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मंडी व्यवस्था पर सवाल: Burhanpur में किसानों की भीड़, उप संचालक बोले- व्यवस्था सुधरी

 बुरहानपुर। जिले की तुकईथड़ कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर चना बेचने पहुंचे किसानों को मंगलवार को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। कई किसान अपनी उपज लेकर रात से ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ मंडी परिसर में पहुंच गए थे, लेकिन मंडी का मुख्य गेट सुबह से दोपहर 12 बजे तक बंद रहने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। रातभर मंडी के बाहर डटे रहे किसानजानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में किसान रात में ही मंडी पहुंच गए थे ताकि सुबह जल्दी अपनी उपज की बिक्री कर सकें। लेकिन सुबह होने के बाद भी जब मंडी का गेट नहीं खुला तो किसानों में नाराजगी और असंतोष देखने को मिला। कई किसान खुले आसमान के नीचे पूरी रात अपनी बारी का इंतजार करते रहे। गेट बंद रहने से बढ़ी परेशानीमंडी गेट पर ताला लगा होने के कारण किसानों को न तो प्रवेश मिल पाया और न ही खरीदी प्रक्रिया शुरू हो सकी। इस दौरान किसानों की भीड़ लगातार बढ़ती गई और मौके पर अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए। सूचना पर प्रशासन मौके पर पहुंचास्थिति बिगड़ती देख नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचीं और पूरी व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर तत्काल समाधान के निर्देश दिए, जिसके बाद खरीदी प्रक्रिया को शुरू कराने की कवायद तेज हुई। दोपहर 12 बजे खुला गेट, शुरू हुई खरीदीलगभग दोपहर 12 बजे मंडी का गेट खोला गया और चना खरीदी की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद धीरे-धीरे किसानों की भीड़ को नियंत्रित किया गया और उपज की तुलाई व खरीदी कार्य प्रारंभ हुआ। अधिकारियों का पक्ष व्यवस्था सामान्य हुईउप संचालक कृषि एवं खरीदी प्रभारी एमएस देवके ने बताया कि मंडी मैनेजर के पारिवारिक कारणों से समय पर नहीं पहुंच पाने के कारण देरी हुई। जैसे ही जानकारी मिली, तुरंत वैकल्पिक कर्मचारी भेजकर खरीदी शुरू कराई गई। उन्होंने कहा कि दोपहर तक सभी व्यवस्थाएं सामान्य हो गईं और खरीदी कार्य सुचारू रूप से चलने लगा। प्रशासन ने बताया अधिकार क्षेत्र का मामलाइस पूरे मामले पर एसडीएम भागीरथ वाखला ने कहा कि यह विषय उप संचालक कृषि के अधिकार क्षेत्र में आता है और आगे की व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा देखी जाएगी। किसानों में नाराजगी बरकरारहालांकि खरीदी शुरू हो गई, लेकिन किसानों ने देर से प्रक्रिया शुरू होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि समय पर व्यवस्था होती तो उन्हें रातभर परेशानी नहीं उठानी पड़ती।

सिविल सेवा : देश की प्रशासनिक व्यवस्था की “रीढ़”

