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अमेरिकी F-35 को हमने मार गिराया’, ईरान का बड़ा दावा; अमेरिका को दी नई चेतावनी

नई दिल्ली। Abbas Araghchi ने दावा किया है कि ईरान की सेना ने युद्ध के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक Lockheed Martin F-35 Lightning II लड़ाकू विमान को मार गिराया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाला ईरान दुनिया का पहला देश बन गया है। तेहरान में दिए गए बयान में अराघची ने अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष में कई सैन्य विमानों के नुकसान को स्वीकार किया है। ईरानी विदेश मंत्री ने इसे तेहरान के पुराने दावों की पुष्टि बताया और कहा कि युद्ध में ईरान की सैन्य क्षमता दुनिया के सामने आ चुकी है। अमेरिकी रिपोर्ट में क्या कहा गया?13 मई को प्रकाशित अमेरिकी कांग्रेस की संस्था Congressional Research Service (CRS) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका के करीब 42 सैन्य विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए। रिपोर्ट में कहा गया कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है क्योंकि कई जानकारियां अब भी गोपनीय हैं। रिपोर्ट में स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट और स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक आधिकारिक तौर पर F-35 गिराए जाने की पुष्टि नहीं की है। ईरान ने दी नई चेतावनीअराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि ईरान की सेना ने आधुनिक अमेरिकी तकनीक को चुनौती दी है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो दुनिया “और बड़े सरप्राइज” देखेगी। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में बढ़ा तनावरिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ “Operation Epic Fury” नाम से 40 दिनों तक संयुक्त हवाई अभियान चलाया था। यह अभियान 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ था। सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट अमेरिकी रक्षा विभाग, अमेरिकी सेंट्रल कमांड और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान अभियान पर अमेरिका का सैन्य खर्च बढ़कर 29 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि ईरानी सेना ने युद्ध के दौरान अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया। अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में भी ईरान संघर्ष में अमेरिकी सैन्य विमानों के नुकसान का जिक्र किया गया है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के दावों और अमेरिकी रिपोर्ट के बीच अब भी कई तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसके बावजूद इस बयान ने मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा दिया है।

TMC सांसद सायनी घोष ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े दावों को नकारा, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

नई दिल्ली । कोलकाता की राजनीति एक बार फिर संपत्ति विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में पहुंच गई है। इस बार चर्चा के केंद्र में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष हैं, जिन्होंने अपने ऊपर और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी से कथित तौर पर जुड़ी संपत्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार और फर्जी बताते हुए कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर गलत सूचनाएं फैलाकर राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद तब और गहरा गया जब कोलकाता नगर निगम द्वारा कुछ संपत्तियों की जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई। यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब राजनीतिक हलकों में पहले से ही विभिन्न आरोपों को लेकर तनाव बना हुआ है। आरोपों में यह दावा किया जा रहा था कि कुछ संपत्तियों का संबंध अभिषेक बनर्जी और उनके करीबी लोगों से हो सकता है। हालांकि, इन दावों को लेकर अब तक कोई ठोस आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। सायनी घोष ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की बातें न केवल गलत हैं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी तरह की अफवाह या झूठी खबर को फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कदम उठाया जाएगा। उनके अनुसार, यह प्रयास केवल उनकी और उनकी पार्टी की छवि को खराब करने के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में इन दावों का कोई आधार नहीं है। इस पूरे मामले में राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है क्योंकि विपक्षी दलों की ओर से पहले ही कई सवाल उठाए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री से जुड़े राजनीतिक विरोधियों ने इन संपत्ति मामलों को लेकर पारदर्शिता की मांग की है और जांच को आगे बढ़ाने की बात कही है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह सभी आरोप केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए फैलाए जा रहे हैं और इनका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना है। सायनी घोष ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हाल के दिनों में उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले ही उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने की घटना सामने आई थी और अब उनके खिलाफ झूठी खबरों का सहारा लेकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे एक सुनियोजित अभियान बताया, जिसका मकसद उनकी आवाज को दबाना है। इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर जांच और आरोपों की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ऐसे में यह मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित न रहकर राजनीतिक टकराव का एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। फिलहाल स्थिति यह है कि जांच की प्रक्रिया जारी है, लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक तौर पर ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।

