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दिल्ली में अब बैग उठाने की टेंशन खत्म… दो मम्म‍ियों ने बाजारों में उतारा कैरीमेन

नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) के सरोजनी नगर, लाजपत नगर या चांदनी चौक के मुहाने पर खड़े होकर गौर से देखें तो एक बड़ा ही दिलचस्प नजारा दिखता है. एक तरफ वो पति, दोस्त या बॉयफ्रेंड्स हैं, जो शॉपिंग बैग्स (Shopping bags) के बोझ तले दबे, रीढ़ की हड्डी को 45 डिग्री पर झुकाए, चेहरे पर ‘मुझे घर जाना है’ वाले भाव लिए घूम रहे हैं. और दूसरी तरफ… एक नई नस्ल का उदय हुआ है- नाम है ‘कैरीमैन (Carryman)’. जो न फुल टाइम सैलरी (Full time salary) पर जॉब कर रहे हैं, बल्क‍ि हैप्पी कस्टमर वाली संतुष्ट‍ि भी बटोर रहे। शॉपिंग का ये वो गंभीर मोड़ है जहां अमूमन एक लंबा पारिवारिक झगड़ा शुरू होता है, लेकिन दो मम्म‍ियों के एक अनोखे बिजनेस आइडिया ने इस ‘वेटलिफ्टिंग’ को एक बेहद दिलचस्प स्टार्टअप में बदल दिया है. सोशल मीडिया पर इस सर्विस की तस्वीरें और रील्स इस कदर वायरल हो रही हैं कि लोग इसकी क्रिएटिविटी को सलाम कर रहे हैं। जब दो सहेलियों के ‘मॉम गिल्ट’ से निकला लाख टके का आइडियाइस अनोखे स्टार्टअप की कहानी किसी कॉरपोरेट रूम में नहीं, बल्कि बच्चों के प्रैम और भारी शॉपिंग बैग्स से जूझते हुए लाजपत नगर की सड़कों पर लिखी गई. इस स्टार्टअप की को-फाउंडर रितु कंदारी श्रीवास्तव और कनिष्का मल्होत्रा ने बताया कि वे दोनों छोटे बच्चों की मां हैं. पिछले साल जब वे लाजपत नगर बाजार गईं, तो बच्चों के प्रैम को संभालना और साथ में भारी-भरकम शॉपिंग बैग्स को ढोना उनके लिए एक दुःस्वप्न जैसा हो गया था। उन्होंने वहां एक बुजुर्ग महिला को भी सामान से हांफते देखा. रितु के मुताबिक तभी हमारे मन में आया कि काश कोई ऐसी सर्विस होती जहां हम कुछ पैसे देकर मदद ले पाते, ताकि हमें शॉपिंग पर जाने के लिए अपने घरवालों के आगे हाथ न फैलाना पड़े. बस इसी जरूरत ने ‘कैरीमैन’ को जन्म दे दिया. उन्होंने नगर निगम और पुलिस से बकायदा इजाजत ली, युवाओं को ट्रेनिंग दी और लाजपत नगर में अपना पहला कियोस्क खोल दिया। ‘पत्नियों का अरमान और पतियों का सहारा’: सोशल मीडिया पर हो रही तारीफये स्टार्ट अप शुरू होने के साथ ही इंटरनेट पर ये सर्विस इस कदर छा गई है कि दिल्ली के मिजाज को समझने वाले यूजर्स इस पर मजेदार पोस्ट और अनुभव लिख रहे हैं.यूजर दीपाली पोरवाल ने लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट का एक मजेदार आंखों देखा हाल बयां करते हुए अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि दृश्य यह था कि कविता जी आगे-आगे चल रही थीं, उनकी नजरें कुर्तियों के डिस्काउंट बोर्ड पर थीं. उनके ठीक 3 कदम पीछे उनके पति शर्मा जी चल रहे थे, जिनके दोनों हाथों में पहले से ही 6 बैग्स थे। शर्मा जी के मुंह से कराह निकली- ‘कविता, अब और नहीं! यह शॉपिंग है या वेटलिफ्टिंग?’ तभी नीली टी-शर्ट पहने ‘कैरीमैन’ राहुल की एंट्री होती है. शर्मा जी ने राहुल को ऐसे देखा जैसे कोई डूबता हुआ इंसान लाइफ-जैकेट को देखता है. 