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चोट से उबरकर मिचेल स्टार्क की धमाकेदार वापसी तय, दिल्ली कैपिटल्स को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली ।आईपीएल 2026 के बीच दिल्ली कैपिटल्स के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत देने वाली खबर सामने आई है, जिसने टीम के खेमे में नई ऊर्जा भर दी है। ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क को प्रतियोगी क्रिकेट खेलने की अनुमति मिल गई है, जिसके बाद उनके जल्द ही दिल्ली कैपिटल्स से जुड़ने की पूरी संभावना बन गई है। लंबे समय से चोट की समस्या से जूझ रहे स्टार्क को कोहनी और कंधे की परेशानी के कारण इस सीजन के शुरुआती मैचों से बाहर रहना पड़ा था, लेकिन अब उनकी वापसी लगभग तय मानी जा रही है और वह जल्द मैदान पर नजर आ सकते हैं। स्टार्क की चोट की शुरुआत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान हुई थी, जहां उन्होंने लगातार पांच टेस्ट मैच खेले थे और अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया था। इसके बावजूद उनके कंधे और कोहनी में धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, जिसने बाद में उनकी फिटनेस पर असर डाला। इसके बाद उन्हें रिकवरी और रिहैब प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसके कारण वह आईपीएल के शुरुआती चरण में उपलब्ध नहीं हो पाए। उनकी अनुपस्थिति का असर दिल्ली कैपिटल्स की गेंदबाजी पर साफ नजर आया और टीम को कई मुकाबलों में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान सोशल मीडिया पर उनके आईपीएल में न खेलने को लेकर कई तरह की चर्चाएं और आलोचनाएं भी देखने को मिलीं, लेकिन स्टार्क ने स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह फिट होने के बाद ही मैदान में वापसी करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनकी चोट टीम के लिए शुरुआती मैचों में चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर रही है, लेकिन उनका लक्ष्य पूरी तरह स्वस्थ होकर टीम को योगदान देना है। अब जब उन्हें आधिकारिक रूप से मंजूरी मिल गई है, तो उनके जल्द ही टीम से जुड़ने की उम्मीदें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि वह जल्द ही राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मुकाबले में मैदान पर उतर सकते हैं, जिससे दिल्ली कैपिटल्स की गेंदबाजी को बड़ा फायदा मिलेगा। उनकी वापसी से टीम की पेस अटैक को मजबूती मिलेगी और डेथ ओवर्स में रन रोकने की क्षमता भी बेहतर होगी। वर्तमान में दिल्ली कैपिटल्स ने अपने प्रदर्शन में संतुलन बनाए रखा है, लेकिन टीम को लगातार जीत की जरूरत है ताकि प्लेऑफ की दौड़ में मजबूत स्थिति बनाई जा सके। ऐसे में मिचेल स्टार्क की वापसी टीम के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। उनकी अनुभव और गेंदबाजी कौशल विपक्षी टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। टीम प्रबंधन भी स्टार्क की वापसी को लेकर बेहद उत्साहित है और उम्मीद कर रहा है कि उनके आने से गेंदबाजी आक्रमण में स्थिरता और धार दोनों बढ़ेंगी। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्टार्क कब पूरी तरह मैदान पर उतरते हैं और अपने प्रदर्शन से टीम को कितनी मजबूती प्रदान करते हैं।

