क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?
पर्सनैलिटी राइट्स का मतलब है कि किसी व्यक्ति की पहचान जैसे उसका नाम, चेहरा, आवाज, फोटो या सिग्नेचर को उसकी अनुमति के बिना किसी भी कमर्शियल या गलत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सरल शब्दों में कहें तो,
आपकी पहचान आपकी संपत्ति है, जिसे कोई भी बिना इजाजत इस्तेमाल नहीं कर सकता।
क्या यह अधिकार सिर्फ सेलेब्स के लिए है?
यह एक आम धारणा है कि यह अधिकार सिर्फ फिल्मी सितारों या पब्लिक फिगर्स के लिए होता है, लेकिन ऐसा नहीं है।
साधारण व्यक्ति भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग कर सकता है, अगर उसे लगता है कि उसकी पहचान का गलत उपयोग किया जा रहा है।
क्यों बढ़ रही इसकी मांग?
आज के डिजिटल युग में सेलेब्स की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। कई मामलों में देखने को मिलता है कि-
सेलेब्स की तस्वीरों का टी-शर्ट, मग और विज्ञापनों में बिना अनुमति इस्तेमाल किया जाता है
उनकी आवाज और चेहरे का एडिट कर फेक वीडियो बनाए जाते हैं
एआई और डीपफेक तकनीक से आपत्तिजनक या गलत कंटेंट तैयार किया जाता है
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रमोशन और विज्ञापन में उनका नाम जोड़ा जाता है
इन सभी गतिविधियों से उनकी इमेज और कमाई दोनों पर असर पड़ता है।
कोर्ट कब देता है सुरक्षा?
जब कोई सेलेब अदालत में यह साबित करता है कि उसकी पहचान का बिना अनुमति उपयोग हो रहा है और इससे उसे नुकसान हो रहा है चाहे वह व्यक्तिगत हो या आर्थिक तो कोर्ट तुरंत उस उपयोग पर रोक लगा सकता है और संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई भी कर सकता है।
कैसे होता है फैसला?
कोर्ट यह देखता है कि-
क्या पहचान का गलत इस्तेमाल हुआ है
क्या इससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा या कमाई को नुकसान हुआ है
क्या उपयोग कमर्शियल या भ्रामक उद्देश्य से किया गया है
अगर जवाब “हां” होता है, तो कोर्ट तुरंत आदेश जारी कर सकता है।
डिजिटल युग में बढ़ती जरूरत
एआई और डीपफेक टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। अब किसी भी व्यक्ति का चेहरा या आवाज आसानी से कॉपी कर फर्जी वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिससे सेलेब्स ही नहीं आम लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।
पर्सनैलिटी राइट्स आज के समय में डिजिटल सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सेलेब्स का इसे लेकर कोर्ट जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पहचान और निजी छवि की सुरक्षा और भी जरूरी हो जाएगी।