149 रुपये में शर्मा जी को जो सुख मिला, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी लग्जरी स्पा से नहीं की जा सकती. अब शर्मा जी आजाद थे, गोलगप्पे खा रहे थे और पत्नी से कह रहे थे-‘अरे सुनो, वो कोने वाली दुकान पर भी अच्छा कलेक्शन है, वहां भी देख लो!’ वहीं, नीतू मिश्रा नाम की यूजर ने इस सर्विस को दुनियाभर के पतियों के लिए ‘मुक्ति का मार्ग’ बताते हुए पोस्ट किया, ‘भाई! दुनियाभर के पतियों और बॉयफ्रेंड्स के लिए खुशखबरी है. अब शॉपिंग में बीवी या गर्लफ्रेंड के शॉपिंग बैग नहीं उठाने पड़ेंगे. आप चाहें तो उन्हें अपना क्रेडिट, डेबिट कार्ड देकर अकेले भी शॉपिंग पर भेज सकते हैं! मैंने सर्च किया तो पाया कि यह सिर्फ ₹149 प्रति घंटा में आपका 12 किलो तक का भारी बैग उठाएगा, लंबी लाइनों में आपकी जगह खड़ा रहेगा और फूड स्टॉल से खाना भी लाएगा. थक जाएं तो आपके लिए फोल्डिंग चेयर और धूप से बचाने के लिए छाता भी लगाएगा। वहीं यूजर आशीष प्रमोद गोस्वामी और सीमा त्यागी ने भी इसके किरायों की लिस्ट साझा करते हुए बताया कि कैसे यह सेवा 2 घंटे के लिए 219 रुपये और 3 घंटे के लिए 319 रुपये में उपलब्ध है, जो ग्राहकों को दुकानों में बैठने की जगह ढूंढने और सामान को मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाने में भी मदद करती है. यूजर कल्पना प्रसाद लिखती हैं कि अब दिल्ली की शॉपिंग होगी बिल्कुल टेंशन-फ्री! न पति को परेशान करना पड़ेगा, न हाउस हेल्प का इंतजार.यह सिर्फ सामान उठाना नहीं, कैरीमेन एक सम्मानजनक व्यवस्था है। कैरीमेन ने रखा अपना पक्ष इस पूरे शोर और लोकप्रियता के बीच खुद ‘कैरीमैन’ ने भी सोशल मीडिया पर अपना विजन साफ करते हुए लिखा है कि कैरीमैन सिर्फ शॉपिंग में मदद करने वाली सर्विस नहीं है. हमारा मानना है कि भारतीय बाजारों में शॉपिंग आरामदायक होनी चाहिए, भीड़भाड़ वाले इलाकों में परिवार खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें और हर काम को एक सम्मान और एक स्ट्रक्चर मिलना चाहिए. हम सिर्फ एक सर्विस नहीं, एक पूरा सिस्टम बना रहे हैं. फुल टाइम पर कर रहे काम एक रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई कि कैरीमेन स्टार्टअप में इन युवाओं को प्रॉपर फुल-टाइम सैलरी पर रखा गया है, वे कोई दिहाड़ी या ‘गिग वर्कर्स’ नहीं हैं. 18 साल के एक ‘कैरीमैन’ आनंद कुमार ने बताया कि पहले वे साड़ी की दुकान में हेल्पर थे, लेकिन यहां उन्हें बेहतर पैसे के साथ-साथ ग्राहकों से पूरा ‘सम्मान’ और भरोसा मिलता है। वैसे देखा जाए तो ये स्टार्टअप केवल दो सहेलियों की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि भारतीय बाजारों की बुनियादी कमियों जैसे टूटे फुटपाथ, बेतरतीब भीड़ और पार्किंग की किल्लत के बीच से भी कैसे ‘जुगाड़’ और ‘इनोवेशन’ का एक नया रास्ता निकाला जा सकता है।

भारत सहित 54 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका…. USTR ने रखा प्रस्ताव

