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लंदन में नीलामी के लिए तैयार जयपुर राजघराने का ‘सुपरकंप्यूटर’, 25 करोड़ तक लग सकती है बोली

जयपुर। राजस्थान के शाही इतिहास और वैज्ञानिक विरासत से जुड़ा एक दुर्लभ खगोलीय यंत्र ‘एस्ट्रोलेब’ अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 17वीं सदी का यह ऐतिहासिक उपकरण 29 अप्रैल को लंदन में नीलामी के लिए पेश किया जाएगा। विशेषज्ञ इसे उस दौर का ‘सुपरकंप्यूटर’ और ‘प्राचीन स्मार्ट डिवाइस’ बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह यंत्र कभी जयपुर राजघराने के शाही संग्रह का हिस्सा था। सवाई मानसिंह द्वितीय के निधन के बाद यह महारानी गायत्री देवी के पास रहा और बाद में निजी संग्रह में शामिल हो गया। अब पहली बार इसे सार्वजनिक नीलामी में उतारा जा रहा है। आकार, बनावट और कीमत खास पीतल से निर्मित यह एस्ट्रोलेब आकार और उपयोगिता दोनों में विशेष माना जा रहा है। इसका वजन करीब 8.2 किलोग्राम और ऊंचाई लगभग 46 सेंटीमीटर है, जो सामान्य यंत्रों की तुलना में काफी बड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी दुर्लभता और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसकी कीमत 1.5 से 2.5 मिलियन पाउंड (करीब 15 से 25 करोड़ रुपये) तक जा सकती है। 17वीं सदी का बहुउपयोगी यंत्र जानकारों के मुताबिक, यह यंत्र अपने समय में कई जटिल गणनाओं के लिए उपयोग किया जाता था। इसके माध्यम से सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तारों की स्थिति, इमारतों की ऊंचाई तथा कुओं की गहराई तक मापी जा सकती थी। इसके अलावा धार्मिक दिशा निर्धारण और पंचांग आधारित ज्योतिषीय गणनाओं में भी इसका उपयोग होता था। मुगलकालीन विरासत की झलक यह एस्ट्रोलेब 17वीं सदी की शुरुआत में लाहौर के प्रसिद्ध कारीगर कायम मुहम्मद और मुहम्मद मुकीम द्वारा तैयार किया गया था। इसकी विशेषता यह है कि इसमें तारों के नाम फारसी भाषा तथा उनके संस्कृत समकक्ष देवनागरी लिपि में अंकित हैं, जो उस दौर में विज्ञान और संस्कृति के अद्भुत संगम को दर्शाते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ी दिलचस्पी इस यंत्र में 94 शहरों के अक्षांश-देशांतर और 38 तारों के संकेतक अंकित हैं, जिन्हें आज भी काफी सटीक माना जाता है। यही वजह है कि दुनिया भर के संग्रहालयों और निजी कलेक्टरों में इसे लेकर खास रुचि देखी जा रही है।

वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

नई दिल्ली। देहरादून जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के दौरान आर्थिक जागरूकता और वित्तीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को वित्तीय प्रणाली की बुनियादी समझ देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था। कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से सामने रखी गई कि आज के समय में आर्थिक स्थिरता केवल बचत पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही जानकारी और योजनाओं के उपयोग पर भी आधारित है। लोगों को बताया गया कि पेंशन और बीमा जैसी योजनाएं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हर नागरिक को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए। इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं सरल तरीके से पहुंचनी चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ सकें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपने स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए यह संदेश दिया गया कि ऐसे समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हें और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। लोगों को यह भी समझाया गया कि वित्तीय जानकारी को केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। इस दौरान बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौके पर ही कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे लोगों को सीधे लाभ मिला। छोटे स्तर पर नकद और सिक्कों के आदान-प्रदान जैसी सेवाओं ने भी ग्रामीण लोगों के लिए सुविधा का काम किया। इसके अलावा, वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया, जिससे लोगों को अपने क्षेत्र में ही बैंकिंग सेवाएं प्राप्त हो सकें। कार्यक्रम में विभिन्न वित्तीय संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि वित्तीय शिक्षा ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।

ट्रंप का दावा- पुतिन और जेलेंस्की से ‘अच्छी बातचीत’, जल्द खत्म हो सकता है युद्ध

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही है तथा जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है। फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘द संडे ब्रीफिंग’ में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दोनों देशों के बीच हालात सामान्य करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पुतिन और जेलेंस्की दोनों से बातचीत होती रही है, हालांकि आखिरी बातचीत कब हुई, इस पर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। ‘नफरत से नहीं सुलझेगा विवाद’ ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती कटुता पर चिंता जताते हुए कहा कि आपसी नफरत किसी भी समाधान में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने इसे “हास्यास्पद और पागलपन” बताया तथा कहा कि शांति स्थापित करने के लिए संवाद ही सबसे जरूरी रास्ता है। गौरतलब है कि फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने का वादा ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान किया था। हालांकि उनके दूसरे कार्यकाल में भी संघर्ष जारी है। जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण इधर युद्ध क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यूक्रेन के निप्रो शहर पर रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमले में एक मकान पूरी तरह नष्ट हो गया। वहीं रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक महिला की मौत और एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। यह घटनाएं हाल ही में युद्धबंदियों की अदला-बदली के बाद सामने आई हैं। रूस का दावा रूस के विशेष दूत रोदियोन मिरोशनिक ने दावा किया कि फरवरी 2022 से अब तक यूक्रेनी हमलों में 8 हजार से अधिक रूसी नागरिक मारे गए हैं और करीब 20 हजार घायल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

इंडिगो शेयर को झटका, ग्लोबल फर्म ने डाउनग्रेड कर बदला नजरिया..

नई दिल्ली। विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडिगो को लेकर वित्तीय बाजार में एक अहम बदलाव देखने को मिला है, जहां एक ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी की रेटिंग और अनुमानित लक्ष्य मूल्य दोनों में कटौती कर दी है। इस फैसले के बाद निवेशकों के बीच हलचल बढ़ गई है और शेयर पर दबाव साफ नजर आने लगा है। ब्रोकरेज फर्म ने पहले जहां कंपनी को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ रखा था, वहीं अब उसे न्यूट्रल श्रेणी में डाल दिया गया है। इसके साथ ही टारगेट प्राइस को भी पहले के मुकाबले नीचे संशोधित किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में शेयर में तेज उछाल की उम्मीदें कम हो सकती हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और विमानन उद्योग पर पड़ रहा लागत का दबाव माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों के परिचालन खर्च को काफी बढ़ा दिया है, जिससे उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है। हालांकि इंडिगो को अपने बड़े नेटवर्क और मजबूत ऑपरेशनल सिस्टम की वजह से उद्योग में अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति वाली कंपनियों में गिना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसके भविष्य के अनुमान को प्रभावित किया है। बढ़ती लागत और अस्थिर वैश्विक माहौल ने कंपनी की ग्रोथ संभावनाओं पर सवाल खड़े किए हैं। घरेलू स्तर पर सरकार की ओर से ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयासों से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत पूरी तरह पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति अब भी एयरलाइंस के लिए चुनौती बनी हुई है। शेयर बाजार में भी इंडिगो के स्टॉक ने पिछले कुछ समय में उतार-चढ़ाव का सामना किया है। कभी हल्की बढ़त तो कभी गिरावट के चलते निवेशकों के लिए यह स्टॉक अस्थिर बना हुआ है। लंबी अवधि के प्रदर्शन में भी दबाव देखने को मिला है, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल है।

वॉशिंगटन के होटल में गोलीबारी से पहले ट्रंप-एपस्टीन तस्वीरों का विरोध प्रदर्शन, वीडियो वायरल

