Chambalkichugli.com

ट्रेजेडी क्वीन की असली कहानी पिता ने बचपन छीना कमाई ली और फिर उसी बेटी के लिए बंद कर दिया घर का दरवाजा


नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की दुनिया में ट्रेजेडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी ने अपनी अदाकारी से करोड़ों दिलों पर राज किया। पर्दे पर उनके आंसुओं ने दर्शकों को भावुक किया लेकिन उनकी असली जिंदगी का दर्द किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। जिस बेटी ने अपने परिवार को गरीबी से निकालकर सम्मान और सुख सुविधाओं से भरी जिंदगी दी उसी बेटी को एक दिन उसके पिता ने अपने ही घर से बेघर कर दिया था।

साल 1933 में मुंबई के दादर इलाके की एक साधारण चाल में जन्मी माहजबीन बानो का बचपन अभावों और संघर्षों के बीच बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल था। कहा जाता है कि जन्म के बाद हालात इतने कठिन थे कि उनके पिता ने उन्हें एक अनाथालय के बाहर छोड़ दिया था हालांकि बाद में वे उन्हें वापस घर ले आए। लेकिन गरीबी का दबाव लगातार परिवार पर बना रहा।

जब माहजबीन मात्र चार साल की थीं तब उनके पिता ने उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए भेज दिया। वह स्कूल जाना चाहती थीं और सामान्य बच्चों की तरह खेलना कूदना चाहती थीं लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म लेदर फेस से उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और पहली बार 25 रुपये की कमाई की। यही वह शुरुआत थी जिसने आगे चलकर पूरे परिवार की तस्वीर बदल दी।

समय के साथ माहजबीन फिल्मों की दुनिया में पहचान बनाने लगीं। उनकी कमाई बढ़ी और परिवार की आर्थिक परेशानियां दूर होने लगीं। धीरे धीरे उनकी बहनें भी फिल्मों में काम करने लगीं और परिवार चाल से निकलकर बांद्रा के एक बेहतर घर में रहने लगा। हालांकि आर्थिक स्थिति बदलने के बावजूद घर का माहौल नहीं बदला। बेटियों की जिंदगी के फैसले लेने का अधिकार अब भी परिवार के मुखिया के पास ही था।

यही वह दौर था जब माहजबीन की जिंदगी में निर्देशक कमाल अमरोही आए। दोनों एक दूसरे के करीब आए और उन्होंने चुपचाप शादी कर ली। माहजबीन जानती थीं कि उनके पिता इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करेंगे इसलिए उन्होंने इस विवाह को लंबे समय तक छिपाकर रखा। लेकिन जब यह राज खुला तो परिवार में बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

हालात उस समय और बिगड़ गए जब मीना कुमारी ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध कमाल अमरोही की फिल्म में काम करने का फैसला किया। पिता को यह मंजूर नहीं था। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने अपनी ही बेटी के लिए घर के दरवाजे बंद कर दिए। विडंबना यह थी कि जिस घर से उन्हें निकाला गया था वह उनकी मेहनत और कमाई से ही खरीदा गया था।

घर छोड़ते समय मीना कुमारी ने अपने पिता को एक भावुक पत्र लिखा। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें घर से अपने कपड़ों और किताबों के अलावा कुछ नहीं चाहिए। यहां तक कि अपनी कार भी वापस भेजने की बात कही। यह पत्र उनकी संवेदनशीलता और परिवार के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

मीना कुमारी ने अपने पूरे जीवन में परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं लेकिन जब उनकी अपनी जिंदगी कठिन दौर से गुजरी तो वह काफी हद तक अकेली रहीं। शायद यही वजह थी कि पर्दे पर उनका दर्द इतना वास्तविक लगता था। बैजू बावरा परिणीता साहिब बीबी और गुलाम तथा पाकीजा जैसी कालजयी फिल्मों में उनका अभिनय आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है। उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं बल्कि त्याग संघर्ष और दर्द से भरे उस जीवन की कहानी है जिसने भारतीय सिनेमा को अमूल्य विरासत दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular News