Chambalkichugli.com

मार्केट में हलचल के संकेत: 20 मई को शेयर बाजार पर रहेंगी नजरें

नई दिल्ली। 20 मई के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहने की संभावना है। एशियाई बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत और अमेरिकी बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में रह सकते हैं। बीते सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी ने सीमित दायरे में कारोबार किया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल किसी बड़े ट्रिगर की कमी है। हालांकि बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में हल्की हलचल देखने को मिल सकती है। ग्लोबल मार्केट का असर रहेगा अहमअंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर इंडेक्स की चाल भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर रहेंगे। यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेत भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार में अस्थिरता ला सकती हैं। घरेलू बाजार में क्या रहेगा फोकस?देश के भीतर निवेशकों की नजर कुछ अहम आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। बैंकिंग सेक्टर में लोन ग्रोथ और ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े बाजार को दिशा दे सकते हैं। आईटी कंपनियों के शेयरों में भी हल्की खरीदारी देखने को मिल सकती है, क्योंकि वैश्विक टेक सेक्टर में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव बना रह सकता है।  निवेशकों के लिए सावधानी जरूरीमार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट के दौरान खरीदारी का अवसर हो सकता है।स्टॉप लॉस के साथ ट्रेडिंग करना और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना इस समय बेहतर रणनीति मानी जा रही है। कुल मिलाकर 20 मई को शेयर बाजार में हल्की अस्थिरता देखने को मिल सकती है। ग्लोबल संकेतों और घरेलू डेटा के आधार पर बाजार दिशा तय करेगा। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और रणनीति के साथ कदम बढ़ाने का है।

उम्र का असर तो होता ही है', गोविंदा के टूटे दांत वाली क्लिप पर ट्रोल्स से भिड़े फैंस

नई दिल्ली । बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता गोविंदा एक रियलिटी शो में हाल ही में नजर आए, जहां उनकी मुस्कुराहट की एक छोटी सी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस क्लिप में उनके एक साइड के दांत को लेकर कुछ यूजर्स ने ट्रोल करना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने इसे एआई से जुड़ा वीडियो बताने की कोशिश की, जबकि कुछ ने इसे उम्र का असर बताया। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।  ट्रोल्स बनाम फैंस की बहजैसे ही यह क्लिप वायरल हुई, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने गोविंदा का मजाक उड़ाने की कोशिश की, लेकिन उनके फैंस तुरंत समर्थन में उतर आए। फैंस ने साफ कहा कि उम्र के साथ शारीरिक बदलाव स्वाभाविक हैं और किसी भी कलाकार का मजाक उड़ाना गलत है। कई लोगों ने लिखा कि गोविंदा ने अपने करियर में जो योगदान दिया है, उसके लिए उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। “हम उनके बचपन के हीरो हैं” -फैंस का समर्थनफैंस ने कमेंट्स में लिखा कि गोविंदा ने 80 और 90 के दशक में लाखों लोगों को एंटरटेन किया है। एक यूजर ने लिखा कि “अगर उम्र का असर दिख रहा है, तो इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिए।”कई लोगों ने यह भी कहा कि कलाकारों को उनकी उम्र और स्थिति के आधार पर नहीं बल्कि उनके योगदान के आधार पर देखा जाना चाहिए। सुपरस्टार का सुनहरा दौरगोविंदा 90 के दशक में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते थे। उनकी कॉमिक टाइमिंग, डांस और अभिनय के कारण वे दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। कई फिल्मों में उनकी मौजूदगी ही सफलता की गारंटी मानी जाती थी। अपने करियर के चरम पर उन्होंने एक साथ कई फिल्मों में काम किया, जिससे उनकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर छोटी-सी क्लिप भी बड़ी बहस का कारण बन सकती है। हालांकि इस बार फैंस ने अपने पसंदीदा स्टार के समर्थन में मजबूती से खड़े होकर ट्रोलिंग का जवाब दिया।

