नरवर क्षेत्र के सिमरिया, इमलिया और पारागढ़ गांवों में नरवाई की आग ने विकराल रूप ले लिया। आंधी के कारण आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते करीब 100 बीघा में खड़ी लहसुन की फसल जलकर राख हो गई। इसके अलावा 100 से अधिक भूसे और कंडों के कूप भी आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए। किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।
सबसे दर्दनाक घटना पशुधन से जुड़ी रही, जहां करीब 55 मवेशियों की जलकर मौत हो गई। खेतों और बाड़ों में बंधे ये पशु आग से बच नहीं सके और जिंदा जल गए, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और दुख है।
इसी दौरान कई अन्य जिलों में भी आंधी ने भारी नुकसान पहुंचाया। करैरा के बांसवेरा में मकान की छत गिरने से एक मां और बेटा मलबे में दब गए, जिन्हें ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर बचाया। वहीं शिवपुरी शहर में पोलो ग्राउंड की बाउंड्रीवाल गिरने से चार युवक घायल हो गए।
तेज आंधी के चलते पेड़ और बिजली के खंभे भी बड़ी संख्या में गिर गए, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। बिजली विभाग के अनुसार अकेले शिवपुरी क्षेत्र में 60 से अधिक पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं।
भीमपुर तहसील के बर्राढाना गांव में आग की एक और बड़ी घटना सामने आई, जहां चूल्हे की चिंगारी से लगी आग ने 18 मकानों को जला दिया। इस हादसे में 30 से अधिक बकरियां और 25 मवेशी भी जिंदा जल गए। गैस सिलेंडर फटने से स्थिति और भयावह हो गई।
इसी तरह दमोह और रायसेन जिलों में भी आंधी-तूफान से बिजली व्यवस्था चरमरा गई और आगजनी की घटनाओं में भारी नुकसान हुआ।
प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है और प्रभावित परिवारों को अस्थायी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों और ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है।