पर्सनैलिटी राइट्स क्या हैं? क्यों सेलेब्स Amitabh Bachchan से लेकर Kartik Aaryan तक कर रहे हैं इसकी मांग

नई दिल्ली। हाल के समय में बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे अपने पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) की कानूनी सुरक्षा के लिए अदालत का रुख कर रहे हैं। इस लिस्ट में अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, सलमान खान, करण जौहर, रजनीकांत, जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, अक्षय कुमार, ऋतिक रोशन और कार्तिक आर्यन जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह कदम खास तौर पर बढ़ते डिजिटल दुरुपयोग और एआई तकनीक के गलत इस्तेमाल को देखते हुए उठाया जा रहा है। क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?पर्सनैलिटी राइट्स का मतलब है कि किसी व्यक्ति की पहचान जैसे उसका नाम, चेहरा, आवाज, फोटो या सिग्नेचर को उसकी अनुमति के बिना किसी भी कमर्शियल या गलत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सरल शब्दों में कहें तो,आपकी पहचान आपकी संपत्ति है, जिसे कोई भी बिना इजाजत इस्तेमाल नहीं कर सकता। क्या यह अधिकार सिर्फ सेलेब्स के लिए है?यह एक आम धारणा है कि यह अधिकार सिर्फ फिल्मी सितारों या पब्लिक फिगर्स के लिए होता है, लेकिन ऐसा नहीं है।साधारण व्यक्ति भी अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग कर सकता है, अगर उसे लगता है कि उसकी पहचान का गलत उपयोग किया जा रहा है। क्यों बढ़ रही इसकी मांग?आज के डिजिटल युग में सेलेब्स की पहचान का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है। कई मामलों में देखने को मिलता है कि- सेलेब्स की तस्वीरों का टी-शर्ट, मग और विज्ञापनों में बिना अनुमति इस्तेमाल किया जाता हैउनकी आवाज और चेहरे का एडिट कर फेक वीडियो बनाए जाते हैंएआई और डीपफेक तकनीक से आपत्तिजनक या गलत कंटेंट तैयार किया जाता हैसोशल मीडिया पर फर्जी प्रमोशन और विज्ञापन में उनका नाम जोड़ा जाता है इन सभी गतिविधियों से उनकी इमेज और कमाई दोनों पर असर पड़ता है। कोर्ट कब देता है सुरक्षा? जब कोई सेलेब अदालत में यह साबित करता है कि उसकी पहचान का बिना अनुमति उपयोग हो रहा है और इससे उसे नुकसान हो रहा है चाहे वह व्यक्तिगत हो या आर्थिक तो कोर्ट तुरंत उस उपयोग पर रोक लगा सकता है और संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई भी कर सकता है। कैसे होता है फैसला?कोर्ट यह देखता है कि- क्या पहचान का गलत इस्तेमाल हुआ हैक्या इससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा या कमाई को नुकसान हुआ हैक्या उपयोग कमर्शियल या भ्रामक उद्देश्य से किया गया हैअगर जवाब “हां” होता है, तो कोर्ट तुरंत आदेश जारी कर सकता है। डिजिटल युग में बढ़ती जरूरतएआई और डीपफेक टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। अब किसी भी व्यक्ति का चेहरा या आवाज आसानी से कॉपी कर फर्जी वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिससे सेलेब्स ही नहीं आम लोग भी प्रभावित हो सकते हैं। पर्सनैलिटी राइट्स आज के समय में डिजिटल सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सेलेब्स का इसे लेकर कोर्ट जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पहचान और निजी छवि की सुरक्षा और भी जरूरी हो जाएगी।
‘सैयारा’ के बाद फिर साथ दिखे Ahaan Panday और अनीत पड्डा, मोहित सूरी की नई लव स्टोरी में करेंगे काम

नई दिल्ली। साल 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘सैयारा’ से दर्शकों का दिल जीतने वाले अहान पांडे और अनीत पड्डा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस हिट जोड़ी ने न सिर्फ अपनी केमिस्ट्री से फैंस को प्रभावित किया था, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म को बड़ी सफलता दिलाई थी। अब यह जोड़ी एक बार फिर डायरेक्टर मोहित सूरी के साथ नए प्रोजेक्ट में नजर आने वाली है। मोहित सूरी की नई रोमांटिक फिल्म का ऐलानयश राज फिल्म्स ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया है कि अहान पांडे और अनीत पड्डा को लेकर एक नई रोमांटिक फिल्म बनाई जा रही है, जिसका नाम अभी तय नहीं हुआ है। हालांकि मेकर्स ने यह जरूर संकेत दिया है कि यह फिल्म एक “इमोशनल और म्यूजिकल सिनेमैटिक एक्सपीरियंस” होगी, जिसमें यादगार धुनें और गहरी लव