शिवपुरी में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सख्ती: कलेक्टर ने दिए कड़े निर्देश, गड़बड़ी पर होगी कार्रवाई

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में गेहूं उपार्जन व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उपार्जन केंद्रों की लगातार निगरानी की जाए और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संपन्न की जानी चाहिए। इसी के तहत जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों पर नियमित निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने टोकन वितरण व्यवस्था, बारदाना उपलब्धता, गेहूं की गुणवत्ता और परिवहन व्यवस्था की बारीकी से जांच की। इसके साथ ही किसानों को भुगतान समय पर हो रहा है या नहीं, इसकी भी समीक्षा की गई। डिप्टी कलेक्टर अजय शर्मा ने बैराड़ उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया, जबकि डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ ने मलावनी, कमालपुर और पिछोर स्थित उपार्जन केंद्रों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कुछ स्थानों पर सुधार की आवश्यकता है। अधिकारियों ने केंद्रों पर किसानों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैसे पेयजल, छाया और बैठने की व्यवस्था की भी समीक्षा की। जहां कमियां पाई गईं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। प्रशासन का कहना है कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी केंद्रों पर निगरानी लगातार जारी रहेगी ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो।
किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक

भोपाल । भोपाल में किसानों को राहत देते हुए मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की अंतिम तिथि बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। पहले जहां यह प्रक्रिया 9 मई तक निर्धारित थी, अब इसे बढ़ाकर 23 मई कर दिया गया है। इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त और किसानों के अनुकूल हों, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं, जिससे उनकी सुविधा और विकल्प दोनों बढ़े हैं। गेहूं खरीदी को सुगम बनाने के लिए सरकार ने एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता दी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों की उपज खरीदी जा सके। इसके अलावा तौल प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण जैसी व्यवस्थाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई हैं। उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को बेहतर अनुभव मिल सके। राज्य सरकार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह दर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से तय की गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि वे स्वयं भी उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं, ताकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इस कदम से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों पर बेहतर काम करने का दबाव भी रहेगा।सरकार का यह फैसला किसानों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।
अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

भोपाल/खरगोन । मध्यप्रदेश में किसान कल्याण को लेकर सरकार की सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली जब Mohan Yadav ने अपने ही बयान को अगले ही दिन जमीन पर उतार दिया। 29 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं और 30 अप्रैल की सुबह उन्होंने इसे सच कर दिखाया। मुख्यमंत्री अचानक Khargone जिले के कतरगांव स्थित खरीदी केंद्र पहुंच गए जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और किसानों से सीधे संवाद किया निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल उपार्जन की प्रक्रिया को देखा बल्कि किसानों के साथ बैठकर चाय भी पी और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं था बल्कि जमीनी हकीकत को समझने और सुधार की दिशा तय करने का प्रयास था दरअसल मुख्यमंत्री इससे एक दिन पहले महेश्वर में रात्रि विश्राम पर थे और वहीं से उन्होंने संकेत दिए थे कि वे कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। उनके इस कदम ने यह साफ कर दिया कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि क्रियान्वयन पर भी उतना ही जोर दे रही है। प्रदेश सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए कई अहम बदलाव भी किए हैं। तौल में देरी से बचने के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है और जरूरत के अनुसार इसे और बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा चमक विहीन गेहूं की स्वीकार्यता सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे अधिक किसानों को राहत मिल सके। सूकड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को भी बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है खरीदी केंद्रों पर बारदाना तौल कांटे हम्माल तुलावटी सिलाई मशीन कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों की उपज का सही मूल्य मिल सके यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। अब तक प्रदेश में 9.83 लाख किसानों ने 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं जबकि 5 लाख से अधिक किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष जहां 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस बार सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा यह संदेश देता है कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर निगरानी रख रही है ताकि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से किसानों तक पहुंच सके
गेहूं खरीदी पर सियासी संग्राम तेज सरकार के दावों पर कांग्रेस का बड़ा हमला

भोपाल । मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा खरीदी का कोटा बढ़ाने के दावों के बीच अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जमीनी हकीकत सरकार के दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार भले ही 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का दावा कर रही हो लेकिन असल स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों के आंकड़े ही सरकार की पोल खोलने के लिए काफी हैं। उनके अनुसार इस अवधि में लगभग 2.25 लाख किसानों से केवल 9.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो पाई है जबकि राज्य में कुल 19.04 लाख किसानों से खरीदी किया जाना बाकी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मध्यप्रदेश में वास्तविक आवश्यकता लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की है लेकिन वर्तमान गति को देखते हुए यह लक्ष्य बेहद दूर दिखाई दे रहा है। चौधरी का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो पूरी खरीदी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब छह महीने का समय लग सकता है जो किसानों के हित में बिल्कुल भी नहीं है। कांग्रेस नेता ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह केवल विज्ञापनों के जरिए उपलब्धियां दिखाने में लगी हुई है जबकि जमीनी स्तर पर किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर गेहूं की खरीदी को घुन या मिट्टी का हवाला देकर रोक दिया जा रहा है जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में खड़े हैं लेकिन खरीदी प्रक्रिया धीमी होने के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है। चौधरी ने यह भी कहा कि सरकार को किसानों को भ्रमित करना बंद करना चाहिए और वास्तविक स्थिति को स्वीकार करते हुए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार 24 घंटे के भीतर खरीदी प्रक्रिया को तेज करे ताकि किसानों को राहत मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से किए गए वादों को निभाना सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी हर साल एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहता है क्योंकि बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में खरीदी की धीमी रफ्तार न केवल किसानों की आय को प्रभावित करती है बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वास्तव में खरीदी प्रक्रिया को तेज करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।