वॉशिंगटन । अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन स्थित वॉशिंगटन हिल्टन होटल में हुई गोलीबारी की घटना के बाद अब एक नया घटनाक्रम चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले से कुछ घंटे पहले होटल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसमें होटल की बाहरी दीवार पर प्रोजेक्शन के जरिए पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जेफरी एपस्टीन से जुड़ी तस्वीरें तथा दस्तावेज दिखाए गए। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान एक ऑडियो क्लिप भी चलाई गई, जिसमें कथित ईमेल पढ़कर सुनाए गए। इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए होटल के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके कुछ समय बाद होटल में गोलीबारी की घटना सामने आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति सुरक्षा घेरा पार करने की कोशिश में पकड़ा गया। सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत अन्य शीर्ष अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना में एक सुरक्षा अधिकारी घायल हुआ, जिसे बुलेट-रेसिस्टेंट जैकेट होने के कारण गंभीर चोट नहीं आई। संदिग्ध को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद ट्रंप और एपस्टीन से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

भोपाल मंडल को नई सौगात: कल से चलेगी बनारस–हडपसर अमृत भारत एक्सप्रेस, कई प्रमुख स्टेशनों से गुजरेगी

भोपाल। भोपाल मंडल के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। पश्चिम मध्य रेलवे ने बनारस से हडपसर के बीच नई अमृत भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन विशेष फेरे की शुरुआत 28 अप्रैल से करने का फैसला लिया है। यह ट्रेन आधुनिक सुविधाओं से लैस अमृत भारत रेक के साथ चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 02531 बनारस–हडपसर उद्घाटन स्पेशल वाराणसी से शाम 4:45 बजे रवाना होगी। इस ट्रेन में कुल 22 कोच होंगे, जो यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव देंगे। भोपाल मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर ठहरावयह ट्रेन भोपाल मंडल के कई अहम स्टेशनों से होकर गुजरेगी, जिससे क्षेत्र के यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। तय समय के अनुसार— बीना: सुबह 5:15 आगमन, 5:20 प्रस्थानरानी कमलापति स्टेशन: सुबह 7:35 आगमन, 7:40 प्रस्थाननर्मदापुरम: सुबह 8:50 आगमन, 8:55 प्रस्थानइटारसी: सुबह 9:25 आगमन, 9:30 प्रस्थानहरदा: सुबह 10:20 आगमन, 10:25 प्रस्थान इन शहरों से होते हुए पहुंचेगी हडपसरइसके बाद ट्रेन खंडवा, भुसावल, जलगांव, मनमाड, कोपरगांव, अहिल्यानगर और दौंड कॉर्ड लाइन से होते हुए अगले दिन रात 12:55 बजे हडपसर पहुंचेगी। यात्रियों को मिलेगा तेज और आधुनिक सफरइस नई ट्रेन सेवा के शुरू होने से पूर्व और पश्चिम भारत के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और आधुनिक रेल सुविधा का लाभ मिलेगा। रेल प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल यह उद्घाटन विशेष फेरा है और इसके नियमित संचालन की जानकारी अलग से जारी की जाएगी।

Ashoknagar Farmers Protest : अशोकनगर में खाद संकट पर हंगामा, सड़कों पर उतरे व्यापारी; ऑनलाइन टोकन सिस्टम बंद करने की मांग