– प्रदीप कुमार वर्मा भारतीय संवैधानिक प्रावधानों में तीसरी स्तंभ कहे जाने वाले कार्यपालिका के तहत सिविल सर्विस वह सेवा है, जो देश की सरकार के सार्वजनिक प्रशासन के लिए जिम्मेदार है। भारत में सिविल सेवा में भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा ,भारतीय विदेश सेवा और अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवा समूह शामिल हैं। हमारे देश में भारतीय सिविल सेवक न केवल नीतियों के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार होते हैं, बल्कि वे नीतियों को आकार देने, निर्णय लेने और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी जिम्मेदारियों में प्रशासनिक संचालन,विकास योजनाओं का क्रियान्वयन,कानून व्यवस्था बनाए रखने,प्राकृतिक आपदाओं से निपटने तथा नागरिक सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करना शामिल है। देश की विभिन्न सार्वजनिक सेवा विभागों में लगे सिविल सेवा के इन्ही अधिकारियों के काम को “स्वीकार” करने के लिए हर साल 21 अप्रैल को राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन सिविल सेवकों के लिए देश की प्रशासनिक मशीनरी को सामूहिक रूप से और नागरिकों की सेवा के प्रति “समर्पण” के साथ चलाने की भी याद दिलाता है। सिविल सेवा शब्द सबसे पहले ब्रिटिश काल में आया था, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के नागरिक कर्मचारी प्रशासनिक नौकरियों में शामिल थे। तब उन्हें “लोक सेवक” के रूप में जाना जाता था। इस व्यवस्था की नींव ब्रिटश अधिकारी वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा रखी गई। लेकिन बाद में चार्ल्स कॉर्नवॉलिस द्वारा और अधिक सुधार किए गए, इसलिए उन्हें “भारत में नागरिक सेवाओं के “पिता” के रूप में जाना जाता है। तत्कालीन भारतीय इतिहास में सिविल सेवा की शुरुआत मूल रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा वाणिज्यिक कार्यों को संभालने के लिए की गई थी। कंपनी का उद्देश्य व्यापारिक हितों की रक्षा करना था, लेकिन धीरे-धीरे यह सेवा प्रशासनिक मशीनरी के रूप में भी विकसित हुई। कालांतर में जैसे-जैसे कंपनी के क्षेत्रीय प्रभाव में विस्तार हुआ, वैसे-वैसे सिविल सेवकों की जिम्मेदारियाँ भी बढ़ीं और प्रशासनिक कामकाज के संचालन के लिए उन्हें तैयार किया गया। धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों में “प्रशासन” का उल्लेख मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र जैसे ग्रंथों में राजधर्म, प्रशासनिक ढांचे, अधिकारियों की नियुक्ति और उनके कर्तव्यों के रूप में मिलता है। तब शासन में न्याय, कर-संग्रह, जनकल्याण, और दंड नीति पर विशेष बल दिया गया था। हमारे प्राचीन महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों में राजधर्म, दंडनीति और राज्य व्यवस्था के उच्च आदर्शों का भी उल्लेख मिलता है। यही नहीं भारतीय सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में प्रशासनिक संचालन के लिए राजुक एवं महामात्र आदि अधिकारियों की नियुक्ति की थी। यह अधिकारी न्याय, कर संग्रह, जन-कल्याण और राज्य की निगरानी जैसे कार्य करते थे। प्राचीन शिलालेखों में “धम्म नीति” का उल्लेख मिलता है, जो शासन में नैतिकता और लोकहित को प्रमुखता देता है। वहीं,गुप्त काल की प्रशासनिक व्यवस्था में विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्ति देखी गई। प्रशासनिक पदों में उपरिक, विषयपति, नगरपति, और ग्रामिक जैसे पदाधिकारी नियुक्त होते थे।स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार प्राप्त थे, जिससे शासन सुगठित रूप से चलता था। मध्यकालीन भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में दक्षिण भारत के साम्राज्य चोल, चेर, पाण्ड्य और विजयनगर साम्राज्य में संगठित प्रशासनिक तंत्र था। प्राचीन भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के इतिहास में चोलों के काल में स्थानीय स्वशासन प्रणाली अत्यंत विकसित थी। तब ग्राम सभाएं सक्रिय रूप से कर संग्रह, न्याय और विकास कार्यों में लगी रहती थीं। आज की प्रशासनिक व्यवस्था में काल की प्रशासनिक व्यवस्था परिलक्षित होती है। इसी प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज ने एक संगठित प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया जिसे “अष्टप्रधान मंडल” कहा जाता था, जिसमें आठ मंत्री विभिन्न विभागों का संचालन करते थे।इनमें पेशवा, अमात्य, सुमंत, सचिव, पंडितराव, सेनापति, नायक एवं न्यायाधीश शामिल थे। उस काल में भी आज की ही तरह “गांव” प्रशासन की सबसे छोटी इकाई होती थी, जिसका संचालन ग्रामसभा करती थी। इसके बाद में तब के मुगल शासन में प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित किया गया। जिसमे न्यायपालिका, पुलिस और राजस्व प्रशासन को अलग-अलग विभागों में बांटा गया। राजस्व नीति में टोडरमल की व्यवस्था को ऐतिहासिक माना जाता है। भारत के स्वतंत्र होने के बाद देश के सिविल सेवकों के पहले बैच को सरदार वल्लभ भाई पटेल ने संबोधित किया था। देश के सिविल सेवकों को समर्पित इस प्रेरक भाषण में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने उन्हें भारत का स्टील फ्रेम कहा था। सरदार पटेल ने उस ऐतिहासिक भाषण में सिविल सेवकों से आग्रह किया था कि वे राजनीतिक दबावों से ऊपर उठकर निष्पक्षता, निष्ठा और पारदर्शिता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने घोषणा की कि देश के लिए सिविल सेवकों के योगदान का सम्मान करने के लिए हर साल राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस मनाया जाएगा. 21 अप्रैल 2006 को विज्ञान भवन में पहला राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस मनाया गया। तब से, यह दिन हर साल एक ही दिन मनाया जाता है। स्वतंत्रता के बाद, भारतीय संविधान निर्माताओं ने सिविल सेवा को एक गैर-राजनीतिक, निष्पक्ष और सक्षम संस्था के रूप में बनाए रखने का निर्णय लिया।भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, और भारतीय विदेश सेवा जैसी अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना की गई। राजनीतिक विश्लेषण भारत में युवाओं का सिविल सेवा की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है। भारत में सिविल सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। भारतीय सिविल सेवा में सफलता के झंडे गाड़ने वाली दो बहनों टीना डाबी और रिया डाबी के नाम से आज कौन परिचित नहीं है। वहीं,देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी आज भी इन युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा की स्रोत है। अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार सिविल सेवा में महिलाओं की हिस्सेदारी अब 31 प्रतिशत से अधिक हो गई है और कुल सफल उम्मीदवारों के एक तिहाई की ओर लगातार बढ़ रही है। लगभग एक दशक पहले सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत थी। यह एक महत्‍वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है। सिविल सेवाओं में युवाओं की बढ़ती संख्या और इस बढ़ते आकर्षण के पीछे प्रतिष्ठा, सुरक्षा, और समाज सेवा जैसे कई महत्वपूर्ण कारक हैं। आज के डिजिटल युग में सिविल सेवकों की भूमिका और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। उन्हें ‘ई-गवर्नेंस’, ‘समावेशी विकास’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे लक्ष्यों को जमीनी