स्टोरी देखने को मिलेगी। मोहित सूरी बोले- “ये सफर फिर से नया जैसा है”डायरेक्टर मोहित सूरी ने इस रीयूनियन को लेकर कहा कि उनके लिए लव स्टोरी हमेशा से फिल्म निर्माण का सबसे मजबूत आधार रही है। उन्होंने कहा कि हर प्यार की कहानी गहरी और सच्ची होनी चाहिए, और वह इसी भावना के साथ इस नई फिल्म को बनाने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस बार वह खुद को एक न्यूकमर की तरह महसूस कर रहे हैं और काफी उत्साहित होने के साथ-साथ नर्वस भी हैं। यश राज फिल्म्स का बयानयश राज फिल्म्स के सीईओ ने कहा कि मोहित सूरी के साथ काम करना सिर्फ फिल्म बनाना नहीं, बल्कि भावनाओं को स्क्रीन पर उतारने जैसा अनुभव है। उन्होंने कहा कि ‘सैयारा’ एक खास मोमेंट थी, और अब टीम उससे भी ज्यादा सच्ची और असरदार कहानी लेकर आ रही है। अहान और अनीत की वापसी को लेकर भी उन्होंने खुशी जताई। अहान-अनीत के नए प्रोजेक्ट्स भी चर्चा में‘सैयारा’ के बाद दोनों कलाकारों के करियर में तेजी आई है। अहान पांडे ने अली अब्बास जफर की एक अनटाइटल्ड फिल्म साइन कर ली है। वहीं अनीत पड्डा जल्द ही हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ में नजर आएंगी, जिसमें नाना पाटेकर, विशाल जेठवा और विनीत कुमार सिंह जैसे कलाकार भी शामिल हैं। ‘सैयारा’ की शानदार कमाई‘सैयारा’ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए भारत में करीब 338 करोड़ रुपये और वर्ल्डवाइड लगभग 580 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यह फिल्म 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में चौथे स्थान पर रही और इसने नई स्टार जोड़ी को इंडस्ट्री में मजबूत पहचान दिलाई। ‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान पांडे और अनीत पड्डा की जोड़ी का मोहित सूरी के साथ दोबारा जुड़ना दर्शकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। नई फिल्म से एक बार फिर इमोशन, म्यूजिक और रोमांस का दमदार मिश्रण देखने की उम्मीद है, जो एक यादगार सिनेमैटिक अनुभव दे सकता है। ‘सैयारा’ की हिट जोड़ी अहान पांडे और अनीत पड्डा एक बार फिर मोहित सूरी की नई रोमांटिक फिल्म में साथ नजर आएंगे, जिससे फैंस में उत्साह बढ़ गया है। नई फिल्म को एक इमोशनल और म्यूजिकल लव स्टोरी बताया जा रहा है।
चोट के बावजूद खेल रहे हैं Virat Kohli, फिटनेस को लेकर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को 5 विकेट से हराकर एक और जीत अपने नाम की। 147 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए RCB ने 29 गेंद शेष रहते 149 रन बनाकर आसान जीत दर्ज की। इस जीत में सबसे अहम भूमिका विराट कोहली की रही, जिन्होंने 34 गेंदों पर 49 रन बनाए और टीम को मजबूत शुरुआत दी। उनकी इस पारी में 6 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। कोहली ने देवदत्त पडिक्कल के साथ दूसरे विकेट के लिए 57 रनों की साझेदारी कर जीत की नींव रखी। घुटने की चोट से जूझ रहे हैं विराट कोहलीमैच के बाद विराट कोहली ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उनका घुटना अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह से वह घुटने में दर्द और सूजन की समस्या से परेशान हैं। कोहली ने माना कि वह इस मैच में भी 100 प्रतिशत फिट नहीं थे, लेकिन टीम के लिए मैदान पर उतरना जरूरी था। उन्होंने कहा कि पिछले मुकाबले की तुलना में स्थिति बेहतर है, लेकिन अभी पूरी तरह फिट होने में समय लगेगा। ‘मैं अभी पूरी तरह फिट नहीं हूं’ – कोहलीकोहली ने मैच के बाद बातचीत में बताया कि पिछले चार-पांच दिनों से उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश थी कि पावरप्ले में ही मैच का रुख बदल दिया जाए। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह मैच को और बेहतर तरीके से खत्म कर सकते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी बल्लेबाजी और जज्बे पर संतोष जताया। पिच और रणनीति पर भी रखी रायविराट कोहली ने पिच को लेकर कहा कि सतह पर ज्यादा घास नहीं थी और यह अपेक्षाकृत धीमी थी। गर्म मौसम के कारण पिच का व्यवहार अलग था, जिससे बल्लेबाजी चुनौतीपूर्ण हो गई थी। उन्होंने बताया कि उनकी रणनीति शुरुआती ओवरों में ही विपक्षी टीम पर दबाव बनाने की थी, ताकि लक्ष्य आसान हो सके। RCB की गेंदबाजी ने भी दिखाया दमइस मुकाबले में RCB की जीत में गेंदबाजों का भी अहम योगदान