खंडवा में दर्दनाक हादसा: पुल से 200 फीट गहरी खाई में गिरी बोलेरो, ड्राइवर की मौत

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में शुक्रवार सुबह एक भयावह सड़क हादसा हो गया। खंडवा-भोपाल हाईवे पर स्थित नर्मदानगर ओवरब्रिज से एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गया। हादसा इतना भीषण था कि वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया और ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना इंदिरा सागर बांध के बाहरी हिस्से में बने ओवरब्रिज पर हुई। बताया जा रहा है कि भोपाल की ओर से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो अचानक अनियंत्रित हो गई और सुरक्षा जाल पार करते हुए नीचे जा गिरी। वाहन ने गिरते समय पावर स्टेशन की रिटेनिंग वॉल को भी तोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार यदि यह दीवार नहीं होती, तो बोलेरो सीधे टरबाइन से निकलने वाले तेज बहाव वाले पानी में समा सकती थी। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची। करीब 200 फीट नीचे उतरकर पुलिसकर्मियों ने क्षतिग्रस्त बोलेरो के गेट तोड़े और अंदर फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान अभिषेक नरगावे (26) निवासी ग्राम अंजनिया खुर्द के रूप में हुई है। नर्मदानगर थाना प्रभारी के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और छाती में गंभीर चोटों को मौत का कारण बताया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। परिजनों ने बताया कि अभिषेक खुद अपनी बोलेरो टैक्सी के रूप में चलाता था। गुरुवार रात वह कुछ यात्रियों को छोड़ने राजगढ़ गया था और लौटते समय यह हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि दुर्घटना सुबह करीब 4 बजे हुई। अभिषेक अविवाहित था और परिवार का सहारा माना जाता था।
शी जिनपिंग के ‘पतनशील अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप की मुहर, बोले- बाइडेन ने देश को कमजोर कर दिया

नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अमेरिका को “पतनशील राष्ट्र” कहे जाने पर वह कुछ हद तक सहमत हैं। हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि यह टिप्पणी मौजूदा अमेरिकी स्थिति पर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल की नीतियों पर लागू होती है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उनकी बीजिंग यात्रा बेहद सफल रही और शी जिनपिंग ने कई मुद्दों पर उनकी सराहना भी की। ट्रंप के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका की स्थिति को लेकर जो टिप्पणी की, उसका इशारा बाइडेन प्रशासन की आर्थिक और विदेश नीति की ओर था। ट्रंप ने कहा कि बाइडेन सरकार के दौरान अमेरिका को आर्थिक कमजोरी, वैश्विक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों की वजह से अमेरिका की वैश्विक छवि कमजोर हुई और चीन जैसे देशों को बढ़त मिली। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी वापसी के बाद अमेरिका फिर से मजबूत स्थिति में आ रहा है। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप ने शी जिनपिंग के किस बयान का जिक्र किया। माना जा रहा है कि वह चीन-अमेरिका संबंधों पर हुई बंद कमरे की बातचीत या “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” से जुड़े बयान की ओर इशारा कर रहे थे। अपनी मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने कहा था कि दुनिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका और चीन के रिश्तों का संतुलित रहना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से चीन की आलोचनात्मक टिप्पणी को सही ठहराने जैसा संकेत दिया है। वहीं रिपब्लिकन खेमे में इसे बाइडेन प्रशासन पर सीधा हमला माना जा रहा है।
अरावली पर्वतमाला विवाद पर SC की टिप्पणी, पर्यावरण सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