नई दिल्ली। भारत और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल (India and US Delegation) द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade talks) को अंतिम रूप देने की कोशिशों में जुटा है। इसी बीच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (US Trade Representative- USTR) ने बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लागू न करने के आरोप में भारत सहित 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उन जांच के बाद सामने आया है, जो अमेरिका ने 60 देशों के खिलाफ इस आधार पर शुरू की थीं कि वे बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रहे हैं। इस प्रस्ताव की टाइमिंग काफी अहम है क्योंकि इस वक्त नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच व्यापार सौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस लिहाज से इसे एक झटका माना जा रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTS) जैमीसन ग्रीर ने एक बयान में कहा, ”हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफल रहना अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।” उन्होंने कहा, ”हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसका उल्लंघन करने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे” यह प्रस्ताव 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत की गई 60 जांचों में से एक के बाद आया है। क्या है USTR की धारा 301?USTR (यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) की धारा 301 अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 का एक प्रमुख प्रावधान है। यह अमेरिका को व्यापारिक साझेदार देशों की अनुचित व्यापार नीतियों या वबां प्रचलित परंपराओं की जांच करने और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए आयात शुल्क या व्यापार प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वे उपाय अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, या क्या वे US के व्यापार और वाणिज्यिक हितों पर कोई बेवजह बोझ तो नहीं डालते हैं। सुधारात्मक कार्रवाई करने की अनुमतिअगर जाँच में यह पाया जाता है कि किसी देश ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए ऐसे तौर-तरीके अपनाए हैं, जिन्हें अमेरिकी व्यापार के लिए हानिकारक मानता है, तो धारा-301 के प्रावधान US प्रशासन को उस मामले में सुधारात्मक कार्रवाई करने की अनुमति देता है। इन उपायों में ऊँचे टैरिफ लगाना, व्यापार पर प्रतिबंध लगाना या अन्य ऐसे उपाय शामिल हो सकते हैं जिनका उद्देश्य जाँच के दौरान सामने आई चिंताओं को दूर करना होता है। बंधुआ मजदूरी वाले आरोप पर भारत का क्या जवाब?भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांचों को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ”भारत धारा-301 कार्यवाही के मामले में अमेरिका के साथ संपर्क में है। साथ ही भारत दो फरवरी 2026 को घोषित समझौते के ढांचे और सात फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप अमेरिका के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी बातचीत कर रहा है।” सार्वजनिक सुनवाई सात जुलाई 2026 कोइसमें कहा गया कि धारा-232 (क्षेत्रीय) शुल्क के तहत आने वाले उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं को इन प्रस्तावित शुल्कों से बाहर रखा गया है। कपड़ा एवं परिधान उत्पादों के लिए एक विशेष प्रणाली प्रस्तावित की गई है, जिसके तहत चयनित देशों से एक निश्चित मात्रा में आयात को अमेरिका में कम शुल्क दरों पर प्रवेश की अनुमति मिल सकती है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ”रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क अभी अंतिम नहीं हैं और हितधारक 22 जून 2026 तक सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। लिखित टिप्पणियां छह जुलाई 2026 तक प्रस्तुत की जा सकती हैं।” सार्वजनिक सुनवाई सात जुलाई 2026 को होगी। उधऱ, ग्रीर ने कहा कि कुछ व्यापारिक साझेदारों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं। इनमें अमेरिका, मेक्सिको-कनाडा के बीच समझौते (यूएसएमसीए) और पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत जतायी गयी प्रतिबद्धताएं शामिल हैं।हालांकि, उन्होंने कहा कि ”प्रत्येक व्यापारिक साझेदार को यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे कि वैश्विक व्यापार बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा न दे और उसे स्थायी न बनाए।” अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने एक बयान में कहा कि भारत, चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब सहित 54 देशों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई है।

US: ट्रंप को बड़ा झटका…. संसद में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव मंजूर