ग्वालियर से 4 मई से बढ़ेंगी फ्लाइट्स, दिल्ली के लिए हफ्ते में 6 दिन उड़ान

नई दिल्ली । ग्वालियर के यात्रियों के लिए राहतभरी खबर है। शहर की एयर कनेक्टिविटी अब पहले से ज्यादा मजबूत होने जा रही है। 4 मई से Akasa Air की नई फ्लाइट सेवा शुरू होगी, जिससे ग्वालियर से दिल्ली के बीच हवाई यात्रा और आसान हो जाएगी। नई सेवा के बाद अब यात्रियों को सप्ताह में 6 दिन उड़ान सुविधा मिलेगी, जो अब तक सीमित थी। अब हफ्ते में 6 दिन फ्लाइट, बढ़ी सुविधाअब तक IndiGo की फ्लाइट्स केवल मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को संचालित हो रही थीं। लेकिन नई व्यवस्था के तहत अकासा एयर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को अपनी उड़ानें शुरू करेगी। इस तरह दोनों एयरलाइंस मिलकर लगभग पूरे सप्ताह यात्रियों को ग्वालियर-Delhi रूट पर सेवा देंगी। इस बदलाव से खासतौर पर उन यात्रियों को राहत मिलेगी, जिन्हें पहले सीमित दिनों के कारण यात्रा प्लान करने में परेशानी होती थी। कनेक्टिविटी होगी और मजबूतदिल्ली पहुंचने के बाद यात्रियों को देश के बड़े शहरों बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे व्यापारियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को सीधा फायदा होगा, क्योंकि अब उन्हें कनेक्टिंग फ्लाइट्स के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सुविधाजनक टाइमिंग, डे-ट्रैवल के लिए बेहतरनई फ्लाइट राजमाता विजयाराजे सिंधिया टर्मिनल पर सुबह 10:40 बजे पहुंचेगी और 11:50 बजे दिल्ली के लिए रवाना होगी। यह टाइमिंग खासतौर पर बिजनेस ट्रैवलर्स और डे-ट्रिप करने वालों के लिए काफी अनुकूल मानी जा रही है।एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, इस शेड्यूल से यात्रियों को उसी दिन काम निपटाकर वापसी की योजना बनाने में भी सुविधा मिलेगी। विकास को मिलेगी नई रफ्तारटर्मिनल डायरेक्टर लोकेंद्र कुमार यादव का कहना है कि उड़ानों की संख्या बढ़ने से न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि शहर के आर्थिक और पर्यटन विकास को भी गति मिलेगी। बेहतर एयर कनेक्टिविटी किसी भी शहर के विकास का अहम आधार होती है, और यह पहल ग्वालियर को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत पहचान दिलाने में मदद करेगी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा कदमविशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से क्षेत्रीय शहरों को बड़े महानगरों से जोड़ने में मदद मिलती है। इससे निवेश, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक और व्यावसायिक महत्व वाले शहर के लिए यह कदम लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है।

भीषण गर्मी का असर, आस्था पर ग्वालियर के मंदिरों में पूजा पद्धति, में बड़े बदलाव

ग्वालियर । ग्वालियर में भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ जनजीवन तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसका प्रभाव धार्मिक स्थलों और आस्था के केंद्र मंदिरों तक भी साफ दिखाई देने लगा है जहां मौसम के अनुरूप भगवान की सेवा और पूजा पद्धति में बदलाव किए जा रहे हैं तेज धूप और लू के थपेड़ों के बीच मंदिरों के पुजारी देवताओं को राहत पहुंचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं ताकि श्रद्धा और परंपरा के साथ साथ मौसम का संतुलन भी बना रहे शहर के प्रमुख मंदिरों में अब देवी देवताओं को गर्म और भारी वस्त्रों की जगह हल्के और सूती कपड़े पहनाए जा रहे हैं जिससे उन्हें ठंडक मिल सके वहीं श्रृंगार में भी बदलाव करते हुए चंदन खस मोगरा और गुलाब जैसे प्राकृतिक ठंडक देने वाले तत्वों का उपयोग बढ़ा दिया गया है मंदिरों में फैलती इन सुगंधों के साथ वातावरण भी शीतल और शांत महसूस होने लगा है भोग की परंपरा में भी मौसम का असर साफ दिख रहा है जहां पहले पक्के और गरम भोजन चढ़ाए जाते थे वहीं अब उनकी जगह ठंडे और तरल पदार्थों को प्राथमिकता दी जा रही है भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद में अब मौसमी फल और शीतल पेय शामिल किए जा रहे हैं ताकि यह भोग भी मौसम के अनुकूल हो सके अचलेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ की सेवा में विशेष परिवर्तन किए गए हैं यहां अभिषेक के लिए ठंडे पानी का उपयोग किया जा रहा है और गर्भगृह में कूलर लगाए गए हैं जिससे अंदर का तापमान नियंत्रित रखा जा सके इसके साथ ही पिंडी के ऊपर एक छेद वाला मटका रखा गया है जिससे लगातार जलधारा गिरती रहती है और शिवलिंग को शीतल बनाए रखती है मंदिर प्रशासन का कहना है कि जल्द ही यहां एसी की सुविधा भी शुरू की जाएगी इसी तरह चक्रधर मंदिर में भी पूजा पद्धति में बदलाव देखने को मिल रहा है यहां भगवान को सूती वस्त्र पहनाने के साथ चंदन का लेप किया जा रहा है और भोग में खरबूजा तरबूज आम अनार जैसे रसदार फल और ठंडाई को शामिल किया गया है जो गर्मी में ठंडक पहुंचाने का काम करते हैं श्रद्धालु भी इस बदले हुए स्वरूप को देख संतोष और आस्था के साथ जुड़ रहे हैं मंदिरों के पुजारियों के अनुसार यह बदलाव कोई नया प्रयोग नहीं बल्कि हर साल गर्मी के मौसम में अपनाई जाने वाली परंपरा का हिस्सा है उनका मानना है कि भगवान की सेवा भी प्रकृति और मौसम के अनुसार होनी चाहिए ताकि भक्ति का भाव और अधिक सजीव बना रहे गौरतलब है कि ग्वालियर में इन दिनों तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्म हवाओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है बुधवार को अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि गुरुवार को न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से अधिक है दिन और रात दोनों समय गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है ऐसे में मंदिरों में किए गए ये बदलाव न सिर्फ धार्मिक परंपराओं का पालन हैं बल्कि बदलते मौसम के प्रति संवेदनशीलता का भी उदाहरण बनकर सामने आ रहे हैं