ASHOKNAGAR FARMERS PROTEST

HIGHLIGHTS: खाद विक्रेता संघ की रैली, कलेक्ट्रेट में ज्ञापन ऑनलाइन टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग डीएपी खाद की कमी पर जताई चिंता एक दिन के लिए दुकानों का सांकेतिक बंद मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी   Ashoknagar Farmers Protest : ग्वालियर। अशोकनगर में कृषि आदान विक्रेता संघ ने सोमवार को अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। बता दें कि महात्मा वाड़ा से शुरू हुई रैली में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए। विरोध के तौर पर संघ ने एक दिन के लिए खाद की दुकानों को बंद रखा और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की। DATIYA GOVANSH PROTEST: गोवंश को ‘राज्य माता’ का दर्जा देने की मांग, दतिया में सड़कों पर उतरे गोभक्त ऑनलाइन टोकन व्यवस्था पर सवाल संघ अध्यक्ष केपी यादव ने बताया कि ‘साथी’ पोर्टल और ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के कारण किसानों और व्यापारियों दोनों को परेशानी हो रही है। जमीन विभाजन से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के चलते कई किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती पर असर पड़ रहा है। 16 करोड़ के साथ माइकल की बायोपिक मैदान में, अक्षय और रणवीर की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा डीएपी की कमी से बढ़ी चिंता व्यापारियों ने डीएपी और अन्य खाद की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पांच बीघा जमीन पर केवल एक बोरी डीएपी देना पर्याप्त नहीं है। साथ ही, सुपर खाद लेने पर डीएपी न मिलने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं, जिससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छिंदवाड़ा: हज यात्रियों को छोड़ लौट रही कार हादसे का शिकार, तीन की मौत, तीन गंभीर घायल एक महीने में समाधान नहीं तो आंदोलन संघ ने खाद की पर्याप्त आपूर्ति, जबरन अन्य उत्पादों की बिक्री पर रोक, डीलर मार्जिन बढ़ाने और पोर्टल की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद किया जाएगा, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।

खराब फॉर्म ने बढ़ाई चिंता, क्या 2026 होगा आखिरी सीजन?

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार रहे अजिंक्य रहाणे के लिए मौजूदा इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का सीजन किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हो रहा है। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान के तौर पर मैदान में उतर रहे रहाणे का बल्ला इस साल पूरी तरह खामोश है, जिसके चलते क्रिकेट गलियारों में अब उनके आईपीएल करियर के अंत की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनके प्रदर्शन में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो साल 2027 के मेगा ऑक्शन में इस दिग्गज खिलाड़ी को कोई भी फ्रेंचाइजी खरीदने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी। अजिंक्य रहाणे को कोलकाता नाइट राइडर्स ने 1.5 करोड़ रुपये की कीमत पर रिटेन किया था और उन पर कप्तानी का भरोसा भी जताया था। हालांकि, टीम के नेतृत्व में तो वह अपनी सूझबूझ दिखा रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत प्रदर्शन के मोर्चे पर वह बुरी तरह विफल रहे हैं। मौजूदा सीजन में खेले गए अब तक के 8 मैचों में रहाणे ने मात्र 23.14 की औसत से केवल 162 रन बनाए हैं। उनके स्कोर कार्ड पर नजर डालें तो 67 रनों की एक पारी को छोड़कर बाकी मैचों में वह 8, 41, 28 और शून्य जैसे अंकों पर आउट हुए हैं। रविवार को लखनऊ के खिलाफ हुए मैच में भी वह 15 गेंदों पर केवल 10 रन ही बना सके, जिसने टीम की मुश्किलों को बढ़ाया। आईपीएल के इतिहास में रहाणे का रिकॉर्ड शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 206 मैचों में 30.2 की औसत से 5194 रन बनाए हैं, जिसमें 2 शतक और 34 अर्धशतक शामिल हैं। लेकिन क्रिकेट की दुनिया में वर्तमान फॉर्म सबसे अधिक मायने रखती है। बढ़ती उम्र और टी-20 फॉर्मेट की मांग के अनुसार घटते स्ट्राइक रेट ने उनकी जगह पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कोलकाता की टीम जिस आक्रामक खेल के लिए जानी जाती है, उसमें रहाणे की धीमी बल्लेबाजी फिट नहीं बैठ रही है। ऐसे में पूरी संभावना है कि आगामी सीजन से पहले टीम उन्हें रिलीज कर दे। आगामी समय में होने वाले मेगा ऑक्शन के दौरान सभी टीमें भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए युवाओं पर दांव लगाना पसंद करेंगी। रहाणे जैसे अनुभवी खिलाड़ी के लिए खराब फॉर्म के साथ ऑक्शन पूल में जाना एक बड़ा खतरा हो सकता है। यदि अगले कुछ मैचों में रहाणे कोई बड़ी और प्रभावपूर्ण पारी नहीं खेलते हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि 2026 उनके सुनहरे आईपीएल सफर का अंतिम पड़ाव साबित हो सकता है। फिलहाल, टीम मैनेजमेंट और प्रशंसकों की नजरें उनके अगले प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो उनके भविष्य का फैसला करेगा।