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान (America and Iran) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अपनी ही संसद (Parliament) में बड़े झटके का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी संसद (American Parliament) के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद बिना संसद (कांग्रेस) की अनुमति के ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के युद्ध पर रोक लगाना था. इस दौरान वोटिंग से साफ हो गया है कि ईरान के साथ युद्ध की आशंका को लेकर अमेरिकी सांसदों में चिंता काफी बढ़ गई है. खास बात ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने भी ईरान जंग पर पाला बदल लिया। 7 वोटों से पास हुआ प्रस्तावसदन में ‘वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन’ पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला. प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 208 सांसदों ने मतदान किया. हालांकि दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास मामूली बहुमत है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप इस प्रस्ताव को रोकने में नाकाम रहे. इस वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने अपनी ही पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स के पक्ष में वोट डाला. कांग्रेस में ट्रंप के लिए ये किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब ट्रंप के पास क्या विकल्प?संसद के जानकारों का कहना है कि ये वोटिंग फिलहाल काफी हद तक प्रतीकात्मक है. इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी इसे अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन ‘सीनेट’ से भी पास कराना होगा. इसके बाद, अगर ट्रंप इस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो उस वीटो को बेअसर करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो कि बहुत मुश्किल है। हालांकि, ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि संसद में युद्ध के अधिकारों को सीमित करने वाले तीन प्रस्ताव पेश किए गए थे. लेकिन वो बेहद कम अंतर से नाकाम हो गए थे. इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भी एक प्रक्रियात्मक वोटिंग के दौरान इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था. सीनेट में भी ये सात बार की नाकाम कोशिशों के बाद कामयाब हुई थी।

पेट्रोल-डीजल कीमतों पर नजर: वैश्विक गिरावट के बावजूद भारत में क्यों नहीं घट रहे रेट?

नई दिल्ली । दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत देखने को मिल रही है। जून 2026 की शुरुआत के साथ पाकिस्तान, चीन, नेपाल और म्यांमार जैसे भारत के पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों में कमी दर्ज की गई है। हालांकि भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं और निकट भविष्य में बड़ी राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइस के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आने के बाद वैश्विक स्तर पर पेट्रोल की औसत कीमत में गिरावट दर्ज हुई है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 108.71 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। पड़ोसी देशों की बात करें तो पाकिस्तान में पेट्रोल की औसत कीमत में उल्लेखनीय गिरावट आई है और यह 130 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई है। चीन में भी पेट्रोल के दाम में मामूली कमी दर्ज की गई है। वहीं नेपाल और म्यांमार में भी ईंधन सस्ता हुआ है। इसके विपरीत बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। डीजल के मोर्चे पर भी कुछ देशों में राहत मिली है। पाकिस्तान, नेपाल और चीन में डीजल की कीमतें घटी हैं, जबकि श्रीलंका, भूटान और म्यांमार में इसके दाम बढ़े हैं। भारत में कीमतें कम क्यों नहीं हो रहीं, इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सरकार ने करों में राहत देकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ को सीमित रखने की कोशिश की थी। बाद में कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी भी की गई। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते दबाव और लागत को देखते हुए निकट भविष्य में कीमतों में कटौती की संभावना सीमित है। कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिया गया है कि यदि कंपनियों के घाटे बढ़ते हैं तो कीमतों में और वृद्धि की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, यदि वैश्विक स्तर पर तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे आती हैं, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत का रास्ता खुल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल का भाव 70 से 80 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में स्थिर होने पर उपभोक्ताओं को फायदा मिलने की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं को ईंधन कीमतों में तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

MP: मऊगंज में छात्रा ने फांसी लगाकर दी फांसी… NEET परीक्षा रद्द होने से डिप्रेशन में थी…

