मोदी-मेलोनी मुलाकात का असर? भारत की चेतावनी के बाद क्या पाकिस्तान को हथियार बेचना रोकेगा इटली

नई दिल्ली। रोम में प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की पीएम Giorgia Meloni की मुलाकात के बाद भारत-इटली रक्षा संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा देने की बात कही है। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इटली अब पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई सीमित करेगा या उस पर रोक लगाएगा। भारत ने हाल के महीनों में इटली के सामने अपनी सुरक्षा चिंताओं को मजबूती से रखा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने अपने इतालवी समकक्ष Guido Crosetto से साफ कहा था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली उन्नत रक्षा तकनीक भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। भारत ने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है, इसलिए संवेदनशील सैन्य तकनीक उसके हाथों तक नहीं पहुंचनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुई रक्षा वार्ता में भारत ने पाकिस्तान को इटली द्वारा की गई पूर्व हथियार आपूर्ति का मुद्दा भी उठाया। भारत ने खासतौर पर नौसेना प्रणालियों, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और रडार तकनीक को लेकर चिंता जताई। इसके जवाब में इतालवी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भारत को मिलने वाली अत्याधुनिक रक्षा तकनीक किसी तीसरे देश के साथ साझा नहीं की जाएगी। दरअसल पाकिस्तान और इटली के बीच रक्षा कारोबार काफी पुराना और मजबूत रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार चीन के बाद इटली पाकिस्तान को हथियार देने वाले बड़े देशों में शामिल रहा है। पाकिस्तान अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए इटली से नौसैनिक उपकरण, रडार, सैन्य हेलीकॉप्टर, आर्टिलरी सिस्टम और गोला-बारूद खरीदता रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2018 में इटली ने पाकिस्तान को करीब 762 मिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात की मंजूरी दी थी। वहीं हालिया आंकड़ों में इटली से पाकिस्तान को हथियार और सैन्य उपकरणों के निर्यात का आंकड़ा 541 मिलियन डॉलर से ज्यादा बताया गया है। पाकिस्तानी सेना में इतालवी हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है, जिसमें Beretta 92FS पिस्तौल भी शामिल है। अब स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि इटली की बड़ी रक्षा कंपनी Leonardo भारत में रक्षा और नौसेना परियोजनाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य की रक्षा साझेदारी तभी मजबूत होगी, जब इटली भारत की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के इटली दौरे को इसी नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत-इटली रक्षा सहयोग और गहरा हो सकता है, लेकिन पाकिस्तान को हथियार सप्लाई का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी परीक्षा बना रहेगा।
13 लाख के मोबाइल बरामद: अब हर थाने में दर्ज होगी गुम फोन की शिकायत

मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में पुलिस ने गुम हुए मोबाइल फोन तलाशने के अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 120 गुम मोबाइल उनके असली मालिकों को लौटाए गए। बरामद किए गए इन मोबाइल फोन की कुल कीमत करीब 13 लाख 20 हजार रुपए बताई जा रही है। लंबे समय बाद अपने मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई और कई लोगों ने पुलिस टीम का आभार जताया। यह पूरा अभियान पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा के निर्देशन में चलाया गया। जिले की सायबर सेल और सभी थाना प्रभारियों की संयुक्त टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने तकनीकी सहायता और मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से जिले के अलावा अन्य जिलों और राज्यों से भी मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कई मोबाइल ऐसे थे जो महीनों पहले गुम हो चुके थे, लेकिन तकनीकी निगरानी के जरिए उन्हें सफलतापूर्वक खोज लिया गया। इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि अब आम लोगों को मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज कराने के लिए सायबर सेल कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पुलिस विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए जिले के सभी थानों में मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू कर दी है। अब कोई भी व्यक्ति अपने नजदीकी थाने में आवेदन, आधार कार्ड की कॉपी और मोबाइल खरीद का बिल जमा कर शिकायत दर्ज करा सकेगा। इससे आम नागरिकों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। पुलिस प्रशासन ने ऑनलाइन शिकायत की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। अब लोग स्वयं भी ऑनलाइन माध्यम से अपने गुम मोबाइल की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे शिकायत प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगी। पुलिस का कहना है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से मोबाइल ट्रेसिंग अभियान को और प्रभावी बनाया जाएगा। मोबाइल वापस मिलने पहुंचे कई लोगों ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका फोन दोबारा मिल पाएगा। कुछ लोगों के लिए मोबाइल सिर्फ संचार का माध्यम नहीं बल्कि जरूरी दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी और निजी डेटा का भी महत्वपूर्ण जरिया था। ऐसे में मोबाइल वापस मिलना उनके लिए बड़ी राहत साबित हुआ। एसपी राजीव मिश्रा ने इस सफल कार्रवाई के लिए सायबर सेल और संबंधित थाना पुलिस टीमों की सराहना की है। उन्होंने घोषणा की कि इस अभियान में बेहतर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही भविष्य में भी गुम मोबाइल खोजने का अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस पहल से लोगों का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर और मजबूत होगा। अशोकनगर पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर 120 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए। करीब 13.20 लाख रुपए कीमत के मोबाइल अब सायबर सेल और थाना पुलिस की मदद से ट्रेस किए गए। साथ ही हर थाने में मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज करने की नई सुविधा भी शुरू की गई है।
कैलिफोर्निया मस्जिद हमला: कट्टरपंथी युवकों ने बरसाईं गोलियां, 3 की मौत; 140 बच्चों की जान बची

नई दिल्ली। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में स्थित एक मस्जिद पर हुए भीषण हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दो किशोर हमलावरों ने बाद में खुद को भी गोली मार ली। जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों हमलावर ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और श्वेत वर्चस्ववादी सोच का समर्थन करते थे। अधिकारियों का कहना है कि यह हमला अमेरिका में बढ़ती धार्मिक घृणा और चरमपंथी हिंसा का गंभीर उदाहरण है। पुलिस ने हमलावरों की पहचान 17 वर्षीय केन क्लार्क और 18 वर्षीय कैलेब वाजक्वेज के रूप में की है। जांच में सामने आया कि दोनों पहली बार इंटरनेट के जरिए मिले थे और बाद में एक-दूसरे के संपर्क में आए। एफबीआई के सैन डिएगो प्रमुख एजेंट मार्क रेमिली ने बताया कि दोनों युवकों ने ऑनलाइन मंचों पर कट्टरपंथी विचार अपनाए थे। उनके दस्तावेजों और लेखों में मुसलमानों, यहूदियों, अश्वेत समुदाय, महिलाओं और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के खिलाफ घृणित टिप्पणियां मिली हैं। दोनों ने श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा का समर्थन करते हुए यह दावा किया था कि श्वेत लोगों का अस्तित्व खतरे में है। जांच एजेंसियों के मुताबिक हमलावरों ने खुद को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च मस्जिद हमले के आरोपी ब्रेंटन टैरेंट का “बेटा” बताया था। 2019 में क्राइस्टचर्च की मस्जिदों पर हुए हमले में 51 लोगों की मौत हुई थी। अधिकारियों को हमलावरों के पास से नाजी प्रतीक, चरमपंथी साहित्य और कई ऑनलाइन घोषणापत्र भी मिले हैं। एक हमलावर ने अपने लेखों में मानसिक तनाव और महिलाओं द्वारा अस्वीकार किए जाने की बातें भी लिखी थीं। हमले के दौरान मस्जिद के सुरक्षा गार्ड अमीन अब्दुल्ला ने बहादुरी दिखाते हुए हमलावरों का सामना किया। अधिकारियों के अनुसार अब्दुल्ला ने हमलावरों को मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों तक पहुंचने से रोकने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। मस्जिद परिसर में मौजूद करीब 140 स्कूली बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया। इमाम ताहा हस्सान ने बताया कि अमीन अब्दुल्ला ने गोलीबारी के बीच रेडियो पर लॉकडाउन की घोषणा की और हमलावरों को रोकने की कोशिश करते रहे। घायल होने के बावजूद उन्होंने जवाबी फायरिंग जारी रखी, जिससे हमलावरों को पीछे हटना पड़ा। बाद में हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। पुलिस प्रमुख स्कॉट वाहल ने बताया कि हमलावर मस्जिद के अंदर घुसने में सफल हो गए थे और उन्होंने खाली कमरों की तलाशी भी ली। इसके बाद पार्किंग क्षेत्र में उन्होंने मंसूर काजिहा और नादिर अवाद को गोली मार दी। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने भी हमलावरों का ध्यान अपनी ओर खींचकर अन्य लोगों की जान बचाने में मदद की। घटना के बाद जांच एजेंसियों ने दोनों हमलावरों के घरों की तलाशी ली, जहां से कम से कम 30 बंदूकें, भारी मात्रा में गोला-बारूद और एक क्रॉसबो बरामद किया गया। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हमलावर किसी बड़े हमले की योजना बना रहे थे। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में मुस्लिम और यहूदी समुदायों के खिलाफ घृणा अपराधों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बाद धार्मिक तनाव और अधिक बढ़ गया है। सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर के इमाम ताहा हस्सान ने कहा कि मस्जिद को पहले भी धमकियां और नफरत भरे संदेश मिलते रहे हैं, लेकिन इस तरह के हिंसक हमले की कभी कल्पना नहीं की गई थी। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले को घरेलू आतंकवाद और ऑनलाइन कट्टरपंथ से जोड़कर जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर फैल रही नफरत और चरमपंथी प्रचार सामग्री युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रही है, जो समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
बाइक रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे दवा व्यापारी, ई-फार्मेसी पर रोक की मांग

मध्य प्रदेश । गुना में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर के दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इस दौरान जिले की करीब 700 मेडिकल दुकानें बंद रहीं, जिनमें शहर की लगभग 350 दुकानें शामिल थीं। मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों और आम लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्थाओं के चलते गंभीर मरीजों को राहत मिलती रही। दवा व्यापारियों ने शहर के सुगन चौराहे पर एकत्रित होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद सभी व्यापारी बाइक रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन ने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के ऑनलाइन दवा बिक्री लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे छोटे मेडिकल व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना वैध चिकित्सकीय सलाह और बिना प्रमाणित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। एसोसिएशन के सचिव राकेश शर्मा ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई कंपनियां लंबे समय से अवैध तरीके से कारोबार कर रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट और प्रीडेटरी प्राइसिंग नीति का भी विरोध किया। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बड़े डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। ज्ञापन में GSR 817(E) और GSR 220(E) अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग भी उठाई गई। मेडिकल स्टोर बंद रहने से कई मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए भटकना पड़ा, लेकिन जिला प्रशासन ने पहले से वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लागू कर दी थीं। प्रशासन के निर्देश पर जन औषधि केंद्र, निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोर और शासकीय अस्पतालों की दवा दुकानें खुली रहीं। सिविल अस्पताल, कैंट चौराहा और भगत सिंह चौक स्थित जन औषधि केंद्रों पर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा आशीर्वाद हॉस्पिटल, सहयोग नर्सिंग होम, बालाजी नर्सिंग होम, ममता नर्सिंग होम और एजेएस हॉस्पिटल की मेडिकल दुकानें भी संचालित रहीं। दवा व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
World Updates: पेरू में 5.8 तीव्रता का भूकंप, 27 घायल; कैलिफोर्निया में जंगल की आग और सूडान-लेबनान में हिंसा से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं और हिंसक संघर्षों ने चिंता बढ़ा दी है। पेरू में भूकंप, अमेरिका के कैलिफोर्निया में जंगल की आग, सूडान में ड्रोन हमला और दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों जैसी घटनाओं ने कई देशों को प्रभावित किया है। प्रशासनिक एजेंसियां राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। पेरू के दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में मंगलवार देर रात 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और 27 लोग घायल हो गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप का केंद्र इका क्षेत्र के पाम्पा डी टेट शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर था और इसकी गहराई 56.5 किलोमीटर दर्ज की गई। भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। कई इमारतों में दरारें आ गईं और कुछ ढांचे आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के मारे जाने की खबर सामने नहीं आई है। पेरू के रक्षा मंत्री अमादेव फ्लोर्स ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और सैन लुइस गोंजागा यूनिवर्सिटी समेत अन्य क्षतिग्रस्त भवनों का निरीक्षण किया। प्रशासन राहत, मरम्मत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। पेरू प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां ज्वालामुखियों और फॉल्ट लाइनों की वजह से अक्सर भूकंप आते रहते हैं। उधर अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया में जंगल की आग ने भारी तबाही मचाई है। तेज हवाओं की वजह से लगी आग तेजी से फैलती चली गई, जिसके बाद 17 हजार से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने के आदेश दिए गए। यह आग लॉस एंजिल्स से लगभग 48 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम स्थित सिमी वैली के पहाड़ी इलाकों में शुरू हुई। वेंटुरा काउंटी अग्निशमन विभाग के अनुसार आग ने पांच वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को जलाकर राख कर दिया और कम से कम एक घर पूरी तरह नष्ट हो गया। दमकल विभाग के प्रवक्ता एंड्रयू डाउड ने बताया कि शुरुआत में 48 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की हवाओं ने आग को और भड़काया, लेकिन रात में हवा धीमी पड़ने से राहत कार्यों में मदद मिली। प्रशासन ने कई इलाकों में अभी भी निकासी आदेश जारी रखे हैं। इसी बीच दमकलकर्मी दक्षिणी कैलिफोर्निया तट के पास स्थित सांता रोजा द्वीप पर लगी भीषण आग से भी जूझ रहे हैं। यहां करीब 59 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आग फैल चुकी है। आग में एक केबिन और उपकरण शेड जलकर नष्ट हो गए हैं, जबकि राष्ट्रीय उद्यान सेवा के 11 कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। अफ्रीकी देश सूडान में भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। पश्चिमी कोरडोफान प्रांत के घुबायश कस्बे में मंगलवार को एक व्यस्त बाजार पर ड्रोन हमला किया गया, जिसमें 28 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय मानवाधिकार संगठन ‘इमरजेंसी लॉयर्स’ ने दावा किया कि हमला सूडानी सेना की ओर से किया गया। संगठन के मुताबिक हमला उस समय हुआ जब बाजार में बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे। हालांकि सूडानी सेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने नागरिकों को निशाना नहीं बनाया। सेना के अधिकारियों के अनुसार ड्रोन हमले में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के लड़ाकू वाहनों को निशाना बनाया गया था। सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और आरएसएफ के बीच भीषण संघर्ष जारी है, जिसने देश को गृहयुद्ध जैसी स्थिति में धकेल दिया है। वहीं दक्षिणी लेबनान पर इजरायल के हवाई हमलों में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मृतकों में चार महिलाएं और तीन बच्चे भी शामिल हैं। यह हमला इजरायल और हिजबुल्ला के बीच जारी तनाव के बीच हुआ है। अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद दोनों पक्षों के बीच लगभग रोज हमले जारी हैं। लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में भी एक दर्दनाक हादसा सामने आया। मिडटाउन मैनहट्टन में एक महिला खुले गड्ढे में गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार 56 वर्षीय महिला अपनी कार पार्क करने के बाद बाहर निकल रही थी, तभी वह सड़क पर मरम्मत के लिए बनाए गए खुले गड्ढे में गिर गई। बाद में दमकलकर्मियों ने उसे बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बिजली कंपनी कॉन एडिसन ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला के गिरने से कुछ मिनट पहले एक भारी ट्रक गुजरने के कारण गड्ढे का ढक्कन हट गया था। दुनियाभर में एक साथ सामने आई इन घटनाओं ने सुरक्षा, प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध जैसे मुद्दों को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। कई देशों में प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित रखने के प्रयास लगातार जारी हैं।
गुना PWD ऑफिस पर कुर्की की कार्रवाई: कर्मचारी का बकाया न चुकाने पर एक्शन

