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जब बॉलीवुड के 'राज' ने अपने ही परिवार का किरदार निभाकर रचा इतिहास..

नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में आई हैं जिन्होंने अपनी अनूठी कहानी और कलाकारों के शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है। ऐसी ही एक यादगार फिल्म साल 2000 में बड़े पर्दे पर उतरी थी, जिसने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि अभिनय की दुनिया में एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया।

इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसके मुख्य अभिनेता गोविंदा थे, जिन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे छह अलग-अलग किरदारों को एक साथ पर्दे पर जीवंत कर दिया था। उस दौर में इस तरह का प्रयोग करना न केवल चुनौतीपूर्ण था, बल्कि दर्शकों के लिए भी यह एक बिल्कुल नया और रोमांचक अनुभव था।

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से राज मल्होत्रा नाम के एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी चुलबुली और मजाकिया हरकतों से सबको हंसने पर मजबूर कर देता है। लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आता है जब राज के पूरे परिवार की एंट्री होती है।

पर्दे पर जब राज के दादा, उसकी दादी, पिता, मां और बहन एक साथ नजर आते हैं, तो दर्शक यह देखकर दंग रह जाते हैं कि इन सभी किरदारों को निभाने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद गोविंदा ही थे। हर किरदार के लिए उन्होंने अपनी आवाज, बोलने के लहजे और शारीरिक हाव-भाव को इतनी बारीकी से बदला था कि फिल्म देखते समय एक पल के लिए भी ऐसा महसूस नहीं होता था कि ये सभी भूमिकाएं एक ही कलाकार द्वारा निभाई जा रही हैं।

व्यावसायिक मोर्चे पर भी इस फिल्म ने अपनी चमक बिखेरी। मध्यम बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में जबरदस्त भीड़ जुटाई और अपनी लागत से दोगुने से भी ज्यादा की कमाई करने में सफल रही। इस फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर अभिनेता में प्रतिभा हो और पटकथा में दम हो, तो दर्शक उसे भरपूर प्यार देते हैं।

फिल्म के संवाद और कॉमेडी सीन आज भी सोशल मीडिया पर खासे लोकप्रिय हैं। इस प्रोजेक्ट ने गोविंदा को एक ऐसे वर्सटाइल एक्टर के रूप में स्थापित किया जो किसी भी सांचे में ढल सकता था, चाहे वह एक बुजुर्ग दादी का किरदार हो या एक शरारती जवान लड़के का।

अभिनय के अलावा फिल्म की स्टारकास्ट ने भी इसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई। मुख्य अभिनेत्री के साथ गोविंदा की जोड़ी को काफी सराहा गया और दोनों के बीच की केमिस्ट्री ने पर्दे पर जादू बिखेरा। साथ ही, कॉमेडी जगत के अन्य दिग्गज कलाकारों ने भी अपनी उपस्थिति से फिल्म को और भी मजेदार बना दिया।

दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में केवल मुख्य नायक ने ही बहुमुखी भूमिका नहीं निभाई थी, बल्कि एक अन्य मशहूर कॉमेडियन ने भी दोहरी भूमिका निभाकर हंसी का तड़का लगाया था। तकनीकी रूप से यह फिल्म उस समय की अन्य फिल्मों से काफी आगे थी क्योंकि इसमें कई किरदारों को एक ही फ्रेम में कुशलतापूर्वक दिखाया गया था।

आज दशकों बीत जाने के बाद भी यह फिल्म भारतीय सिनेमा प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है। यह फिल्म उस दौर का प्रतीक है जब पारिवारिक मनोरंजन और शुद्ध कॉमेडी ही सिनेमा की जान हुआ करती थी।

बिना किसी विवाद या भारी भरकम स्पेशल इफेक्ट्स के, केवल सादगी और बेहतरीन टाइमिंग के दम पर इस फिल्म ने जो मुकाम हासिल किया, वह आज के दौर की फिल्मों के लिए एक मिसाल है। गोविंदा के वे छह यादगार चेहरे आज भी दर्शकों को गुदगुदाते हैं और सिनेमाई पर्दे पर उनके उस अनोखे ‘सिक्सर’ की याद दिलाते हैं।

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