ग्लैमरस करियर और अचानक मौत: ट्विशा शर्मा की जिंदगी के अनसुने पहलू

मध्य प्रदेश । भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस ने अब नया मोड़ ले लिया है। अब तक रिटायर्ड जज की बहू और वकील की पत्नी के रूप में पहचानी जाने वाली ट्विशा की जिंदगी का ग्लैमरस चेहरा सामने आया है। मॉडलिंग, फिल्मों और कॉर्पोरेट दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी ट्विशा शर्मा कभी फैशन और ग्लैमर इंडस्ट्री का चर्चित नाम थीं। लेकिन चमक-दमक से भरी जिंदगी का अंत जिस दर्दनाक तरीके से हुआ, उसने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है। ट्विशा शर्मा ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने के बाद कई नामी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए विज्ञापन शूट किए थे। उन्होंने तेलुगु शॉर्ट फिल्मों और फिल्मों में भी अभिनय किया। अपने आकर्षक व्यक्तित्व और कॉन्फिडेंस की वजह से उन्होंने “मिस पुणे” का खिताब भी हासिल किया था। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें उनका ग्लैमरस अंदाज दिखाई दे रहा है। हालांकि अभिनय के क्षेत्र में बड़ी सफलता नहीं मिलने के बाद ट्विशा ने पढ़ाई पर ध्यान दिया और एमबीए कर कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी शुरू की। इसी दौरान उनकी मुलाकात मेट्रिमोनियल साइट के जरिए भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और दिसंबर 2025 में शादी हो गई। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद रिश्ते में तनाव और विवाद की बातें सामने आने लगीं। ट्विशा की संदिग्ध मौत के बाद परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। घटना को आठ दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन परिजनों ने अब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है। परिवार दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा हुआ है। मामले में दहेज मृत्यु का केस दर्ज किया गया है। वहीं, पूर्व जिला जज और ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि पति समर्थ सिंह अब भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है और कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान भी समर्थ सिंह का व्यवहार हिंसक था। परिवार का कहना है कि उन्होंने शुरुआती शिकायतों को नजरअंदाज किया, जिसका आज उन्हें पछतावा है। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने भी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एफआईआर दर्ज कराने में देरी की गई और आरोपियों को बचाने की कोशिश हुई। वहीं ट्विशा की बहन नैना शर्मा ने वायरल सीसीटीवी फुटेज पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वीडियो अधूरा है और घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्से सामने नहीं लाए गए। इस बीच राज्यसभा सांसद Vivek Tankha ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी जरूरी है, क्योंकि परिवार का स्थानीय पुलिस पर भरोसा कमजोर हुआ है। उधर, पूर्व सैनिकों ने भी ट्विशा को न्याय दिलाने के समर्थन में भोपाल में बाइक रैली निकालकर प्रदर्शन किया। मामले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और फरार आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।

Alert: आपके फोन में आया WAR LOCKDOWN NOTICE एक क्लिक में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

