MP RAPE CASE: युवती बोली- धर्म बदलने और निकाह का बनाया दबाव, 24 घंटे में हुआ गिरफ्तार

HIGHLIGHTS: पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज। मुख्य आरोपी 24 घंटे में गिरफ्तार। शादी और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप। दुष्कर्म और धमकी देने की शिकायत। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी। MP RAPE CASE: मध्यप्रदेश। अशोकनगर के चंदेरी से दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बता दें कि पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है, साथ ही दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। Guna neet Student Accident: आधे घंटे तक रेल्वी ट्रैक पर तड़पती रही छात्रा, किसी ने नहीं की मदद मौसी की बेटी की शादी में आयी थी युवती पुलिस का कहना है कि पीड़िता ने 5 जून को चंदेरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह 14 मई को वह अपनी मौसी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होने चंदेरी आई थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने उस पर एक युवक से शादी करने और मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई, साथ ही मुख्य आरोपी पर दुष्कर्म का भी आरोप लगाया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बीएनएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। UNION CARBIDE UPDATE: CM मोहन यादव बोले- अब यूनियन कार्बाइड की जमीन का होगा सही इस्तेमाल; कचरा हटाने के बाद अब मैनेजमेंट पर फोकस 24 घंटे के भीतर लिया एक्शन मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने 26 साल के मुख्य आरोपी अल्ताफ खान को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले में नामजद दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक दौड़ तेज, गूगल और स्पेसएक्स के बीच 30 अरब डॉलर का रणनीतिक समझौता

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं की मांग में लगातार हो रही वृद्धि के बीच तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक समझौता सामने आया है। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने अपनी एआई क्षमताओं को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्पेसएक्स के साथ बहु-अरब डॉलर का दीर्घकालिक करार किया है। इस समझौते के तहत गूगल को विशाल कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच मिलेगी, जिससे कंपनी अपने उन्नत एआई प्लेटफॉर्म और क्लाउड सेवाओं का विस्तार कर सकेगी। समझौते के अनुसार, अक्टूबर 2026 से जून 2029 तक गूगल हर महीने निर्धारित भुगतान के बदले उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं का उपयोग करेगा। पूरे अनुबंध की अनुमानित कीमत लगभग 30 अरब डॉलर आंकी गई है। यह करार मौजूदा समय में एआई क्षेत्र में हो रहे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है और इससे तकनीकी कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी स्पष्ट होती है। इस व्यवस्था के तहत गूगल को लगभग 1,10,000 एनवीडिया जीपीयू के साथ-साथ सीपीयू, मेमोरी और अन्य आवश्यक हार्डवेयर संसाधनों तक पहुंच प्राप्त होगी। इन संसाधनों का उपयोग विशेष रूप से बड़े भाषा मॉडल, जनरेटिव एआई एप्लिकेशन, क्लाउड प्लेटफॉर्म और एंटरप्राइज एआई समाधानों के विकास एवं संचालन में किया जाएगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता गूगल की एआई सेवाओं को नई गति प्रदान कर सकती है। उच्च प्रदर्शन वाले एनवीडिया एच200 चिप्स के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि उपलब्ध कराई जाने वाली कंप्यूटिंग शक्ति 100 मेगावाट से अधिक हो सकती है। यह क्षमता आधुनिक एआई मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्तमान समय में एआई उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियों में पर्याप्त कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता शामिल है, जिसके कारण बड़ी तकनीकी कंपनियां लगातार नए डेटा सेंटर और हार्डवेयर संसाधनों में निवेश कर रही हैं। समझौते में प्रदर्शन और समयसीमा से जुड़े स्पष्ट प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। यदि निर्धारित समय तक आवश्यक एनवीडिया चिप्स और संबंधित संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, तो गूगल को अनुबंध समाप्त करने का अधिकार प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त दोनों पक्षों को पूर्व सूचना देकर समझौते से बाहर निकलने का विकल्प भी दिया गया है। इससे अनुबंध में लचीलापन और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। गूगल का मानना है कि उसके एआई उत्पादों, एजेंट आधारित प्लेटफॉर्म और जेमिनी एंटरप्राइज सेवाओं की मांग