मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रांसफर प्रक्रिया में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य

मध्य प्रदेश: के शिक्षकों को स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया के बीच बड़ी राहत मिली है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए शिक्षकों को वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी जो मैरिज सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। राज्य में चल रही ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने शिकायत की थी कि वर्षों पहले विवाह होने के बावजूद उनके पास विवाह प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे निर्धारित श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करने से वंचित हो रहे थे। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों ने लगातार विभाग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की थी। शिक्षक संगठनों का तर्क था कि कई शिक्षकों का विवाह दो दशक या उससे भी पहले हुआ है, जब विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया वर्तमान की तरह व्यापक नहीं थी। ऐसे मामलों में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता उन्हें अनावश्यक परेशानी में डाल रही थी। विभाग ने इन आपत्तियों पर विचार करते हुए अब वैकल्पिक दस्तावेजों को स्वीकार करने का निर्णय लिया है। नए निर्देशों के अनुसार शिक्षक विवाह प्रमाण पत्र के स्थान पर लोकसेवक समग्र कार्ड, सेवा पुस्तिका का सत्यापित पृष्ठ अथवा अन्य मान्य दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर वैवाहिक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। विभाग के इस कदम को शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि ऑनलाइन ट्रांसफर आवेदन की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले यह राहत दी गई है। इससे उन शिक्षकों को विशेष लाभ मिलेगा जो दस्तावेजी बाधाओं के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थानांतरण सूची 27 या 28 जून तक जारी की जा सकती है। ऐसे में अंतिम चरण में किया गया यह बदलाव बड़ी संख्या में आवेदकों को प्रक्रिया में शामिल रहने का अवसर देगा। हालांकि सभी वर्गों के शिक्षकों की समस्याओं का समाधान अभी नहीं हो पाया है। विशेष रूप से दिव्यांग शिक्षकों के बीच कुछ नियमों को लेकर असंतोष बना हुआ है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र के संबंध में निर्धारित शर्तों को लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार उनके पास वैध प्रमाण पत्र मौजूद हैं, फिर भी एक वर्ष के भीतर जारी प्रमाण पत्र की मांग के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग का यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यावहारिक और शिक्षक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल दस्तावेज संबंधी बाधाएं कम होंगी, बल्कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी भी बढ़ेगी। अब शिक्षकों की निगाहें स्थानांतरण सूची के प्रकाशन और लंबित मांगों पर विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

मध्य प्रदेश: की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर लगाए गए आरोपों पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है, लेकिन प्रदेश की जनता ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं जिससे जनता के बीच गलत संदेश पहुंचे। उनके अनुसार आरोपों में प्रस्तुत की गई जानकारी वास्तविक दस्तावेजों और रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि संबंधी जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में चुनावी नामांकन के दौरान जो संपत्ति विवरण प्रस्तुत किया गया था, उसमें और वर्तमान स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम दर्ज भूमि का क्षेत्रफल पहले जैसा ही है और उनकी पत्नी के नाम दर्ज कृषि भूमि में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पार्टी का दावा है कि आरोपों के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने उन व्यावसायिक संस्थाओं और भूमि स्वामित्व से जुड़े आरोपों का भी खंडन किया जिनका उल्लेख राजनीतिक विवाद में किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों और संपत्तियों का नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनके संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं और उनमें किसी प्रकार की अनियमितता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री संबंधित एक कंपनी के निदेशक पद से वर्षों पहले अलग हो चुके थे और उसके बाद की गतिविधियों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। मुख्यमंत्री के परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी भाजपा ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज भूमि और संपत्तियों के संबंध में जो दावे किए गए हैं, वे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। साथ ही जिन रिश्तेदारों का उल्लेख आरोपों में किया गया है, उनका स्वतंत्र अस्तित्व है और उनके कार्यों को मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जोड़ना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित पक्ष स्वयं भी कानूनी और सार्वजनिक स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। भाजपा ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश सरकार विकास, निवेश, उद्योग, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है, जिससे विपक्ष असहज महसूस कर रहा है। इसी कारण ध्यान भटकाने के लिए आरोपों की राजनीति की जा रही है। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब-जब प्रदेश में पिछड़े वर्ग से आने वाले नेताओं ने नेतृत्व संभाला, तब-तब उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने और कमजोर करने की कोशिश की गई। भाजपा का आरोप है कि वर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ भी इसी मानसिकता के तहत अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा जहां आरोपों को निराधार बता रही है, वहीं विपक्ष अपने दावों पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
IPL में नया भूचाल! हार्दिक पांड्या को कप्तानी का ऑफर, KKR ने शुरू की ट्रेड डील की तैयारी

