US: जानें क्यों घट रही ट्रंप की लोकप्रियता…… अप्रूवल रेटिंग घटी

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की लोकप्रियता (Popularity) में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप को लेकर जारी एक ताजा सर्वे में उनकी अप्रूवल रेटिंग (Approval rating) घटकर 34% पर पहुंच गई, जो उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट पिछले सर्वे के 36% से भी कम है और जनवरी 2025 में पद संभालने के समय के मुकाबले काफी नीचे आ चुकी है। सर्वे के अनुसार, महंगाई और ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने जनता की नाराज़गी को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। इस संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे पेट्रोल की कीमतों में 40% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में इजाफे ने अमेरिकी नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। सर्वे में केवल 22% लोगों ने ट्रंप के महंगाई से निपटने के तरीके को सही माना, जो यह दिखाता है कि आर्थिक मुद्दों पर सरकार के प्रति भरोसा कम हो रहा है। किस बात से नाराज है अमेरिका की जनताईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर भी अमेरिकी जनता में खासा विरोध देखा जा रहा है। सर्वे के अनुसार, केवल 34% लोग इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसके खिलाफ हैं। हालांकि, ट्रंप को रिपब्लिकन समर्थकों का मजबूत समर्थन अभी भी मिला हुआ है, जहां 78% लोग उनके साथ खड़े हैं। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था संभालने को लेकर उनके अपने समर्थकों में भी असंतोष बढ़ रहा है। इस गिरती लोकप्रियता का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। सर्वे में यह संकेत मिला है कि स्वतंत्र मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स को बढ़त मिल रही है और कई मतदाताओं ने अभी भी कोई फैसला नहीं लिया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले की कोशिश का भी जनता की राय पर खास असर नहीं पड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि रिपब्लिकन पार्टी के लिए आगामी मध्यावधि चुनावों में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम

नई दिल्ली। उत्तराखंड (Uttarakhand) के चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra) 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जो कि हिंदू धर्म (Hinduism) में बहुत पवित्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘बड़ा चार धाम’ (‘Big Four Dham’) भी होता है? यह भारत के चार अलग-अलग दिशा में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है. इस यात्रा की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी. उनका उद्देश्य पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करना था. इसके लिए उन्होंने देश के चार दिशाओं में चार प्रमुख धाम स्थापित किए- किन देवताओं से जुड़े हैं ये चार धाम?बड़ा चार धाम यात्रा में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का महत्व है.बद्रीनाथ- भगवान विष्णु को समर्पितरामेश्वरम- भगवान शिव का ज्योतिर्लिंगद्वारका- भगवान श्रीकृष्ण का मंदिरपुरी- भगवान जगन्नाथ (विष्णु अवतार) बद्रीनाथ धाम (उत्तर भारत)बद्रीनाथ उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है. मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और माता लक्ष्मी ने उन्हें बद्री वृक्ष बनकर बचाया था. महाभारत से भी इसका संबंध बताया जाता है, कहा जाता है कि पांडव स्वर्ग जाते समय यहां से गुजरे थे। रामेश्वरम धाम (दक्षिण भारत)रामेश्वरम तमिलनाडु में समुद्र के बीच स्थित एक पवित्र स्थान है. यहां का रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. यही जगह राम सेतु से भी जुड़ी मानी जाती है. द्वारका धाम (पश्चिम भारत)द्वारका गुजरात में समुद्र किनारे बसा एक पवित्र शहर है. इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर बहुत भव्य है और इसे मोक्ष प्राप्ति का स्थान भी माना जाता है. जगन्नाथ पुरी (पूर्व भारत)पुरी ओडिशा में स्थित है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं. क्यों खास है बड़ा चार धाम यात्रा?बड़ा चार धाम यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक शांति पाने का मार्ग है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस यात्रा को पूरा करता है, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह यात्रा हमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सही संतुलन सिखाती है। चार धाम यात्रा और बड़ा चार धाम यात्रा में अंतरछोटा चार धाम, जिसे उत्तराखंड चार धाम भी कहा जाता है. इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल होती है. यह यात्रा लगभग 1600 किलोमीटर की होती है और आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। वहीं बड़ा चार धाम पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसके उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारका और पूर्व में पुरी शामिल हैं. यह यात्रा करीब 6000 से 7000 किलोमीटर तक की होती है और भारत के चारों दिशाओं को जोड़ती है। दोनों यात्राओं में बद्रीनाथ धाम समान रूप से शामिल है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम माना जाता है और मोक्ष का धाम भी माना जाता है. छोटा चार धाम यात्रा प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जहां आप पहाड़, नदियां और हिमालय की सुंदरता का आसानी से दीदार कर सकते हैं. वहीं बड़ा चार धाम यात्रा पूरे भारत की धार्मिक एकता को दर्शाती है, जहां भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कृष्ण और जगन्नाथ जी की उपासना की जाती है। बड़ा चार धाम यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स1. पहले से प्लान करें यह यात्रा लंबी और लोकप्रिय है, इसलिए टिकट और होटल पहले ही बुक कर लें क्योंकि बड़ा चार धाम में पूरे साल भीड़ रहती है. 2. सही समय चुनेंरामेश्वरम, द्वारका और पुरी जाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है. वहीं, बद्रीनाथ धाम मई के आसपास जाना सही होता है. 3. जरूरी पेपर रखेंबड़े चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए आईडी प्रूफ साथ रखें. जो होटल और मंदिर दर्शन के लिए जरूरी होता है. 4. हल्का और जरूरी सामान ही पैक करेंइस यात्रा पर जाने के लिए कॉटन कपड़े, हल्के ऊनी कपड़े, आरामदायक जूते और रेनकोट जरूर रखें. 5. लोकल गाइड लेंइस यात्रा पर जाने के लिए लोकल गाइड की मदद जरूर ले सकते हैं. आपको जगह की सही जानकारी और इतिहास समझने में मदद मिलेगी. 6. कैश साथ रखेंहर जगह डिजिटल पेमेंट नहीं चलता, इसलिए थोड़े पैसे कैश में रखें.
इस साल 13 माह का रहेगा हिन्दू वर्ष… दो बार आएगा ज्येष्ठ, जानें कब से शुरू होगा अधिकमास?

