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चंबल में मासूम पर मौत का हमला ,नहाने गई 7 साल की बच्ची को मगरमच्छ खींच ले गया

मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां चंबल नदी में नहाने गई एक मासूम बच्ची मगरमच्छ का शिकार हो गई इस घटना ने पूरे इलाके में भय और शोक का माहौल पैदा कर दिया है घटना चिन्नोनी थाना क्षेत्र के ग्राम वैदपुरा की बताई जा रही है जहां मंगलवार को विजय केवट की दो बेटियां रावी उर्फ सखी और राजकुमारी रोज की तरह नदी में नहाने गई थीं दोनों बहनें नदी किनारे खेलते और नहाते हुए समय बिता रही थीं तभी अचानक पानी में छिपे बैठे मगरमच्छ ने हमला कर दिया प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार मगरमच्छ ने सात वर्षीय रावी को अचानक अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उसे गहरे पानी की ओर खींच ले गया पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि दूसरी बच्ची कुछ समझ ही नहीं पाई और घबराकर तुरंत घर की ओर भागी वहां पहुंचकर उसने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी बेटी के साथ हुई इस भयावह घटना की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया परिजन और ग्रामीण तुरंत नदी किनारे पहुंचे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी नदी में मगरमच्छ के हमले के बाद बच्ची का कोई पता नहीं चल पाया घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी मौके पर पहुंचा और तलाश अभियान शुरू किया गया ग्रामीणों का कहना है कि चंबल नदी में मगरमच्छों की मौजूदगी पहले से ही है लेकिन इसके बावजूद कई गांवों के लोग रोजमर्रा के कामों जैसे नहाने और कपड़े धोने के लिए नदी पर निर्भर हैं ऐसे में इस तरह की घटनाएं लगातार खतरे की घंटी बनकर सामने आ रही हैं इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है हर कोई इस घटना से स्तब्ध है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वन विभाग की टीम के साथ मिलकर मगरमच्छ की तलाश और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है साथ ही प्रशासन द्वारा लोगों को नदी में न जाने की सलाह भी दी जा रही है यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा इंतजाम कितने जरूरी हैं खासकर उन इलाकों में जहां जंगली जीवों की मौजूदगी लगातार बनी रहती है

प्रेमिका की शादी के दिन युवक ने ली आखिरी सांस ,गुना में सुसाइड से मचा हड़कंप

गुना । मध्य प्रदेश के गुना से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है 25 वर्षीय प्रद्युम्न सिंह सहरिया की मौत ने न केवल उसके परिवार को झकझोर कर रख दिया है बल्कि प्रेम संबंधों के जटिल पहलुओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं जानकारी के अनुसार प्रद्युम्न ने मंगलवार शाम नेशनल हाईवे के किनारे जहरीला पदार्थ निगल लिया था इसके बाद वह खुद ही बदहवास हालत में पुलिस चौकी पहुंचा और अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी पुलिस ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन हालत गंभीर होने के कारण बुधवार तड़के इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि इस आत्मघाती कदम के पीछे एक प्रेम संबंध की कहानी जुड़ी हुई है बताया जा रहा है कि प्रद्युम्न पहले से शादीशुदा था लेकिन करीब पांच साल पहले उसका एक युवती के साथ प्रेम संबंध शुरू हुआ था यह रिश्ता धीरे धीरे इतना गहरा हो गया कि उसने अपनी शादीशुदा जिंदगी से दूरी बना ली परिजनों के अनुसार प्रद्युम्न ने अपनी प्रेमिका के कहने पर करीब दो साल पहले अपनी पत्नी को छोड़ दिया था उसे उम्मीद थी कि अब वह अपनी प्रेमिका के साथ नई जिंदगी शुरू करेगा लेकिन हालात उसके मुताबिक नहीं रहे दोनों के बीच लगातार तनाव बना रहा और आखिरकार युवती ने उसके साथ रहने से इनकार कर दिया घटना ने तब और भी दुखद मोड़ ले लिया जब पता चला कि जिस दिन प्रद्युम्न की हालत अस्पताल में गंभीर बनी हुई थी उसी दिन उसकी प्रेमिका की शादी की रस्में बमोरी क्षेत्र में चल रही थीं इस संयोग ने इस पूरी घटना को और भी मार्मिक बना दिया स्थानीय लोगों के अनुसार प्रद्युम्न मानसिक रूप से काफी परेशान था और रिश्ते में आई दूरी को वह सहन नहीं कर पा रहा था हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के पीछे और कोई कारण तो नहीं है यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि भावनात्मक तनाव और रिश्तों में असंतुलन व्यक्ति को किस हद तक प्रभावित कर सकता है जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में समय रहते संवाद और समझदारी से स्थिति को संभाला जाए फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयान भी लिए जा रहे हैं वहीं पूरे इलाके में इस घटना को लेकर शोक और चर्चा का माहौल बना हुआ है

दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है सरकार जहां इस कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है वहीं विपक्ष ने इस पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि UCC को सर्वसम्मति से लागू किया जाएगा या इसे जबरन थोपा जाएगा उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान और लोकतंत्र की भावना के विपरीत काम कर रही है सिंघार ने खास तौर पर दलित और आदिवासी समुदायों को लेकर चिंता जताई और पूछा कि क्या इन वर्गों को UCC के दायरे में शामिल किया जाएगा या नहीं उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सात सदस्यों की कमेटी आखिर कैसे तय करेगी कि किन लोगों को इस कानून में शामिल किया जाना चाहिए और किन्हें नहीं उनके अनुसार इतने महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने से पहले प्रदेश की जनता से व्यापक राय लेना जरूरी है उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरते और जनता के साथ संवाद स्थापित करे इस दौरान सिंघार ने असलम चमड़ा मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा उन्होंने आरोप लगाया कि असलम हो या अन्य आरोपी उन्हें सत्ता पक्ष का संरक्षण मिल रहा है उन्होंने कहा कि इन मामलों में नगर निगम और विभागीय स्तर पर कनेक्शन सामने आ रहे हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मुद्दों को उठाया लेकिन सत्ता पक्ष ने आरोपियों को बचाने का काम किया उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर इन मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही इसके अलावा सिंघार ने OBC आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए OBC वर्ग का इस्तेमाल कर रही है उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार बार मामले को कोर्ट के पाले में डाल रही है और खुद जिम्मेदारी लेने से बच रही है सिंघार ने यह भी कहा कि सरकार अपने लोगों को लाभ पहुंचाने में ज्यादा रुचि दिखा रही है जबकि आम जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक OBC आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय टलता रहेगा कुल मिलाकर UCC OBC आरक्षण और अन्य मामलों को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है जहां एक ओर सरकार इसे सुधार की दिशा में कदम बता रही है वहीं विपक्ष इसे जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए लगातार हमलावर बना हुआ है आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है और प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है

GWALIOR MIST SPRAY SYSTEM: चिलचिलाती गर्मी के बिच लोगों को रहत देने का प्रयास, ग्वालियर में चौराहों पर लगे मिस्ट स्प्रे सिस्टम

MIST SPRAY SYSTEM

HIGHLIGHTS : ग्वालियर में मिस्ट स्प्रे सिस्टम की शुरुआत पड़ाव चौराहे पर पायलट प्रोजेक्ट सफल हवा में धूल कणों को कम करने में मददगार पीक आवर्स में रोजाना 3-3 घंटे चलेगा सिस्टम अन्य चौराहों पर भी लागू करने की योजना   GWALIOR MIST SPRAY SYSTEM: मध्य प्रदेश। ग्वालियर में बढ़ती गर्मी और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नगर निगम ने मिस्ट स्प्रे सिस्टम की शुरुआत की है। बता दें कि शहर के व्यस्त पड़ाव चौराहे पर करीब ढाई लाख रुपए की लागत से यह पायलट प्रोजेक्ट लगाया गया है, जिसका ट्रायल सफल रहा। अब इसे 30 अप्रैल से नियमित रूप से शुरू किया जाएगा। रेल सुरक्षा और सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज डीजीपी मकवाणा ने बुलाई हाई लेवल बैठक कैसे काम करता है मिस्ट स्प्रे सिस्टम इस सिस्टम के तहत चौराहे पर चार पोल लगाए गए हैं, जिन पर विशेष नोजल फिट हैं। ये नोजल 4 से 5 फीट तक पानी की महीन फुहार छोड़ते हैं, जिससे हवा में मौजूद धूल कण नीचे बैठ जाते हैं। इससे न सिर्फ प्रदूषण कम होता है, बल्कि राहगीरों को तुरंत ठंडक भी महसूस होती है। विंध्य के विकास को मिलेगी नई गति उपाध्यक्ष बने डॉ पटेल को उप मुख्यमंत्री का आशीर्वाद पीक आवर्स में मिलेगा ज्यादा फायदा नगर निगम के अनुसार, इस मिस्ट स्प्रे सिस्टम को सुबह और शाम के पीक आवर्स में तीन-तीन घंटे तक चलाया जाएगा। यही वह समय होता है जब ट्रैफिक और धूल का स्तर सबसे ज्यादा होता है। इससे लोगों को राहत मिलने के साथ-साथ हवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। सेना की ट्रेन रोकने की साजिश का अंत खंडवा रेलवे कोर्ट ने ट्रैकमैन को सुनाई 6 साल की सजा स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित बताया गया सिस्टम डॉक्टरों के अनुसार, इस मिस्ट स्प्रे सिस्टम से स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं है। इसमें बहुत कम मात्रा में पानी की फुहार छोड़ी जाती है, जो हवा में घुलकर हल्की हो जाती है और सीधे तौर पर शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालती।

सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन को नया नेतृत्व उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दी संजीव कांकर को शुभकामनाएं

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासनिक गतिविधियों के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात सामने आई जब उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष संजीव कांकर ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने संजीव कांकर को उनके नए दायित्व के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की उन्होंने विश्वास जताया कि कांकर अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए जनसेवा को और अधिक प्रभावी बनाएंगे राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन राज्य की महत्वपूर्ण संस्था है जो आम जनता तक आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है ऐसे में इस संस्था के नेतृत्व की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है उन्होंने उम्मीद जताई कि नए उपाध्यक्ष के रूप में संजीव कांकर अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे वहीं संजीव कांकर ने उप मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है वह उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य आम जनता तक जरूरी वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना और व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने वाली प्रमुख संस्था है इसके माध्यम से राशन और अन्य आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाई जाती हैं यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही बल्कि इसे जनसेवा को मजबूत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है आने वाले समय में इस नई जिम्मेदारी के साथ सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन के कामकाज में और अधिक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है

रेल सुरक्षा और सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज डीजीपी मकवाणा ने बुलाई हाई लेवल बैठक

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में रेलवे सुरक्षा और आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर व्यापक रणनीति बनाई गई बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने की जिसमें राज्य और केंद्र की कई प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश से होकर गुजरने वाले विस्तृत रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और बड़े आयोजनों के मद्देनजर समय रहते तैयारी सुनिश्चित करना था मध्य प्रदेश देश के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर का केंद्र है ऐसे में यहां की सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी माना जा रहा है पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि रेलवे सुरक्षा से जुड़े हर पहलू पर पहले से तैयारी की जाए और लगातार निगरानी रखी जाए उन्होंने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा सुविधा देना सर्वोच्च प्राथमिकता है इसके लिए संबंधित सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा बैठक में विशेष रूप से सिंहस्थ 2028 जैसे विशाल धार्मिक आयोजन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन को देखते हुए रेल यातायात प्रबंधन भीड़ नियंत्रण अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन और स्टेशन प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई इसके साथ ही रेलवे परिसरों में कानून व्यवस्था बनाए रखने ट्रैक को अवरोधमुक्त रखने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने महिला और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने और अपराधों की रोकथाम जैसे मुद्दों पर भी मंथन किया गया अधिकारियों ने संवेदनशील स्टेशनों पर विशेष सुरक्षा प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी विचार रखा बैठक में राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साथ रेलवे और खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए जिनमें रेलवे के विभिन्न जोन और सुरक्षा बलों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े इस दौरान बहु एजेंसी समन्वय को और प्रभावी बनाने पर सहमति बनी ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके इस तरह की बैठक को राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है खासतौर पर ऐसे समय में जब बड़े धार्मिक आयोजनों और बढ़ते रेल यातायात के चलते सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं कुल मिलाकर यह बैठक रेलवे सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में देखी जा रही है आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी

विंध्य के विकास को मिलेगी नई गति उपाध्यक्ष बने डॉ पटेल को उप मुख्यमंत्री का आशीर्वाद