नई दिल्ली । देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने संकेत दिया है कि इस पूरे मामले में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और जब तक सभी पहलुओं पर पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिलती, तब तक किसी भी प्रकार की खनन गतिविधियों को लेकर कोई राहत देने पर विचार नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसे अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला क्षेत्र में चल रही खनन गतिविधियों को लेकर लगातार गंभीर और चिंताजनक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रही हैं। इन प्रतिक्रियाओं को देखते हुए अदालत ने फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरे पारिस्थितिकीय प्रभावों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें अत्यधिक सावधानी आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले की सुनवाई को टुकड़ों में नहीं करेगा, बल्कि सभी पहलुओं पर एक साथ विचार करेगा। अदालत ने यह संकेत दिया कि जब तक पूरे मामले की व्यापक समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक किसी भी नई गतिविधि या निर्णय की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि न्यायालय इस पर्यावरणीय मुद्दे को बेहद गंभीरता से देख रहा है। इससे पहले भी न्यायालय ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए थे और विशेषज्ञों की एक समिति से सुझाव मांगे थे। इस समिति ने सुझाव दिया था कि स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचना को अरावली पहाड़ी माना जाए, जबकि 500 मीटर के भीतर स्थित दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को अरावली पर्वतमाला के रूप में परिभाषित किया जाए। हालांकि, इस परिभाषा को लेकर कई पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों के बीच चिंता भी जताई गई थी। न्यायालय ने यह भी माना कि इस परिभाषा के लागू होने से कुछ क्षेत्रों में पर्यावरणीय संरक्षण की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। इसी कारण अदालत ने पहले दिए गए आदेशों को अस्थायी रूप से स्थगित भी किया था और सभी खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है, तो संबंधित पक्ष को उसे चुनौती देने का पूरा अधिकार होगा। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में किसी भी तरह का पक्षपातपूर्ण आदेश देने से बचा जाएगा। अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी से जुड़े मामलों में न्यायालय संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण अपना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र भू-जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत आवश्यक भूमिका निभाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अनियंत्रित खनन गतिविधि लंबे समय में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकती है।
भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित धार भोजशाला विवाद मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सामने आया। Madhya Pradesh High Court की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना और हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार दिए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर था। कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की रिपोर्ट और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने यह भी माना कि पुरातत्व एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और उसके निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है। कोर्ट ने क्या-क्या कहा?हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक है, यह मूल रूप से हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था, हिंदुओं को पूजा का अधिकार है, ASI परिसर का संरक्षण और प्रबंधन जारी रखेगा, सरकार संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था पर भी विचार करे ,श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, अदालत ने कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। नमाज की अनुमति वाला आदेश रद्दहाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह छूट दी है कि वे नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार से संपर्क कर सकते हैं। ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसाकोर्ट ने साफ कहा कि ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन में मिले तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जज ने सुनवाई के दौरान सभी वकीलों का आभार जताते हुए कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों, ASI एक्ट और संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखकर फैसला दिया है। लंबे समय से चल रहा था विवादधार भोजशाला मामला लंबे समय से विवाद और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। हिंदू पक्ष लगातार इसे देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र बताता रहा, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले को इस मामले में एक बड़ा और अहम निर्णय माना जा रहा है। प्रशासन ने फैसले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
गर्मी से फसलों पर संकट: किसानों ने पपीता बचाने के लिए लगाए क्रॉप कवर

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में इन दिनों गर्मी अपने चरम पर है। जिले का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जबकि दोपहर के समय लगभग 25 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही गर्म हवाएं लोगों को झुलसा रही हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक हीट वेव का अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर पपीता की खेती पर देखने को मिल रहा है। खेतों का तापमान तेजी से बढ़ने के कारण छोटे पौधों के झुलसने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में किसान अपनी फसल को बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। कई किसान खेतों में क्रॉप कवर लगा रहे हैं, जबकि कुछ किसान पुराने कपड़े, जालियां और साड़ियों का इस्तेमाल कर पौधों को तेज धूप और लू से बचा रहे हैं। विशेषज्ञ किसान विजय यादव के अनुसार, नर्सरी और खुले खेत के तापमान में करीब 15 डिग्री सेल्सियस का अंतर देखा जा रहा है। यही कारण है कि शुरुआती अवस्था में पौधों को अतिरिक्त सुरक्षा देना जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि जब तक तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर नहीं हो जाता, तब तक क्रॉप कवर हटाना जोखिम भरा हो सकता है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पपीता की खेती की गई है। उद्यानिकी उपसंचालक केके गिरवाल ने किसानों को सलाह दी है कि तेज धूप से बचाने के लिए पौधों के चारों ओर घेरा बनाएं और नियमित सिंचाई करते रहें, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। गर्मी का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुबह 11 बजे के बाद से ही सड़कों पर सन्नाटा छाने लगता है और लोग शाम तक घरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान और गुजरात की ओर से आ रही शुष्क और गर्म हवाओं के कारण हीट वेव की स्थिति बनी हुई है। अनुमान है कि 20 मई तक इसी तरह भीषण गर्मी और लू का असर जारी रह सकता है।
सरकारी गाड़ी छोड़ साइकिल से दफ्तर पहुंचे अशोकनगर कलेक्टर