रहा। रसिख सलाम ने 4 विकेट और भुवनेश्वर कुमार ने 3 विकेट लेकर LSG की बल्लेबाजी को झकझोर दिया। LSG की पूरी टीम 146 रन पर सिमट गई। कृणाल पंड्या ने भी 2 विकेट हासिल किए। बेहतरीन गेंदबाजी के कारण RCB को आसान लक्ष्य मिला। LSG के कार्यवाहक कप्तान ने मानी कमजोरीLSG के कप्तान निकोलस पूरन ने हार के बाद स्वीकार किया कि उनकी टीम इस सीजन में लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि 175 रन का स्कोर प्रतिस्पर्धी होता, लेकिन बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके। पूरन ने माना कि टी20 क्रिकेट में निरंतरता मुश्किल होती है, लेकिन टीम प्रयास कर रही है। यह मुकाबला RCB की शानदार जीत के साथ-साथ विराट कोहली की फिटनेस को लेकर चिंता भी छोड़ गया है। घुटने की चोट के बावजूद उनका प्रदर्शन टीम के लिए बेहद अहम साबित हुआ, लेकिन आने वाले मैचों में उनकी उपलब्धता और फिटनेस RCB के अभियान के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
भारत का सबसे बड़ा Trade पार्टनर बना चीन… अमेरिका को छोड़ा पीछे

नई दिल्ली। चीन (China), अमेरिका (America) को पीछे छोड़कर 2025-26 में भारत (India) का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार (Largest Trading Partner) बन गया है। उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान चीन के साथ देश का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया। अमेरिका 2024-25 तक लगातार चार वर्षों तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर परचीन 2013-14 से 2017-18 तक और फिर 2020-21 में भी भारत का शीर्ष व्यापारिक साझेदार रहा। चीन से पहले यूएई देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। पिछले वित्त वर्ष के दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.66 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.63 अरब डॉलर रहा। व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर था। व्यापार संतुलन में बदलाव2025-26 में अमेरिका को निर्यात मामूली रूप से 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95 फीसदी बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। व्यापार अधिशेष 2024-25 के 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया। जिन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ भारत का निर्यात घटा है, उनमें नीदरलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और मलयेशिया शामिल हैं। जिन प्रमुख देशों के साथ 2025-26 में आयात बढ़ा है, उनमें रूस, इराक, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, कतर और ताइवान शामिल हैं।
जांच खत्म करे अमेरिका…. भारत ने अतिरिक्त उत्पादन के आरोपों को किया खारिज

नई दिल्ली। भारत (India) ने अमेरिका (America) के व्यापार प्रतिनिधित (यूएसटीआर-USTR) की ओर से लगाए गए आरोपों को सख्ती के साथ खारिज किया। उन्होंने भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त उत्पादन (Excess Production) और औद्योगिक असंतुलन (Industrial Imbalance) का आरोप लगाया था। भारत ने कहा कि जांच शुरू करने वाले नोटिस में इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस कारण नहीं दिया गया है। भारत ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह यह निष्कर्ष निकाले कि भारत ने कोई नकारात्मक काम नहीं किया है और उसके खिलाफ जो जांच चल रही है, उसे समाप्त कर दे। यह बात भारत सरकार ने अपने जवाब में यूएसटीआर को बताई। 11 मार्च को अमेरिका ने अपने व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ जांच शुरू करने की घोषणा की। इनमें भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इस जांच का उद्देश्य उन ‘अनुचित विदेशी नीतियों या तरीकों’ को देखना और उन पर कार्रवाई करना है, जिनसे अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को नुकसान होता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने जांच शुरू करने की घोषणा की। यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301(बी) के तहत की गई है। इस जांच में अलग-अलग देशों की ‘नीतियों, कार्यों और तरीकों’ की जांच की जाएगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि क्या उन देशों में उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता है और विनिर्माण क्षेत्र में असंतुलन है। जांच के दायर में कौन-कौन देश?