उज्जैन के महाकाल मंदिर में अनुपम खेर की भक्ति यात्रा, देश और फैंस के लिए की विशेष प्रार्थना, मंदिर व्यवस्था की खुलकर की तारीफ

नई दिल्ली। उज्जैन: प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित पवित्र महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन किए। अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने मंदिर में आयोजित आरती में भाग लिया और पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की। मंदिर में बिताए गए समय को उन्होंने बेहद दिव्य और ऊर्जावान अनुभव बताया और कहा कि यहां आकर उन्हें एक अलग ही शांति और शक्ति का एहसास हुआ, जो जीवन में एक विशेष प्रेरणा देता है। अनुपम खेर समय-समय पर अपनी धार्मिक यात्राओं को लेकर चर्चा में रहते हैं। वे देशभर के विभिन्न मंदिरों और पवित्र स्थलों पर जाकर आस्था व्यक्त करते हैं और अपने अनुभवों को फैंस के साथ साझा करते हैं। इसी क्रम में उनकी उज्जैन यात्रा भी बेहद खास रही, जहां उन्होंने महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर की भव्यता और वातावरण की आध्यात्मिक ऊर्जा को करीब से महसूस किया। अभिनेता ने अपनी इस यात्रा की झलक अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की, जहां उन्होंने कई तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए। इन दृश्यों में वे मंदिर परिसर में घूमते हुए और आरती में शामिल होते हुए दिखाई दिए। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि महाकाल के दर्शन करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय रहा और उन्होंने देशवासियों की शांति, सुख और समृद्धि के लिए भी प्रार्थना की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की संस्कृति और धार्मिक स्थलों की प्राचीनता और भव्यता विश्व में अद्वितीय है। वीडियो संदेश में अनुपम खेर ने उत्साह के साथ ‘जय महाकाल’ का उद्घोष किया और बताया कि आरती के दौरान का अनुभव अत्यंत दिव्य था। उन्होंने कहा कि यहां का वातावरण मन और आत्मा दोनों को एक अलग ऊर्जा प्रदान करता है। साथ ही उन्होंने मंदिर प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की और कहा कि यहां भक्तों के लिए सुव्यवस्थित और सम्मानजनक व्यवस्था की गई है, जिससे सभी श्रद्धालु सहजता से दर्शन कर सकें। अनुपम खेर ने यह भी बताया कि उन्होंने महाकाल के दर्शन के साथ-साथ सभी के कल्याण और देश की प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना की। उनके अनुसार यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं थी, बल्कि आत्मिक शांति और आंतरिक शक्ति प्राप्त करने का एक माध्यम भी रही। वर्कफ्रंट की बात करें तो अनुपम खेर जल्द ही फिल्म ‘खोसला का घोसला’ के दूसरे भाग में नजर आएंगे, जिसमें वे एक बार फिर कमल किशोर खोसला के किरदार में दिखाई देंगे। इस फिल्म का निर्देशन दिबाकर बनर्जी कर रहे हैं और इसमें कई अनुभवी कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में होंगे। इसके अलावा वे निर्देशक सूरज बड़जात्या के आगामी प्रोजेक्ट का भी हिस्सा हैं, जिससे उनके प्रशंसकों में उत्साह बना हुआ है। महाकालेश्वर मंदिर की यह यात्रा एक बार फिर यह दर्शाती है कि अनुपम खेर अपने व्यस्त फिल्मी करियर के बावजूद आध्यात्मिकता और आस्था से गहरा जुड़ाव रखते हैं। उनका यह अनुभव न केवल उनके लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि उनके चाहने वालों के लिए भी प्रेरणादायक संदेश लेकर आया है।

सामाजिक सुरक्षा नीति की मांग तेज: बड़वानी में मुलायम कर्मियों ने तेज आवाज

बड़वानी। जिले में मंगलवार को भारतीय मजदूर संघ, मध्यप्रदेश के बैनर तले आउटसोर्स एवं ठेका कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार बाबू सिंह निनामा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी रैली के रूप में पहुंचे और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग की। आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं पर ठोस नीति की मांगज्ञापन में प्रदेश के विभिन्न विभागों, उद्योगों और संस्थाओं में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक ठोस और स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई है। संघ ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और स्थायी सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है, जिसे तुरंत दूर किया जाना चाहिए। श्रम कानूनों के सख्त पालन की मांगसंघ ने अपने ज्ञापन में श्रम कानूनों के सख्त पालन पर जोर देते हुए कहा कि कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मांग की गई कि 8 घंटे से अधिक कार्य करने पर अतिरिक्त भुगतान दिया जाए, वेतन हर महीने की 7 तारीख तक सुनिश्चित रूप से मिले और सभी कर्मचारियों को वेतन पर्ची उपलब्ध कराई जाए। ईपीएफ, ईएसआई और समान वेतन की मांगकर्मचारियों ने मांग की कि सभी आउटसोर्स कर्मियों को ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिले। इसके साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू करने और बिचौलिया प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर सीधे विभाग से भुगतान करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई। नौकरी सुरक्षा और सुविधाओं पर जोरज्ञापन में यह भी कहा गया कि बिना जांच के किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया जाए और अनुभव के आधार पर वेतन वृद्धि दी जाए। साथ ही नियमित भर्ती प्रक्रियाओं में आउटसोर्स कर्मचारियों को अवसर देने, सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने और साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की गई। 62 वर्ष तक सेवा और बीमा सुविधा की मांगसंघ ने यह भी प्रस्ताव रखा कि कर्मचारियों को 62 वर्ष तक सेवा का अवसर दिया जाए। इसके अलावा 20 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा और कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई, ताकि कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित और सशक्त बन सके। प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपीलभारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान केवल कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के हित में है। उन्होंने सरकार से जल्द ठोस निर्णय लेने की अपील की।