कमल हासन और श्रुति हासन ने साथ डाला वोट, लोकतंत्र के पर्व में सितारों की चमक..

नई दिल्ली । तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राज्यभर में मतदान का माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा, जहां आम नागरिकों के साथ-साथ फिल्मी जगत की कई बड़ी हस्तियों ने भी लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और हर वर्ग के मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्साहित नजर आए। चेन्नई सहित राज्य के कई हिस्सों में मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग प्रक्रिया जारी रही, जिससे लोकतंत्र की मजबूती का संदेश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस दौरान सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली उपस्थिति अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन तथा उनकी बेटी अभिनेत्री श्रुति हासन की रही। दोनों चेन्नई के एक मतदान केंद्र पर एक साथ पहुंचे और सुबह ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पिता और पुत्री की यह जोड़ी मतदान केंद्र पर आकर्षण का केंद्र बनी रही, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने के लिए इकट्ठा हो गए। मतदान के बाद श्रुति हासन ने लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करते हुए संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने सभी से अपने अधिकार का प्रयोग करने की अपील की। उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया और कई युवाओं ने भी मतदान को लेकर उत्साह दिखाया। कमल हासन, जो लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं, इस चुनाव में भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनकर लोगों को जागरूक करते नजर आए। उन्होंने मतदान को हर नागरिक का महत्वपूर्ण अधिकार बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से वोट डालने की अपील की। मतदान केंद्र पर उनकी उपस्थिति के दौरान माहौल काफी उत्साहित रहा और समर्थकों की भीड़ ने उन्हें देखने के लिए काफी देर तक इंतजार किया। इसी बीच तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई अन्य प्रसिद्ध कलाकारों ने भी अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डाला। अभिनेता रजनीकांत ने चेन्नई के एक मतदान केंद्र पर पहुंचकर शांतिपूर्वक मतदान किया और लोगों से अपील की कि वे लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में वोट करें। उनके आने से वहां भी भारी भीड़ इकट्ठा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय रहना पड़ा। अभिनेता धनुष ने भी मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया और युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा अभिनेता अजित कुमार भी मतदान केंद्र पर सफेद पारंपरिक पोशाक में नजर आए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से वोट डालने के बाद अपने फैंस का अभिवादन किया और वहां से रवाना हुए। उनकी मौजूदगी से भी मतदान केंद्र पर उत्साह का माहौल बन गया। इसी तरह अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी अलग-अलग केंद्रों पर जाकर मतदान किया और लोगों को अपने अधिकार के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। पूरे राज्य में मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। हर मतदान केंद्र पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात था ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। सुबह से शाम तक चली इस प्रक्रिया में राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। अब सभी की निगाहें आगामी परिणामों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

ग्वालियर स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल, 11 करोड़ खर्च के बाद भी सड़कों से गायब बसें

नई दिल्ली । ग्वालियर में स्मार्ट सिटी के नाम पर शुरू की गई बस सेवा अब पूरी तरह सवालों के घेरे में है। शहरवासियों को सस्ती, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज ठप पड़ चुका है। जिन बसों को शहर की लाइफलाइन बनना था, वे अब सुनसान इलाकों में खड़ी-खड़ी कबाड़ में तब्दील होती नजर आ रही हैं। 2023 में हुई थी शुरुआत, कुछ महीनों में ही ठपGwalior Smart City Development Corporation ने साल 2023 में बड़े दावों के साथ इंट्रा सिटी बस सेवा शुरू की थी। इन बसों में आधुनिक सुविधाएं और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया था, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का अनुभव मिल सके। शुरुआत में यह योजना लोगों के बीच चर्चा में भी रही, लेकिन कुछ ही महीनों में इसका संचालन लगभग बंद हो गया।  ग्वालियर में 11 करोड़ की स्मार्ट सिटी बस सेवा कुछ महीनों में ठप, बसें कबाड़ बनीं और योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इस योजना के लिए करीब 11 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। प्रोजेक्ट के तहत 16 इंट्रा सिटी और कुल 32 बसें (इंटरसिटी सहित) चलाने की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर बसों का संचालन बेहद सीमित रहा और धीरे-धीरे बसें सड़कों से गायब हो गईं। आज स्थिति यह है कि ये बसें शहर के अलग-अलग इलाकों-रेस कोर्स रोड, गार्डर पुलिया और रेलवे ओवरब्रिज के नीचे खड़ी नजर आती हैं। लंबे समय से खड़ी रहने के कारण कई बसें जंग खा रही हैं, जिससे करोड़ों की संपत्ति बर्बाद होती दिख रही है। ऑटो-विक्रम के दबदबे में नहीं चल पाईं बसेंसूत्रों की मानें तो शहर में पहले से चल रहे ऑटो और विक्रम का नेटवर्क इतना मजबूत है कि बस सेवा को प्रतिस्पर्धा में टिकने का मौका ही नहीं मिला। निजी कंपनी ने भी संचालन में खास रुचि नहीं दिखाई, जिससे धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।यात्रियों के लिए बनाए गए जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम का उद्देश्य बसों की हर गतिविधि पर नजर रखना था, लेकिन जब बसें ही नहीं चलीं तो यह तकनीक भी बेकार साबित हुई। जनता में नाराजगी, उठ रहे सवालस्थानीय लोगों में इस योजना को लेकर भारी नाराजगी है। हजीरा निवासी मूलचंद का कहना है कि शहर में सरकारी बस सेवा पूरी तरह गायब है, जबकि करोड़ों की बसें यूं ही खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं। उन्होंने इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताया और कहा कि “स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है।” जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?इस पूरे मामले में कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं- क्या बिना ठोस ग्राउंड सर्वे के प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया?निजी कंपनी की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई?करोड़ों खर्च होने के बावजूद सेवा टिकाऊ क्यों नहीं बन पाई? स्मार्ट सिटी प्लान पर उठे सवालबस सेवा के फेल होने से अब पूरे स्मार्ट सिटी प्लान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जिस योजना का उद्देश्य शहर को आधुनिक बनाना था, वही अब अव्यवस्था और लापरवाही का उदाहरण बनती दिख रही है।अगर समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रोजेक्ट सरकारी योजनाओं में एक और असफल उदाहरण बनकर रह जाएगा।