नई दिल्ली। हिंदू पंचांग (Hindu Calendar) के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 (Vikram Samvat 2083) खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास (Jyeshtha month) इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना ‘अधिक मास’ (Adhik Maas 2026) कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है। कब पड़ेगा अधिकमास 2026?पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा। इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी। अधिकमास क्यों आता है?– अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है. एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है. वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का। हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है। अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान ना करें ये कामअधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। क्या खास है पुरुषोत्तम मास?अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
MP: पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं मैहर कलेक्टर…. प्रसूता को दी समझाइश

मैहर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर की कलेक्टर (Maihar: Collector) IAS बिदिशा मुखर्जी (IAS Bidisha Mukherjee) इन दिनों अपने सख्त और संवेदनशील तेवरों के लिए चर्चा में हैं. हाल ही में जब वे मैहर के सिविल अस्पताल (Maihar Civil Hospital) का औचक जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और एक ‘सुपर वुमेन’ की तरह समाज की कुरीतियों पर दहाड़ती नजर आईं. पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं… अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को जब यह पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वे दंग रह गईं. उन्होंने महिला के पास जाकर बड़ी ही आत्मीयता, लेकिन दृढ़ता के साथ उसे समझाइश दी कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, उनकी अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. कलेक्टर ने महिला से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा? अस्पताल में उनके इस तेवर ने वहां मौजूद कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. यह पूरा घटनाक्रम समाज की उस गहरी सोच पर प्रहार करता है जहां आज भी ‘पुत्र प्राप्ति’ या अन्य सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं। महिला सशक्तिकरण का दिया उदाहरणकलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज जमाना बदल गया है. उन्होंने उदाहरण दिया कि “आज मध्य प्रदेश में 31% कलेक्टर महिलाएं हैं, हमारी पूरी टीम महिलाओं की है. फिर यह भेदभाव क्यों?” ग्राउंड स्टाफ को फटकारउन्होंने केवल महिला को ही नहीं टोका, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अमले और मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल दागे. कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान कहां है? उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के फायदों और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करे। कलेक्टर ने अस्पताल में मिल रहे भोजन की क्वालिटी की भी जांच की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है और यहां महिला रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रही हैं।
होर्मुज खुलने की चर्चा से कमोडिटी मार्केट में हलचल…. तेजी से गिरे सोने-चांदी के रेट

नई दिल्ली। सोने और चांदी के भाव (Gold- Silver Rate) में अचानक से बड़ी गिरावट आई है. भारतीय कमोडिटी मार्केट (Indian Commodity Market) में सोने और चांदी के भाव तेजी से गिरे हैं. शाम के करोबार के दौरान चांदी करीब 7000 रुपये गिर गई. इसी तरह, 10 ग्राम सोने का फ्यूचर रेट भी गिरा है. कमोडिटी मार्केट में सोने-चांदी के भाव में यह गिरावट, ईरान-अमेरिका तनाव (Iran-America tension) और होर्मुज खोलने (Opening of Hormuz) की चर्चा के बीच आई है. ऐसे में यह संकेत दिख रहा है कि ग्लोबल मार्केट में कुछ तो हलचल चल रही है। मंगलवार की रात करीब 7.45 बजे कमोडिटी मार्केट MCX पर 3 जुलाई फ्यूचर के लिए 1 किलो चांदी की कीमत 2.40 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई थी, जो 6900 रुपये से ज्यादा या 3 फीसदी की गिरावट है. इसी तरह, 5 जून फ्यूचर के लिए सोने का भाव भी 1.70 फीसदी या 2500 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये पर आ गया। अचानक क्यों आई ये बड़ी गिरावट? डॉलर में तेजी देखी गई है, जिस कारण कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं के दाम गिरे हैं. रुपया डॉलर की तुलना में 94.5 के ऊपर जा पहुंचा है. इसी तरह, ब्रेंट क्रूड ऑयल में भी करीब 3 फीसदी की तेजी देखी जा रही है, जो होमुर्ज पर बढ़ते तनाव का संकेत दे रहा है. हालांकि, रिपोर्ट्स और डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान ने जंग रोकने और होर्मुज खोलने का प्रताव दिया है. यह दावा तब किया जा रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अभी तक नहीं हो पाई है। वहीं कुछ खबरें यह भी दावा कर रही हैं कि अमेरिका और ईरान समुद्र में अपनी ताकत को बढ़ा रहे हैं, जो एक तनाव का संकेत दे रहा है. वहीं एशियाई, भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजार में व्यापक स्तर पर गिरावट दिख रही है. इंटरनेशनल गोल्ड-सिल्वर प्राइसअंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. सोना 2.30 फीसदी या 108 डॉलर प्रति औंस गिरकर 4586 डॉलर पर औंस पर आ चुका है. वहीं चांदी की बात करें तो 3.20 फीसदी या 2.5 डॉलर टूटकर 72.6 डॉलर पर औंस पर आ चुका है। रिकॉर्ड हाई से कितना सस्ता हुआ गोल्ड-सिल्वर? एमसीएक्स के मुताबिक, गोल्ड का रिकॉर्ड हाई लेवल 2.02 लाख रुपये है, जो अब 53 हजार रुपये गिरकर 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ चुका है. इसी तरह, चांदी का लाइफटाइम हाई लेवल 4.57 लाख रुपये है, जो अब 2.07 लाख रुपये सस्ती होकर 2.40 लाख रुपये पर आ चुकी है।
राजा रघुवंशी हत्याकांड… भाई गोविन्द बोला- सोनम इंदौर आई तो उनके घर में नहीं रहेगी

