नई दिल्ली ।भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है। सुबह की शुरुआत से लेकर शाम की थकान मिटाने तक एक कप गर्म चाय लोगों को ताजगी और सुकून देती है। खासतौर पर कड़क चाय के शौकीनों की संख्या काफी ज्यादा है। हालांकि बहुत से लोग यह मानते हैं कि चाय को जितनी देर तक उबाला जाएगा वह उतनी ही कड़क बनेगी। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।
दरअसल परफेक्ट कड़क चाय का राज उसे देर तक उबालने में नहीं बल्कि सही समय पर सही सामग्री डालने में छिपा होता है। यदि चाय बनाने की प्रक्रिया को सही तरीके से अपनाया जाए तो केवल तीन से चार मिनट में बेहतरीन स्वाद वाली चाय तैयार की जा सकती है।
क्यों खराब हो जाता है स्वाद?
कई लोग कड़क चाय बनाने के लिए चायपत्ती को लंबे समय तक उबालते रहते हैं। ऐसा करने से चायपत्ती में मौजूद टैनिन्स अधिक मात्रा में निकलने लगते हैं और धीरे-धीरे जलने लगते हैं। इसका असर चाय के स्वाद पर पड़ता है और चाय कड़वी लगने लगती है। नतीजतन चाय का प्राकृतिक स्वाद और खुशबू दोनों प्रभावित हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चाय को जरूरत से ज्यादा पकाने की बजाय उसे सही समय तक उबालना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ऐसे बनाएं परफेक्ट कड़क चाय
सबसे पहले एक बर्तन में आवश्यकतानुसार पानी डालकर गर्म करें। जब पानी में उबाल आने लगे तो उसमें चायपत्ती डालें। इसके बाद चायपत्ती को लगभग तीन मिनट तक पानी में अच्छी तरह उबलने दें। इस दौरान अदरक को कूटकर तैयार कर लें। तीन मिनट पूरे होने के बाद अदरक को चाय में डालें और करीब एक मिनट तक पकने दें।
इससे अदरक में मौजूद प्राकृतिक तेल और सुगंध पूरी तरह बाहर आ जाते हैं और चाय का स्वाद बेहतर बनता है। इसके बाद दूध मिलाएं और चाहें तो स्वादानुसार चीनी भी डाल सकते हैं। कुछ लोग चाय में बेहद कम मात्रा में नमक डालने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि चुटकी भर से भी कम नमक चाय के स्वाद को नमकीन नहीं बनाता बल्कि अन्य फ्लेवर को उभारने में मदद कर सकता है।
चाय बनाने के पीछे है स्वाद का विज्ञान
खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार चाय का स्वाद पूरी तरह संतुलन पर आधारित होता है। यदि चायपत्ती ज्यादा देर तक उबाली जाए तो उसका कड़वापन बढ़ सकता है। वहीं अदरक को शुरुआत में डालने से उसके आवश्यक तेल पूरी तरह रिलीज नहीं हो पाते।
इसी वजह से चायपत्ती को पहले उबालना और कुछ मिनट बाद अदरक मिलाना अधिक प्रभावी माना जाता है। वहीं अंत में दूध डालने से चाय का रंग स्वाद और सुगंध संतुलित बनी रहती है। यदि आप भी हर बार रेस्टोरेंट या ढाबे जैसी कड़क और स्वादिष्ट चाय बनाना चाहते हैं तो अगली बार चाय को घंटों उबालने की बजाय इस आसान तकनीक को जरूर अपनाएं।