मऊगंज। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के नवगठित जिले मऊगंज (Mauganj District ) मगनिया गांव (Maganiya Village) की रहने वाली एक छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने घर में लगें पंखे पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली परिजनों का आरोप है बेटी NEET की तैयारी कर रही थी. उसे हाल में दी परीक्षा में 650 अंक भी आने की उम्मीद थी लेकिन पेपर लीक होने और रद्द के बाद से वह डिप्रेशन में थी और उसने इस तरह का कदम उठा लिया जिसके बाद पूरा परिवार सदमे में हैं। कुक की नौकरी की, पिता ने लोन लेकर कराई तैयारीआकांक्षा के घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने के बाद भी आकांशा के किसान क्रेडिट कार्ड से 3 लाख रुपए लोन लिए थे. परिवार वाले उसे नागपुर के एक निजी कोचिंग में तैयारी करा रहे थे। पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी किसानी करते थे लेकिन बेटी को पढ़ाने के लिए नागपुर में कुक की नौकरी करने लगे थे और वहीं बेटी को पढ़ा रहे थे. नीट का पेपर भी जब हुआ तो पूरे परिवार को भरोसा था कि इस बार चयन हो जाएगा और उनकी बेटी डाक्टर बन जाएगी लेकिन पेपर लीक होने के बाद वह ड्रिपेशन में चली गई और पूरे परिवार खुशियां चली गईं। ‘सॉरी, मम्मी पापा.. अब हिम्मत नहीं है’मौके पर एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें उसने लिखा था कि सॉरी, मम्मी पापा आपको भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डाक्टर बनेगी पर दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है. मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया दोबारा पेपर अच्छा जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। नीट पेपर लीक मामलाNEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है. 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद पेपर लीक की आशंका सामने आई थी. NTA के मुताबिक 7 मई की शाम परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिली, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई. 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया. इसके बाद 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने 21 मई को री-एग्जाम आयोजित करने की घोषणा की. पूरे मामले की जांच CBI कर रही है और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट में लगातार नई याचिकाएं दायर की जा रही हैं और परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव, जैसे पेन-पेपर मोड के स्थान पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने की मांग उठ रही है. वहीं दूसरी ओर, लीक मामले से जुड़े नेटवर्क के सदस्यों पर जांच एजेंसियां और कानून लगातार शिकंजा कस रहे हैं तथा उनके खिलाफ कार्रवाई तेज होती जा रही है।

Deputy Collector Arrested: रेप केस में डिप्टी कलेक्टर गिरफ्तार, शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप

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HIGHLIGHTS: डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर रेप केस में गिरफ्तार युवती ने शादी का झांसा देकर शोषण का लगाया आरोप कार, सरकारी आवास और फ्लैट में संबंध बनाने का दावा शिकायत के बाद पुलिस ने दर्ज किया मामला आरोपी बोले- अभी मैं आरोपी साबित नहीं हुआ हूं   Deputy Collector Arrested: मध्यप्रदेश। मुरैना में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार एक युवती ने उन पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। बता दें कि पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। आखिरी मैसेज, CCTV और 3 घंटे की मौजूदगी… ख्याति की मौत ने खड़े किए कई सवाल फेसबुक पर हुई थी दोनों की पहचान पीड़िता का कहना है कि उसकी और अरविंद माहौर की पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फिर माहौर ने शादी का प्रस्ताव रखा। युवती का आरोप है कि इसी भरोसे के आधार पर वह उनके करीब आई। बाद में उसे कई जगह ले जाकर संबंध बनाए गए। युवती का दावा है कि यह सब शादी के वादे के भरोसे पर हुआ। T20 कप्तानी पर बड़ा संकट: सूर्यकुमार यादव पर खतरा, श्रेयस अय्यर रेस में सबसे आगे एक साल तक चलता रहा संबंध शिकायत में युवती ने कहा है कि मार्च 2025 से जून 2026 तक दोनों के बीच संपर्क रहा। लेकिन जब उसने शादी की बात की तो माहौर पीछे हट गया और शादी से इंकार करने लगा। युवती का कहना है कि विरोध करने पर उसे और उसके परिवार को धमकियां भी दी गईं। इसके बाद उसने पुलिस का दरवाजा खटखटाया और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई। T20 कप्तानी पर बड़ा संकट: सूर्यकुमार यादव पर खतरा, श्रेयस अय्यर रेस में सबसे आगे आरोपी ने आरोपों को बताया गलत पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर डिप्टी कलेक्टर को गिरफ्तार कर लिया है। मेडिकल जांच के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं, अरविंद माहौर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सिर्फ एफआईआर दर्ज हुई है, अभी वे दोषी साबित नहीं हुए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।  