तूफानी पारी के बाद बोले वैभव सूर्यवंशी: मेरा करियर अभी और आगे जाएगा

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का एक और मुकाबला फिर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के नाम रहा। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने मात्र 38 गेंदों में 93 रनों की विस्फोटक पारी खेली और टीम को अहम जीत दिलाई। इस जीत के साथ ही राजस्थान रॉयल्स ने प्लेऑफ की उम्मीदों को भी जिंदा रखा। मैच के दौरान वैभव ने शुरुआत थोड़ी संभलकर की, लेकिन जैसे ही उन्होंने लय पकड़ी, फिर मैदान के हर कोने में शॉट्स बरसने लगे। उनकी पारी में कई शानदार चौके और छक्के शामिल रहे, जिसने विरोधी टीम लखनऊ सुपर जायंट्स के गेंदबाजों की कमर तोड़ दी। “मैं सिर्फ अपना खेल खेल रहा हूं” -वैभव सूर्यवंशीमैच के बाद प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए वैभव ने कहा कि वह किसी दबाव या चर्चाओं में नहीं आते। उन्होंने साफ कहा कि उनका फोकस सिर्फ अपने खेल पर है। उनके मुताबिक, पिच को समझने और सही समय पर आक्रामक होने की रणनीति ही उनकी सफलता की कुंजी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह शुरुआत में जल्दबाजी नहीं करते, बल्कि विकेट पर समय बिताकर फिर बड़े शॉट खेलते हैं। उनके अनुसार, यही तरीका उन्हें लगातार बड़ी पारियां खेलने में मदद कर रहा है। “यह तो बस शुरुआत है” -युवा स्टार का बड़ा बयानलगातार तीसरी बार प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने आत्मविश्वास से कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अगर उनका करियर लंबा चलता है तो वह और भी बड़े प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।  उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह मीडिया या बाहरी चर्चाओं पर ध्यान नहीं देते। उनके लिए सबसे जरूरी है मैदान पर प्रदर्शन और टीम के लिए योगदान। लगातार चमक रहा है युवा सिताराइस सीजन में वैभव सूर्यवंशी पहले ही कई बार मैच जिताऊ पारियां खेल चुके हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें आईपीएल 2026 का सबसे चर्चित युवा खिलाड़ी बना दिया है। वह इस सीजन कई छक्के जड़ चुके हैं और ऑरेंज कैप की रेस में भी मजबूत दावेदार बने हुए हैं। आईपीएल 2026 में वैभव सूर्यवंशी लगातार अपने प्रदर्शन से यह साबित कर रहे हैं कि वह आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बन सकते हैं। उनकी 93 रनों की पारी सिर्फ एक और उदाहरण है कि क्यों उन्हें भविष्य का स्टार माना जा रहा है।

पसीने और बदबू की समस्या खत्म! गर्मियों में पैरों को रखें साफ और तरोताजा..

नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान के साथ पसीना आना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसी दौरान पैरों से आने वाली बदबू कई लोगों के लिए एक बड़ी और असहज समस्या बन जाती है। लंबे समय तक जूते और मोजे पहनने की वजह से पैरों में नमी बनी रहती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। यही बैक्टीरिया पैरों से आने वाली अप्रिय गंध का मुख्य कारण बनते हैं, जो कई बार सामाजिक परिस्थितियों में शर्मिंदगी का कारण भी बन जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पैरों में शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक पसीने की ग्रंथियां होती हैं। जब यह पसीना बाहर नहीं निकल पाता, तो जूतों के अंदर गर्म और नम वातावरण बन जाता है, जो बैक्टीरिया के विकास के लिए आदर्श स्थिति प्रदान करता है। यही कारण है कि गर्मियों में Foot Odor की समस्या अधिक देखने को मिलती है। इस समस्या से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है रोज साफ और सूती मोजों का इस्तेमाल करना। कॉटन मोजे पसीने को जल्दी सोख लेते हैं और पैरों को सूखा रखने में मदद करते हैं। एक ही मोजे को बार-बार पहनना बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ावा देता है, इसलिए रोजाना मोजे बदलना जरूरी माना जाता है। इसके अलावा, पैरों की सही सफाई भी बेहद आवश्यक है। नहाने के बाद पैरों को अच्छे से सुखाना चाहिए, विशेषकर उंगलियों के बीच की जगह को, क्योंकि यहां नमी लंबे समय तक बनी रहती है। यदि अधिक पसीना आता है तो फुट पाउडर का उपयोग भी राहत दे सकता है, जिससे पैरों में सूखापन बना रहता है। जूते भी इस समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक ही जूते को लगातार पहनने से उसमें नमी जमा हो जाती है, जिससे बदबू और बैक्टीरिया दोनों बढ़ते हैं। इसलिए जूतों को समय-समय पर धूप में रखना चाहिए ताकि उनमें मौजूद नमी और कीटाणु खत्म हो सकें। साथ ही, कोशिश करनी चाहिए कि कम से कम दो जोड़ी जूते इस्तेमाल किए जाएं और उन्हें बदल-बदलकर पहना जाए। घरेलू उपायों में नींबू और बेकिंग सोडा का मिश्रण भी काफी प्रभावी माना जाता है। गुनगुने पानी में इन दोनों को मिलाकर पैरों को कुछ देर डुबोने से बैक्टीरिया कम होते हैं और पैरों को ताजगी मिलती है। इसी तरह फिटकरी वाले पानी से पैर धोने पर भी बदबू में कमी आती है, क्योंकि फिटकरी में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। सही फुटवियर का चुनाव भी बेहद जरूरी है। बहुत टाइट जूते पहनने से हवा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे पसीना अधिक जमा होता है और बदबू बढ़ती है। गर्मियों में हल्के, खुले और सांस लेने वाले जूते पहनना बेहतर विकल्प माना जाता है। कुल मिलाकर, पैरों की बदबू कोई गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने पर यह असहज स्थिति पैदा कर सकती है। थोड़ी सी सावधानी, नियमित सफाई और सही आदतों के जरिए इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है और पूरे दिन पैरों को तरोताजा रखा जा सकता है।

गर्मी में सफर की तैयारी: यात्रा के दौरान इन टिप्स को जरूर अपनाएं

नई दिल्ली। मई-जून में घूमने का प्लान बनाते समय मौसम, जगह और पैकिंग का सही ध्यान रखना जरूरी है। थोड़ी सी तैयारी आपकी यात्रा को ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बना सकती है। गर्मियों के अंत और मानसून की शुरुआत का समय यात्रा के लिए रोमांचक हो सकता है, लेकिन इस दौरान मौसम तेजी से बदलता है। ऐसे में सही योजना के बिना यात्रा मुश्किल भी हो सकती है। इसलिए यात्रा से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। मई-जून में ट्रैवल प्लान बनाते समय सबसे पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है। जिस जगह आप जा रहे हैं, वहां बारिश या तेज गर्मी की संभावना हो सकती है। ऐसे में कपड़े और जरूरी सामान उसी हिसाब से पैक करना चाहिए। मौसम की जानकारी जरूर लेयात्रा से पहले डेस्टिनेशन का मौसम अपडेट देखें। कई जगहों पर इस समय अचानक बारिश या लू चल सकती है। अगर भारी बारिश की संभावना हो तो यात्रा की तारीख या जगह बदलना बेहतर विकल्प हो सकता है। सही यात्रा साधन चुनेंकम दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन या बस सुविधाजनक होती है, जबकि लंबी दूरी के लिए फ्लाइट बेहतर विकल्प हो सकता है। समय और मौसम को ध्यान में रखकर ट्रैवल मोड चुनना जरूरी है। पैकिंग में लापरवाही न करेंहल्के और आरामदायक कपड़े रखें, साथ में रेनकोट या छाता जरूर रखें क्योंकि बारिश की संभावना रहती है। दवाइयां, पानी की बोतल और जरूरी दस्तावेज साथ रखना न भूलें। जगह का चयन सोच-समझकर करेंगर्मी से राहत पाने के लिए लोग अक्सर पहाड़ी इलाकों जैसे मनाली, शिमला, दार्जिलिंग, ऊटी या मुन्नार जाते हैं। वहीं समुद्र किनारे घूमने के लिए गोवा, केरल या अंडमान-निकोबार बेहतर विकल्प हो सकते हैं। खाने-पीने का ध्यान रखेंयात्रा के दौरान बाहर का खाना सीमित मात्रा में लें ताकि स्वास्थ्य खराब न हो। साफ पानी और हल्का भोजन आपकी यात्रा को आसान बनाएगा। मई-जून में यात्रा का आनंद तभी लिया जा सकता है जब सही तैयारी हो। मौसम, पैकिंग और सही जगह का चयन आपकी ट्रिप को यादगार और सुरक्षित बना सकता है।

