HIGHLIGHTS:
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सुबह 6:20 बजे से ग्वालियर में सूतक काल लागू
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शाम 6:46 बजे शुद्धिकरण के बाद खुलेंगे मंदिरों के पट
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प्रमुख मंदिरों में सुबह की आरती के बाद दर्शन बंद
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सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में खग्रास ग्रहण
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ग्रहण के बाद स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व

LUBAR ECLIPSE: ग्वालियर। 2026 के पहले खग्रास चंद्र ग्रहण के चलते प्रमुख मंदिरों के पट सुबह से बंद कर दिए गए हैं। सुबह 6:20 बजे सूतक काल प्रारंभ होते ही देवदर्शन वर्जित कर दिए गए थे। इसके बाद अब शाम 6:46 बजे ग्रहण समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद ही श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे। बता दें कि लगभग 12 घंटे तक मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी।
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प्रमुख मंदिरों में सुबह की आरती के बाद बंद हुए पट
शहर के राम मंदिर फालका बाजार, अचलेश्वर मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, गुरुद्वारा महादेव और संकट मोचन हनुमान मंदिर सहित कई मंदिरों में सुबह की आरती के बाद पट बंद कर दिए गए।
ग्रहण समाप्ति पर गंगाजल से शुद्धिकरण कर विधि-विधान से आरती की जाएगी।
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सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ग्रहण
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह खग्रास चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में दिखाई देगा। ग्वालियर अंचल में इसका दृश्य प्रभाव लगभग 28 मिनट तक रहने का अनुमान है। सूतक काल में पूजा, मूर्तियों का स्पर्श और भोग लगाना वर्जित माना जाता है, इसलिए धार्मिक गतिविधियां दिनभर स्थगित रहेंगी।
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गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सावधानी की सलाह
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उन्हें घर में रहने और नुकीली वस्तुओं के उपयोग से बचने को कहा गया है।
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व बताया गया है। भोजन पकाने से परहेज और पहले से बने भोजन में तुलसी पत्र रखने की परंपरा भी निभाई जाती है।
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वैज्ञानिक दृष्टि से क्या है चंद्र ग्रहण?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। खग्रास स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में ढक जाता है और लालिमा लिए दिखाई देता है।