खरगोन में किसान ने खेत में जहर पीकर की आत्महत्या, लगाए गंभीर आरोप

खरगोन। जिले के रेहगांव में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 43 वर्षीय किसान सालकराम मोतीराम यादव ने अपने ही खेत में जहरीली दवा पीकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मंगलवार सुबह गोगांवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मौत से पहले बनाया वीडियो, लगाए गंभीर आरोपआत्महत्या से पहले किसान ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें वह भावुक होकर कुछ लोगों के नाम लेते हुए नजर आया। वीडियो में उसने जमीन खरीद-फरोख्त के दौरान धोखाधड़ी, पैसे लेने के बाद भी जमीन न देने और लगातार धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही उसने पुलिस से अपने परिवार की सुरक्षा और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। 45 लाख रुपये के जमीन सौदे में विवादजानकारी के अनुसार, सालकराम यादव ने रेहगांव निवासी राजू गुप्ता, वीरेंद्र गुप्ता और जितेंद्र गुप्ता से 7 एकड़ 52 डिसमिल जमीन का सौदा 45 लाख रुपये में किया था। यह सौदा सुरेश मंशाराम यादव के नाम पर लिखी गई चिट्ठी के आधार पर हुआ था। इसमें एक लाख रुपये बयाना दिया गया था और बाकी राशि पांच महीने में देने की शर्त तय की गई थी। पैसे देने के बाद भी मुकरने का आरोपमृतक किसान ने वीडियो में आरोप लगाया कि उसने तय राशि में से 45 लाख रुपये दे दिए थे, जिसमें पूरी लिखापढ़ी का खर्च भी शामिल था। इसके बावजूद जमीन मालिकों ने सौदे से मुकरते हुए उसे जमीन नहीं दी। किसान का यह भी दावा है कि उसने राजू और जितेंद्र गुप्ता को 22 लाख 7 हजार 300 रुपये अलग से दिए थे, फिर भी वे अपने वादे से पीछे हट गए। धमकी देने के भी लगाए आरोपकिसान ने अपने वीडियो में बिलखेड़ निवासी श्याम पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि श्याम उसे खरीदी गई जमीन पर जाने से रोक रहा था और जान से मारने की धमकी दे रहा था। इसके अलावा सुरेश और उसके बेटे कमलेश पर भी धमकाने का आरोप लगाया गया है। पोस्टमार्टम के दौरान हंगामा, गिरफ्तारी की मांगपोस्टमार्टम के दौरान परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति बिगड़ती देख थाना प्रभारी दीपक यादव ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाइश दी और उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर माहौल शांत कराया। पुलिस जांच में जुटी, मर्ग कायमगोगांवा पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, परिजनों के बयान और वीडियो साक्ष्य के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इलाके में शोक और आक्रोश का माहौलघटना के बाद रेहगांव और आसपास के गांवों में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर विवाद का समाधान होता तो किसान की जान बच सकती थी।

40 साल का करियर और 150 फिल्में; राकेश बेदी के घर का हर कोना बयां करता है अभिनय के प्रति उनका जुनून