इस जांच के दायरे में आने वाली अर्थव्यवस्थाएं हैं- बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, मलयेशिया, मेक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम। अमेरिकी जांच पर भारत ने क्या कहा?अमेरिका के जांच नोटिस के जवाब में भारत सरकार ने कहा कि वह इस नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह और सख्ती से खारिज करती है। भारत ने कहा कि यह जांच नोटिस सिर्फ बड़े आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है। इसमें भारत सरकार की किसी खास नीति या काम का नाम नहीं बताया गया है, जिसे गलत या भेदभावपूर्ण कहा जा सके या जो अमेरिका के व्यापार को नुकसान पहुंचाता हो, जैसा कि कानून की धारा 301(b) में जरूरी है। भारत ने कहा है कि नोटिस में इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस कारण या शुरुआती सबूत नहीं दिए गए हैं। यह दावा कि भारत के बड़े उद्योगों में ‘जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता’ है और इससे अमेरिका के साथ व्यापार में अधिक लाभ (ट्रेड सरप्लस) होता है, उसके समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है। भारत ने कहा कि यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 और 302 के नियमों के अनुसार सही तरीके से शुरू नहीं की गई है। इसलिए भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से अनुरोध किया है कि वह भारत के पक्ष में फैसला दे, जांच को खत्म करे और इसे तुरंत बंद कर दे। भारत ने आगे कहा है कि चूंकि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हो चुकी है, इसलिए किसी भी व्यापारिक चिंता को इसी बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि ऐसे मुद्दों का समाधान एकतरफा कदमों से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत के ढांचे के भीतर होना चाहिए।
नेपाल सरकार का बड़ा फैसला…. 2006 के बाद सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की होगी जांच… 7 पूर्व PM भी दायरे में

काठमांडू। नेपाल (Nepal) की सरकार ने बुधवार को अपनी कैबिनेट बैठक (Cabinet meeting.) में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। नए नवेले प्रधानमंत्री बालेन शाह (Prime Minister Balen Shah.) की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सरकार ने 2006 के बाद से सार्वजनिक पद पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया। इस जांच के दायरे में नेपाल के सात पूर्व प्रधानमंत्री भी आएंगे। इसके अलावा सैकड़ों ऐसे मंत्रियों के भी नाम इस लिस्ट में शामिल होंगे, जो कि 2006 के बाद नेपाल सरकार में काम कर चुके हैं। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ युवा और खेल मंत्री सस्मित पोखरेल ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र कुमार भंडारी की अगुवाई में इस पांच सदस्यीय संपत्ति जांच आयोग का गठन किया जाएगा। जांच पैनल के सदस्यों में दो पूर्व जज चंडी राज ढकाल और पुरुषोत्तम पराजुली को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा नेपाल पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लमसाल भी इस आयोग के सदस्य होंगे। जांच के दायरे में 7 पूर्व PMबालेन शाह की सरकार के इस फैसले के बाद में नेपाल के सात पूर्व प्रधानमंत्री आ गए हैं। उनमें पुष्प कमल दहल (प्रचंड), शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली, सुशील कोइराला, बाबूराम भट्टाराई, झाला नाथ खनाल और माधव कुमार नेपाल जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा कोइराला के परिवार की भी संपत्ति जांच की जा सकती है। आयोग को 2006 में नेपाल में हुए जन आंदोलन-द्वितीय से लेकर वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 तक प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्च अधिकारियों की संपत्ति घोषणाओं को एकत्र करने और उनकी जांच करने का दायित्व सौंपा गया है। Gen-Z आंदोलन पर भी पैनल का गठनइसके अलावा नेपाल सरकार ने पिछले वर्ष हुए ‘जेन-G’ प्रदर्शनों की जांच रिपोर्ट के क्रियान्वयन के दौरान सुरक्षा तंत्र की भूमिका का अध्ययन करने के लिए बुधवार को तीन सदस्यीय एक पैनल का गठन किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार, इस संबंध में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश प्रेम राज कार्की की अध्यक्षता में एक पैनल गठित करने का निर्णय लिया गया। इस पैनल में सशस्त्र पुलिस बल के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक सुबोध अधिकारी और नेपाल पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक टेक प्रसाद राय को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पैनल को गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को लागू करने के दौरान सुरक्षा संबंधी मामलों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए इन प्रदर्शनों के दौरान 76 लोगों की मौत हो गई थी।
ईरान जंग में तबाह हुए मिडिल ईस्ट के मुल्कों की मदद के लिए आगे आए 11 देश, विश्व बैंक- IMF से की अपील

तेरहान। ब्रिटेन (Britain) और जापान (Japan) समेत 11 देशों के वित्त मंत्रियों ने ईरान जंग (Iran War) में तबाह हुए मध्य-पूर्व के मुल्कों (Middle East) की ‘समन्वित’ आर्थिक मदद की अपील की है। इन देशों ने बुधवार (15 अप्रैल) को विश्व बैंक (World Bank) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) से अपील की है कि प्रभावित देशों को “समन्वित आपातकालीन सहायता” उपलब्ध कराई जाए, ताकि जरूरत के हिसाब से वित्तीय मदद और लचीले टूलकिट उपलब्ध कराए जा सकें। ब्रिटिश सरकार द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में मंत्रियों ने कहा, “हम IMF और विश्व बैंक से अपील करते हैं कि वे ज़रूरतमंद देशों को समन्वित आपातकालीन सहायता प्रदान करें; यह सहायता उन देशों की परिस्थितियों के अनुरूप हो और इसमें उनके पास उपलब्ध सभी संसाधनों और लचीलेपन का पूरा इस्तेमाल किया जाए।” बयान में आगे कहा गया है, “अगर ईरान-अमेरिका के बीच शत्रुता फिर से शुरू हुई या संघर्ष का दायरा बढ़ा या होर्मुज़ समुद्री मार्ग में लगातार बाधाएं आती रहीं तो ये वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, उनकी सप्लाई चेन और दुनिया की आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के लिए यह गंभीर अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती हैं।” इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर 58 अरब डॉलर तक का खर्चइस बीच, रायटर्स ने ऊर्जा रिसर्च कंपनी Rystad Energy के डेटा का हवाला देते हुए बताया है कि मध्य-पूर्व युद्ध के कारण इस क्षेत्र को ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर 58 अरब डॉलर तक का खर्च उठाना पड़ सकता है; इसमें अकेले तेल और गैस सुविधाओं पर ही 50 अरब डॉलर तक का खर्च शामिल है। यह अनुमान रिसर्च फर्म के तीन हफ़्ते पहले के शुरुआती 25 अरब डॉलर के अनुमान से काफ़ी ज़्यादा है। यह 8 अप्रैल को US और ईरान के बीच हुए संघर्ष-विराम से पहले हुए नुकसान के व्यापक दायरे को दर्शाता है। मरम्मत से कोई नई क्षमता नहीं बनेगीRystad के सीनियर एनालिस्ट करण सतवानी कहते हैं, “मरम्मत के काम से कोई नई क्षमता नहीं बनती। यह मौजूदा क्षमता को दूसरी तरफ़ मोड़ देता है, और इस बदलाव का असर प्रोजेक्ट में देरी और महंगाई के रूप में मध्य-पूर्व से कहीं दूर तक महसूस किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि 58 अरब डॉलर का बिल तो सिर्फ़ मुख्य बात है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ऊर्जा निवेश की समय-सीमा पर पड़ने वाले इसके दूरगामी प्रभाव भी उतने ही महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।” Rystad का कहना है कि मरम्मत पर कुल खर्च औसतन लगभग 46 अरब डॉलर रहने की संभावना है; इसमें डाउनस्ट्रीम रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल संपत्तियों का हिस्सा सबसे ज़्यादा होगा, क्योंकि वे काफ़ी जटिल होती हैं और उन्हें नुकसान भी बड़े पैमाने पर हुआ है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि औद्योगिक, बिजली और विलवणीकरण (desalination) संपत्तियों की मरम्मत पर अतिरिक्त 3 अरब से 8 अरब डॉलर तक का खर्च आ सकता है।
भारत अब रूस से नहीं खरीद पाएगा सस्ता तेल…. अमेरिका ने फिर लगाई पाबंदी