HIGHLIGHTS: कलेक्टर साइकिल से पहुंचे कलेक्ट्रेट ईंधन बचत का दिया संदेश पर्यावरण संरक्षण पर जोर अधिकारियों से की खास अपील इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा ASHONAGAR COLLECTOR: अशोकनगर। साकेत मालवीय ने शुक्रवार को पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत का संदेश देते हुए सरकारी वाहन छोड़ साइकिल से कलेक्ट्रेट पहुंचकर अनूठी पहल की। सुबह वे अपने सरकारी आवास से साइकिल पर निकले और पहले सामूहिक योग कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद वहीं से साइकिल चलाकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण ईंधन बचत का दिया संदेश कलेक्टर साकेत मालवीय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री द्वारा ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए अब पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना जरूरी है। अधिकारियों-कर्मचारियों से की अपील कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद कलेक्टर ने अधिकारियों और कर्मचारियों से चर्चा की। उन्होंने अपील की कि सभी शासकीय कर्मचारी और आम नागरिक सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल, पैदल या इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग करें। उनका कहना था कि इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार दिखा पहल का असर कलेक्टर की इस पहल का असर तुरंत देखने को मिला। संयुक्त कलेक्टर सोनम जैन सहित कई अधिकारी पैदल और इलेक्ट्रिक वाहन से कार्यालय पहुंचे। शहरभर में कलेक्टर की इस सादगीपूर्ण और जागरूकता भरी पहल की सराहना की जा रही है।
आज का राशिफल 15 मई: जानें किस राशि को होगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क

नई दिल्ली।15 मई 2026 शुक्रवार को ग्रहों की विशेष स्थिति कई राशियों के लिए धन लाभ, करियर ग्रोथ और रिश्तों में मजबूती लेकर आ रही है, जबकि कुछ राशियों को स्वास्थ्य, खर्च और विवादों से सतर्क रहने की जरूरत है। जानिए सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष राशिआज आत्मविश्वास और ऊर्जा चरम पर रहेगी। करियर में नेतृत्व करने का मौका मिल सकता है। बिजनेस में नए निर्णय लाभ दिलाएंगे। प्रेम संबंध मजबूत होंगे।शुभ रंग: लाललकी नंबर: 9 वृषभ राशिअनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सतर्क रहें। मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। निवेश सोच-समझकर करें।शुभ रंग: सफेदलकी नंबर: 6 मिथुन राशिआर्थिक लाभ और करियर में तरक्की के मजबूत योग हैं। नई योजनाएं सफल होंगी। दोस्तों और परिवार का सहयोग मिलेगा।शुभ रंग: हरालकी नंबर: 5 कर्क राशिकार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। मेहनत का फल मिलेगा। परिवार का सहयोग रहेगा, लेकिन तनाव से बचें।शुभ रंग: सिल्वरलकी नंबर: 2 सिंह राशिभाग्य का पूरा साथ मिलेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे। यात्रा और निवेश दोनों लाभदायक रह सकते हैं।शुभ रंग: सुनहरालकी नंबर: 1 कन्या राशिआज सावधानी जरूरी है। स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। वाहन चलाते समय सतर्क रहें।शुभ रंग: नीलालकी नंबर: 7 तुला राशिसाझेदारी में लाभ मिलेगा। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। नौकरी और बिजनेस दोनों में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।शुभ रंग: गुलाबीलकी नंबर: 6 वृश्चिक राशिप्रतिस्पर्धियों पर जीत मिलेगी। पुराने विवाद खत्म हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें।शुभ रंग: मरूनलकी नंबर: 8 धनु राशिविद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन शानदार रहेगा। नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। प्रेम जीवन में मधुरता बढ़ेगी।शुभ रंग: पीलालकी नंबर: 3 मकर राशिपरिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। भावनाओं में बहकर निर्णय न लें।शुभ रंग: ग्रेलकी नंबर: 4 कुंभ राशिसाहस और आत्मविश्वास बढ़ेगा। करियर में बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। यात्रा और नए संपर्क लाभकारी रहेंगे।शुभ रंग: आसमानीलकी नंबर: 11 मीन राशिधन लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में सराहना मिलेगी। रिश्तों में गंभीरता और स्थिरता आएगी।शुभ रंग: क्रीमलकी नंबर: 7
भोजशाला विवाद पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी चर्चा में, नमाज की अनुमति संबंधी मांग खारिज