सामाजिक न्याय का विश्व दिवस 2026: समानता और सम्मान की वैश्विक लड़ाई को मिला नया संकल्प

दुनिया भर में 2026 का सामाजिक न्याय का विश्व दिवस इस बार और अधिक व्यापक चर्चा के साथ मनाया जा रहा है, जहां सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संगठन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर असमानता को कम करने के उपायों पर मंथन कर रही हैं। यह दिवस World Day of Social Justice के रूप में हर साल 20 फरवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में न्याय, समान अवसर और मानव अधिकारों को मजबूत करना है। इस वर्ष विशेष रूप से ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि तेजी से बदलते डिजिटल और तकनीकी युग में भी सामाजिक और आर्थिक असमानताएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर कुछ वर्गों तक ही सीमित रहेंगे तो विकास संतुलित नहीं माना जा सकता। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठनों ने इस अवसर पर यह दोहराया है कि सामाजिक न्याय केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह नीति निर्माण और शासन व्यवस्था का मूल आधार होना चाहिए। गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता, श्रमिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। विभिन्न देशों में इस दिन रैलियों, सेमिनारों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि एक समावेशी समाज ही स्थायी शांति और विकास की गारंटी दे सकता है। 2026 में यह दिवस इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई देशों में आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक विभाजन की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह दिन नीति निर्माताओं को यह याद दिलाता है कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सामाजिक न्याय का विश्व दिवस 2026 दुनिया भर में समान अधिकार, अवसरों की बराबरी और सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से मनाया जा रहा है। यह दिन हर वर्ष 20 फरवरी को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य एक ऐसे समाज की कल्पना को मजबूत करना है जहां जाति, वर्ग, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव न हो। -सामाजिक न्याय का विश्व दिवस 2026

बुध गोचर का असर: 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें, रहें सावधान

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, व्यापार, संवाद और तर्क का कारक माना गया है। हाल ही में बुध ग्रह ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया है, जिसका असर सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में बुध का गोचर मानसिक स्थिति, भावनाओं और निर्णय क्षमता पर प्रभाव डाल सकता है। इस दौरान कई लोगों को तनाव, असमंजस और कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह गोचर कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इन जातकों को करियर, सेहत और पारिवारिक जीवन में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। मेष राशि पर प्रभावमेष राशि के जातकों के लिए यह समय कार्यस्थल पर तनाव बढ़ा सकता है। ऑफिस में सहकर्मियों के साथ विवाद की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है, अन्यथा नुकसान की संभावना बन सकती है। वृश्चिक राशि पर प्रभाववृश्चिक राशि वालों के लिए यह गोचर पारिवारिक जीवन में तनाव ला सकता है। घर-परिवार में मतभेद और रिश्तों में दूरी बढ़ने की आशंका है। साथ ही सेहत को लेकर भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। धनु राशि पर प्रभावधनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में बाधाओं से भरा हो सकता है। कामकाज में रुकावटें और निराशा का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में धैर्य और संयम बनाए रखना जरूरी होगा। कुंभ राशि पर प्रभावकुंभ राशि के लोगों को आर्थिक और मानसिक दबाव झेलना पड़ सकता है। अचानक खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है। करीबी लोगों से विवाद की स्थिति भी बन सकती है, जिससे रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। बुध गोचर का यह प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा, लेकिन मेष, वृश्चिक, धनु और कुंभ राशि के जातकों को इस समय विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। संयम, सोच-समझकर निर्णय और धैर्य इस समय सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकते हैं।

आपातकालीन चिकित्सा सेवा दिवस (Emergency Medical Services Day): जीवन बचाने वाली अदृश्य सेना को सलाम