नई दिल्ली। देशभर में लॉकडाउन को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया साइबर फ्रॉड तेजी से फैल रहा है। व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर “WAR LOCKDOWN NOTICE.pdf” और “Emergency Lockdown Order” जैसे नामों वाली फाइलें वायरल की जा रही हैं। साइबर एक्सपर्ट्स ने लोगों को चेतावनी दी है कि ऐसी किसी भी फाइल को डाउनलोड या ओपन करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। दरअसल, स्कैमर्स सरकारी आदेश जैसा दिखने वाला नकली PDF तैयार कर रहे हैं। इनमें सरकारी लोगो, आदेश की भाषा और फर्जी नोटिफिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है ताकि लोग इसे असली समझ लें। जैसे ही यूजर फाइल डाउनलोड करता है या उसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करता है, फोन में मैलवेयर या फिशिंग अटैक सक्रिय हो सकता है। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्कैम लोगों के डर और अफवाहों का फायदा उठाकर किया जा रहा है। हाल ही में वर्क फ्रॉम होम और ईंधन बचाने को लेकर हुई चर्चाओं के बाद सोशल मीडिया पर फर्जी लॉकडाउन संदेश तेजी से फैलाए जा रहे हैं। ऐसे चुराई जा रही आपकी जानकारीइन फर्जी PDF फाइलों के जरिए यूजर्स को नकली वेबसाइट्स पर भेजा जाता है, जहां उनसे बैंक डिटेल्स, ATM कार्ड नंबर, OTP और अन्य निजी जानकारी मांगी जाती है। कई मामलों में लोगों के बैंक खाते खाली होने, व्हाट्सएप अकाउंट हैक होने और निजी डेटा चोरी होने की शिकायतें सामने आई हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल ऑनलाइन फ्रॉड पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो चुके हैं। अब ठग सिर्फ SMS या कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों की भावनाओं और डर का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसा रहे हैं। PDF फाइल हमेशा सुरक्षित नहींविशेषज्ञों के अनुसार हर PDF सुरक्षित नहीं होती। कई फाइलों में हिडन लिंक, स्क्रिप्ट और खतरनाक मैलवेयर छिपे हो सकते हैं। यदि फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं है, तो खतरा और बढ़ जाता है। खुद को ऐसे रखें सुरक्षितकिसी भी अनजान PDF या लिंक को बिना जांचे डाउनलोड न करें। लॉकडाउन या सरकारी आदेश से जुड़ी जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट या विश्वसनीय मीडिया से ही सत्यापित करें। किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसका स्रोत जरूर जांचें। फोन और ऐप्स को हमेशा अपडेट रखें। किसी भी स्थिति में OTP, बैंक डिटेल्स या पासवर्ड साझा न करें। संदिग्ध मैसेज तुरंत डिलीट करें और आगे फॉरवर्ड न करें। साइबर एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे डर या अफवाह में आकर कोई भी फाइल ओपन न करें। एक छोटी सी लापरवाही आपकी निजी जानकारी और बैंक अकाउंट दोनों को खतरे में डाल सकती है।

चुनावी शोर थमा, पर कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम जारी, सीएम पद को लेकर फिर गरमाई सियासत

नई दिल्ली ।  कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सत्ता को लेकर अंदरूनी संघर्ष सामने आने लगा है। हाल ही में पांच राज्यों के चुनावी माहौल के शांत होने के बाद राज्य में सत्तारूढ़ Indian National Congress के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान फिर से चर्चा में आ गई है। मौजूदा मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar के बीच कथित सत्ता-साझेदारी के फॉर्मूले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, 2023 में सरकार गठन के समय दोनों नेताओं के बीच एक अनौपचारिक समझौते की बात सामने आई थी, जिसमें कथित तौर पर ढाई-ढाई साल के नेतृत्व की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। जैसे-जैसे सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण के करीब पहुंच रही है, वैसे-वैसे यह मुद्दा फिर से सियासी बहस का केंद्र बन गया है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हालिया बयानों को लेकर उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि वे पार्टी नेतृत्व के निर्णय का पालन करेंगे, लेकिन उनके बयान के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। शिवकुमार खेमे का मानना है कि समय आ गया है जब कथित समझौते पर आगे की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थक इस तरह के किसी भी बदलाव की संभावना को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनके अनुसार राज्य में नेतृत्व स्थिर है और सरकार अपना पूरा कार्यकाल सिद्धारमैया के नेतृत्व में ही पूरा करेगी। साथ ही, पार्टी के भीतर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों का समर्थन भी इस बहस को और जटिल बना रहा है। कर्नाटक की राजनीति में जातीय समीकरण भी इस विवाद को और गहरा बना रहे हैं। सिद्धारमैया का समर्थन मुख्य रूप से पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच मजबूत माना जाता है, जबकि डीके शिवकुमार को वोक्कालिगा समुदाय का प्रमुख चेहरा माना जाता है। इन सामाजिक आधारों के कारण यह मुद्दा केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी हिस्सा बन गया है। इसी बीच, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस विवाद का समाधान निकालेंगे। दिल्ली में जल्द ही एक महत्वपूर्ण बैठक की संभावना जताई जा रही है, जिसमें दोनों नेताओं के बीच समन्वय और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। वहीं विपक्षी दल इस स्थिति को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पार्टी जनता के मुद्दों की बजाय सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को आंतरिक मामला बताते हुए सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की कोशिश कर रहा है।