नई दिल्ली।  मनोरंजन जगत के जाने-माने अभिनेता राकेश बेदी, जिन्होंने हाल ही में अपने अभिनय से एक बार फिर दर्शकों के बीच हलचल मचा दी है, इन दिनों अपने अभिनय के साथ-साथ अपने खास आशियाने को लेकर भी चर्चा में हैं। मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित एक प्रसिद्ध टावर में बना उनका घर किसी आम घर जैसा नहीं, बल्कि एक छोटी सी फिल्मी दुनिया जैसा नजर आता है। अपनी पत्नी और बेटी के साथ इस घर में रह रहे राकेश बेदी ने इसे बेहद संजीदगी और कलात्मकता के साथ संवारा है, जहां कदम रखते ही सिनेमा के प्रति उनके प्रेम की झलक मिलती है। राकेश बेदी के घर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी प्रवेश शैली है। घर के मुख्य द्वार पर ही कुछ स्लेट्स लगाई गई हैं, जिन पर हिंदी सिनेमा के कालजयी डायलॉग लिखे हुए हैं। मेहमानों का स्वागत ‘शोले’ फिल्म के गब्बर सिंह के उस मशहूर संवाद ‘जो डर गया समझो मर गया’ से होता है, जो तुरंत ही घर के माहौल को फिल्मी और रोमांचक बना देता है। घर की इस साज-सज्जा का श्रेय उनकी पत्नी आराधना को जाता है, जिन्होंने पेशेवर चकाचौंध से दूर घर में एक पारिवारिक सुकून और फिल्मी विरासत का संतुलन बनाए रखा है। घर के भीतर का नजारा बेहद सादगीपूर्ण और आरामदायक है। लिविंग रूम को कोजी सोफों और टेक्सचर्ड वॉल पेंट के साथ सजाया गया है, जहां मेल खाते हुए शो-पीस और लैंप शेड इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं। अभिनय के साथ-साथ लेखन और पठन-पाठन में रुचि रखने वाले राकेश बेदी ने घर में एक कस्टमाइज लाइब्रेरी भी बनाई है। इसके अलावा, उन्होंने एक छोटा ऑफिसनुमा कमरा भी तैयार किया है, जिसकी दीवारें उनके प्रशंसकों द्वारा दिए गए उपहारों, पेंटिंग्स और उनके लोकप्रिय नाटकों के पोस्टर्स से भरी हुई हैं। यह कोना उनके करियर के उतार-चढ़ाव और दर्शकों के प्यार का जीता-जागता गवाह है। लगभग चार दशकों से फिल्म जगत का हिस्सा रहे राकेश बेदी ने अब तक 150 से अधिक फिल्मों और अनगिनत नाटकों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से न केवल नाम कमाया, बल्कि एक भव्य जीवनशैली भी अर्जित की है। उनका यह घर केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं है, बल्कि उस कलाकार की स्मृतियों का संदूक है जिसने अपनी कॉमेडी और संजीदा अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज किया है। वर्तमान में उनके घर की ये झलकियां कला प्रेमियों और प्रशंसकों के बीच काफी पसंद की जा रही हैं। यह घर इस बात का उदाहरण है कि कैसे आधुनिकता के बीच अपनी जड़ों और अपनी कला को सहेजकर रखा जा सकता है। राकेश बेदी का यह आशियाना न केवल उनके संघर्षों की कहानी सुनाता है, बल्कि नए कलाकारों के लिए एक प्रेरणा भी है कि सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी अपनी पसंद और यादों को कैसे संजोया जाता है।

BHIND MURDER CASE : पुरानी रंजिश के चलते युवक को मरी गोली, पहले थे अच्छे दोस्त; बाद में बने दुश्मन!