रिंकू सिंह की तूफानी पारी से केकेआर की वापसी, लखनऊ के सामने 155 का लक्ष्य..

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के इस मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स की शुरुआत बेहद खराब रही, लेकिन अंत में रिंकू सिंह की शानदार पारी ने टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकालते हुए सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा दिया। लखनऊ के मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में बल्लेबाजी क्रम लगातार लड़खड़ाता नजर आया, लेकिन एक खिलाड़ी की जुझारू पारी ने पूरी कहानी बदल दी। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी कोलकाता की टीम की शुरुआत ही झटके के साथ हुई। शुरुआती ओवरों में ही विकेट गिरने लगे, जिससे टीम दबाव में आ गई और रन गति धीमी पड़ गई। शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और पिच पर टिककर खेलने में संघर्ष करते नजर आए। मध्यक्रम में भी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं रही। एक के बाद एक विकेट गिरने से टीम की स्थिति और खराब होती चली गई। कुछ बल्लेबाजों ने कोशिश जरूर की, लेकिन वे लंबे समय तक क्रीज पर टिक नहीं सके। इस दौरान विपक्षी गेंदबाजों ने शानदार अनुशासन के साथ गेंदबाजी की और लगातार दबाव बनाए रखा। ऐसे मुश्किल समय में रिंकू सिंह ने पारी को संभालने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने शुरुआत में संयम दिखाया और धीरे-धीरे अपनी लय पकड़ते हुए आक्रामक बल्लेबाजी शुरू की। उनकी पारी में शानदार शॉट्स का मिश्रण देखने को मिला, जिसमें चौके और छक्कों की बरसात ने टीम को संभाल लिया। रिंकू सिंह ने अंत तक नाबाद रहते हुए तेज रन बनाए और टीम के स्कोर को 155 तक पहुंचा दिया। उनकी यह पारी पूरी तरह जिम्मेदारी और आक्रामकता का बेहतरीन उदाहरण रही, जिसने टीम को एक लड़ने लायक स्कोर तक पहुंचाया। अगर यह पारी नहीं आती, तो स्कोर और भी कम हो सकता था। दूसरी ओर, विपक्षी गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। एक गेंदबाज ने विशेष रूप से शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार विकेट निकाले और बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उनकी गेंदबाजी ने कोलकाता की पारी को शुरुआत में ही झटका दे दिया था। हालांकि अंत में रिंकू की पारी ने मुकाबले को संतुलित कर दिया और अब मैच पूरी तरह खुला हुआ है। लखनऊ की टीम के सामने 155 रन का लक्ष्य है, जिसे हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा।

सुपरस्टार्स का चेहरा और डबिंग आर्टिस्ट का दम: फिल्म मेकिंग के इस जादुई फॉर्मूले का पूरा सच

नई दिल्ली। सिनेमा की दुनिया में अक्सर जो हम देखते हैं, वह हकीकत का केवल एक हिस्सा होता है। पर्दे पर दिखने वाले किसी प्रभावशाली किरदार की गूंजती हुई आवाज के पीछे अक्सर एक लंबी और जटिल तकनीकी प्रक्रिया छिपी होती है, जिसे ‘डबिंग’ कहा जाता है। यह फिल्मी दुनिया का वह जादुई हिस्सा है जिसके बिना आधुनिक सिनेमा की कल्पना करना लगभग असंभव है। कई बार दर्शक थिएटर में जिस अभिनेता के संवादों पर तालियां बजाते हैं, असल में वह आवाज किसी और फनकार की होती है। हाल के दौर में बड़े बजट की कई पैन-इंडिया फिल्मों ने इस प्रक्रिया को और भी ज्यादा लोकप्रिय बना दिया है, जहाँ भाषा की बाधा को पार करने के लिए डबिंग का सहारा लिया जाता है। डबिंग की प्रक्रिया मुख्य रूप से फिल्म के ‘पोस्ट-प्रोडक्शन’ चरण के दौरान शुरू होती है। इसकी जरूरत कई कारणों से पड़ती है। अक्सर शूटिंग के समय लोकेशन पर बाहरी शोर-शराबे, हवा की आवाज या तकनीकी दिक्कतों के कारण कलाकार के संवाद स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं हो पाते। ऐसे में उन संवादों को स्टूडियो के शांत वातावरण में दोबारा रिकॉर्ड किया जाता है ताकि दर्शकों को एक बेहतरीन ध्वनि अनुभव मिल सके। लेकिन यह केवल एक तकनीकी जरूरत नहीं है; यह एक रचनात्मक फैसला भी होता है। कई बार किसी अभिनेता का व्यक्तित्व तो किरदार के लिए एकदम सही होता है, लेकिन उसकी आवाज या बोलने का लहजा उस खास रोल के साथ न्याय नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में निर्देशक किसी ऐसे डबिंग आर्टिस्ट का चुनाव करते हैं जिसकी आवाज उस किरदार की गहराई और गंभीरता को पूरी तरह से व्यक्त कर सके। आज के दौर में जब फिल्में एक साथ कई राज्यों और भाषाओं में रिलीज हो रही हैं, तो डबिंग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। दक्षिण भारतीय सितारों की फिल्मों को उत्तर भारत में और बॉलीवुड की फिल्मों को दक्षिण में घर-घर तक पहुँचाने का श्रेय इन आवाज के जादूगरों को ही जाता है। एक सफल डबिंग आर्टिस्ट वह होता है जो न केवल अभिनेता के होंठों की हलचल (लिप-सिंक) के साथ तालमेल बिठाता है, बल्कि उस किरदार के हर इमोशन, गुस्से और दर्द को अपनी आवाज के जरिए जीवंत कर देता है। कई बार बड़े सितारे भी अपने अभिनय को और अधिक निखारने के लिए ‘वॉयस मॉड्यूलेशन’ का सहारा लेते हैं, जिसमें तकनीक की मदद से उनकी आवाज को भारी या अलग तरह का बनाया जाता है। विशेष रूप से एक्शन फिल्मों में, जहाँ अभिनेता का पूरा ध्यान शारीरिक कौशल और स्टंट पर होता है, संवादों की गुणवत्ता अक्सर प्रभावित हो जाती है। ऐसे में बाद में स्टूडियो में जाकर दी गई डबिंग ही उस दृश्य को प्रभावशाली बनाती है। दिलचस्प बात यह है कि कई बार नामचीन एक्टर्स भी दूसरे बड़े सितारों को अपनी आवाज उधार देते हैं, जिससे फिल्म की लोकप्रियता को एक नया आयाम मिलता है। हालांकि इन पर्दे के पीछे काम करने वाले कलाकारों को अक्सर वह प्रसिद्धि नहीं मिल पाती जो पर्दे पर दिखने वाले चेहरों को मिलती है, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी मेहनत ही किसी कहानी को मुकम्मल बनाती है। डबिंग महज एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि वह कला है जो शब्दों को आत्मा प्रदान करती है और सिनेमाई अनुभव को यादगार बनाती है।