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SHEOPUR PUBLIC HEARING: श्योपुर में लगा जनता दरबार, मौके पर ही कई समस्याओं का मिला समाधान

Sheopur Public Hearing

HIGHLIGHTS: जनसुनवाई में 135 आवेदन प्राप्त कई मामलों का मौके पर ही निराकरण कलेक्टर ने समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता स्वीकृत सफाई व्यवस्था सुधारने के आदेश   SHEOPUR PUBLIC HEARING: मध्यप्रदेश। श्योपुर जिला मुख्यालय पर आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में कुल 135 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। कलेक्टर शीला दाहिमा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवेदनों को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साप्ताहिक टीएल बैठक में इन मामलों की समीक्षा कर लंबित शिकायतों को प्राथमिकता से निपटाने की बात भी कही। BHIND COLLEGE EXAM SCAM: परीक्षा में पास करने के नाम पर छात्रों से वसूले 100-100 रूपए; वीडियो हुआ वायरल मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई जनसुनवाई में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई। इसके अलावा पीएम किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, खाद्यान्न पात्रता पर्ची और आवास योजनाओं से जुड़े आवेदनों पर भी विचार किया गया। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए। करुणानिधि के पीछे खड़ा वही लड़का बना ‘किंगमेकर’: विजय की जीत पर RGV का तंज, TVK ने बदली तमिलनाडु की सियासत जरूरतमंदों को मिली आर्थिक सहायता कार्यक्रम के दौरान ग्राम सांकुडली निवासी बालक अंशुमन के नेत्र उपचार के लिए रेडक्रॉस के माध्यम से 5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई। यह राशि भोपाल में इलाज के दौरान आने-जाने के खर्च के लिए दी गई है। वहीं ग्राम हसनपुर हवेली के मोहम्मद इलियास को मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के तहत 2 लाख रुपए की अनुग्रह सहायता की जानकारी दी गई। UAE पर ईरानी हमला, 3 भारतीय घायल, भारत सख्त; मोदी बोले- नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर वार ‘अस्वीकार्य’ सफाई और योजनाओं पर दिए सख्त निर्देश कलेक्टर ने पीएम किसान योजना से जुड़े आवेदनों की जांच कर पात्र लोगों को लाभ दिलाने के निर्देश दिए। साथ ही सब्जी मंडी क्षेत्र में गंदगी की शिकायत मिलने पर नगरीय निकाय को तुरंत सफाई व्यवस्था सुधारने के आदेश दिए गए। उन्होंने पूरे शहर में स्वच्छता अभियान चलाने और सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

टिकट के बदले 5 करोड़ मांगे गए, TMC छोड़ मनोज तिवारी का बड़ा खुलासा, बंगाल में सियासी भूचाल

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर और नेता मनोज तिवारी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी पारा और चढ़ा दिया है। तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से नाता तोड़ते हुए पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मनोज तिवारी, जो कभी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल थे और राज्य सरकार में खेल मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं, अब खुलकर पार्टी के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा चुनाव में टिकट देने के बदले उनसे 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। तिवारी का कहना है कि यह घटना उनके लिए चौंकाने वाली थी और इसी ने उन्हें पार्टी छोड़ने के फैसले के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में पारदर्शिता और सिद्धांतों की बात करने वाली पार्टी के भीतर इस तरह की मांग बेहद निराशाजनक है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि TMC के साथ उनका “चैप्टर खत्म” हो चुका है और अब वे आगे की राजनीतिक राह पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच बंगाल चुनाव के नतीजों ने पहले ही राज्य की राजनीति की तस्वीर बदल दी है। भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार राज्य में सत्ता हासिल की है, जबकि लंबे समय से सत्ता में रही ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चुनावी हार के बाद TMC के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और मनोज तिवारी जैसे नेताओं के आरोप इस असंतोष को और हवा दे सकते हैं। ऐसे आरोपों से पार्टी की छवि पर भी असर पड़ सकता है, खासकर तब जब विपक्ष पहले से ही पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर हमलावर रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक ममता बनर्जी या TMC की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया है। इस घटनाक्रम का एक और पहलू यह भी है कि चुनाव के बाद नेताओं का दल-बदल और खुलासे सामने आना आम बात होती है। लेकिन जब कोई बड़ा नाम इस तरह का आरोप लगाता है, तो उसका असर व्यापक होता है और वह सियासी विमर्श का केंद्र बन जाता है। कुल मिलाकर, मनोज तिवारी का यह आरोप सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में नए विवाद की शुरुआत साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि TMC इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है।