3 MONTH’S GIRL RAPED: तीन महीने की बच्ची से दुष्कर्म, ताऊ को ‘आखिरी सांस तक’ उम्रकैद!

3 MONTH'S GIRL RAPED

HIGHLIGHTS: 3 माह की बच्ची से दुष्कर्म का मामला आरोपी ताऊ को आजीवन कारावास DNA रिपोर्ट से अपराध की पुष्टि 15 दिन में पुलिस ने दाखिल किया चालान 3 महीने में कोर्ट ने सुनाया फैसला   3 MONTH’S GIRL RAPED: मध्य प्रदेश। मुरैना जिले में तीन महीने की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बता दें कि कोर्ट ने आरोपी ताऊ को ‘आखिरी सांस तक’ आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर 20,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला घटना के केवल तीन महीने के भीतर सुनाया गया। 15 दिन में पुलिस ने पूरी की जांच घटना 30 दिसंबर 2025 की है। स्टेशन रोड थाना पुलिस ने गंभीरता को देखते हुए मात्र 15 दिनों में जांच पूरी कर चालान पेश किया। मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर डीएनए परीक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आरोपी की पहचान पूरी तरह स्थापित हो गई। नोटिस पर पलटवार: BJP विधायक चिंतामणि का सवाल-CM का क्या? Ujjain में सियासी घमासान मां की शिकायत से खुला मामला पीड़िता की मां ने FIR में बताया कि आरोपी, जो रिश्ते में ताऊ ससुर का लड़का है, बच्ची को गोद में लेने के बहाने अपने कमरे में ले गया था। बाद में बच्ची की हालत बिगड़ी और उसके शरीर पर चोट के संकेत मिले, जिसके बाद परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। नोटिस पर पलटवार: BJP विधायक चिंतामणि का सवाल-CM का क्या? Ujjain में सियासी घमासान तीन महीने में पूरा हुआ ट्रायल अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तेज़ी से सुनवाई पूरी की। विशेष लोक अभियोजक इन्द्रेश कुमार प्रधान ने मामले की पैरवी की, जिसके बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले तो नहीं देना होगा गुजारा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला न्यायालय का कड़ा संदेश कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर हैं और इन पर कठोरतम दंड आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।  

रतलाम में प्रशासनिक दबाव ने ली जान? 4 दिन में 3 नोटिस और छुट्टी से इनकार, पटवारी रविशंकर के सुसाइड नोट ने खोली व्यवस्था की पोल

रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने उत्सव के माहौल को पल भर में चीख-पुकार और मातम में बदल दिया। आलोट तहसील में पदस्थ पटवारी “रविशंकर खराड़ी” ने अपने घर की तीसरी मंजिल पर साफे से फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त और भी मार्मिक हो गई जब पता चला कि महज एक दिन पहले ही रविशंकर अपने छोटे भाई की शादी के जश्न में डूबे थे और बारात में जमकर डांस कर रहे थे। लेकिन उस मुस्कान के पीछे “प्रशासनिक प्रताड़ना” का जो दर्द छिपा था, उसका अंदाजा शायद ही किसी को रहा होगा। पुलिस की शुरुआती जांच में घटनास्थल से तीन मोबाइल फोन और एक “ओरिजिनल सुसाइड नोट” बरामद हुआ है, जिसने जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। सुसाइड नोट में रविशंकर ने स्पष्ट रूप से नायब तहसीलदार “सविता राठौर” पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक पटवारी ने लिखा कि उन पर न केवल काम का अनुचित दबाव बनाया जा रहा था, बल्कि उन्हें “गलत काम” करने के लिए भी मजबूर किया गया। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि छोटे भाई की शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन के लिए भी उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और उन्हें बार-बार नोटिस देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। घटना की पृष्ठभूमि को खंगालने पर पता चलता है कि अप्रैल माह के दौरान रविशंकर को महज 4 दिनों के भीतर “तीन कारण बताओ नोटिस” थमाए गए थे। ये नोटिस 6 अप्रैल, 8 अप्रैल और 9 अप्रैल को जारी किए गए थे, जिनमें जमीन नामांतरण और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों जैसे मामलों में लापरवाही का हवाला दिया गया था। सुसाइड से कुछ घंटे पहले रविशंकर ने पटवारी संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में एक भावुक मैसेज भी किया था, जिसमें उन्होंने पूछा था, “मेरे साथ कितने पटवारी मेरा सपोर्ट करेंगे?” इसके बाद उन्होंने तहसील अध्यक्ष को अपना सुसाइड नोट भेजा और फिर कभी किसी का फोन नहीं उठाया। रविशंकर के परिवार की कहानी भी कम दुखद नहीं है। उनके पिता रकमेश्वर खराड़ी भी पटवारी थे, जिनकी दिसंबर 2023 में “हार्ट अटैक” से मौत हो गई थी। पिता की मृत्यु के बाद ही रविशंकर को “अनुकंपा नियुक्ति” मिली थी। अभी उन्हें नौकरी ज्वाइन किए महज चार महीने ही हुए थे। रविशंकर की एक 4 साल की छोटी बेटी है और उनकी पत्नी वर्तमान में “प्रेग्नेंट” हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी रविशंकर के कंधों पर थी, लेकिन अधिकारियों के कथित उत्पीड़न ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया कि उन्होंने अपनी और अपने अजन्मे बच्चे की परवाह किए बिना यह आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और पटवारी संघ ने मेडिकल कॉलेज में करीब “7 घंटे तक धरना” दिया। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और नायब तहसीलदार के खिलाफ “हत्या का केस” दर्ज करने की मांग की। मामले की गंभीरता और बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार सविता राठौर को “निलंबित” कर दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और मृतक के पास से मिले डिजिटल सबूतों और रिकॉर्डिंग्स को खंगाला जा रहा है ताकि इस सुसाइड मिस्ट्री की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

