ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, जब शनि जैसे धीमी गति वाले ग्रह वक्री होते हैं तो उनका प्रभाव अधिक तीव्र माना जाता है। ऐसे में कुछ राशियों के लोगों को आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए यह अवधि करियर और आर्थिक मामलों में चुनौतीपूर्ण रह सकती है। नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव बढ़ सकता है और वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद होने की आशंका है। नए निवेश या नया कारोबार शुरू करने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि धन फंसने की संभावना बन सकती है। अनावश्यक विवादों से दूरी बनाए रखें।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों पर पहले से शनि की ढैय्या का प्रभाव है। ऐसे में शनि के वक्री होने से परेशानियां बढ़ सकती हैं। अचानक बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। पारिवारिक मतभेद की स्थिति भी बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें।
मकर राशि
मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इस दौरान व्यापार में बनने वाले सौदे अटक सकते हैं और साझेदारी के कार्यों में धोखा मिलने की आशंका जताई गई है। बचत पर असर पड़ सकता है। इस अवधि में किसी को उधार देने से बचें और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें।
मीन राशि
मीन राशि के जातक इस समय शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण से गुजर रहे हैं, जिसे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। शनि की वक्री चाल के दौरान कार्यों में देरी, रुकावट और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। अनिद्रा और अनजाने भय जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूरी बनाए रखें और फिलहाल किसी भी प्रकार का निवेश करने से बचें।
वक्री शनि के दौरान बताए गए उपाय
शनिवार को दीपदान करें: प्रत्येक शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
हनुमान चालीसा का पाठ करें: नियमित रूप से या कम से कम मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ करें।
दान-पुण्य करें: शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द, छाता, जूते या काले वस्त्र किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।
अच्छे कर्म अपनाएं: असहाय लोगों, सफाई कर्मचारियों और मजदूरों का सम्मान करें। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, न्यायप्रिय शनि देव कर्मों के आधार पर ही फल प्रदान करते हैं।