आखिरी मैसेज, CCTV और 3 घंटे की मौजूदगी… ख्याति की मौत ने खड़े किए कई सवाल

नई दिल्ली । भोपाल में 18 वर्षीय छात्रा ख्याति जैन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही ख्याति 11 मई 2026 को अपने घर में मृत पाई गई थी। घटना के 24 दिन बाद भी मामला चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है। ख्याति की मां वर्षा जैन का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत सामान्य आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश हो सकती है। उन्होंने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अब तक गंभीरता से जांच नहीं की गई है। मां के अनुसार घटना वाले दिन वह एक स्कूल में इंटरव्यू देने के लिए घर से बाहर गई थीं। इसी दौरान उनकी बेटी के बॉयफ्रेंड तनीष चंद्रवंशी का घर आना-जाना हुआ। परिवार का दावा है कि तनीष करीब तीन घंटे तक घर में मौजूद रहा था। CCTV फुटेज में उसके घर में प्रवेश करने की बात भी सामने आई है। इतना ही नहीं, ख्याति की मौत की सूचना सबसे पहले तनीष ने ही पुलिस और परिवार को दी थी। मामले को और रहस्यमय बनाता है वह आखिरी इंस्टाग्राम मैसेज, जो ख्याति के अकाउंट से उसके बॉयफ्रेंड को भेजा गया था। इस संदेश में पारिवारिक तनाव, मानसिक परेशानी और जीवन समाप्त करने जैसी बातें लिखी गई थीं। हालांकि मां का कहना है कि यह भाषा उनकी बेटी की सामान्य लेखन शैली से मेल नहीं खाती। उनका आरोप है कि तनीष के पास ख्याति के इंस्टाग्राम अकाउंट का एक्सेस था और संभव है कि संदेश किसी और ने भेजा हो। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने सवालों को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार ख्याति ने मौत से लगभग 24 घंटे पहले तक भोजन नहीं किया था। उसकी बाईं कलाई पर कट के दो निशान भी पाए गए। हालांकि मौत के वास्तविक कारण को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है और विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। ख्याति मूल रूप से औबेदुल्लागंज की रहने वाली थी और पिछले दो वर्षों से भोपाल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान उसकी दोस्ती और फिर प्रेम संबंध तनीष चंद्रवंशी से हुआ था। परिवार का कहना है कि वे इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थे और इसी वजह से दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी रहती थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच आत्महत्या के एंगल से कर रही है, जबकि परिजन हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं। मामले की सच्चाई जांच पूरी होने और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

परदे पर परफेक्ट शॉट के लिए जब पिता ने भुला दिया रिश्ता: 'गदर' के क्लाइमेक्स में अनिल शर्मा ने दांव पर लगा दी थी बेटे उत्कर्ष की जान