केमिस्टों की हड़ताल का असर: आज दवा दुकानों पर ताले, प्रशासन अलर्ट

मध्य प्रदेश । ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री के विरोध में देशभर के केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर आज झाबुआ जिले में मेडिकल स्टोर बंद रखे गए। इस बंद का असर झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित पूरे जिले में देखने को मिला। स्थानीय दवा विक्रेताओं ने इस विरोध को समर्थन देते हुए कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री बढ़ने से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। केमिस्टों का आरोप: नियमों का उल्लंघन कर हो रही ऑनलाइन बिक्रीशिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री में नियमों की अनदेखी हो रही है। बिना उचित निगरानी और सत्यापन के दवाइयों की होम डिलीवरी से न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। केमिस्टों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से गलत दवा उपयोग की संभावना बढ़ जाती है, जो जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है। मरीजों की परेशानी से बचने प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्थामेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने पहले से व्यवस्था की है। ड्रग इंस्पेक्टर के अनुसार, जिले में कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर आज खुले रखे गए हैं। इनमें जिला चिकित्सालय स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के साथ-साथ मेघनगर और थांदला के जन औषधि केंद्र शामिल हैं। निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर भी खुलेप्रशासन ने कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों को भी संचालन की अनुमति दी है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं आसानी से मिल सकें। इनमें झाबुआ, थांदला और पेटलावद क्षेत्र के कई मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल शामिल हैं। इन केंद्रों पर आम नागरिक अपनी आवश्यक दवाएं प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन की अपीलड्रग इंस्पेक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल निर्धारित मेडिकल स्टोरों से ही दवाएं खरीदें। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आवश्यक दवाओं की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

तबादला नीति में राहत: गंभीर बीमार कर्मचारियों को मिल सकती है छूट

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद तबादलों का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। नई नीति के तहत प्रदेश में 1 जून से 15 जून तक कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले किए जा सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट को मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा गया था, जिसे अंतिम मंजूरी मिलने के बाद लागू करने का निर्णय लिया गया। नई तबादला नीति में कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण राहतें दी गई हैं। सरकार ने साफ किया है कि पति-पत्नी की पोस्टिंग एक ही स्थान पर रखने के मामलों पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा। इसके अलावा गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को भी तबादलों में विशेष रियायत दी जाएगी। सरकार ने ऐसे मामलों को संवेदनशील मानते हुए उन्हें प्राथमिक श्रेणी में रखने का फैसला किया है। कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की ‘ए प्लस’ नोटशीट वाले तबादलों को 31 मई तक पूरा किया जाएगा। लंबित आवेदन भी इसी अवधि में निपटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी की पोस्टिंग और गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों को सामान्य तबादला नीति से अलग रखा गया है, ताकि इन मामलों में त्वरित निर्णय लिए जा सकें। नई नीति में प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादलों की सीमा अलग-अलग तय करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। अब तक दोनों को एक ही कोटे में शामिल किया जाता था, जिससे प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक फेरबदल करने में परेशानी होती थी। सरकार का मानना है कि अलग कोटा तय होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। तबादलों की सीमा को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं, वहां कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। 200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में 15 प्रतिशत, 1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में 10 प्रतिशत और 2000 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में पांच प्रतिशत तबादले किए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति हर वर्ष की तरह अलग रहेगी। वहीं जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अपनी अलग नीति जारी कर सकेंगे, लेकिन वे मूल ढांचे से अलग व्यवस्था नहीं बना पाएंगे। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की अनुशंसा से होंगे, जबकि प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी होगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी ट्रांसफर ऑर्डर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए जारी किए जाएंगे। हालांकि जिन विभागों में ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहां ऑफलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। अनुसूचित क्षेत्रों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने का निर्णय लिया गया है। साथ ही किसी जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही तबादले किए जाएंगे और वरिष्ठता का भी ध्यान रखा जाएगा। कर्मचारी संगठनों के नेताओं को नियुक्ति के बाद चार साल तक तबादलों से छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। वहीं गंभीर बीमारी से जूझ रहे और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को तबादले से राहत दी जाएगी। अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य संस्थानों में समायोजित करने की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। कैबिनेट बैठक में तबादला नीति के अलावा कई अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में वर्ष 2027 में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक का उल्लेख किया और कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का भी निरीक्षण करेंगे। बैठक में प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

