फिल्म के SFX सुपरवाइजर विशाल त्यागी के अनुसार, क्लाइमेक्स सीन में किसी भी तरह का CGI या ग्राफिक्स इस्तेमाल नहीं किया गया था। पूरा सीन प्रैक्टिकल इफेक्ट्स के साथ शूट किया गया, जिसमें असली धमाके और वास्तविक सेटअप का उपयोग हुआ।
इस सीन में एक टैंकर ब्लास्ट दिखाया गया है, जिसे बेहद रियलिस्टिक बनाने के लिए करीब 500 लीटर ईंधन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआत में यह मात्रा 250 लीटर तय थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ा दिया गया ताकि दृश्य अधिक प्रभावशाली लगे।
त्यागी के मुताबिक, इस पूरे सीन में लगभग 25 किलो विस्फोटक सामग्री का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे धमाके का असर और अधिक वास्तविक दिखाई दे। सेट पर ट्रेन और कंटेनर जैसे तत्व भी असली थे, जिससे शूटिंग का जोखिम और बढ़ गया।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि अभिनेता रणवीर सिंह शूटिंग के दौरान बेहद करीब मौजूद थे। टीम को इस बात का पूरा ध्यान रखना था कि आग और धमाके की लपटें उनके तक न पहुंचें। सुरक्षा टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थी।
हालांकि, इन जोखिमों के बावजूद शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी की गई। टीम के अनुसार, रणवीर सिंह ने पूरे सीन के दौरान बेहद आत्मविश्वास के साथ काम किया और उन्हें तकनीकी टीम पर पूरा भरोसा था।
सूत्रों के मुताबिक, क्लाइमेक्स पूरा होने के बाद रणवीर ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि सीन बेहद शानदार बना है। वहीं सह-अभिनेता Arjun Rampal भी शूटिंग के दौरान मौजूद थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें धमाके से पहले ही हटाया गया।
फिल्म की टीम का दावा है कि यह क्लाइमेक्स भारतीय सिनेमा के सबसे रियलिस्टिक एक्शन सीन्स में से एक है, जिसमें VFX का इस्तेमाल लगभग नहीं के बराबर किया गया।
कुल मिलाकर, ‘धुरंधर 2’ का यह क्लाइमेक्स न सिर्फ फिल्म की सबसे बड़ी हाइलाइट बन गया है, बल्कि इसने एक्शन फिल्मों की शूटिंग के तरीके पर भी नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अब भी असली धमाकों का जोखिम लेना जरूरी है?