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सिस्टम की चूक, उजागर सतना में कुपोषण से बच्ची की मौत, के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई


सतना । मध्यप्रदेश के सतना जिले में कुपोषण से एक चार माह की मासूम बच्ची की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मझगंवा ब्लॉक के सुरांगी गांव में हुई इस घटना में जांच के दौरान आंगनबाड़ी स्तर से लेकर सुपरवाइजर तक की गंभीर लापरवाही सामने आई जिसके बाद तत्काल प्रभाव से कदम उठाए गए

मृत बच्ची सूर्यांशी उर्फ प्रियांशी प्रजापति अति गंभीर कुपोषण की शिकार थी। जानकारी के अनुसार वह अपने जुड़वा भाई के साथ पोषण की कमी से जूझ रही थी लेकिन समय रहते उसे आवश्यक उपचार नहीं मिल सका। जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची की स्थिति गंभीर होने के बावजूद उसे समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती नहीं कराया गया जो उसकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी कदम था

बुखार आने पर परिजन बच्ची को मझगंवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया और उसे पीआईसीयू में भर्ती किया गया लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे Rewa मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश रास्ते में ही एंबुलेंस में बच्ची ने दम तोड़ दिया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा

इस पूरे मामले में जांच के बाद प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पाण्डेय को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में सामने आया कि उन्होंने बच्ची की नियमित वृद्धि निगरानी नहीं की और अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में होने के बावजूद उसे NRC के लिए रेफर नहीं किया। इतना ही नहीं परिजनों को सही समय पर उचित सलाह भी नहीं दी गई और टीकाकरण में भी लापरवाही बरती गई

कलेक्टर Satish Kumar S ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वहीं पर्यवेक्षण स्तर पर भी बड़ी चूक सामने आई जिसके चलते दो सुपरवाइजर दीपक विश्वकर्मा और करूणा पाण्डेय के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। दोनों को बच्चों की निगरानी और फॉलोअप की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन नहीं किया

प्रशासन ने दोनों सुपरवाइजर की दो वित्तीय वर्षों तक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई केवल दंड नहीं बल्कि एक सख्त संदेश भी है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी भी है कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अधिक सजगता और जवाबदेही की जरूरत है। यदि समय रहते सही कदम उठाए जाते तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी

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