BHIND COLLEGE EXAM SCAM: परीक्षा में पास करने के नाम पर छात्रों से वसूले 100-100 रूपए; वीडियो हुआ वायरल

Daboh College Exam Scam

HIGHLIGHTS: प्रायोगिक परीक्षा में 100 रुपए वसूली का आरोप स्टाफ को खुलेआम पैसे लेते दिखा वीडियो मान्यता निरस्त होने के बाद भी कराई गई परीक्षा पहले भी सामने आ चुका है नकल का मामला एसडीएम ने जांच के दिए आदेश   BHIND COLLEGE EXAM SCAM: मध्यप्रदेश। भिंड में दबोह नगर के एक निजी महाविद्यालय में प्रायोगिक परीक्षा के दौरान छात्रों से 100-100 रुपए वसूलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि छात्रों से पास कराने के नाम पर यह रकम ली जा रही थी। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इसके वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर वीडियो में दिखी खुली वसूली बताया जा रहा है कि दबोह स्थित दुर्गाप्रसाद सर्राफ महाविद्यालय में बीएससी की प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की जा रही थी। वायरल वीडियो में छात्र-छात्राएं अपनी प्रायोगिक फाइल के साथ स्टाफ को पैसे देते नजर आ रहे हैं, जबकि कर्मचारी उन पैसों को लेकर जेब में रखते दिखाई दे रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस महाविद्यालय की मान्यता जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा चार दिन पहले ही निरस्त कर दी गई थी। इसके बावजूद कॉलेज में परीक्षा आयोजित की गई, जिससे नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 5 राज्यों के नतीजों में सियासी भूचाल: बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत, ममता का किला ढहा; तमिलनाडु में विजय की TVK ने रचा इतिहास मामले की जांच की शुरू वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया है। एसडीएम विजय सिंह यादव ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी दबोह में परीक्षा के दौरान गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार वीडियो सामने आने के बाद लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन ठोस कदम उठाएगा। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और दोषियों पर किस तरह की कार्रवाई की जाती है।

करुणानिधि के पीछे खड़ा वही लड़का बना ‘किंगमेकर’: विजय की जीत पर RGV का तंज, TVK ने बदली तमिलनाडु की सियासत

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां फिल्म स्टार थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं। सिर्फ दो साल पुरानी पार्टी का यह प्रदर्शन राज्य की राजनीति में ‘विजय युग’ की शुरुआत माना जा रहा है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, और TVK इससे सिर्फ 10 सीट पीछे रहकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इससे विजय के मुख्यमंत्री बनने की राह लगभग साफ मानी जा रही है। इस ऐतिहासिक जीत के बीच मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा (RGV) ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी तस्वीर शेयर कर सियासी हलचल बढ़ा दी। तस्वीर में एम करुणानिधि फीता काटते नजर आ रहे हैं, और उनके पीछे एक युवा लड़का खड़ा है—जो कोई और नहीं बल्कि खुद विजय हैं। इस फोटो को शेयर करते हुए RGV ने तंज कसते हुए लिखा कि करुणानिधि ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनके पीछे खड़ा यह लड़का एक दिन उनकी पार्टी को इतनी बड़ी चुनौती देगा। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और यूजर्स भी दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे ‘किस्मत का खेल’ बता रहे हैं, तो कुछ विजय को नया करुणानिधि तक कह रहे हैं। विजय की इस जीत ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को बड़ा झटका दिया है। पिछले चुनाव में 133 सीटें जीतने वाली DMK इस बार सिर्फ 59 सीटों पर सिमट गई है। यानी करीब 74 सीटों का नुकसान, जो पार्टी के लिए करारी हार साबित हुआ है। करीब 60 साल तक तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही, लेकिन विजय ने महज दो साल में इस राजनीतिक चक्र को तोड़ दिया। कुल मिलाकर, एक पुरानी तस्वीर ने आज की राजनीति की तस्वीर बदल दी है—जहां कभी करुणानिधि के पीछे खड़ा एक लड़का आज तमिलनाडु की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है।

