सुबह 10 बजे से ही जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों से कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे थे। प्रदर्शन में नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ आशा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और उषा कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लगातार अस्पतालों और गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों ने बताया कि तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है। बैंक की किस्तें रुक गई हैं और घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप था कि विभागीय प्रक्रियाओं और फाइलों में उलझे भुगतान का खामियाजा उन्हें और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
सुरेश पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जिलेभर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए सोमवार तक समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन साहू, सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आरबीएसके डॉक्टर, सीएचओ, बीसीएम, बीपीएम, आउटसोर्स कर्मचारी, आशा और उषा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
स्वास्थ्य कर्मचारियों की चेतावनी के बाद अब जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय पर वेतन भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।