इंदौर। राजा रघुवंशी हत्याकांड (Raja Raghuvanshi murder case) की मुख्य आरोपी सोनम (Sonam) को मेघालय कोर्ट ने जमानत (Meghalaya court Grants Bail) दे दी है। राजा के परिवारवालों का आरोप है कि जमानत मिलने में सोनम के भाई गोविंद ने भी उसकी मदद की है। अब इस मामले में गोविंद का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि अगर राजा का परिवार हाई कोर्ट जाना चाहता है तो उन्हें जाना चाहिए। वहीं ये पूछे जाने पर कि क्या वह सोनम की जमानत का विरोध करते है, उन्होंने कहा कि कानून के हिसाब से जो हुआ सही हुआ। इसी के साथ उन्होंने ये भी साफ किया है कि सोनम इंदौर आ भी गई तो उनके घर में नहीं रहेगी। गोविंद ने कहा, मुझे भी पता चला है कि सोनम को जमानत मिल गई है, लेकिन ऑर्डर की कॉपी आना बाकी है। मुझे भी मीडिया के जरिए पता चला कि बेल मिल गई है। हमारे पास अभी तक कोई प्राइवेट वकील नहीं है। सरकार द्वारा नियुक्त वकील अभी इस केस में लगे हुए हैं। । मुझे नहीं पता कि वह कब रिहा होंगी, कहां रहेंगी या शिलांग में होंगी या नहीं। सोनम की जमानत करवाने के आरोपों पर गोविंद ने कहा, मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। जेल में सोनम से मिलने से पहले मैंने राजा के भाई को साफ-साफ बता दिया था कि मुझे कुछ कागजी कार्रवाई करनी है। मैंने उन्हें पहले ही साफ-साफ बता दिया था। गोविंद ने कहा, हम सोनम को अभी घर में नहीं रखेंगे। यह संभव नहीं है। सोनम की जमानत पर उन्होंने कहा, यह एक कानूनी फैसला है और कानून के हिसाब से जो हुआ, सही हुआ। अगर यह सरकार का फैसला है, तो मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। उन्होंने आगे कहा, अगर मेरे माता-पिता उसे घर लाना चाहते हैं, तो मैं घर पर नहीं रहूंगा। सीबीआई जांच की मांगइससे पहले सोनम को जमानत मिलने पर राजा के परिवार ने असंतोष जताया और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। राजा की भावुक मां उमा ने कहा कि सोनम उनके बेटे के हत्याकांड की कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता है और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उसे जमानत कैसे मिल गई। उन्होंने कहा कि मेघालय पुलिस ने पिछले नौ महीने में इस मामले की अच्छी तरह जांच की, ‘लेकिन यह उनकी समझ से परे है कि महीने-दो महीने में खेल अचानक कैसे बदल गया?’ राजा की मां ने कहा, हम सरकार से एक ही मांग करते हैं कि हत्याकांड के शिकार मेरे बेकसूर बेटे को इंसाफ मिले। मुझे इस मामले में सीबीआई जांच चाहिए। राजा के बड़े भाई विपिन ने कहा कि उनका परिवार सोनम को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को मेघालय हाई कोर्ट में चुनौती देगा। 10 महीने से जेल में बंद थी सोनमविपिन ने जांच में ‘हेर-फेर’ का संदेह जताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने उन्हें अब तक न तो चार्जशीट की कॉपी दी है, न ही उन्हें से ठीक से देखने का मौका मिला है। अधिकारियों ने बताया कि अपने पति राजा रघुवंशी की साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से नौ जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह 10 महीने से अधिक समय तक शिलांग के जिला कारागार में न्यायिक हिरासत के तहत बंद थी। राजा रघुवंशी का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। उनकी सोनम से शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और वे 20 मई को हनीमून के वास्ते मेघालय के लिए रवाना हुए थे। हनीमून के दौरान 23 मई को लापता राजा रघुवंशी का शव दो जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में पाया गया था। राजा रघुवंशी हत्याकांड में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम के साथ ही इस महिला के कथित प्रेमी राज कुशवाह और कुशवाह के तीन दोस्तों को भी गिरफ्तार किया गया था।
BHIND MURDER CASE: देवरानी-जेठानी के बीच बाथरूम जाने को लेकर विवाद, भिंड में छोटे भाई ने बड़े के सिर पर मारी गोली

HIGHLIGHTS : बाथरूम को लेकर महिलाओं में शुरू हुआ विवाद दो भाइयों के बीच हुआ झगड़ा बना जानलेवा छोटे भाई ने बड़े भाई के सिर में मारी गोली मौके पर ही हुई 36 वर्षीय युवक की मौत आरोपी वारदात के बाद परिवार समेत फरार BHIND MURDER CASE: ग्वालियर। भिंड जिले के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र में एक मामूली विवाद ने खौफनाक मोड़ ले लिया। बता दें कि घर में बाथरूम इस्तेमाल को लेकर देवरानी-जेठानी के बीच हुई कहासुनी ने इतना तूल पकड़ लिया कि मामला दो भाइयों के बीच जानलेवा संघर्ष में बदल गया। Chambal River Crocodile Attack: चंबल नदी में नहा रही बच्ची पर मगरमछ ने किया हमला, लड़की का आधा धड़ गायब रात में बढ़ा विवाद तो चली गोली पुलिस के अनुसार, दिन में हुए विवाद की जानकारी जब दोनों महिलाओं ने अपने-अपने पतियों को दी, तो रात में दोनों भाई आमने-सामने आ गए। बहस धीरे-धीरे झगड़े में बदली और फिर हाथापाई शुरू हो गई। इसी दौरान छोटे भाई ने गुस्से में आकर हथियार उठा लिया। मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान कट्टे से सिर में मारी गोली रात करीब 12 से 1 बजे के बीच छोटे भाई राजू भदौरिया ने कट्टा निकालकर अपने 36 वर्षीय बड़े भाई मनमोहन भदौरिया के सिर में गोली मार दी। गोली लगते ही मनमोहन की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के समय उनके पिता गोवर्धन सिंह भी घर में मौजूद थे, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। MP HEATWAVE: ग्वालियर में गर्मी से राहत, लेकिन उमस ने बढ़ाई मुश्किलें; कल फिर हीटवेव का अलर्ट आरोपी फरार, पुलिस कर रही तलाश घटना के बाद आरोपी राजू भदौरिया अपने परिवार के साथ फरार हो गया। गोहद चौराहा थाना प्रभारी ने बताया कि मृतक की पत्नी सरिता भदौरिया की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी की तलाश शुरू करदी है।
भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली। मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है। हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’ IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड। मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। ‘सुपर अल नीनो’ क्या है? जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है। मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है। प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है। ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं। मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं। भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है? अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है। उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है। इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश? भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है। कब आएगा मॉनसून? आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।
Chambal River Crocodile Attack: चंबल नदी में नहा रही बच्ची पर मगरमछ ने किया हमला, लड़की का आधा धड़ गायब

