यात्रा के दौरान शिशिर खनाल ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग, सीमा प्रबंधन, सांस्कृतिक संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने और संवाद के माध्यम से सभी संवेदनशील विषयों को सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया।
हालांकि, मीडिया से बातचीत के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री ने एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा विवाद से जुड़े Kalapani और Lipulekh क्षेत्र को नेपाल का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है और यह मुद्दा ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक संदर्भों से जुड़ा हुआ है। उनके इस बयान ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुर्खियों में ला दिया है।
शिशिर खनाल ने साथ ही यह भी कहा कि नेपाल इस मुद्दे को किसी भी प्रकार की उग्र राष्ट्रवादी बयानबाजी के बजाय शांतिपूर्ण और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को आपसी सम्मान और समझ के आधार पर बातचीत की मेज पर बैठकर समाधान तलाशना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे और रिश्तों में विश्वास और मजबूत हो सके।
उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कई श्रद्धालु नेपाल के मार्ग से इस यात्रा पर जाते हैं, इसलिए सीमा क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने भारत और चीन के बीच हुए कुछ समझौतों को लेकर भी नेपाल की चिंता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के निर्णयों में नेपाल की सहमति और भागीदारी को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा विषय है।
भारत की प्रगति और आर्थिक विकास की सराहना करते हुए शिशिर खनाल ने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है और यह क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने नेपाल में चल रहे जन-आंदोलनों और सामाजिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। साथ ही भारत में हाल के एक आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते, जिससे उनके बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
कुल मिलाकर यह यात्रा भारत-नेपाल संबंधों में संवाद और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के रुख में अंतर एक बार फिर स्पष्ट दिखाई दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, आगे की बातचीत ही इन संवेदनशील मामलों के समाधान का रास्ता तय करेगी।