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अरावली पर्वतमाला विवाद पर SC की टिप्पणी, पर्यावरण सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता


नई दिल्ली । देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने संकेत दिया है कि इस पूरे मामले में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और जब तक सभी पहलुओं पर पूरी तरह संतुष्टि नहीं मिलती, तब तक किसी भी प्रकार की खनन गतिविधियों को लेकर कोई राहत देने पर विचार नहीं किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसे अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला क्षेत्र में चल रही खनन गतिविधियों को लेकर लगातार गंभीर और चिंताजनक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रही हैं। इन प्रतिक्रियाओं को देखते हुए अदालत ने फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि गहरे पारिस्थितिकीय प्रभावों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें अत्यधिक सावधानी आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले की सुनवाई को टुकड़ों में नहीं करेगा, बल्कि सभी पहलुओं पर एक साथ विचार करेगा। अदालत ने यह संकेत दिया कि जब तक पूरे मामले की व्यापक समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक किसी भी नई गतिविधि या निर्णय की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि न्यायालय इस पर्यावरणीय मुद्दे को बेहद गंभीरता से देख रहा है।

इससे पहले भी न्यायालय ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए थे और विशेषज्ञों की एक समिति से सुझाव मांगे थे। इस समिति ने सुझाव दिया था कि स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचना को अरावली पहाड़ी माना जाए, जबकि 500 मीटर के भीतर स्थित दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को अरावली पर्वतमाला के रूप में परिभाषित किया जाए। हालांकि, इस परिभाषा को लेकर कई पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों के बीच चिंता भी जताई गई थी।

न्यायालय ने यह भी माना कि इस परिभाषा के लागू होने से कुछ क्षेत्रों में पर्यावरणीय संरक्षण की स्थिति प्रभावित हो सकती है, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। इसी कारण अदालत ने पहले दिए गए आदेशों को अस्थायी रूप से स्थगित भी किया था और सभी खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है, तो संबंधित पक्ष को उसे चुनौती देने का पूरा अधिकार होगा। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में किसी भी तरह का पक्षपातपूर्ण आदेश देने से बचा जाएगा। अदालत का यह रुख स्पष्ट करता है कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी से जुड़े मामलों में न्यायालय संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण अपना रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र भू-जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता के लिए भी अत्यंत आवश्यक भूमिका निभाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अनियंत्रित खनन गतिविधि लंबे समय में गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकती है।

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