HIGHLIGHTS : चंबल नदी में नहाते समय मगरमच्छ का हमला 14 वर्षीय किशोरी की दर्दनाक मौत बहन के सामने हुआ पूरा हादसा 4 घंटे बाद SDRF ने शव निकाला पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की Chambal River Crocodile Attack: मध्य प्रदेश। मुरैना जिले की चंबल नदी से एक दर्दनाक घटा सामने आई है। बता दें कि चिन्नोनी थाना क्षेत्र के वेदपुरा गांव में 14 वर्षीय किशोरी रावी पर उस वक्त मगरमच्छ ने हमला कर दिया, जब वह अपनी बहन के साथ नदी में नहा रही थी। अचानक हुए इस हमले में मगरमच्छ उसे पकड़कर गहरे पानी में खींच ले गया और उसके आधे धड़ को खा गया। मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान बहन के सामने हुआ हादसा मृतक रावी अपनी बहन राजकुमारी के साथ गर्मी से राहत पाने के लिए नदी में उतरी थी। नहाने के दौरान अचानक मगरमच्छ ने रावी को जकड़ लिया। यह दर्दनाक घटना उसकी बहन की आंखों के सामने हुई, जिसने डर के मारे तुरंत घर पहुंचकर अपनी मां गुलाबो केवट को पूरी जानकारी दी। सोना-चांदी में हल्की चमक, फेड के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता पुलिस और SDRF ने चलाया रेस्क्यू मां द्वारा सूचना दिए जाने पर चिन्नोनी पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत SDRF टीम को बुलाया गया। करीब चार घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद टीम ने नदी से किशोरी का शव बरामद किया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। MP HEATWAVE: ग्वालियर में गर्मी से राहत, लेकिन उमस ने बढ़ाई मुश्किलें; कल फिर हीटवेव का अलर्ट थाना प्रभारी का बयान थाना प्रभारी एसआई ऋषिकेश शर्मा ने बताया कि दोनों बहनें नदी में नहाने गई थीं, तभी मगरमच्छ ने रावी को पकड़कर नीचे खींच लिया। बाद में SDRF की मदद से शव को बाहर निकाला गया।
मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान

नई दिल्ली। बुधवार सुबह 9:18 बजे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 306 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,193 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 88 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085 पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों की मजबूत धारणा के चलते बाजार में शुरुआती खरीदारी हावी रही। डिफेंस और ऑटो सेक्टर बने बाजार के स्टार परफॉर्मरशुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी डिफेंस और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप गेनर्स में रहे। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी, FMCG, एनर्जी और फार्मा सेक्टर भी मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि दूसरी ओर मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसई सेक्टर में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार में सेक्टोरल मिक्स ट्रेंड बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी जारीबाजार में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 149 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,125 पर पहुंच गया।निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 208 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,628 पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों का प्रदर्शनसेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में मारुति सुजुकी, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, टीसीएस और एसबीआई जैसे शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। वहीं टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक में हल्का दबाव देखने को मिला। वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों का असरबाजार विशेषज्ञों के अनुसार यूएई के ओपेक से बाहर होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर थोड़ा दबाव देखने को मिला है, हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है, जिसका फैसला आज रात आने वाला है। यह निर्णय वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुखएशियाई बाजारों में भी बुधवार को मजबूती देखने को मिली। शंघाई, हांगकांग, सोल, जकार्ता और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि जापानी बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद रहे। अमेरिकी बाजारों में कमजोरीइसके विपरीत, अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स 0.05 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले। कुल मिलाकर वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की है। हालांकि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड के फैसले पर है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।