जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई की। मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह सुनियोजित हत्या का मामला है। उनके अनुसार सोनम ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की और शव को गहरी खाई में फेंक दिया। घटना के बाद वह फरार हो गई थी और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गई।
सुनवाई के दौरान सरकार ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) दर्ज हो गई थी। यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसी तकनीकी आधार को जमानत का कारण मान लिया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी आधार बताए गए थे और मजिस्ट्रेट के रिकॉर्ड में भी इसका उल्लेख है। पहले भी सोनम की जमानत याचिका मेरिट के आधार पर खारिज हो चुकी थी, इसलिए केवल लिपिकीय गलती के आधार पर राहत देना उचित नहीं था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके थे और शुरुआती जमानत याचिकाओं में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया गया था तो बाद में केवल गलत धारा लिखे जाने को आधार बनाकर जमानत कैसे मिल गई। सोनम की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि गिरफ्तारी के कारण उसे बताए ही नहीं गए थे, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि यदि ऐसा था तो यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर उसे कुछ आपत्तियां हैं, लेकिन चूंकि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी है इसलिए इस स्तर पर उसकी जमानत पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून के अनुसार आगे कोई कार्रवाई आवश्यक हो तो राज्य सरकार ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है।
यह मामला मई 2025 में सामने आया था। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए, जहां 23 मई को दोनों लापता हो गए। 3 जून को राजा का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ और पुलिस ने कई आरोपियों के साथ सोनम रघुवंशी को भी मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर है, जबकि मामले की सुनवाई जारी है।