मध्य प्रदेश । गुना में लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही एक बार फिर अदालत की सख्ती का कारण बनी। सेवानिवृत्त कर्मचारी के करीब 36 लाख रुपए के एरियर और वेतन भुगतान न किए जाने पर बुधवार को जिला न्यायालय के आदेश पर पीडब्ल्यूडी कार्यालय में दोबारा कुर्की की कार्रवाई की गई। इससे पहले फरवरी 2026 में भी कोर्ट की टीम विभागीय संपत्तियों की कुर्की कर चुकी थी, लेकिन विभाग ने दो महीने में भुगतान करने का लिखित आश्वासन देकर समय ले लिया था। तय अवधि बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर अदालत को फिर हस्तक्षेप करना पड़ा। मामला पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त कर्मचारी कौशल किशोर राठौर से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि विभाग ने लंबे समय तक उन्हें उनके पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया। न्याय पाने के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। यह मामला निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां हर स्तर पर फैसला कर्मचारी के पक्ष में आया। अदालतों ने विभाग को बकाया वेतन और एरियर का भुगतान करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। विभाग ने वर्ष 2013 तक के एरियर का भुगतान तो कर दिया, लेकिन 2014 से लेकर रिटायरमेंट तक की लगभग 36 लाख रुपए की राशि रोक ली गई। लगातार आदेशों और नोटिसों के बावजूद जब भुगतान नहीं हुआ, तो कौशल किशोर राठौर ने अवमानना और इजरा याचिका दायर की। इसके बाद न्यायालय ने विभाग के खिलाफ वसूली और कुर्की की कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। फरियादी कौशल किशोर राठौर ने बताया कि फरवरी में हुई पहली कुर्की के दौरान विभागीय अधिकारियों ने अदालत में लिखित में यह भरोसा दिया था कि दो महीने के भीतर पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी कारण कोर्ट की टीम को दोबारा पीडब्ल्यूडी कार्यालय पहुंचकर कुर्की की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। बुधवार को न्यायालय की टीम ने विभागीय संपत्तियों का आकलन किया और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी की। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 दिसंबर 2026 तक कुर्की के माध्यम से पूरी राशि वसूलकर कर्मचारी को भुगतान सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला सरकारी विभागों द्वारा अदालत के आदेशों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। यदि विभाग ने अब भी भुगतान नहीं किया, तो आने वाले समय में विभाग की अन्य संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अदालत अब इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है और आदेशों की अवहेलना पर आगे और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
सड़क पर नमाज पर रोक के बाद सियासत गरमाई, पूर्व डीजीपी बृजलाल ने योगी फैसले का किया समर्थन

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर लगाए गए प्रतिबंध के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, जहां इस निर्णय पर समर्थन और विरोध दोनों ही स्वर तेज हो गए हैं। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक और वर्तमान राज्यसभा सांसद बृजलाल ने इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि, जिससे यातायात या आम जनजीवन प्रभावित होता है, उसे नियंत्रित करना आवश्यक है ताकि समाज में शांति और अनुशासन बना रहे। बृजलाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि समय के साथ सरकारों की प्राथमिकताएं और प्रशासनिक दृष्टिकोण बदलते रहे हैं, और पहले के दौर में कई बार सरकारी और आधिकारिक परिसरों में धार्मिक आयोजनों को लेकर अलग तरह की परंपराएं देखने को मिलती थीं। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक कालखंडों में धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर सरकारी स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए गए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर भी असर पड़ता रहा है। इस पूरे मुद्दे ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर बहस को जन्म दे दिया है। वर्तमान सरकार का कहना है कि सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी प्रकार की भीड़ या आयोजन, चाहे वह किसी भी धर्म से संबंधित हो, यदि यातायात या सामान्य व्यवस्था को प्रभावित करता है, तो उसे अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, धार्मिक गतिविधियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और निर्धारित स्थानों पर आयोजन की अनुमति देने की बात भी कही गई है, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में धार्मिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक नीति के संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। इसी कारण विभिन्न राजनीतिक दल इस विषय पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं। एक ओर सरकार इसे व्यवस्था सुधार और कानून पालन का हिस्सा बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी और कुछ सामाजिक संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। इस बीच बृजलाल के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है, क्योंकि उन्होंने न केवल वर्तमान नीति का समर्थन किया है, बल्कि पिछले प्रशासनिक और राजनीतिक दौरों की तुलना करते हुए यह संकेत देने की कोशिश की है कि समय के साथ शासन शैली में बड़ा बदलाव आया है। उनके अनुसार, प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार के सामाजिक तनाव को रोकना और सभी समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखना होना चाहिए। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले समय में यह बहस और अधिक गहराने की संभावना है, क्योंकि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर नीति निर्धारण हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है।
ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

मध्य प्रदेश । शिवपुरी में बुधवार को ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में केमिस्टों की देशव्यापी हड़ताल का बड़ा असर देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर जिलेभर के करीब 350 मेडिकल स्टोर पूरे दिन बंद रहे। इनमें शहर के लगभग 150 मेडिकल प्रतिष्ठान भी शामिल थे। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने इस दौरान विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। केमिस्टों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। साथ ही भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित किया जा रहा है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से नियम GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. चन्द्र प्रकाश गोयल और सचिव गोपाल दास अग्रवाल ने कहा कि दवाएं कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, बल्कि सीधे जन स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। उनका कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद सरकार इस मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है। केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान स्थानीय मेडिकल स्टोरों ने फ्रंटलाइन हेल्थ सपोर्ट की भूमिका निभाई थी और लोगों तक दवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बावजूद आज छोटे दवा व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने के बावजूद मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ने पहले से ही आवश्यक और आपातकालीन दवाओं की व्यवस्था कर दी थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अस्पताल परिसरों में संचालित मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहे, जहां जरूरतमंद मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका मानना है कि बिना निगरानी के ऑनलाइन दवा वितरण से न केवल छोटे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
रूस का परमाणु शक्ति प्रदर्शन: 65 हजार सैनिकों संग शुरू हुआ महाअभ्यास, यूक्रेन और NATO में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली। यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करते हुए बेलारूस के साथ संयुक्त परमाणु सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। तीन दिन तक चलने वाले इस महाअभ्यास में रूस ने 65 हजार सैनिकों, 140 लड़ाकू विमानों, 200 मिसाइल लॉन्चरों, 73 युद्धपोतों और 13 पनडुब्बियों को उतारा है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस अभ्यास में करीब 7800 प्रकार के हथियार और सैन्य उपकरण शामिल किए गए हैं। यह सैन्य अभ्यास 19 मई से शुरू होकर 21 मई तक चलेगा और इसे यूक्रेन तथा नाटो देशों के लिए एक बड़ा रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। रूस ने यह अभ्यास ऐसे समय पर शुरू किया है जब यूक्रेन लगातार रूसी क्षेत्रों पर ड्रोन हमले तेज कर रहा है। यूक्रेन युद्ध को चार साल पूरे होने वाले हैं और इस दौरान कई बार रूस अपने परमाणु हथियारों और मिसाइलों का प्रदर्शन कर चुका है। इस बार रूस ने परमाणु हमला करने में सक्षम मिसाइल प्रणालियों को भी अभ्यास में शामिल किया है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक वीडियो जारी किया जिसमें सैनिक मोबाइल इस्कंदर-एम मिसाइल सिस्टम को लॉन्च साइट तक ले जाते नजर आए। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी मारक क्षमता करीब 500 किलोमीटर बताई जाती है। रूसी सेना बेलारूस में तैनात टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन के इस्तेमाल का अभ्यास भी कर रही है। हाल ही में रूस ने बेलारूस में ओरेशनिक मिसाइल प्रणाली भी तैनात की है, जो परमाणु हमला करने में सक्षम मानी जाती है। बेलारूस की सीमा कई नाटो देशों से लगती है, इसलिए इस तैनाती को यूरोप के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। रूस का कहना है कि नाटो देशों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और यूक्रेन को मिल रहे पश्चिमी समर्थन से उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। यह अभ्यास ऐसे समय पर हो रहा है जब रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin चीन के दौरे पर हैं। इस दौरान रूस और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। माना जा रहा है कि रूस वैश्विक स्तर पर यह संदेश देना चाहता है कि वह पश्चिमी दबाव के बावजूद पीछे हटने वाला नहीं है। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते के समाप्त होने के बाद यह पहला बड़ा परमाणु अभ्यास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे यूरोप में तनाव और बढ़ सकता है। नाटो देशों ने अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यूरोप में सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उधर यूक्रेन ने रूस और बेलारूस के इस संयुक्त अभ्यास की कड़ी आलोचना की है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बेलारूस में परमाणु हथियारों की तैनाती और संयुक्त अभ्यास अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। यूक्रेन ने आरोप लगाया कि रूस और बेलारूस परमाणु अप्रसार संधि का उल्लंघन कर रहे हैं। यूक्रेन ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह के कदम पूरे यूरोप को अस्थिर कर सकते हैं। रूस और नाटो देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस परमाणु अभ्यास ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि यूक्रेन युद्ध जल्द नहीं रुका तो आने वाले समय में यूरोप में सैन्य टकराव का खतरा और गहरा सकता है।
कलयुगी मां की क्रूरता: बच्चों को बस में छोड़ा, जेब में लिखी चिट्ठी और प्रेमी संग हो गई फरार

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के बीड जिले से सामने आया यह मामला मानवता को झकझोर देने वाला है, जहां एक महिला अपने प्रेमी के साथ भागते समय अपने ही दो मासूम बच्चों को बस में लावारिस छोड़कर फरार हो गई। यह घटना समाज और परिवारिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जानकारी के अनुसार, महिला ने बच्चों को पंढरपुर से संभाजीनगर जा रही बस में अकेला छोड़ दिया। जाने से पहले उसने बेहद हैरान करने वाला कदम उठाते हुए दोनों बच्चों की जेब में एक चिट्ठी रख दी, जिसमें लिखा था कि उनके माता-पिता नहीं हैं और उन्हें यवतमाल पहुंचा दिया जाए। इस चिट्ठी में बच्चों के नाना का मोबाइल नंबर भी दर्ज था, ताकि किसी तरह संपर्क किया जा सके। बस में सफर के दौरान जब बच्चे अकेले रोते हुए दिखाई दिए, तो कंडक्टर को उन पर शक हुआ। जांच करने पर जब उसने उनकी जेब में पड़ी चिट्ठी पढ़ी, तो पूरा मामला सामने आ गया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने नंबर के आधार पर बच्चों के नाना से संपर्क किया और उन्हें बुलाया गया। हालांकि, स्थिति तब और चौंकाने वाली हो गई जब बच्चों के नाना ने भी मासूमों को अपनाने से इनकार कर दिया। बताया गया है कि उन्होंने बच्चों की देखभाल करने के बजाय अपनी बेटी द्वारा घर से ले जाई गई स्कूटी और नकदी के बारे में सवाल किए। इससे बच्चों का भविष्य और अधिक अनिश्चित हो गया। बाद में प्रशासन और पुलिस की मदद से दोनों मासूमों को सुरक्षित रूप से बाल कल्याण समिति की निगरानी में बीड के एक अनाथालय में भेज दिया गया, जहां उनकी देखभाल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करना अब प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। जब जन्म देने वाले माता-पिता और नजदीकी रिश्तेदार भी बच्चों को अपनाने से पीछे हट जाएं, तो समाज की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक तनाव और सामाजिक दबाव जैसे पहलुओं की भी गहन जांच जरूरी है। फिलहाल दोनों बच्चे सुरक्षित हैं, लेकिन उनका भविष्य अभी भी अनिश्चितता के घेरे में है। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि बच्चों की देखभाल केवल कानूनी नहीं बल्कि मानवीय जिम्मेदारी भी है, जिसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।