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। अदालत ने अपने निर्णय में ऐतिहासिक तथ्यों, पुरातात्विक साक्ष्यों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक रिपोर्ट को अहम आधार बनाया। फैसले के बाद जहां हिंदू संगठनों में उत्साह का माहौल है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई है। करीब 30 वर्षों से भोजशाला विवाद धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ था। हिंदू पक्ष का दावा रहा कि यह स्थल परमार राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा। प्रशासन ने वर्षों तक संतुलन बनाए रखने के लिए मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की व्यवस्था लागू की थी। विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया। सर्वे के दौरान मिली तस्वीरों और अवशेषों ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर स्थापत्य शैली, देवी-देवताओं की आकृतियों वाले स्तंभ, संस्कृत शिलालेख, कमल और हाथी जैसे हिंदू प्रतीक चिन्हों का उल्लेख किया गया। कई स्तंभों पर टूटी मूर्तियों और नक्काशी के प्रमाण भी मिले, जिन्हें हिंदू पक्ष मंदिर के साक्ष्य के रूप में पेश कर रहा है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक रिपोर्ट यह दर्शाती है कि विवादित स्थल का संबंध भोजशाला और देवी सरस्वती की आराधना से रहा है। अदालत ने यह भी माना कि यहां हिंदू पूजा की परंपरा पूरी तरह कभी समाप्त नहीं हुई। कोर्ट ने ASI को परिसर का प्रशासन जारी रखने और केंद्र सरकार को प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और RAF की तैनाती की गई तथा भोजशाला परिसर के बाहर बैरिकेडिंग की गई। हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे “ऐतिहासिक न्याय” बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे। यह फैसला केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और पुरातात्विक साक्ष्यों के बीच लंबे समय से चल रही बहस का महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।
भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू पक्ष के दावों को महत्वपूर्ण आधार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है। यह विवाद 1990 के दशक से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज की व्यवस्था लागू की थी। मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाती थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया। लंबे समय तक चली इस जांच में परिसर से कई ऐसे अवशेष मिले, जिन्हें हिंदू धार्मिक और स्थापत्य परंपरा से जुड़ा बताया गया। रिपोर्ट में देवी-देवताओं की आकृतियां, प्राचीन मूर्तिकला, स्तंभों पर उकेरी गई कलाकृतियां और संस्कृत शिलालेखों का उल्लेख सामने आया। हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद के रूप में उपयोग किया गया। ASI की रिपोर्ट में परिसर के कई स्तंभों और संरचनाओं को मंदिर वास्तुकला से जुड़ा बताया गया है। यही वजह है कि हाईकोर्ट का फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी कानूनी और धार्मिक जीत माना जा रहा है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट और अदालत में पेश किए गए कई तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजशाला लंबे समय से मस्जिद के रूप में उपयोग होती रही है और धार्मिक स्वरूप को लेकर केवल एक पक्ष के दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैले। संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। भोजशाला विवाद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े कानूनी और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।
मध्य प्रदेश में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 5 की मौत, यूपी-बिहार के मजदूर थे शिकार

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। सुबह करीब 11:30 बजे हुए इस धमाके में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा इतना भयावह था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे और फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह धराशायी हो गईं। आसपास के मकानों तक धमाके की कंपन महसूस की गई। मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। झुलसे हुए मजदूर बदहवास हालत में बाहर भागते नजर आए। कई लोगों के कपड़े शरीर की त्वचा से चिपक गए थे। फैक्ट्री के बाहर जले हुए अवशेष, बाल और विस्फोटक सामग्री बिखरी पड़ी मिली। हादसे के बाद भी लंबे समय तक पटाखे फूटने की आवाजें आती रहीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। आशंका है कि केमिकल का अनुपात बिगड़ने या मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने से विस्फोट हुआ। श्रम विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई कि बारूद की हैंडलिंग के दौरान स्टैटिक चार्ज बनने से ‘सेल्फ इग्निशन’ हुआ होगा। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से केमिकल के सैंपल जुटाए हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, उसका निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था। बावजूद इसके वहां बड़े स्तर पर पटाखा निर्माण किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर निर्माणाधीन यूनिट में ही विस्फोटक सामग्री का उत्पादन शुरू कर दिया गया था। फैक्ट्री के पास विस्फोटक लाइसेंस तो था, लेकिन फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी पंजीकरण और सुरक्षा अनुमतियां नहीं ली गई थीं। पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है। उसके समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है। वहीं, उज्जैन संभाग कमिश्नर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा इंतजाम और नियमों के पालन की पड़ताल की जाएगी। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि घायलों का इलाज देवास, इंदौर के एमवाय, चोइथराम और अमलतास अस्पतालों में चल रहा है। कई मजदूर 80 से 90 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घायलों से मुलाकात कर मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में पहले भी मार्च 2026 में विस्फोट हो चुका था, लेकिन प्रशासन ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और रोज करीब 18 लाख रुपए का माल तैयार होता था।