Bhind Youth Shot Dead

HIGHLIGHTS: भिंड के कैथोदा गांव में युवक की हत्या पुरानी रंजिश बनी वारदात की वजह रास्ता रोककर की गई फायरिंग 5 आरोपी घटना के बाद फरार गांव में दहशत का माहौल   BHIND MURDER CASE : भिंड। जिले के मेहगांव थाना क्षेत्र के कैथोदा गांव में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बता दें कि मृतक गिर्राज गुर्जर एक निमंत्रण कार्यक्रम से लौट रहा था, तभी पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे रास्ते में रोक लिया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में सनसनी फैल गई। दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर जानकारी के मुताबिक गिर्राज गुर्जर और मुख्य आरोपी आसवीर गुर्जर के बीच पुरानी रंजिश थी। बताया जा रहा है कि दोनों पहले अच्छे दोस्त थे, लेकिन किसी विवाद के बाद उनके रिश्ते बिगड़ गए। समय के साथ यह विवाद गहरी दुश्मनी में बदल गया, जिसका अंत इस खौफनाक वारदात में हुआ। Morena Mayor Sharda Solanki : CM से मिलने पर रोका तो भड़क गई महापौर; TI को ही कह दिया-बदतमीज कहीं की! पहले विवाद, फिर ताबड़तोड़ फायरिंग घटना वाली रात आरोपियों ने गिर्राज का रास्ता रोककर पहले गाली-गलौज और मारपीट की। विवाद बढ़ने पर मुख्य आरोपी ने बंदूक से उसके सीने में गोली मार दी। इसके बाद एक अन्य आरोपी ने भी फायरिंग की, जबकि बाकी आरोपी उसे उकसाते रहे। गोली लगते ही गिर्राज की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी फरार, पुलिस की तलाश जारी वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं। पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। शादी में खूनी बवाल: बाप-बेटे ने तलवार से किया हमला, दूल्हे के मामा की मौत गांव में दहशत, सुरक्षा बढ़ाई गई घटना के बाद कैथोदा गांव में भय का माहौल बना हुआ है। पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर आक्रोश और डर दोनों देखने को मिल रहा है।

Khandwa में सड़क पर पड़े मुरूम के ढेर से दर्दनाक हादसा, बाइक टकराकर 28 वर्षीय युवक की मौत

खंडवा। जिले के बीड़ रोड स्थित मूंदी मंडी के पास सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें शादी समारोह से लौट रहे तीन लोगों की बाइक सड़क किनारे पड़े मुरूम (गिट्टी-मिट्टी) के ढेर से टकरा गई। इस हादसे में 28 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। शादी से लौटते समय हुआ हादसाजानकारी के अनुसार, ग्राम दैत निवासी विजय सिंह (28), जो टेलर का काम करता था, अपने साथी राजेंद्र सिंह (35) और 12 वर्षीय सूरज सिंह के साथ ग्राम मांडला में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। देर रात तीनों एक ही बाइक से घर लौट रहे थे, तभी मूंदी मंडी के पास अंधेरे में सड़क किनारे पड़े मुरूम के ढेर से उनकी बाइक अनियंत्रित होकर टकरा गई। अस्पताल पहुंचते ही टेलर ने तोड़ा दमहादसा इतना भीषण था कि तीनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत मूंदी के शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान विजय सिंह ने दम तोड़ दिया। वहीं, डॉक्टर शिखा चंद्रवंशी ने राजेंद्र सिंह और सूरज सिंह की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल खंडवा रेफर कर दिया। बिना सुरक्षा संकेत के पड़ा था मुरूम, लापरवाही के आरोपप्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सड़क किनारे मुरूम का ढेर बिना किसी चेतावनी संकेत या सुरक्षा व्यवस्था के रखा गया था। अंधेरे के कारण बाइक सवार उसे देख नहीं पाए और यह हादसा हो गया। स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। राजनीतिक दलों ने ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग कीघटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। भाजपा नेता दिग्विजय सिंह तोमर और युवक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अनिल जाधव ने इस मामले में लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। दोनों नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया है। पुलिस जांच में जुटीमूंदी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की जांच की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। गांव में मातम का माहौलविजय सिंह की मौत की खबर से उसके गांव दैत में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

साउथ की फिल्मों का ओटीटी पर धमाका: इस हफ्ते रिलीज होंगी कॉमेडी और पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्में