हर साल मनाया जाने वाला आपातकालीन चिकित्सा सेवा दिवस (Emergency Medical Services Day) उन हजारों स्वास्थ्यकर्मियों, एंबुलेंस स्टाफ, पैरामेडिक्स और डॉक्टरों को समर्पित होता है, जो हर पल “जीवन और मृत्यु” के बीच खड़े होकर लोगों की जान बचाते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि किसी भी दुर्घटना, हार्ट अटैक, स्ट्रोक या गंभीर चोट की स्थिति में समय ही सबसे बड़ा इलाज हैऔर यही काम EMS (Emergency Medical Services) करती है। आपातकालीन चिकित्सा सेवा क्या है?आपातकालीन चिकित्सा सेवा (EMS) एक ऐसी प्रणाली है जो अचानक होने वाली गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान करती है। इसमें शामिल होते हैं: एंबुलेंस सेवाएं पैरामेडिक्स और EMT (Emergency Medical Technicians) अस्पतालों का इमरजेंसी विभाग इमरजेंसी कॉल रिस्पॉन्स सिस्टम इन सभी का उद्देश्य एक ही होता है मरीज को “गोल्डन ऑवर” के भीतर जीवन रक्षक उपचार देना। गोल्डन ऑवर का महत्वचिकित्सा विज्ञान में “गोल्डन ऑवर” का मतलब होता है किसी गंभीर दुर्घटना या हार्ट अटैक के बाद का पहला 60 मिनट। इस समय में अगर मरीज को सही इलाज मिल जाए तो: जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है स्थायी नुकसान (Permanent Disability) कम हो जाता है इसी कारण EMS को “सर्वाइवल की पहली कड़ी” कहा जाता है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की भूमिकाEMS सिर्फ मरीज को अस्पताल पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पूरी जीवन रक्षक प्रणाली है: 1. तुरंत प्रतिक्रिया (Rapid Response)कॉल मिलते ही एंबुलेंस और टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है। 2. मौके पर प्राथमिक उपचारमरीज को CPR, ऑक्सीजन, ब्लीडिंग कंट्रोल जैसे जरूरी इलाज मौके पर दिया जाता है। 3. सुरक्षित परिवहनमरीज को सही स्थिति में अस्पताल पहुंचाना ताकि हालत न बिगड़े। 4. अस्पताल से समन्वयपहले से अस्पताल को सूचना देकर इमरजेंसी तैयारी कराई जाती है। EMS कर्मियों की चुनौतियांEMS कर्मी हर दिन कई कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं: ट्रैफिक जाम में फंसी एंबुलेंससंसाधनों की कमी अत्यधिक तनावपूर्ण और गंभीर मरीज 24×7 ड्यूटी का दबाव कई बार जान जोखिम में डालकर सेवा देना फिर भी वे बिना रुके, बिना थके लोगों की जान बचाते रहते हैं। भारत में EMS की स्थितिभारत में पिछले कुछ वर्षों में EMS प्रणाली में सुधार हुआ है: 108 एंबुलेंस सेवा का विस्तार सरकारी और निजी अस्पतालों का बेहतर नेटवर्क इमरजेंसी हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग बढ़ा मोबाइल और GPS आधारित एंबुलेंस ट्रैकिंग हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी सुधार की जरूरत है। यह दिन क्यों महत्वपूर्ण है?आपातकालीन चिकित्सा सेवा दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक संदेश है: हर सेकंड कीमती है सही समय पर मदद जीवन बचा सकती है EMS कर्मी “गुमनाम हीरो” हैं आपातकालीन चिकित्सा सेवा दिवस हमें यह सिखाता है कि किसी भी आपदा या मेडिकल इमरजेंसी में सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाली टीम ही असली जीवन रक्षक होती है। एंबुलेंस की आवाज सिर्फ एक वाहन की नहीं, बल्कि उम्मीद की आवाज होती है। इस दिन हमें EMS कर्मियों के योगदान को सम्मान देना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उनकी मेहनत के बिना आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था अधूरी है। -आपातकालीन चिकित्सा सेवा दिवस