अपेक्षा से अधिक तेजी से बढ़ रही है। इसी कारण अतिरिक्त कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता महसूस की गई। कंपनी के क्लाउड कारोबार में भी तेजी देखी जा रही है, जहां लंबी अवधि के अनुबंधों का मूल्य लगातार बढ़ रहा है। यह संकेत देता है कि कॉरपोरेट और एंटरप्राइज ग्राहक बड़े पैमाने पर एआई आधारित समाधानों को अपना रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता केवल दो कंपनियों के बीच व्यावसायिक सहयोग नहीं बल्कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण संकेत है। बड़े डेटा सेंटर, उन्नत प्रोसेसर और विशाल कंप्यूटिंग नेटवर्क भविष्य की तकनीकी बढ़त तय करेंगे। ऐसे में यह करार आने वाले वर्षों में एआई उद्योग की दिशा और निवेश प्रवृत्तियों को प्रभावित कर सकता है।
वित्त वर्ष 2027 में विकास की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत, जीडीपी वृद्धि 6.6% रहने का अनुमान; महंगाई और तेल कीमतें बढ़ाएंगी दबाव

नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026 में अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन दर्ज करने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था अगले वित्त वर्ष में नई चुनौतियों का सामना कर सकती है। ताजा आर्थिक आकलनों के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में देश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दर वैश्विक स्तर पर अब भी मजबूत मानी जाएगी, लेकिन पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इसमें कुछ नरमी देखने को मिल सकती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मोर्चों पर उभरती परिस्थितियां विकास की गति को प्रभावित कर सकती हैं। वित्त वर्ष 2026 में अर्थव्यवस्था को कई सकारात्मक कारकों का लाभ मिला। घरेलू खपत को प्रोत्साहन देने वाले उपाय, अपेक्षाकृत कम महंगाई, अनुकूल मौसम की स्थिति, ब्याज दरों में राहत और वैश्विक आर्थिक स्थिरता ने विकास को मजबूत आधार प्रदान किया। इन कारणों से आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनी रही और वृद्धि दर अनुमान से बेहतर स्तर तक पहुंच गई। हालांकि आगामी वित्त वर्ष के लिए तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में तेज उछाल से भारत जैसे आयात आधारित देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऊर्जा लागत बढ़ने का असर परिवहन, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों पर पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है और इसका प्रभाव अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। इसके साथ ही मानसून को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं। मौसम संबंधी पूर्वानुमानों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई है। यदि वर्षा अपेक्षा से कमजोर रहती है तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कृषि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कमजोरी का असर ग्रामीण आय, उपभोग और खाद्य आपूर्ति पर पड़ता है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। महंगाई भी आने वाले समय में एक प्रमुख चुनौती बन सकती है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में मुद्रास्फीति का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रह सकता है। खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और परिवहन लागत में संभावित वृद्धि से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। महंगाई बढ़ने की स्थिति में घरेलू खपत की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जो आर्थिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। वैश्विक परिस्थितियां भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा मांग पर पड़ सकता है। यदि वैश्विक बाजारों में सुस्ती बनी रहती है तो भारतीय निर्यात क्षेत्र को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे औद्योगिक उत्पादन और निवेश गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना रहेगी। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादी ढांचे, बढ़ते निवेश, डिजिटल विस्तार और घरेलू मांग की वजह से अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बनी रहेगी। निजी उपभोग अब भी आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बना हुआ है और हालिया आंकड़े संकेत देते हैं कि उपभोक्ता मांग में मजबूती बरकरार है। यही कारण है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल माना जा रहा है। आने वाले महीनों में तेल कीमतों, मानसून की प्रगति, महंगाई के रुझान और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर विशेष नजर रहेगी। यही कारक तय करेंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था अनुमानित वृद्धि दर हासिल कर पाती है या विकास की गति में और बदलाव देखने को मिलता है।