नई दिल्ली।क्षेत्रीय सिनेमा के शौकीनों के लिए अप्रैल का यह सप्ताह मनोरंजन की एक नई लहर लेकर आया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस वीकेंड एक साथ कई भाषाओं और अलग-अलग विषयों पर आधारित दक्षिण भारतीय फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। अगर आप कॉमेडी, रोमांस, राजनीति या थ्रिलर कहानियों के प्रशंसक हैं, तो यह हफ्ता आपके लिए बेहद खास है। मनोरंजन जगत में इन फिल्मों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इस सप्ताह की सूची काफी विविधतापूर्ण रखी गई है, जो हर वर्ग के दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखती है। सप्ताह की शुरुआत में ही महिलाओं के संघर्ष और अदम्य शक्ति पर आधारित फिल्म ‘लेचिंदी महिला लोकम’ दर्शकों के बीच होगी। यह फिल्म समाज में महिलाओं के सामने आने वाली रोजमर्रा की मुश्किलों और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को बेहद संजीदगी से दर्शाती है। यह सामाजिक संदेश देने वाली फिल्म 22 अप्रैल से देखने के लिए उपलब्ध होगी। इसके ठीक बाद राजनीति के गलियारों की कड़वी सच्चाई और दांव-पेच दिखाने वाली फिल्म ‘प्रतिछाया’ रिलीज होने जा रही है। यह एक पॉलिटिकल थ्रिलर है, जिसकी कहानी एक ताकतवर नेता के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भ्रष्टाचार के आरोपों और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के बीच फंसा हुआ है। इसे 24 अप्रैल को प्रसारित किया जाएगा। युवा दर्शकों के लिए भी इस सप्ताह एक मजेदार विकल्प उपलब्ध है। ‘हैप्पी राज’ नाम की फिल्म एक रोमांटिक कॉमेडी-ड्रामा है, जो एक मध्यमवर्गीय परिवार की रोजमर्रा की मजेदार उलझनों को दिखाती है। इसमें नायक अपनी प्रेम कहानी और अपने पिता की विचित्र आदतों के बीच तालमेल बैठाने की जद्दोजहद करता नजर आता है। यह फिल्म भी 24 अप्रैल को ही डिजिटल पर्दे पर दस्तक देगी। इसके साथ ही, एक बहुप्रतीक्षित रोमांटिक फिल्म ‘बैंड मेलम’ भी बड़े पर्दे पर सफलता के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने के लिए तैयार है। यह फिल्म 26 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और अब 24 अप्रैल से इसे घर बैठे देखा जा सकेगा। ओटीटी लवर्स के लिए यह सप्ताह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये फिल्में न केवल अपनी मूल भाषा बल्कि कई अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध होकर एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँच रही हैं। अलग-अलग स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने अपने दर्शकों को बांधे रखने के लिए इन बेहतरीन फिल्मों पर भरोसा जताया है। इन नई रिलीज के आने से दर्शकों का वीकेंड काफी रोमांचक और मनोरंजक होने वाला है।

स्वास्थ्य निगरानी की नई पहल: Harda जेल में कैदियों की सेहत पर होगी विशेष जांच

हरदा। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार जिला जेल हरदा में 25 अप्रैल को विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर का उद्देश्य जेल में निरुद्ध कैदियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच करना और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। प्रधान जिला न्यायाधीश के मार्गदर्शन में होगा आयोजनयह विशेष शिविर प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरदा के अध्यक्ष अरविंद रघुवंशी के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जेल परिसर में स्वास्थ्य एवं विधिक दोनों ही सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। हर कैदी को मिलेगा हेल्थ कार्डशिविर के दौरान प्रत्येक कैदी का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा और उन्हें एक विशेष हेल्थ कार्ड प्रदान किया जाएगा। इस हेल्थ कार्ड में संबंधित कैदी की बीमारी, वर्तमान उपचार, खान-पान संबंधी सलाह और आवश्यक सावधानियों का विस्तृत विवरण दर्ज रहेगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नियमित निगरानी रखी जा सकेगी। स्वास्थ्य के साथ विधिक साक्षरता पर भी जोरइस शिविर में केवल स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं बल्कि विधिक साक्षरता कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसके तहत कैदियों को नालसा (NALSA) और सालसा (SALSA) की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें उनके लंबित मामलों की स्थिति से अवगत कराया जाएगा और जरूरतमंद कैदियों को मुफ्त विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कैदियों के पुनर्वास की दिशा में अहम कदमप्रशासन का मानना है कि इस तरह के शिविर न केवल कैदियों के स्वास्थ्य सुधार में मदद करेंगे, बल्कि उन्हें कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाकर उनके पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहलइस आयोजन में जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त भागीदारी रहेगी। चिकित्सक टीम द्वारा कैदियों की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे के उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी।