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गार्डन से बच्चों का अपहरण रच रहे थे पड़ोसी पुलिस ने 7 घंटे में बचाए मासूम और दबोचे आरोपी


इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर में एक सनसनीखेज किडनैपिंग केस ने पूरे शहर को हिला दिया जहां शॉर्टकट से पैसा कमाने की चाह में पड़ोसियों ने मासूम बच्चों के अपहरण की साजिश रच डाली। लालाराम नगर इलाके में गुरुवार शाम 9 वर्षीय नैतिक और 11 वर्षीय सम्राट को बहला फुसलाकर उठाया गया लेकिन पुलिस और परिवार की तत्परता के चलते महज 7 घंटे के भीतर दोनों बच्चों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस पूरी साजिश के पीछे बेरोजगारी और आर्थिक तंगी बड़ा कारण बनकर सामने आई है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी विनीत और उसकी बहन राधिका ने अपने साथियों ललित और उसकी पत्नी तनीषा के साथ मिलकर यह प्लान तैयार किया था। आरोपियों ने अपने इलाके के गार्डन में कई दिनों तक रेकी की क्योंकि वहां बड़े परिवारों के बच्चे खेलने आते थे और उन्हें लगा कि ऐसे बच्चों के अपहरण से मोटी फिरौती वसूली जा सकती है।

योजना के तहत राधिका ने अपनी साथी तनीषा को खास परिवार के बच्चों को निशाना बनाने के लिए कहा था लेकिन गलती से उन्होंने दूसरे परिवार के बच्चों को उठा लिया। आरोपियों को यह अंदाजा नहीं था कि जिन बच्चों को उन्होंने टारगेट बनाया है वे साधारण परिवार से हैं। नैतिक के पिता जूस का ठेला लगाते हैं जबकि सम्राट के पिता ढोलक बजाकर जीविका चलाते हैं।

घटना का खुलासा नैतिक के चचेरे भाई ध्रुव की सतर्कता से हुआ। वह कुछ समय के लिए घर गया था और वापस लौटने पर नैतिक को गायब पाया। एक दोस्त से जानकारी मिलने पर उसने तुरंत परिवार को सूचना दी। परिवार ने आसपास तलाश शुरू की और पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरों में दोनों बच्चे एक महिला के साथ जाते हुए नजर आए। इसके बाद अपहरण की आशंका पर पुलिस को सूचना दी गई।

बच्चों ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें बहाने से अपने साथ ले जाकर एक कमरे में रखा जहां उन्हें खाना दिया गया और मोबाइल पर गेम भी खेलने दिया गया ताकि वे शांत रहें। बाद में आरोपियों ने फिरौती के लिए फोन किया और पैसे न मिलने पर नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो बच्चों को छिपाने की कोशिश भी की गई लेकिन पुलिस की सूझबूझ से सभी आरोपी पकड़ लिए गए।

पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह लगातार निगरानी में रहे और हर गतिविधि पर नजर बनाए रखी। मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर टीम ने सही जगह पर दबिश दी और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे जिससे पुलिस की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले ज्वेलरी शॉप लूटने की योजना बना चुके थे लेकिन असफल रहने के बाद उन्होंने बच्चों के अपहरण का रास्ता चुना। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि आर्थिक तंगी और लालच किस हद तक लोगों को अपराध की ओर धकेल सकता है। वहीं दूसरी ओर परिवार और पुलिस की सतर्कता ने यह साबित कर दिया कि समय पर उठाया गया कदम किसी भी बड़ी अनहोनी को टाल सकता है।

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