वैश्विक संकटों के बीच आर्थिक मोर्चे पर सक्रिय सरकार, पीएम मोदी ने सलाहकार परिषद संग बनाई नई रणनीति

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में देश की आर्थिक प्रगति को गति देने, विकास दर को स्थिर बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से उत्पन्न संभावित चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की गई। आर्थिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ हुए इस विचार-विमर्श का केंद्र भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और विकास की निरंतरता सुनिश्चित करना रहा। बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई जब दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं कमजोर मांग, आपूर्ति शृंखला में बाधाओं, क्षेत्रीय संघर्षों और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इन परिस्थितियों के बावजूद भारत लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन दर्ज कर रहा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है। इसी पृष्ठभूमि में बैठक के दौरान आर्थिक गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित करने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा के दौरान व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक नीतिगत कदमों की समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने विकास दर को मजबूत बनाए रखने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादक क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने से जुड़े विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। प्रधानमंत्री ने भी बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। लोगों के दैनिक जीवन को सरल बनाने और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने से जुड़े सुधारों की समीक्षा की गई। अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी विचार किया गया। सरकार का मानना है कि बेहतर कारोबारी माहौल आर्थिक गतिविधियों को गति देने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभावों को लेकर रहा। विशेषज्ञों ने ऊर्जा बाजारों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और वैश्विक वित्तीय स्थिरता पर पड़ने वाले असर का आकलन प्रस्तुत किया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए क्षेत्रीय अस्थिरता का असर ऊर्जा कीमतों और व्यापारिक लागतों पर पड़ सकता है। इसी कारण सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक वृद्धि को समर्थन दिया है। हाल के आर्थिक संकेतक भी यह दर्शाते हैं कि घरेलू मांग और निवेश गतिविधियां अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं। विशेषज्ञों ने माना कि संरचनात्मक सुधारों और बुनियादी ढांचे में निवेश के कारण भारत की विकास संभावनाएं अन्य कई देशों की तुलना में अधिक सकारात्मक बनी हुई हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों का समूह है, जो सरकार को आर्थिक और विकास संबंधी विषयों पर स्वतंत्र सुझाव प्रदान करता है। बैठक में भविष्य की विकास प्राथमिकताओं, वैश्विक आर्थिक रुझानों और बदलती चुनौतियों के अनुरूप नीतिगत तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयोजित यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार आर्थिक स्थिरता, विकास और निवेश को लेकर सतर्क दृष्टिकोण अपनाए हुए है। आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत निर्णयों के माध्यम से भारत की आर्थिक गति को बनाए रखने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
आयुष्मान भारत वय वंदना योजना से 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिक जुड़े, 13.84 लाख उपचारों पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च

नई दिल्ली । देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और कवरेज बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभाव को लेकर जारी ताजा आंकड़ों में वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक विस्तार का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत अब तक 1.20 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि इस योजना के अंतर्गत 13.84 लाख से अधिक उपचार किए गए हैं। इन उपचारों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत आई है। सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य बढ़ती उम्र के साथ उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करना और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करना