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनके दृश्य दर्शकों के जहन में हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं, लेकिन उन दृश्यों को परदे पर जीवंत करने के लिए पर्दे के पीछे जो खतरे उठाए जाते हैं, वे अक्सर हैरान करने वाले होते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और खौफनाक किस्सा साल २००१ में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ के सेट से सामने आया है। फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा ने खुद इस बात का खुलासा किया है कि फिल्म के एक मुख्य और बेहद खतरनाक स्टंट सीन को फिल्माते समय उन्होंने निर्देशक के दायित्व को पूरा करने के लिए अपने ही सगे बेटे उत्कर्ष शर्मा की जान को दांव पर लगा दिया था। उत्कर्ष ने इस फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल के बेटे ‘चरणजीत’ की भूमिका निभाई थी। यह पूरा घटनाक्रम फिल्म के उस मशहूर क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग के दौरान का है, जिसमें मुख्य किरदार तारा सिंह अपने परिवार की रक्षा करते हुए पाकिस्तान से भारत की सीमा की तरफ भाग रहा होता है। इस पूरे दृश्य को किसी स्टूडियो में नहीं, बल्कि वास्तव में एक चलती हुई ट्रेन के ऊपर फिल्माया जा रहा था। सीन की मांग यह थी कि जब ट्रेन लगभग ४० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हो, तब अभिनेता सनी देओल अपने पांच वर्षीय बाल कलाकार बेटे उत्कर्ष शर्मा को अपने मजबूत कंधों पर बैठाकर ट्रेन की एक बोगी से दूसरी बोगी पर छलांग लगाएंगे। एक पिता होने के नाते अनिल शर्मा के लिए यह निर्णय बेहद आत्मघाती और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला था, परंतु फिल्म को वास्तविक और प्रभावशाली बनाने के चक्कर में उन्होंने यह बड़ा जोखिम मोल ले लिया। शूटिंग के उन खौफनाक पलों को याद करते हुए अनिल शर्मा ने बताया कि जब यह शॉट चल रहा था, तब उनके भीतर का पिता इतना डर गया था कि उन्होंने डर के मारे अपनी आंखें पूरी तरह बंद कर ली थीं। उनके दिमाग में लगातार अनहोनी की आशंकाएं तैर रही थीं और वह सिर्फ भगवान से अपने बच्चे की सलामती की प्रार्थना कर रहे थे। जब तक ट्रेन के रुकने की आवाज उनके कानों में नहीं पड़ती थी, वह अपनी आंखें खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। निर्देशक ने इसे अपने पूरे फिल्मी सफर का सबसे मुश्किल और तनावपूर्ण शॉट करार दिया। उन्होंने आत्मग्लानि भरे स्वर में कहा कि आज भी जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो खुद से यही सवाल पूछते हैं कि यदि उस वक्त कोई छोटी सी चूक हो जाती या संतुलन बिगड़ जाता, तो क्या होता। उन्होंने माना कि सब कुछ सनी देओल के भरोसे छोड़कर उन्होंने बहुत बड़ा जुआ खेला था। इस जानलेवा रिस्क और कलाकारों की कड़ी मेहनत का नतीजा यह हुआ कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। मात्र १८ करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी ‘गदर’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ७७ करोड़ रुपये और वैश्विक स्तर पर १३३ करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कमाई की थी। इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके ५.६ करोड़ से अधिक टिकट बिके थे, जो भारतीय सिनेमा में एक रिकॉर्ड है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने के लिए ट्रकों में भरकर लोग आए थे। इसी ऐतिहासिक सफलता को दोहराने के लिए २२ साल बाद साल २०२३ में अनिल शर्मा इसका सीक्वल ‘गदर २’ लेकर आए, जिसमें अब बड़े हो चुके उत्कर्ष शर्मा मुख्य भूमिका में नजर आए और इस सीक्वल ने भी दुनिया भर में ६९१ करोड़ रुपये कमाकर इतिहास रच दिया, लेकिन इस सफलता की नींव में पिता का वो खौफनाक समझौता हमेशा छिपा रहेगा।

लोन लेने से पहले EMI के ये नियम जरूर जान लें: छोटी गलती बढ़ा सकती है बड़ा आर्थिक बोझ