राजधानी में ट्रैफिक क्रांति, 34,800 करोड़ का मास्टर प्लान करेगा दिल्ली-NCR की सड़कों को पूरी तरह बदलने का दावा

नई दिल्ली ।  दिल्ली में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सड़क ढांचे को पूरी तरह नया रूप देने की योजना बनाई गई है। इस 34,800 करोड़ रुपये की परियोजना का उद्देश्य दिल्ली-NCR को सिग्नल-फ्री और तेज रफ्तार यातायात व्यवस्था में बदलना है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के जाम से राहत मिल सके। इस योजना के तहत लगभग 186 किलोमीटर लंबी नई सड़कों, एक्सप्रेसवे, सुरंगों और एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए उन प्रमुख मार्गों को जोड़ा जाएगा जहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव रहता है, खासकर एयरपोर्ट, बाहरी रिंग रोड और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के आसपास। सरकार का लक्ष्य है कि भारी वाहनों को शहर के अंदर आने से रोका जाए और उन्हें वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जाए, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम हो सके। योजना के तहत कई महत्वपूर्ण रूट्स को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे द्वारका, रोहिणी, पंजाबी बाग, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा। इसके साथ ही एयरपोर्ट और प्रमुख व्यावसायिक इलाकों तक पहुंच को और तेज और आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है। इस मास्टर प्लान का उद्देश्य केवल नए मार्ग बनाना नहीं है, बल्कि पूरे ट्रैफिक सिस्टम को पुनर्गठित करना भी है। इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अंडरग्राउंड टनल प्रोजेक्ट भी है, जिसके तहत एयरपोर्ट के आसपास एक लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिससे वाहन बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल के सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। यह प्रोजेक्ट दिल्ली के व्यस्ततम इलाकों में यात्रा समय को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा। इसके अलावा दिल्ली और गुरुग्राम के बीच एक नया एलिवेटेड कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिससे आईएमएस, हौज खास और महिपालपुर जैसे क्षेत्रों से होते हुए तेज और निर्बाध यात्रा संभव हो सकेगी। इस कॉरिडोर का उद्देश्य मौजूदा हाईवे पर दबाव को कम करना और यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई प्रमुख सड़क परियोजनाएं राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों को सौंप दी गई हैं ताकि उनका तेजी से विकास हो सके। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली और एनसीआर के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