नई दिल्ली ।इंडियन प्रीमियर लीग में ऋषभ पंत और कुलदीप यादव की हाई प्रोफाइल ट्रेड के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा हार्दिक पांड्या को लेकर हो रही है। मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या एक बार फिर आईपीएल के ट्रेड बाजार का सबसे बड़ा नाम बन चुके हैं। लगातार आ रही रिपोर्ट्स ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है और अब कोलकाता नाइट राइडर्स भी इस दौड़ में शामिल हो गई है। खबर है कि केकेआर ने हार्दिक पांड्या को न केवल अपनी टीम में शामिल करने की इच्छा जताई है बल्कि उन्हें कप्तानी का ऑफर भी दिया है। आईपीएल 2026 के समापन के बाद से ही हार्दिक पांड्या के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। मुंबई इंडियंस की कप्तानी संभालने के बाद टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। पिछले तीन सीजन में से दो सीजन मुंबई के लिए बेहद निराशाजनक रहे। ऐसे में यह चर्चा शुरू हो गई कि हार्दिक और फ्रेंचाइजी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सोशल मीडिया पर फॉलो और अनफॉलो की घटनाओं ने इन अटकलों को और हवा दी। इससे पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के बीच हार्दिक पांड्या और यशस्वी जायसवाल की अदला-बदली हो सकती है। हालांकि अब कोलकाता नाइट राइडर्स ने इस मामले में नई एंट्री कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केकेआर प्रबंधन हार्दिक को अपनी टीम का चेहरा बनाना चाहता है और इसके लिए उसने मुंबई इंडियंस के साथ शुरुआती बातचीत भी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार कोलकाता नाइट राइडर्स का मानना है कि हार्दिक पांड्या जैसे अनुभवी ऑलराउंडर और सफल कप्तान टीम को नई दिशा दे सकते हैं। पिछले दो सीजन में अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी की जिम्मेदारी संभाली लेकिन टीम को वह सफलता नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी। ऐसे में केकेआर एक बड़े बदलाव के मूड में नजर आ रही है। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि कोलकाता केवल खिलाड़ी विनिमय तक सीमित नहीं रहना चाहती। फ्रेंचाइजी ऑल कैश डील पर भी विचार कर रही है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मुंबई इंडियंस सीधे वित्तीय सौदे को प्राथमिकता देगी या किसी खिलाड़ी के बदले हार्दिक को छोड़ने पर विचार करेगी। आईपीएल के नियमों के अनुसार किसी खिलाड़ी को दूसरी टीम में भेजने के लिए संबंधित खिलाड़ी की सहमति जरूरी होती है। फ्रेंचाइजियों के बीच बातचीत भले ही हो सकती है लेकिन अंतिम फैसला खिलाड़ी की मंजूरी के बाद ही संभव होता है। यदि खिलाड़ी प्रस्तावित ट्रेड को अस्वीकार कर देता है तो उसे नीलामी पूल में जाना पड़ सकता है। हार्दिक पांड्या के संभावित भविष्य को लेकर राजस्थान रॉयल्स का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। यदि यशस्वी जायसवाल और हार्दिक पांड्या के बीच ट्रेड होता है तो यह दोनों टीमों के लिए फायदेमंद सौदा माना जा रहा है। मुंबई को एक युवा और विस्फोटक ओपनर मिल जाएगा जबकि राजस्थान को एक अनुभवी ऑलराउंडर और संभावित कप्तान मिल सकता है। फिलहाल क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हार्दिक पांड्या अगले सीजन में किस टीम की जर्सी पहनते दिखाई देंगे। यदि यह ट्रेड पूरा होता है तो यह आईपीएल इतिहास के सबसे चर्चित और बड़े सौदों में शामिल हो सकता है।
Rani Durgavati Airport: CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, अब रानी दुर्गावती के नाम से पहचाना जाएगा जबलपुर एयरपोर्ट