है। योजना के माध्यम से लाखों बुजुर्गों को अस्पतालों में उपचार और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिला है। स्वास्थ्य क्षेत्र में चलाए जा रहे टीकाकरण अभियानों को लेकर भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं। मिशन इंद्रधनुष के तहत उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाई गईं, जो पहले नियमित टीकाकरण से वंचित रह गए थे। अभियान के अंतर्गत 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया। इससे देश में पूर्ण टीकाकरण कवरेज को मजबूत करने में मदद मिली है। सरकार के अनुसार बिना किसी टीके वाले बच्चों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में ऐसे बच्चों की हिस्सेदारी कुल आबादी का 0.11 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2024 में घटकर 0.06 प्रतिशत रह गई। इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक प्रगति का संकेत माना जा रहा है। सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष करोड़ों नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए निःशुल्क टीके उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम ने देश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी प्रमुख भूमिका निभा रही है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है। सरकार के अनुसार अब तक 44.14 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 12.03 करोड़ अस्पताल भर्ती मामलों का लाभार्थियों को फायदा मिला है। इन उपचारों का कुल मूल्य लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अस्पताल नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है। वर्तमान में 36 हजार से अधिक अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। इससे लाभार्थियों को अपने क्षेत्र के निकट उपचार सुविधाएं प्राप्त करने में सहायता मिली है। सरकार ने यह भी बताया कि 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा टेलीमेडिसिन सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है और अब तक 47 करोड़ से अधिक डिजिटल परामर्श सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, एम्स संस्थानों तथा डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का दावा है कि इन पहलों के माध्यम से देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, तरुण और रजनीश ने भरा नामांकन

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के रूप में Tarun Chugh और Rajnish Agrawal का नामांकन दाखिल कराकर चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। नामांकन के दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक रहा, वहीं पार्टी ने अपनी राजनीतिक ताकत का भी प्रदर्शन किया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इस मौके पर पूर्व मंत्री Bhupendra Singh ने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि पार्टी की स्थिति इतनी मजबूत है कि यदि भाजपा तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार दे, तब भी जीत सुनिश्चित रहेगी। उनके इस बयान ने राज्यसभा चुनाव को लेकर नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। भूपेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा को विधायकों का व्यापक समर्थन प्राप्त है और पार्टी के पक्ष में संख्या बल मजबूत है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा संगठन और जनाधार दोनों के स्तर पर मजबूत स्थिति में है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के परिणाम को लेकर पार्टी पूरी तरह आश्वस्त है। राज्यसभा चुनाव को केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है। इस चुनाव में विभिन्न दलों की रणनीति, विधायकों की एकजुटता और राजनीतिक समीकरणों पर सबकी नजर बनी हुई है। भाजपा की ओर से किए गए शक्ति प्रदर्शन को विपक्ष के लिए एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नामांकन के बाद अब सभी दल अपने-अपने विधायकों को साधने और रणनीति मजबूत करने में जुट जाएंगे। चुनावी गणित के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भाजपा के आत्मविश्वास भरे दावों ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है, जबकि विपक्ष भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।
Guna neet Student Accident: आधे घंटे तक रेल्वी ट्रैक पर तड़पती रही छात्रा, किसी ने नहीं की मदद

