मैच के दौरान एक ऐसा समय आया जब पाकिस्तान की टीम को फील्डरों की कमी का सामना करना पड़ा। लंच ब्रेक के दौरान जब पाकिस्तान के प्रमुख खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर गए, तो कप्तान इमरान खान को सब्स्टीट्यूट फील्डर की जरूरत पड़ी। उस समय वहां मौजूद 15 साल के सचिन तेंदुलकर को मैदान पर जाने का मौका मिला।
मैदान पर अपनी तैनाती के दौरान सचिन ने अपनी पूरी ऊर्जा के साथ फील्डिंग की। इसी दौरान भारतीय कप्तान कपिल देव ने हवा में एक ऊंचा शॉट खेला जो सीधा सचिन की ओर जा रहा था। सचिन ने उस गेंद को लपकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी और करीब 15 मीटर तक दौड़ लगाई, लेकिन गेंद उनके हाथों से कुछ ही दूरी पर गिर गई। बाद में सचिन ने अपनी आत्मकथा में इस बात का अफसोस जताया था कि अगर वह उस समय लॉन्ग-ऑन की जगह मिड-ऑन पर तैनात होते, तो वह निश्चित ही कपिल देव का कैच पकड़ लेते। यह छोटी सी घटना उस अटूट जुनून को दर्शाती है जो सचिन के मन में बचपन से ही खेल के प्रति था।
सचिन तेंदुलकर का यह अनसुना किस्सा न केवल उनके प्रशंसकों को रोमांचित करता है, बल्कि यह भी बताता है कि महानता की शुरुआत अक्सर अप्रत्याशित रास्तों से होती है। पाकिस्तान की ओर से कुछ देर के लिए की गई वह फील्डिंग आज क्रिकेट जगत की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है। 15 साल के उस बालक ने तब शायद ही सोचा होगा कि जिस टीम के लिए वह आज फील्डिंग कर रहा है, उसी टीम के सबसे खतरनाक गेंदबाजों के खिलाफ वह भविष्य में विश्व रिकॉर्ड की झड़ी लगा देगा। यह ऐतिहासिक पल आज भी ब्रेबोर्न स्टेडियम की यादों में जिंदा है और सचिन के महान सफर का एक अमूल्य हिस्सा है।