L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से चर्चा में रही इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) ने अपने तिमाही और सालाना नतीजों से निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने न सिर्फ मुनाफे में जबरदस्त बढ़त दर्ज की, बल्कि हर शेयर पर ₹38 के भारी-भरकम डिविडेंड का ऐलान भी किया है। कंपनी की ओर से जारी एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, L&T का ग्रुप ऑर्डर इनफ्लो 22% की बढ़त के साथ ₹4.35 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का साफ संकेत देता है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित राजस्व ₹82,762 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 11% ज्यादा है। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से ₹43,747 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल राजस्व का 53% हिस्सा है। पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो कंपनी का Recurring PAT ₹17,238 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 18% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई। वहीं, Consolidated PAT ₹16,084 करोड़ रहा। इसमें ₹1,155 करोड़ का एक बार का प्रावधान (Exceptional Item) शामिल है, जो नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों के लिए किया गया है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी डिविडेंड को लेकर आई है। L&T ने ₹2 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹38 का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जो पिछले साल के ₹34 प्रति शेयर से ज्यादा है। कंपनी ने इसके लिए 22 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में L&T के शेयर होंगे, उन्हें यह डिविडेंड मिलेगा। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद डिविडेंड का भुगतान 10 जून 2026 तक किया जा सकता है। कुल मिलाकर, मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ता मुनाफा और आकर्षक डिविडेंड—तीनों फैक्टर L&T को निवेशकों के लिए एक बार फिर चर्चा में ले आए हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में कंपनी की पकड़ आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।

UAE पर ईरानी हमला, 3 भारतीय घायल, भारत सख्त; मोदी बोले- नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर वार ‘अस्वीकार्य’

नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह ऑयल पोर्ट पर हुए हमले ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। इस हमले में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है और साफ कहा है कि आम नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल जोन को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई खतरों को बीच में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबा गिरने से कुछ जगहों पर नुकसान हुआ और भारतीय नागरिक घायल हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि निर्दोष लोगों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हिंसा तुरंत रोकने की अपील की है। भारत सरकार ने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बिना किसी बाधा के जारी रहना चाहिए। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। UAE अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। हालांकि ईरान ने अब तक इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थिति और संवेदनशील बनी हुई है। इस बीच, फुजैराह की रणनीतिक अहमियत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यह इलाका UAE के तेल निर्यात का बड़ा केंद्र है और यहां से हबशन-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाता है, वह भी होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए। पिछले 24 घंटे में घटनाक्रम तेजी से बदला है। ईरान पर ड्रोन हमले के आरोप, होर्मुज में जहाजों पर हमले, अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और क्षेत्रीय देशों की बढ़ती प्रतिक्रिया ने हालात को और जटिल बना दिया है। दक्षिण कोरिया के एक जहाज में धमाके के बाद आग लगने की घटना ने भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं, अमेरिका ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है, हालांकि ईरान ने इसे असुरक्षित बताया है। इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री का चीन दौरा भी अहम माना जा रहा है, जहां क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक समाधान पर चर्चा हो सकती है। कुल मिलाकर, फुजैराह हमले के बाद पश्चिम एशिया में हालात नाजुक बने हुए हैं। भारत ने जहां अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं कूटनीतिक समाधान और शांति की अपील भी दोहराई है। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

मैं हारी नहीं, हराई गई हूं, ममता का बड़ा हमला इस्तीफा से इनकार, चुनाव आयोग और BJP पर 100 सीट ‘लूटने’ का आरोप

नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी साफ कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा, हम हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है। यह जनादेश नहीं, साजिश है। उन्होंने दो टूक कहा कि वह राजभवन नहीं जाएंगी और इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग विलेन की तरह काम कर रहा था और भाजपा के साथ मिलकर करीब 100 सीटें “लूटी गईं।” ममता ने दावा किया कि काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा किया गया, कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के साथ बदसलूकी हुई और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया, छापेमारी की गई और कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया। ममता ने आरोप लगाया कि पूरे चुनाव में सत्ता पक्ष ने दबाव और डर का माहौल बनाया। उनका कहना था कि “आधिकारिक तौर पर वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने ही चुनाव जीता है।” ममता ने अपने राजनीतिक तेवर भी साफ कर दिए। उन्होंने कहा,अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ूंगी, सड़कों पर रहूंगी और शेर की तरह लड़ाई जारी रखूंगी। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 5 सांसदों समेत 10 सदस्यों की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 294 में से 207 सीटें हासिल की हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे के साथ ही 15 साल से सत्ता में काबिज ममता सरकार का अंत हो गया। इन चुनावों में सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK ने चौंकाने वाली जीत दर्ज की, जबकि केरल में कांग्रेस की वापसी हुई और असम-पुडुचेरी में NDA ने सत्ता बरकरार रखी। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के तीखे तेवर और चुनाव नतीजों पर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और गर्माने वाले हैं।

5 राज्यों के नतीजों में सियासी भूचाल: बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत, ममता का किला ढहा; तमिलनाडु में विजय की TVK ने रचा इतिहास

नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति की तस्वीर ही बदल दी है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सत्ता परिवर्तन हुआ, जबकि असम और पुडुचेरी में NDA ने वापसी कर ली है। इन नतीजों ने जहां कई दिग्गजों को चौंकाया, वहीं कई बड़े राजनीतिक किले भी ढह गए। सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जहां भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार सत्ता पर कब्जा कर लिया। पार्टी ने महज 10 साल में 3 सीटों से छलांग लगाकर 207 सीटों तक पहुंचकर इतिहास रच दिया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस 81 सीटों पर सिमट गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 22 मंत्री चुनाव हार गए, जिससे 15 साल पुराना उनका शासन खत्म हो गया। बंगाल में भाजपा का स्ट्राइक रेट करीब 70% रहा, जो इस जीत की ताकत को दर्शाता है। पार्टी ने बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव लड़ा, ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य की कमान किसे मिलेगी। संभावित चेहरों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य शामिल हैं। साथ ही महिला मुख्यमंत्री के विकल्प पर भी चर्चा तेज है। इस जीत में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीति अहम मानी जा रही है। मोदी ने 242 सीटों पर प्रचार किया, जिनमें से 184 सीटों पर भाजपा को जीत मिली। वहीं ‘पन्ना प्रमुख’ जैसी रणनीति और बूथ स्तर की माइक्रो मैनेजमेंट ने भी बड़ा असर डाला। तमिलनाडु में भी बड़ा राजनीतिक भूचाल आया। यहां एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। 59 साल में पहली बार ऐसा होगा जब राज्य में DMK या AIADMK के अलावा किसी तीसरी पार्टी की सरकार बनेगी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी चुनाव हार गए, जो इस बदलाव की बड़ी मिसाल है। केरल में 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई है, जिससे राज्य में वामपंथी सरकार का अंत हो गया। वहीं असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर अपनी पकड़ मजबूत की है। कुल मिलाकर, इन चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव चल रहा है। कहीं दशकों पुरानी सरकारें खत्म हो रही हैं, तो कहीं नई पार्टियां तेजी से उभर रही हैं। आने वाले समय में इन नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ देखने को मिलेगा।

एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: व्यापारी कल्याण बोर्ड बनेगा, 38 हजार करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी

नई दिल्ली। मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश के व्यापार, उद्योग और बुनियादी विकास को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए। सबसे अहम फैसला राज्य में व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का रहा, जो राष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर काम करेगा और जिसके अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होंगे। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक इस बोर्ड में 8 प्रमुख विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गैर-सरकारी सदस्य भी शामिल किए जाएंगे। इतना ही नहीं, जिला स्तर पर भी इसी तरह की समितियां बनाई जाएंगी, जिनमें व्यापारियों के साथ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों को जगह दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य व्यापारियों की समस्याओं का समाधान और राज्य में व्यापारिक माहौल को मजबूत करना है। बैठक के बाद मंत्री चेतन कश्यप ने जानकारी दी कि राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2442 करोड़ रुपए के “आत्मनिर्भरता मिशन” को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के विकास कार्यों के लिए 38,555 करोड़ रुपए के बड़े बजट को भी स्वीकृति मिली है। सरकार भोपाल के पास एक बड़ा इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कैबिनेट ने 16वें वित्त आयोग (2026-2031) के तहत सड़क निर्माण, ग्रामीण मार्गों के उन्नयन और शासकीय भवनों के रखरखाव के लिए 32,405 करोड़ रुपए के प्रावधान को मंजूरी दी। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स और स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क जैसी आईटी योजनाओं को भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है। महिला एवं बाल विकास क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए ‘मिशन वात्सल्य’ के बेहतर संचालन और नए आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 2,412 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। वहीं आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 1,295 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि स्वीकृत की गई है। कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हाल ही में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली चुनावी सफलता पर जनता का आभार भी जताया। साथ ही बताया कि अब तक राज्य में 41 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जिसका 6,520 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। इस प्रक्रिया में 14.7 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके अलावा इंदौर में 9 से 13 जून तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन की भी जानकारी दी गई, जिसमें 26 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रदेश में कृषि और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।

आंधी-बारिश का कहर: यूपी-बिहार में 31 की मौत, दिल्ली में ओले; कई राज्यों में मौसम ने बदला मिजाज

नई दिल्ली। देशभर में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। उत्तर प्रदेश और बिहार में आंधी, बारिश और बिजली गिरने से पिछले 24 घंटे में 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। वहीं दिल्ली में मंगलवार को ओलावृष्टि हुई, जिससे गर्मी से राहत मिली लेकिन जनजीवन प्रभावित हुआ। यूपी-बिहार में सबसे ज्यादा असरउत्तर प्रदेश में तेज आंधी-बारिश के चलते 8 लोगों की मौत हो गई। पीलीभीत में ईंट-भट्ठे की ऊंची चिमनी गिरने से बड़ा हादसा हुआ।वहीं बिहार में 22 जिलों में खराब मौसम का असर देखने को मिला, जहां बिजली गिरने से 7 बच्चों समेत 23 लोगों की जान चली गई। हरियाणा-राजस्थान में तबाही और राहतहरियाणा में तेज तूफान के कारण 15 हजार से ज्यादा पेड़ उखड़ गए, जिससे कई इलाकों में यातायात बाधित हुआ।वहीं राजस्थान में तापमान में 8 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। पहाड़ों में ठंड बढ़ीहिमाचल प्रदेश के सोलन में तापमान गिरकर 4.8°C तक पहुंच गया, जो मई महीने के लिए असामान्य रूप से कम है। क्यों बदला मौसम?मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बने सिस्टम और दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक बनी ट्रफ लाइन के कारण देश के बड़े हिस्से में बारिश और आंधी का असर देखने को मिल रहा है। अगले 48 घंटे का अलर्टमौसम विभाग ने कई राज्यों में चेतावनी जारी की है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तेज आंधी-बारिश।बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बिजली गिरने का खतरा।असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की आशंका। मध्य प्रदेश में भी असरमध्य प्रदेश में भी मौसम बदला हुआ है। भोपाल समेत 39 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे गर्मी के बीच राहत और चुनौती दोनों बनी हुई है।कुल मिलाकर, देशभर में मौसम का यह बदला रूप राहत और आफत दोनों लेकर आया है। जहां एक तरफ तापमान में गिरावट से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर आंधी-बिजली ने जनजीवन पर बड़ा असर डाला है।