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियों के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात चर्चा में रही जब उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से विंध्य विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल ने सौजन्य भेंट की मंत्रालय में हुई इस मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री ने डॉ पटेल को उनके नए दायित्व के लिए आत्मीय बधाई और शुभकामनाएं दी इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण साबित होगी और उनसे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की अपेक्षा है उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने डॉ पटेल के उज्ज्वल कार्यकाल की कामना करते हुए विश्वास जताया कि वे अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के बल पर विंध्य क्षेत्र में विकास कार्यों को नई दिशा देंगे उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना और हर क्षेत्र को समान रूप से विकसित करना है जिसमें विंध्य अंचल की भूमिका बेहद अहम है डॉ अजय सिंह पटेल ने भी इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे उन्होंने विंध्य क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में ठोस काम किया जाएगा विंध्य विकास प्राधिकरण क्षेत्र के विकास के लिए बनाई गई एक महत्वपूर्ण संस्था है जिसका उद्देश्य विंध्य अंचल में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और विकास योजनाओं को गति देना है इस संस्था के माध्यम से क्षेत्र में सड़कों जल संसाधनों शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं लागू की जाती हैं इस मुलाकात को विंध्य क्षेत्र के विकास के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है जहां सरकार और प्राधिकरण मिलकर क्षेत्र को नई दिशा देने की कोशिश करेंगे आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस नई जिम्मेदारी के साथ विंध्य क्षेत्र में विकास की रफ्तार किस तरह आगे बढ़ती है

जल गंगा संवर्धन अभियान से शहडोल में जल क्रांति ,पुराने तालाब और स्रोतों को मिल रहा नया जीवन

भोपाल । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान एक बड़े जनआंदोलन के रूप में उभरता नजर आ रहा है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शुरू इस पहल का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि लोगों में जल के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी है यही कारण है कि यह अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनभागीदारी का उदाहरण बन चुका है जिले में इस अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है वर्षों से उपेक्षित पड़े तालाबों कुओं और जल संरचनाओं की साफ सफाई और जीर्णोद्धार किया जा रहा है ताकि वर्षा जल का बेहतर संचयन हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए प्रशासन के अनुसार यह पहल आने वाले समय में जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कलेक्टर डॉ केदार सिंह और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम प्रजापति के निर्देशन में जिले की ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में बड़े पैमाने पर काम चल रहा है जल गंगा अभियान के तहत तालाबों की सफाई शोक पिट निर्माण रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य जल संरक्षण गतिविधियों को तेजी से पूरा किया जा रहा है आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिले में 5613 कार्य स्वीकृत किए गए हैं जिनमें से 1006 कार्य पूरे हो चुके हैं जबकि 2834 कार्य अभी प्रगति पर हैं खेत तालाब निर्माण के तहत 3217 कार्य स्वीकृत हुए हैं जिनमें 722 पूर्ण और 1902 प्रगतिरत हैं ब्यौहारी बुढार गोहपारू जयसिंहनगर और सोहागपुर जैसे क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर काम हो रहा है जिससे ग्रामीण इलाकों में जल उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है इसके अलावा डगवेल रिचार्जिंग अमृत सरोवर जल संरक्षण और वाटरशेड से जुड़े कई प्रोजेक्ट भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार के 105 कार्यों में से 53 पूरे हो चुके हैं जो इस अभियान की गति को दर्शाते हैं नगरीय निकायों में भी जल संरक्षण को लेकर विशेष पहल की जा रही है जहां जल ग्रहण संरचनाओं का निर्माण नाले नालियों की सफाई और सौंदर्यीकरण रेन वाटर हार्वेस्टिंग और प्याऊ की स्थापना जैसे कार्य पूरे किए जा चुके हैं यह प्रयास न केवल जल संरक्षण में मदद करेंगे बल्कि शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन को भी मजबूत बनाएंगे उद्यानिकी विभाग द्वारा फलदार पौधों का रोपण और सूक्ष्म सिंचाई के विस्तार पर काम किया जा रहा है वहीं जन अभियान परिषद द्वारा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है प्रभात फेरियां जल चौपाल कलश यात्राएं और वृक्ष पूजन जैसे कार्यक्रमों ने इस पहल को सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है कुल मिलाकर शहडोल में चल रहा यह अभियान एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है जहां प्रशासन और जनता मिलकर जल संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में यह क्षेत्र जल संकट से काफी हद तक उबर सकता है और अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है

