाहिए। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।
UAE अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। हालांकि ईरान ने अब तक इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थिति और संवेदनशील बनी हुई है।
इस बीच, फुजैराह की रणनीतिक अहमियत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यह इलाका UAE के तेल निर्यात का बड़ा केंद्र है और यहां से हबशन-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाता है, वह भी होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए।
पिछले 24 घंटे में घटनाक्रम तेजी से बदला है। ईरान पर ड्रोन हमले के आरोप, होर्मुज में जहाजों पर हमले, अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और क्षेत्रीय देशों की बढ़ती प्रतिक्रिया ने हालात को और जटिल बना दिया है।
दक्षिण कोरिया के एक जहाज में धमाके के बाद आग लगने की घटना ने भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं, अमेरिका ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है, हालांकि ईरान ने इसे असुरक्षित बताया है।
इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री का चीन दौरा भी अहम माना जा रहा है, जहां क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक समाधान पर चर्चा हो सकती है।
कुल मिलाकर, फुजैराह हमले के बाद पश्चिम एशिया में हालात नाजुक बने हुए हैं। भारत ने जहां अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं कूटनीतिक समाधान और शांति की अपील भी दोहराई है। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।