Guna neet Student Accident: गुना। गुना शहर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नीट की तैयारी कर रही एक युवती ने बजरंगगढ़ रेलवे ओवरब्रिज से शनिवार सुबह 7 से 8 बजे के दरमियान छलांग लगा दी। जिसके बाद छात्रा रेलवे ट्रैक पर जा गिरी और आधे घंटे तक वहीं तड़पती रही। लेकिन इस दौरान किसी भी व्यक्ति उसकी मदद नहीं की। बताया जा रहा है कि 19 वर्षीया छात्रा नीट की तैयारी कर रही थी, युवती के गिरने के समय रेलवे ट्रैक पर एक इंजन खड़ा था और दूसरी पटरी पर भी एक इंजन मौजूद था। लोगों का कहना है कि लोको पायलट ने घायल युवती को देखा, लेकिन वह मदद के लिए नीचे नहीं उतरा। UNION CARBIDE UPDATE: CM मोहन यादव बोले- अब यूनियन कार्बाइड की जमीन का होगा सही इस्तेमाल; कचरा हटाने के बाद अब मैनेजमेंट पर फोकस आधे घंटे तक मदद का इंतजार करती रही छात्रा घटना के बाद कई लोग वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने घायल युवती को अस्पताल पहुंचाने की पहल नहीं की। करीब आधे घंटे बाद वहां से गुजर रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन अकेले होने की वजह से वो उसे नहीं उठा पाए। इसके बाद उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को आवाज लगाई। कुछ लोगों की मदद से एक ऑटो रिक्शा की व्यवस्था की गई और युवती को तत्काल निजी अस्पताल पहुंचाया गया। पाकिस्तान में आटे का संकट! कीमत 100 किलो, रोटी के लिए हाहाकार? कॉन्स्टेबल की बेटी, कर रही थी NEET की तैयारी प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घायल युवती आरोन में पदस्थ एक कॉन्स्टेबल की बेटी है। वह लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि पिछले पांच-छह दिनों से वह कोचिंग भी नहीं जा रही थी। हालांकि, युवती ओवरब्रिज से कैसे गिरी, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। परिजनों ने भी फिलहाल इस मामले में कोई बयान नहीं दिया है। CM MOHAN YADAV: CM मोहन यादव का बड़ा फैसला; RGPV को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी पुलिस कर रही जांच सिटी कोतवाली थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि युवती ओवरब्रिज से खुद कूदी या किसी अन्य कारण से नीचे गिरी, इसकी जांच की जा रही है।
21 जून को बनेगा रुचक राजयोग, मंगल-शुक्र की युति से 4 राशियों की चमकेगी किस्मत | Ruchak Rajyog 2026

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति और उनकी चाल का विशेष महत्व माना गया है। इसी क्रम में 21 जून को एक बेहद शक्तिशाली ग्रहयोग बनने जा रहा है, जब मंगल और शुक्र वृषभ राशि में एक साथ आकर रुचक राजयोग का निर्माण करेंगे। यह योग साहस, ऊर्जा, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत माना जाता है। मंगल ग्रह जहां पराक्रम, शक्ति और नेतृत्व क्षमता के कारक हैं, वहीं शुक्र ग्रह सौंदर्य, प्रेम, भोग-विलास और धन-संपत्ति के प्रतिनिधि माने जाते हैं। जब ये दोनों ग्रह एक साथ किसी राशि में युति करते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में सफलता और समृद्धि के नए द्वार खुलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इस राजयोग का सबसे अधिक प्रभाव कुछ विशेष राशियों पर देखने को मिलेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद शुभ रहने वाला है। इस अवधि में करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। प्रेम संबंधों में भी मधुरता आएगी और संपत्ति या निवेश से जुड़े मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। सिंह राशि के जातकों के लिए भी यह योग सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। भाग्य का पूरा साथ मिलने से लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। हालांकि, इस समय क्रोध और जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि संयम से लिए गए निर्णय ही सफलता दिलाएंगे। कर्क राशि के लिए यह राजयोग करियर में नई जिम्मेदारियों और पदोन्नति के संकेत दे रहा है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और निर्णय क्षमता मजबूत होगी। हालांकि, बड़े जोखिम उठाने से बचने की सलाह दी जाती है ताकि स्थिरता बनी रहे। वहीं मीन राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि का संकेत है। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और पुरानी समस्याओं से राहत मिलने की संभावना है। इस दौरान सोच-समझकर कदम उठाना लाभकारी रहेगा। कुल मिलाकर, रुचक राजयोग कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। यह योग न केवल करियर में उन्नति के अवसर देगा बल्कि आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में सहायक माना जाता है। हालांकि, ज्योतिष के अनुसार परिणाम व्यक्ति की कुंडली और कर्मों पर भी निर्भर करते हैं।
UNION CARBIDE UPDATE: CM मोहन यादव बोले- अब यूनियन कार्बाइड की जमीन का होगा सही इस्तेमाल; कचरा हटाने के बाद अब मैनेजमेंट पर फोकस