Google I/O 2026: बिना कोड लिखे बनाएं Android ऐप, Google का नया AI टूल बना गेमचेंजर

नई दिल्ली। Google ने अपने Google I/O 2026 इवेंट में एक ऐसा AI टूल पेश किया है, जिससे अब कोई भी व्यक्ति बिना कोडिंग के अपना Android ऐप बना सकता है। यह फीचर खास तौर पर Google AI Studio में जोड़ा गया है, जिसे ऐप डेवलपमेंट को आसान और तेज बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। अब ऐप बनाना हुआ बेहद आसानइस नए AI सिस्टम की मदद से यूजर सिर्फ आइडिया लिखकर कुछ ही मिनटों में Android ऐप तैयार कर सकते हैं। पहले जहां ऐप बनाने में हफ्तों की कोडिंग लगती थी, अब वह काम AI अपने आप कर देगा। यह टूल खास तौर पर दो तरह के यूजर्स के लिए उपयोगी है— प्रोफेशनल डेवलपर्स, जो जल्दी प्रोटोटाइप बनाना चाहते हैं नॉन-टेक्निकल यूजर्स, जो पहली बार ऐप बनाना चाहते हैं AI टूल से मिलेगा नया कॉम्पिटिशनयह नया प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर Cursor, Replit, Lovable और Claude Code जैसे AI डेवलपमेंट टूल्स को टक्कर देगा। Play Store में भी AI का नया फीचरGoogle ने Play Store में भी नया फीचर “Ask Play” लॉन्च करने की घोषणा की है। इसके जरिए यूजर सामान्य भाषा में सवाल पूछकर अपने लिए सही ऐप ढूंढ सकेंगे। इसके साथ Gemini असिस्टेंट भी यूजर्स को उनकी जरूरत के हिसाब से ऐप्स सजेस्ट करेगा। Gemini से मिलेगा बड़ा अपग्रेडGemini अब फिल्मों, टीवी शोज और स्पोर्ट्स से जुड़े लाखों कंटेंट को समझकर सीधे सही ऐप या प्लेटफॉर्म का लिंक भी दे सकेगा।

समर स्किन केयर गाइड: ऑयली त्वचा से छुटकारा पाने के आसान तरीके

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम आते ही पसीना, धूल और तेज धूप का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। कई लोगों को इस दौरान चेहरे पर चिपचिपाहट, ऑयली स्किन और पिंपल्स जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लगातार पसीना आने से त्वचा के पोर्स बंद हो जाते हैं, जिससे चेहरा डल और असहज दिखने लगता है। लेकिन अगर सही स्किन केयर रूटीन अपनाया जाए, तो इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है। दिन में दो बार फेसवॉश करेंगर्मी में चेहरे पर धूल और पसीना जल्दी जमा हो जाता है। ऐसे में दिन में कम से कम दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करना जरूरी है। इससे त्वचा साफ रहती है और ताजगी महसूस होती है। टोनर का इस्तेमाल करेंटोनर त्वचा के पोर्स को टाइट करता है और अतिरिक्त ऑयल को नियंत्रित करता है। गुलाब जल जैसे नेचुरल टोनर का इस्तेमाल गर्मियों में बेहद फायदेमंद माना जाता है। ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र लगाएंकई लोग गर्मियों में मॉइस्चराइज़र लगाना छोड़ देते हैं, जो गलत है। स्किन को हाइड्रेट रखने के लिए जेल-बेस्ड या ऑयल-फ्री मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे त्वचा हल्की और फ्रेश बनी रहे। सनस्क्रीन लगाना न भूलेंधूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। यह त्वचा को टैनिंग और सूरज की हानिकारक किरणों से बचाता है। चेहरे को ठंडक देंअगर त्वचा ज्यादा चिपचिपी महसूस हो रही हो तो ठंडे पानी से चेहरा धोना या आइस क्यूब से हल्की मसाज करना राहत दे सकता है। इससे स्किन फ्रेश महसूस होती है। पानी और हेल्दी डाइट जरूरीत्वचा को अंदर से स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना और ताजे फल-सब्जियों का सेवन करना जरूरी है। तला-भुना और जंक फूड कम करने से भी स्किन बेहतर रहती है।