सीएम हाउस के पास प्रदर्शन पर सख्ती भोपाल के प्रमुख चौराहे दो महीने के लिए प्रतिबंधित

भोपाल । भोपाल शहर में कानून व्यवस्था और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। पुलिस आयुक्त द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए शहर के प्रमुख और अत्यधिक व्यस्त चौराहों पर धरना प्रदर्शन और पुतला दहन जैसे आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस आदेश के तहत पॉलिटेक्निक चौराहा आकाशवाणी चौराहा और किलोल पार्क चौराहा सहित आसपास के क्षेत्रों को प्रतिबंधित घोषित किया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब इन स्थानों पर लगातार बढ़ती गतिविधियों के कारण यातायात व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा था। प्रशासन का मानना है कि ये चौराहे शहर के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों से जुड़े हुए हैं जहां से एयरपोर्ट और हमीदिया अस्पताल जैसे प्रमुख स्थानों तक आवागमन होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का धरना प्रदर्शन या आंदोलन न केवल आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता है बल्कि आपातकालीन सेवाओं के संचालन में भी बाधा उत्पन्न करता है। पुलिस द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन क्षेत्रों में अक्सर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा प्रदर्शन की अनुमति मांगी जाती रही है लेकिन यहां वैकल्पिक मार्गों की कमी के चलते हर बार शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। यही वजह है कि प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा है ताकि शहर में अनावश्यक जाम और अव्यवस्था को रोका जा सके। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और आगामी दो महीनों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान इन चौराहों पर किसी भी प्रकार का धरना प्रदर्शन हड़ताल या पुतला दहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले को शहर में ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां एक ओर आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है वहीं दूसरी ओर यह भी सवाल उठ रहा है कि प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों की व्यवस्था किस तरह की जाएगी। कुल मिलाकर यह आदेश प्रशासन की उस प्राथमिकता को दर्शाता है जिसमें शहर की सुचारू व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस निर्णय का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या इससे भोपाल की यातायात व्यवस्था में वास्तविक सुधार देखने को मिलता है।

नोटिस पर पलटवार: BJP विधायक चिंतामणि का सवाल-CM का क्या? Ujjain में सियासी घमासान