अंधविश्वास बना मौत की वजह: अशोकनगर में 13 साल की बच्ची की दर्दनाक मौत

मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिले के मोला डेम गांव में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में एक 13 वर्षीय किशोरी की जान चली गई। बुधवार तड़के सांप के काटने के बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन उसे देव स्थान पर झाड़-फूंक कराने ले गए। इलाज में हुई देरी आखिरकार मासूम के लिए जानलेवा साबित हुई और जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। मृतक किशोरी की पहचान लक्ष्मी आदिवासी के रूप में हुई है। घटना बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे की बताई जा रही है। लक्ष्मी अपने माता-पिता के साथ घर में जमीन पर सो रही थी। इसी दौरान अचानक एक जहरीले सांप ने उसके पैर में काट लिया। तेज दर्द महसूस होते ही किशोरी जोर-जोर से चीखने लगी। बेटी की आवाज सुनकर माता-पिता घबराकर उठे तो वहां सांप दिखाई दिया। घटना के बाद परिवार और आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने परिजनों को तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह देने के बजाय बच्ची को स्थानीय देव स्थान ले जाने की बात कही। इसके बाद परिवार लक्ष्मी को अस्पताल पहुंचाने के बजाय झाड़-फूंक कराने ले गया। वहां काफी देर तक कथित उपचार चलता रहा। ग्रामीण मान्यताओं और अंधविश्वास के कारण समय लगातार बीतता गया, जबकि किशोरी की हालत बिगड़ती चली गई। जब काफी देर बाद भी बच्ची की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और उसकी हालत गंभीर होने लगी, तब परिजनों को अस्पताल ले जाने की जरूरत महसूस हुई। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने तक किशोरी की सांसें लगभग थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अस्पताल प्रबंधन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव का पोस्टमार्टम कराया और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया। यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और जागरूकता की कमी को उजागर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सांप काटने की स्थिति में मरीज को बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए, क्योंकि शुरुआती इलाज और एंटी-वेनम इंजेक्शन ही जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका होता है। लेकिन कई ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग झाड़-फूंक और टोने-टोटके पर भरोसा कर इलाज में देरी कर देते हैं, जिसका परिणाम कई बार जानलेवा साबित होता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की बेहद जरूरत है, ताकि लोग अंधविश्वास छोड़कर समय पर चिकित्सा सुविधा का सहारा लें और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध

मध्य प्रदेश । अशोकनगर में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर मेडिकल दुकानों का एक दिवसीय बंद देखने को मिला। जिलेभर के दवा व्यापारियों ने ई-फार्मेसी और बड़े कॉरपोरेट्स की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं। शहर की लगभग 180 और जिले की कुल 297 मेडिकल दुकानों ने इस बंद में भाग लिया, जिससे दिनभर बाजार में मेडिकल स्टोरों के शटर बंद नजर आए। दोपहर के समय बड़ी संख्या में केमिस्ट और दवा व्यापारी एकत्रित हुए और शहर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़ी अधिसूचनाएं वापस लेने और ई-फार्मेसी पर सख्त नियंत्रण लगाने की मांग की गई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि जिला संगठन मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन और राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स से संबद्ध है, जो देशभर के करीब 12.40 लाख केमिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और बड़े कॉरपोरेट्स भारी छूट और प्रिडेटोरी प्राइसिंग के जरिए छोटे और मध्यम मेडिकल संचालकों के व्यापार को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। दवा व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर पर्चे के दवाइयों की बिक्री हो रही है। एंटीबायोटिक्स, नशीली और आदत बनाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। साथ ही नकली प्रिस्क्रिप्शन और दवाओं के गलत भंडारण जैसी समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ सकती है। ज्ञापन में विशेष रूप से केंद्र सरकार की 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और 26 मार्च 2020 की अधिसूचना GSR 220(E) को वापस लेने की मांग उठाई गई। व्यापारियों का कहना है कि कोविड काल में लागू की गई इन व्यवस्थाओं का अब गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक मेडिकल व्यापार प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने कहा कि वे सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि जनस्वास्थ्य सुरक्षित रहे और छोटे व्यापारियों का अस्तित्व बचाया जा सके। पूरे दिन चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा और कई लोगों को मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। अशोकनगर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 297 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा और ई-फार्मेसी पर रोक लगाने की मांग की। व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर खतरे की बात कही।