HIGHLIGHTS: कचरे के निपटारे के बाद जमीन पर फोकस CM ने दिए भविष्य की योजना के संकेत गैस त्रासदी को बताया बड़ा कलंक ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं पर जोर पर्यावरण संरक्षण पर सरकार का फोकस UNION CARBIDE UPDATE: भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह फैक्ट्री में पड़ा जहरीला कचरा नहीं, बल्कि उसकी जमीन का भविष्य है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि कचरे के निपटारे के बाद अब सरकार यूनियन कार्बाइड की जमीन के प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भोपाल गैस त्रासदी को प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने न केवल हजारों लोगों की जान ली बल्कि पर्यावरण को भी गहरा नुकसान पहुंचाया। CM MOHAN YADAV: CM मोहन यादव का बड़ा फैसला; RGPV को तीन हिस्सों में बांटने की तैयारी गैस त्रासदी का कलंक मिटाने की दिशा में बड़ा कदम मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि करीब 40 साल बाद हमारी सरकार ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़े कचरे का सफल निपटारा किया है। इससे भोपाल की धरती से गैस त्रासदी का कलंक मिटाने की दिशा में बड़ा काम हुआ है। अब हम उस जमीन के उचित प्रबंधन पर काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि 2-3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था। इस हादसे में हजारों लोगों की मौत हुई थी, जबकि लाखों लोग इसके दुष्प्रभावों से प्रभावित हुए थे। BHIND RAPE CASE: भिंड गैंगरेप-हत्या कांड; न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे कोंग्रेसी ग्रीन एनर्जी पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है। साथ ही सौर, पवन, बायोमास और जलविद्युत परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति का हिस्सा CM मोहन यादव ने इस दौरन कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। एक पेड़ को दस पुत्रों के समान माना गया है। पर्यावरण संरक्षण हमारी परंपराओं का हिस्सा है और इसको सवारने का सरकार लगातार कर रही है।
पाकिस्तान में आटे का संकट! कीमत 100 किलो, रोटी के लिए हाहाकार?

इस्लामाबाद/कराची। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में गेहूं की कमी और बढ़ती महंगाई ने सरकार की खाद्य प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी खरीद लक्ष्य से काफी पीछे रहने के कारण खुले बाजार में गेहूं और आटे की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लक्ष्य का 8 प्रतिशत भी नहीं खरीद सकी सरकार सिंध सरकार ने इस वर्ष 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 4 जून तक खाद्य विभाग केवल 79,835 मीट्रिक टन गेहूं ही खरीद पाया। यह कुल लक्ष्य का 8 प्रतिशत से भी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य बाजार दर से कम होने के कारण किसानों ने सरकारी एजेंसियों को गेहूं बेचने के बजाय निजी व्यापारियों को प्राथमिकता दी। खुले बाजार में बढ़े दाम सरकारी खरीद कमजोर रहने और निजी कारोबारियों की सक्रियता के चलते गेहूं की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कराची में गेहूं का भाव 11,100 पाकिस्तानी रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि हैदराबाद में यह लगभग 10,900 रुपये प्रति 100 किलोग्राम बिक रहा है। गेहूं महंगा होने का असर आटे पर भी दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में आटा 135 से 140 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जो सरकार द्वारा निर्धारित 107 रुपये प्रति किलो की दर से काफी अधिक है। इसका सबसे ज्यादा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने बुलाई आपात बैठक स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंध के मुख्यमंत्री सैयद मुराद अली शाह ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर अधिकारियों को बाजार पर निगरानी बढ़ाने और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि प्रदेश की खाद्य सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा महत्वपूर्ण संसाधन है। मुख्यमंत्री ने खाद्य विभाग और संबंधित एजेंसियों से नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है, ताकि कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। संकट से उबरने की चुनौती हालांकि सरकारी दावों और निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में विशेष सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाजार में जमाखोरी और आपूर्ति संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सिंध में खाद्य सुरक्षा संकट और गहरा सकता है। बढ़ती कीमतों और कमजोर सरकारी खरीद व्यवस्था ने पाकिस्तान में खाद्यान्न प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जबकि आम नागरिक महंगाई की मार झेलने को मजबूर हैं।