ASHOKNAGAR CRIMES: अशोकनगर में दिल दहला देने वाली घटना, पठार पर मिला नवजात का शव

AHOKNAGAR CRIMES

HIGHLIGHTS : पठार पर मिला नवजात बच्ची का शव खेलते बच्चों ने सबसे पहले देखा ग्रामीणों के पहुंचने तक हो चुकी थी मौत शव को पत्थरों से ढककर सुरक्षित रखा गया पुलिस जांच जारी, पीएम रिपोर्ट का इंतजार   ASHOKNAGAR CRIMES: ग्वालियर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के ईसागढ़ क्षेत्र के ओंढिला गांव में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जहां गांव से कुछ दूरी पर पठार पर एक नवजात बच्ची का शव मिला। बताया जा रहा है कि सुबह खेल रहे बच्चों की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई। बंगाल चुनाव 2026 में सितारों की सियासी जंग रूपा गांगुली से सायंतिका बनर्जी तक कई चेहरे मैदान में पहली नजर में जीवित लग रही थी बच्ची ग्रामीणों के मुताबिक, जब बच्चों ने पहली बार नवजात को देखा, तब वह जीवित प्रतीत हो रही थी। बच्चों ने तुरंत गांव में इसकी जानकारी दी। जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। 600 से ज्यादा कॉलेज निकले फर्जी हाईकोर्ट सख्त CBI और नर्सिंग काउंसिल को जवाब देना होगा ग्रामीणों ने पत्थरों से ढका शव स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने नवजात के शव को वहीं पत्थरों से ढक दिया, ताकि कोई जानवर उसे नुकसान न पहुंचा सके। इस घटना ने गांव में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया। 21 दिन खुद को कमरे में बंद और लगातार शूटिंग रणवीर सिंह ने निभाया ऐसा किरदार जो बन गया मिसाल पुलिस जांच में जुटी, पीएम रिपोर्ट का इंतजार सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि नवजात की मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।  

घंटे मिनट नहीं सूर्योदय से चलता समय काशी विश्वनाथ में लगी वैदिक घड़ी बनी आकर्षण का केंद्र

भोपाल/काशी । काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी इन दिनों खास चर्चा का विषय बनी हुई है यह घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और वैदिक कालगणना को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान इस अनोखी घड़ी का अवलोकन किया और इसकी कार्यप्रणाली को करीब से समझा जिससे इसकी अहमियत और भी बढ़ गई है यह वैदिक घड़ी मूल रूप से मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ी पहल है जिसे वहां के विद्वानों ने तैयार किया है उज्जैन को प्राचीन काल से ही समय गणना और खगोलीय अध्ययन का केंद्र माना जाता रहा है यही वजह है कि इस घड़ी का नाम भी महान सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर रखा गया है इस घड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक घंटे और मिनट के आधार पर नहीं बल्कि सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय चक्र पर आधारित है इस घड़ी के माध्यम से केवल समय ही नहीं बल्कि सूर्योदय सूर्यास्त मुहूर्त ग्रहों की स्थिति और पंचांग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त की जा सकती हैं यानी यह एक तरह से वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलने वाली प्रणाली है जो आधुनिक और प्राचीन ज्ञान का संगम प्रस्तुत करती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घड़ी को देखने के बाद इसके तकनीकी और पारंपरिक पहलुओं को विस्तार से जाना बताया जाता है कि उन्होंने इसकी संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर विशेष रुचि दिखाई इससे पहले भी वे उज्जैन में इस घड़ी के लोकार्पण से जुड़े रहे हैं जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है इस घड़ी को हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया गया था जिसके बाद इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया अब यह घड़ी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है जो यहां आकर न केवल दर्शन करते हैं बल्कि इस अनोखी समय प्रणाली को भी समझने की कोशिश करते हैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस वैदिक घड़ी को लेकर विशेष रूप से उत्साहित हैं उनका मानना है कि भारत की पारंपरिक समय गणना प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए वे उज्जैन को प्राइम मेरिडियन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं उनका तर्क है कि वर्तमान में प्रचलित ग्रीनविच मीन टाइम पश्चिमी सोच पर आधारित है जिसमें दिन की शुरुआत आधी रात से मानी जाती है जबकि भारतीय परंपरा में सूर्योदय को दिन की शुरुआत माना जाता है उज्जैन की भौगोलिक स्थिति कर्क रेखा के पास होने के कारण इसे खगोलीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है यही कारण है कि यहां विकसित की गई वैदिक घड़ी को वैज्ञानिक आधार पर भी सटीक बताया जा रहा है कुल मिलाकर यह पहल केवल एक घड़ी तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैज्ञानिक सोच को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह वैदिक समय प्रणाली कितनी व्यापक स्वीकृति प्राप्त कर पाती है