नई दिल्ली। आज के समय में घर, कार, शिक्षा और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग तेजी से बैंक लोन का सहारा ले रहे हैं। आसान प्रोसेस और डिजिटल बैंकिंग के चलते लोन लेना पहले की तुलना में सरल जरूर हो गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि EMI से जुड़े नियमों की अनदेखी भविष्य में गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकती है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, लोन लेने से पहले अपनी मासिक आय, खर्च और EMI क्षमता का सही आकलन करना बेहद जरूरी है। गलत योजना से न केवल बजट बिगड़ सकता है, बल्कि लंबे समय तक आर्थिक दबाव भी बना रह सकता है। EMI आय का 35-40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिएविशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी व्यक्ति की कुल EMI उसकी मासिक आय के 35 से 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि EMI इससे ज्यादा हो जाती है, तो रोजमर्रा के खर्च, बचत और आपातकालीन जरूरतों पर सीधा असर पड़ता है। बैंकों द्वारा भी लोन मंजूरी से पहले आवेदक की आय, मौजूदा कर्ज और खर्च का विस्तृत आकलन किया जाता है ताकि डिफॉल्ट का जोखिम कम किया जा सके। ब्याज दर का सही चुनाव बेहद जरूरीलोन लेते समय सबसे महत्वपूर्ण पहलू ब्याज दर होता है। ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि फ्लोटिंग और फिक्स्ड ब्याज दर में बड़ा अंतर होता है। फ्लोटिंग रेट में बाजार की स्थिति के अनुसार EMI बढ़ या घट सकती है, जिससे भविष्य में भुगतान अनिश्चित हो सकता है। वहीं फिक्स्ड रेट में EMI पूरी अवधि के लिए स्थिर रहती है, जिससे बजट प्लानिंग आसान हो जाती है। लोन अवधि का सीधा असर EMI परलोन की अवधि भी EMI को सीधे प्रभावित करती है। लंबी अवधि चुनने पर EMI कम हो जाती है, जिससे मासिक दबाव कम महसूस होता है, लेकिन कुल मिलाकर ब्याज अधिक देना पड़ता है। वहीं कम अवधि के लोन में EMI ज्यादा होती है, लेकिन कुल ब्याज कम चुकाना पड़ता है। ऐसे में वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोन अवधि का चुनाव अपनी आय और खर्च के संतुलन को ध्यान में रखकर करना चाहिए। क्रेडिट स्कोर और अतिरिक्त चार्ज पर ध्यान जरूरीलोन लेने से पहले क्रेडिट स्कोर की जांच करना भी जरूरी है, क्योंकि अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और अन्य छिपे हुए शुल्कों की जानकारी भी पहले से लेना जरूरी है, ताकि बाद में कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। सही योजना से ही बनती है वित्तीय स्थिरताविशेषज्ञों का कहना है कि लोन लेना गलत नहीं है, लेकिन बिना योजना के लिया गया कर्ज भविष्य में आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। सही EMI प्लानिंग और समझदारी से लिया गया निर्णय व्यक्ति को वित्तीय स्थिरता की ओर ले जाता है।

T20 कप्तानी पर बड़ा संकट: सूर्यकुमार यादव पर खतरा, श्रेयस अय्यर रेस में सबसे आगे

नई दिल्ली । टीम इंडिया की टी20 कप्तानी को लेकर बड़ा बदलाव चर्चा में आ गया है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 और आईपीएल 2026 के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव के प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते उनके नेतृत्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार अब चयनकर्ता भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए नए कप्तान की तलाश में हैं। इस रेस में सबसे आगे नाम सामने आ रहा है Shreyas Iyer का, जिन्हें एक मजबूत नेतृत्व विकल्प माना जा रहा है। वहीं उप-कप्तानी के लिए तिलक वर्मा और ईशान किशन जैसे युवा खिलाड़ियों के नाम भी चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि टीम मैनेजमेंट केवल मौजूदा सीरीज ही नहीं, बल्कि अगले दो टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए लंबे समय के लिए कप्तान चुनने की योजना पर काम कर रहा है। इसी कारण चयनकर्ता ऐसे खिलाड़ी को जिम्मेदारी देना चाहते हैं जो लगातार प्रदर्शन के साथ टीम को स्थिर नेतृत्व दे सके। श्रेयस अय्यर के पक्ष में सबसे बड़ा कारण उनका आईपीएल में कप्तानी अनुभव और लगातार बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। उन्होंने घरेलू और लीग क्रिकेट में अपनी लीडरशिप क्षमता साबित की है। साथ ही उन्हें टी20 टीम में मध्यक्रम की अहम जिम्मेदारी देने पर भी विचार किया जा रहा है। इस बीच मौजूदा कप्तान Suryakumar Yadav की खराब फॉर्म चिंता का विषय बनी हुई है। टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के कारण उनकी कप्तानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। चयन प्रक्रिया को लेकर मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar और हेड कोच Gautam Gambhir के बीच चर्चा की भी खबरें हैं। दोनों के बीच रणनीतिक दृष्टिकोण को लेकर मतभेद की बातें सामने आ रही हैं, हालांकि अंतिम फैसला चयन समिति की सहमति से ही लिया जाएगा। टीम इंडिया के लिए आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, जहां कप्तानी को लेकर अंतिम संकेत मिल सकते हैं। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि क्या सूर्यकुमार यादव अपनी कप्तानी बचा पाएंगे या फिर भारतीय टी20 क्रिकेट में एक नए नेतृत्व युग की शुरुआत श्रेयस अय्यर के हाथों होगी।