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Shiv Sena Split: महाराष्ट्र में सियासी विस्फोट! ठाकरे खेमे के 6 सांसदों की बगावत, शिंदे शिवसेना की ताकत बढ़ने के संकेत

 
Shiv Sena Split: नई दिल्ली ।महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य में लंबे समय से चर्चा में रहे ऑपरेशन टाइगर को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना UBT के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह ठाकरे खेमे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा और राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

बताया जा रहा है कि शिवसेना UBT के छह सांसदों ने शिंदे गुट के साथ जाने का मन बना लिया है। इनमें से कुछ सांसदों ने सार्वजनिक रूप से अपने फैसले के संकेत भी दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सभी छह सांसद एक साथ शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई संख्या का आंकड़ा भी पूरा हो जाएगा। इससे इन सांसदों पर अयोग्यता की कार्रवाई का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

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राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ऑपरेशन टाइगर को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान सफल रहा है और संगठन पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। फडणवीस ने यह भी कहा कि किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पार्टी और गठबंधन दोनों मजबूत हैं।

वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अपने अंदाज में इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह कभी अधूरा ऑपरेशन नहीं करते और जब किसी मिशन की शुरुआत करते हैं तो उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। शिंदे के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इससे यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि शिवसेना UBT के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में और भी नेता पाला बदल सकते हैं।

दूसरी ओर इस संभावित राजनीतिक झटके को देखते हुए शिवसेना UBT ने भी मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी नेतृत्व ने नरीमन पॉइंट स्थित शिवालय में अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक का उद्देश्य पार्टी नेताओं और जनप्रतिनिधियों को एकजुट रखना तथा संभावित राजनीतिक नुकसान को रोकना है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि छह सांसद वास्तव में शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है। इससे न केवल शिवसेना UBT की संसदीय ताकत कमजोर होगी बल्कि आगामी चुनावों में भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ महायुति गठबंधन को इससे नई मजबूती मिल सकती है।

फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। दोपहर बाद होने वाली राजनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि ऑपरेशन टाइगर वास्तव में कितना सफल रहा और महाराष्ट्र की राजनीति में इसके क्या परिणाम सामने आते हैं।

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