वाशिंगटन। ईरान युद्ध (Iran War) के बाद गहराए ईंधन संकट के बीच अमेरिका (America) ने रूसी तेल (Russian oil) खरीद पर लगाई पाबंदी में ढील दी थी। इसकी मियाद 11 अप्रैल को पूरी हो गई। इस दौरान भारत ने अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद देश रूस से जमकर कच्चे तेल (Crude oil) की खरीद की। अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा फैसले ने भारत समेत कई एशियाई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका रूसी और ईरानी तेल खरीद के लिए दी गई प्रतिबंधों की छूट की समय सीमा को नहीं बढ़ाएगा। अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया के तेल बाजार में भारी अस्थिरता है। भारत जैसे देशों ने अपनी आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए इन छूटों का भरपूर लाभ उठाया था। क्या है पूरा मामला?फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। दुनिया के तेल बाजार को स्थिर करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक अस्थायी नीति अपनाई थी। इसके तहत 12 मार्च को भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी गई थी। यह केवल उस तेल के लिए थी जो 11 मार्च से पहले जहाजों पर लद चुका था। इसी तरह ईरान के लिए भी 30 दिनों का लाइसेंस दिया गया था। रूस के लिए दी गई छूट 11 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई है, जबकि ईरान के लिए यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त होने जा रही है। भारत के लिए बड़ा झटकाभारत इस छूट का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियों ने पहले रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसे रूसी आपूर्तिकर्ताओं से किनारा कर लिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, छूट मिलने के बाद भारत ने रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए थे। भारत समेत कई एशियाई देशों ने अमेरिका से इन छूटों को आगे बढ़ाने की अपील की थी, जिसे अब अमेरिकी ट्रेजरी ने ठुकरा दिया है। ट्रंप के फैसले की खूब हुई आलोचनाट्रंप प्रशासन के इस रुख की अमेरिका के भीतर खासकर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही थी। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल और अल्पसंख्यक नेता चक शूमर जैसे नेताओं ने आरोप लगाया कि इस छूट से रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपनी युद्ध मशीनरी के लिए भारी पैसा मिल रहा है। डेमोक्रेट्स का कहना है कि एक तरफ रूस यूक्रेन में बच्चों की हत्या कर रहा है, तो दूसरी तरफ वह ईरान को अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने के लिए खुफिया जानकारी दे रहा है। ऐसे में उन्हें आर्थिक राहत देना खतरनाक है। ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अब कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा क्योंकि समुद्र में जो तेल 11 मार्च से पहले था, वह इस्तेमाल किया जा चुका है। अब आगे क्या?रूस और ईरान से तेल की आयात बंद होने से भारत को अब खाड़ी के अन्य देशों या अमेरिकी घरेलू बाजार पर निर्भरता बढ़ानी होगी, जो महंगा पड़ सकता है। आपूर्ति कम होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। भारत को अब रूस के साथ व्यापार करने के लिए वैकल्पिक पेमेंट गेटवे जैसे रुपया-रुबल पर गंभीरता से विचार करना होगा, जो अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में न आए।
Rishabh Pant को कोहनी में गंभीर चोट, दर्द से कराहते हुए मैदान से बाहर

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 में 15 अप्रैल को बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को बड़ा झटका लगा, जब कप्तान Rishabh Pant को कोहनी में तेज चोट लग गई। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड की गेंद पर शॉट खेलते समय पंत पूरी तरह चूक गए और गेंद सीधे उनकी बाईं कोहनी पर जा लगी। कैसे लगी चोट?पारी के पांचवें ओवर में हेजलवुड ने तेज और उछाल भरी गेंद डाली, जिस पर पंत ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की। लेकिन गेंद की रफ्तार और बाउंस को सही तरह से न समझ पाने के कारण वह चूक गए और गेंद सीधा कोहनी पर लगी। चोट लगते ही पंत दर्द से कराहते नजर आए और तुरंत फिजियो मैदान पर पहुंचे। मैदान से बाहर, फिर छोटी वापसीशुरुआत में लगा कि पंत कुछ देर बाद दोबारा बल्लेबाजी करेंगे, लेकिन दर्द बढ़ने पर उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा।बाद में पांचवां विकेट गिरने पर वे दोबारा बल्लेबाजी के लिए उतरे, लेकिन सिर्फ 6 गेंदों में 1 रन ही बना सके। उनका विकेट भुवनेश्वर कुमार ने लिया। विकेटकीपिंग भी नहीं कर पाए पंतचोट की वजह से पंत ने विकेटकीपिंग नहीं की, जो टीम के लिए बड़ा झटका रहा। कप्तान होने के साथ-साथ वे टीम के मुख्य विकेटकीपर और मिडिल ऑर्डर के अहम बल्लेबाज भी हैं। कोहनी की चोट क्यों है गंभीर?क्रिकेट में कोहनी की चोट बल्लेबाज और विकेटकीपर दोनों के लिए मुश्किल स्थिति मानी जाती है। इससे- बैट पकड़ने में दिक्कतशॉट लगाने में दर्दथ्रो करने की क्षमता पर असरविकेटकीपिंग मूवमेंट में परेशानी टीम के लिए बड़ा झटकाLucknow Super Giants के लिए यह चोट चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि पंत टीम के कप्तान होने के साथ-साथ मैच विनर भी हैं। उनकी फिटनेस पर टीम की रणनीति और प्रदर्शन दोनों निर्भर करते हैं। अभी क्या स्थिति है?फिलहाल टीम की ओर से उनकी चोट को लेकर कोई आधिकारिक अपडेट नहीं दिया गया है। यह भी साफ नहीं है कि उन्हें स्कैन के लिए ले जाया जाएगा या नहीं। चोट कितनी गंभीर है, इसका आकलन मेडिकल जांच के बाद ही होगा।
ईरान युद्ध के चलते कई देशों में आसमान पर पहुंचे पेट्रोल-डीजल के दाम… भारत में अब तक राहत

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran–US–Israel War.) शुरू होने के बाद से अबतक कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price) आसमान पर पहुंच गए। फिलीपिंस में डीजल के रेट में 172 प्रतिशत उछाल आया तो म्यांमार में पेट्रोल के रेट डबल हो गए। लेकिन, भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट में अभी राहत है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर पिछले कई साल से अटका हुआ है। यह आशंका प्रबल है कि यह राहत चुनाव के बाद छिन सकती है। पेट्रोल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देशglobalpetrolprices.com के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक पेट्रोल के सबसे अधिक दाम बढ़ाने वाले देशों में म्यांमार (101.1%), फिलीपींस (72.6%), मलेशिया (68.1%), लाओस (45.6%), जिम्बाब्वे (42.9%) पाकिस्तान (42.0%), यूएई (40.8%), कंबोडिया (40.4%) और नेपाल (39.5%)। डीजल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देशफिलीपींस 172.0%लाओस 169.5%म्यांमार 161.4%मलेशिया 124.7%न्यूजीलैंड 89.9%यूएई 86.1%कंबोडिया 84.0%लेबनान 80.5%वियतनाम 77.9%ऑस्ट्रेलिया 65.3%स्रोत: globalpetrolprices.com कई देशों को क्यों बढ़ाने पड़े पेट्रोल-डीजल के दामयुद्ध के शुरू होने के बाद ्रबेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 111 डॉलर तक पहुंच गईं। सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, जिससे मार्च के मध्य तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया। 6 अप्रैल तक यह 111.73 डॉलर पर था। हालांकि, सीजफायर के बीच इसमें गिरावट आई और कीमत 95.49 डॉलर पर आ गई। इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा। दुनिया भर में औसत पेट्रोल कीमत 1.2 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.44 डॉलर और डीजल 1.2 से 1.6 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गया। डेटा के अनुसार कुछ देशों में ईंधन कीमतों में विस्फोटक उछाल देखने को मिली। खासतौर पर एशिया और छोटे आयात-निर्भर देशों में दाम तेजी से बढ़े। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बढ़े?एक ओर जब पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतो में आग लगी हई है तो दूसरी ओर भारत में शांति है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत में इस दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल समेत 5 राज्यों का चुनाव और सरकार द्वारा टैक्स में कटौती। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल को महंगा होने से बचाने के लिए 10-10 रुपये टैक्स कम कर दिए। वहीं, निर्यात पर टैक्स बढ़ाया, ताकि घरेलू सप्लाई में दिक्कत न हो। क्या चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल हो जाएगा महंगा?चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक यह चर्चा आम है कि पेट्रोल-डीजल के दाम 5 राज्यों के चुनाव के बाद बढ़ जाएंगे। Macquarie Group ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेट्रोल पर कंपनियों को 18 और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। क्यांकि, एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।