नई दिल्ली । उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में सरकारी आवास खाली कराने की कार्रवाई ने राजनीतिक रंग ले लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बंगलों पर वर्षों से काबिज लोगों को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब यह मुद्दा सीधे सत्ता और संगठन तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि नोटिस मिलते ही भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय ने पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री के आवास पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे ‘कब्जा पॉलिटिक्स’ और गरमा गई है। 6 लोगों को नोटिस, एक महीने की मोहलतविश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने बताया कि हाल ही में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन लोगों का विश्वविद्यालय से कोई सीधा संबंध नहीं है, उनसे आवास खाली कराया जाएगा। इसी के तहत आलोट से भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय सहित करीब 6 लोगों को नोटिस जारी कर एक महीने के भीतर बंगले खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, इन आवासों में पूर्व पुलिस अधिकारी, शिक्षक और अन्य लोग भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि इन कब्जों के कारण वास्तविक कर्मचारियों को आवास नहीं मिल पा रहा है, जबकि 50 से ज्यादा कर्मचारी लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। विधायक का पलटवार: “सीएम का क्या?”नोटिस मिलते ही विधायक चिंतामणि मालवीय ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं कुलपति का बंगला उपयोग कर रहे हैं, तो फिर बाकी लोगों पर कार्रवाई क्यों? उन्होंने इसे “नैतिक सवाल” बताते हुए कहा कि वे भी उसी परंपरा का पालन कर रहे हैं। मालवीय ने यह भी दावा किया कि उनका विश्वविद्यालय से वित्तीय हिसाब लंबित है। उन्होंने बताया कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने करीब 9 लाख रुपए जमा किए थे और जब तक पूरा हिसाब नहीं हो जाता, तब तक आवास खाली करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि अगर गहराई से जांच हुई तो मामला लंबा खिंच सकता है। प्रशासन का पक्ष: कर्मचारियों को प्राथमिकताकुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं, जबकि अच्छे आवास बाहरी लोगों के कब्जे में हैं। प्रशासन ने यह भी योजना बनाई है कि 21 जर्जर भवनों को हटाकर नई व्यवस्था विकसित की जाएगी। सीएम आवास पर भी उठे सवालविवाद का एक बड़ा कारण मुख्यमंत्री को आवंटित कुलपति का बंगला भी बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, उज्जैन के देवास रोड स्थित यह बंगला मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के लिए तैयार कराया गया था और वे उज्जैन प्रवास के दौरान अक्सर वहीं रुकते हैं। इसी को आधार बनाकर विधायक ने सवाल उठाए हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है। सियासी तापमान बढ़ायह पूरा विवाद अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है। एक ओर विश्वविद्यालय नियमों का हवाला देकर आवास खाली कराने पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि इसे चयनात्मक कार्रवाई बता रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विधायक नोटिस का पालन करेंगे या यह मामला और बड़े सियासी टकराव में बदलेगा।

गेहूं खरीदी में नया रिकॉर्ड संभव एमपी सरकार ने केंद्र से बढ़ाया कोटा मांग

भोपाल । भोपाल में मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार से निर्धारित लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में इस बार गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा हुआ है और मौजूदा लक्ष्य से अधिक खरीदी होने की पूरी संभावना है। ऐसे में किसानों को पूरा लाभ दिलाने के लिए केंद्र से कोटा बढ़ाने को लेकर लगातार संवाद किया जा रहा है। रबी विपणन वर्ष 2026 27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। लेकिन प्रदेश में बंपर पैदावार और किसानों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह लक्ष्य कम पड़ता नजर आ रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि लक्ष्य नहीं बढ़ाया गया तो कई किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिल पाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और खरीदी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। पहले छोटे किसानों से गेहूं खरीदा जा रहा है इसके बाद मध्यम और अंत में बड़े किसानों की बारी आएगी ताकि सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके। इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। करीब 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख अधिक है। अब तक 2 लाख 21 हजार 455 किसानों से 95 लाख 17 हजार 550 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 75 लाख 57 हजार 580 क्विंटल गेहूं का परिवहन भी किया जा चुका है जिससे भंडारण व्यवस्था पर दबाव कम हुआ है। सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों को तेजी से भुगतान भी किया जा रहा है। अब तक 1 लाख 6 हजार 55 किसानों को 1091 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह पहल किसानों के विश्वास को मजबूत करने और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भी इस प्रक्रिया पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थितियों के कारण शुरुआती दौर में बारदानों की उपलब्धता चुनौती बनी रही लेकिन सरकार ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर स्थिति को संभाल लिया। जूट के नए बारदानों के साथ साथ पीपी बैग और पुनः उपयोग योग्य बारदानों का उपयोग किया गया जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई। वर्तमान में किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। यह दर किसानों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में मददगार साबित हो रही है। प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि बेहतर उत्पादन के साथ नीति स्तर पर त्वरित निर्णय कितने जरूरी होते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार राज्य की इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या वास्तव में गेहूं खरीदी का लक्ष्य बढ़ाया जाता है