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मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार


नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस धमाके में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा इतना भयावह था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे और फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह धराशायी हो गईं। आसपास के मकानों तक धमाके की कंपन महसूस की गई। मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। झुलसे हुए मजदूर बदहवास हालत में बाहर भागते नजर आए। कई लोगों के कपड़े शरीर की त्वचा से चिपक गए थे। फैक्ट्री के बाहर जले हुए अवशेष, बाल और विस्फोटक सामग्री बिखरी पड़ी मिली। हादसे के बाद भी लंबे समय तक पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। आशंका है कि केमिकल का अनुपात बिगड़ने या मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने से विस्फोट हुआ। श्रम विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बनने से ‘सेल्फ इग्निशन’ हुआ होगा। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से केमिकल के सैंपल जुटाए हैं।

सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, उसका निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था। बावजूद इसके वहां बड़े स्तर पर पटाखा निर्माण किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर निर्माणाधीन यूनिट में ही विस्फोटक सामग्री का उत्पादन शुरू कर दिया गया था। फैक्ट्री के पास विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और सुरक्षा अनुमतियां नहीं ली गई थीं।

पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है। उसके समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। वहीं, उज्जैन संभाग कमिश्नर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा इंतजाम और नियमों के पालन की पड़ताल की जाएगी।

देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि घायलों का इलाज देवास, इंदौर के एमवाय, चोइथराम और अमलतास अस्पतालों में चल रहा है। कई मजदूर 80 से 90 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घायलों से मुलाकात कर मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में पहले भी मार्च 2026 में विस्फोट हो चुका था, लेकिन प्रशासन ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और रोज करीब 18 लाख रुपए का माल तैयार होता था।

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