Rani Durgavati Airport: जबलपुर। वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब जबलपुर एयरपोर्ट को वीरांगना रानी दुर्गावती एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा। इस घोषणा के साथ लंबे समय से चली आ रही मांग को भी बल मिला है। बलिदान दिवस कार्यक्रम में किया ऐलान वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती केवल एक महान योद्धा ही नहीं थीं, बल्कि उन्होंने सुशासन, जल प्रबंधन और जनकल्याण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने अकबर की सेना को तीन बार पराजित कर अपने अदम्य साहस का परिचय दिया था। फर्जी IPS, CBI और RBI अफसर बनकर बुना ठगी का जाल, काला धन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर महिला से 1.58 करोड़ ऐंठे लंबे समय से उठ रही थी नाम बदलने की मांग जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र सौंपकर प्रस्ताव पर विचार करने का आग्रह भी किया था। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से चर्चा कर इस दिशा में कदम बढ़ाने का भरोसा दिया था। रानी दुर्गावती के नाम पर बनेगा चिड़ियाघर मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने जबलपुर और संग्रामपुर में कैबिनेट बैठकों का आयोजन कर रानी दुर्गावती के योगदान को सम्मान देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही क्षेत्र में एक नए चिड़ियाघर (जू) का निर्माण किया जाएगा, जिसका नाम भी वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखा जाएगा। मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का काला दिन: मैहर, रायसेन, सिंगरौली और दमोह में मौतों का तांडव, कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ फ्लाईओवर को भी मिला नाम इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर ब्रिज का नाम भी रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार वीरांगना रानी दुर्गावती की स्मृतियों को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक उनके शौर्य की गाथा पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
फर्जी IPS, CBI और RBI अफसर बनकर बुना ठगी का जाल, काला धन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर महिला से 1.58 करोड़ ऐंठे

मध्य प्रदेश: के ग्वालियर में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लंबे समय तक मानसिक दबाव में रखकर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि साइबर अपराधी किस तरह सरकारी एजेंसियों और अधिकारियों का नाम लेकर आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा रकम के लेन-देन और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। जानकारी के अनुसार पीड़िता स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। उन्हें मई महीने में एक कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर एक मोबाइल नंबर संचालित हो रहा है, जिसका उपयोग अवैध और आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। शुरुआत में यह मामला केवल सत्यापन जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन धीरे-धीरे कॉल करने वालों ने महिला को गंभीर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाना शुरू कर दिया। साइबर ठगों ने महिला को बताया कि उनके बैंक खाते में करोड़ों रुपये का कथित काला धन जमा है और यह मामला राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसियों के संज्ञान में है। इसके बाद अलग-अलग लोगों ने खुद को आईपीएस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी और रिजर्व बैंक से जुड़ा अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया। लगातार वीडियो कॉल और आधिकारिक कार्रवाई जैसी दिखने वाली बातचीत के जरिए महिला पर भरोसा बनाने की कोशिश की गई। ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान ऐसा माहौल तैयार किया मानो किसी पुलिस मुख्यालय अथवा जांच एजेंसी के कार्यालय से कार्रवाई की जा रही हो। जालसाजों ने महिला को यह विश्वास दिलाया कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी संपत्ति भी जब्त हो सकती है। इसी डर का फायदा उठाकर उनसे चरणबद्ध तरीके से बड़ी रकम अलग-अलग खातों में जमा करवाई गई। बताया गया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने और क्लीन चिट मिलने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। मानसिक दबाव और भय के कारण महिला लगातार उनके निर्देशों का पालन करती रहीं। जांच में सामने आया है कि करोड़ों रुपये की यह राशि देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई। रकम कई किश्तों में भेजी गई, जिससे ठगों ने अपने नेटवर्क को छिपाने की कोशिश की। साइबर अपराधियों ने कथित दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और जांच संबंधी कहानियां गढ़कर महिला को लंबे समय तक भ्रमित रखा। यह पूरा घटनाक्रम करीब 37 दिनों तक चलता रहा, जिसके दौरान महिला लगातार ठगों के संपर्क में रही। जब कथित जांच पूरी होने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली और संपर्क करने वाले लोगों के मोबाइल नंबर बंद होने लगे, तब पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही साइबर अपराध शाखा ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाले साइबर अपराध देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी, बैंक या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर धन उगाही करते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंस या धन हस्तांतरण के निर्देश मिलने पर तत्काल स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना आवश्यक है। फिलहाल ग्वालियर पुलिस इस संगठित साइबर ठगी नेटवर्क तक पहुंचने और ठगी गई राशि की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
क्रिकेट के हिटमैन का बड़ा सम्मान: रोहित शर्मा को पद्मश्री, राष्ट्रपति भवन में गूंजीं तालियां

नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में अपना नाम दर्ज करा चुके दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। मंगलवार को द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। इस सम्मान के साथ रोहित शर्मा उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने खेल जगत में अपने उत्कृष्ट योगदान के दम पर देश का सर्वोच्च सम्मान हासिल किया है। रोहित शर्मा का नाम जनवरी 2026 में घोषित पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल किया गया था। भारतीय क्रिकेट में उनके उल्लेखनीय योगदान, शानदार बल्लेबाजी, रिकॉर्डतोड़ उपलब्धियों और सफल नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया। वर्षों से क्रिकेट प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले रोहित ने अपने खेल से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष समारोह में कुल 65 विशिष्ट हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें 2 पद्म विभूषण, 7 पद्म भूषण और 56 पद्मश्री पुरस्कार शामिल रहे। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। रोहित शर्मा के अलावा विजय अमृतराज, अलका याग्निक और ममूटी जैसे कई प्रतिष्ठित कलाकारों को भी सम्मान दिया गया।। रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी बल्लेबाजी का कोई सानी नहीं माना जाता। वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक लगाने वाले वह दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी और बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें विश्व क्रिकेट के महान खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंचा दिया है। बतौर कप्तान भी रोहित शर्मा ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी नेतृत्व क्षमता के तहत टीम इंडिया ने कई महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं और टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया। मैदान पर उनका शांत स्वभाव, रणनीतिक सोच और खिलाड़ियों को प्रेरित करने की क्षमता उन्हें एक सफल कप्तान बनाती है। क्रिकेट के मैदान पर हासिल की गई उनकी उपलब्धियां केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं बल्कि उन्होंने करोड़ों युवाओं को प्रेरित करने का काम भी किया है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व क्रिकेट के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल होना उनकी मेहनत, समर्पण और संघर्ष की कहानी को दर्शाता है। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद खेल जगत और क्रिकेट प्रशंसकों ने रोहित शर्मा को बधाइयां दीं। सोशल मीडिया पर भी उनके सम्मान को लेकर खुशी की लहर देखने को मिली। यह सम्मान न केवल रोहित शर्मा की व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी गर्व का क्षण है। रोहित शर्मा की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह साबित करती है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण से किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
पुलिसकर्मियों के घायल होने के बावजूद नामजद कार्रवाई क्यों नहीं? इंदौर के चर्चित भूमि विवाद मामले में पुलिस की भूमिका पर बढ़ी जांच

मध्य प्रदेश: के इंदौर जिले में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कनाड़िया थाना क्षेत्र स्थित भूरी टेकरी की डायमंड कॉलोनी में कथित रूप से 500 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब घटना के संबंध में दर्ज एफआईआर में आरोपियों को नामजद करने के बजाय अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारी के अनुसार विवादित भूमि पर तनाव की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। घटनास्थल पर दोनों पक्षों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। पुलिस के पहुंचने के बाद हालात नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति अचानक बिगड़ गई और कथित रूप से पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की घटना सामने आई। इस दौरान कुछ जवानों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, लेकिन सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि एफआईआर में किसी भी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया। पुलिस द्वारा अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और पुलिसकर्मी स्वयं घटनाक्रम का हिस्सा थे, तब आरोपियों की पहचान दर्ज करने में कठिनाई क्यों आई। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पुलिस कमिश्नर ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने के लिए कनाड़िया थाना प्रभारी को तलब किया। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी मांगी है और यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में किन परिस्थितियों को आधार बनाया गया। साथ ही मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है। घायल पुलिसकर्मियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान दो जवान घायल हुए थे। इनमें एक जवान के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई है। यदि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी घायल हुए हैं तो उनके साथ हुई घटना की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों की पहचान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है। विवादित भूमि को लेकर क्षेत्र में पहले से चर्चाएं होती रही हैं। लगभग 17 एकड़ क्षेत्र में फैली इस जमीन की कीमत करीब 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतने बड़े आर्थिक महत्व वाली संपत्ति को लेकर लंबे समय से विभिन्न दावे और विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में पुलिस हस्तक्षेप के दौरान हुई कथित मारपीट और उसके बाद दर्ज एफआईआर ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। प्रशासनिक और कानूनी हलकों में अब यह चर्चा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ क्या पुलिस आरोपियों की पहचान कर नामजद कार्रवाई करेगी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि घायल पुलिसकर्मियों से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रियता के बाद मामले की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लोकायुक्त FIR के साए में मिली नई जिम्मेदारी, करोड़ों की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पूर्व प्रभारी DEO की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल

मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले से जुड़े बहुचर्चित शिक्षा विभाग वित्तीय अनियमितता प्रकरण ने एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के चलते जांच के दायरे में आए पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एस.बी. सिंह को शहडोल संभाग में सहायक संचालक का प्रभार सौंपे जाने के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब संबंधित मामले में लोकायुक्त स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है और जांच की प्रक्रिया अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सिंगरौली का यह मामला पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग से जुड़े सबसे चर्चित प्रकरणों में शामिल रहा है। आरोपों के अनुसार विभागीय योजनाओं के संचालन, सामग्री खरीदी, प्रशासनिक स्वीकृतियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े विभिन्न मामलों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू हुई और बाद में मामला इतना गंभीर माना गया कि लोकायुक्त संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ा। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की कार्रवाई भी हुई। उस समय यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र बना था और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कई प्रश्न उठाए गए थे। इसी वजह से माना जा रहा था कि जांच पूरी होने तक इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों की भूमिका सीमित रखी जा सकती है, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े। हालांकि हालिया प्रशासनिक आदेश ने इस धारणा को चुनौती दी है। पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी को शहडोल संभाग में सहायक संचालक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर और बाहर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आलोचकों का मानना है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से घिरे अधिकारी को महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करना शासन की सख्ती को लेकर मिश्रित संदेश दे सकता है। वहीं कुछ प्रशासनिक जानकार इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं। इस नियुक्ति के बाद सबसे अधिक चर्चा पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को लेकर हो रही है। कई लोगों का तर्क है कि जब किसी मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हों और आरोपों की गंभीरता व्यापक हो, तब ऐसे अधिकारियों की नई पदस्थापना पर अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जनता के बीच प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा हो सकते हैं। दूसरी ओर कानूनी दृष्टिकोण अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक आरोप न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध न हो जाएं। केवल FIR दर्ज होना किसी अधिकारी या व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता। ऐसे में संबंधित अधिकारी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिर भी यह तथ्य महत्वपूर्ण बना हुआ है कि सिंगरौली का शिक्षा विभाग प्रकरण लंबे समय तक सार्वजनिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र रहा है। लोकायुक्त कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश की चर्चित जांचों में शामिल हो गया था। अब उसी प्रकरण से जुड़े अधिकारी को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद एक बार फिर इस पूरे मामले पर ध्यान केंद्रित हो गया है। वर्तमान परिस्थितियों में सभी की नजर जांच से जुड़े आगामी घटनाक्रमों पर टिकी हुई है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन और शासन के संभावित निर्णय इस मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल यह नियुक्ति प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर नई बहस को जन्म देती नजर आ रही है।
मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का काला दिन: मैहर, रायसेन, सिंगरौली और दमोह में मौतों का तांडव, कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

मध्य प्रदेश: में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। मंगलवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए कई दर्दनाक हादसों में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मैहर, रायसेन, सिंगरौली और दमोह में हुई इन घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाही से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। मैहर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। यहां सड़क किनारे काटे जा रहे एक सीसम के पेड़ के अचानक गिर जाने से बाइक उसकी चपेट में आ गई। हादसे के समय बाइक पर चार युवक-युवतियां सवार थे, जो मां शारदा के दर्शन के लिए जा रहे थे। बताया गया कि रास्ता भटकने के कारण वे दूसरे मार्ग पर पहुंच गए थे। इसी दौरान ट्रैक्टर की मदद से खींचा जा रहा पेड़ अचानक सड़क पर गिर पड़ा और बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। दुर्घटना में दो युवाओं की मौत हो गई, जबकि दो युवतियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायलों का उपचार जारी है और पुलिस पेड़ कटाई के दौरान बरती गई कथित लापरवाही की जांच कर रही है। रायसेन में एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया। शहर के बायपास क्षेत्र में बिजली के पोल लेकर जा रहे ट्रैक्टर के पीछे चल रही कार अचानक पोलों से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि लंबे पोल कार के अगले हिस्से को चीरते हुए पीछे तक निकल गए। हादसे में कार सवार पति-पत्नी और एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। प्रारंभिक उपचार के बाद एक घायल को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश की जा रही है। सिंगरौली जिले में भी दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान चली गई। बरगवा क्षेत्र में एक तेज रफ्तार बस ने सड़क किनारे मौजूद बच्चे को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को मौके पर तैनात करना पड़ा। इसी जिले के जियावन क्षेत्र में एक अन्य सड़क हादसे में तेज रफ्तार हाईवा ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी। दुर्घटना में एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। हादसे के बाद हाईवा चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। उधर दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने भिड़ंत में दो युवकों की मौत हो गई। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे में तीन अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रदेश में एक ही दिन में सामने आए इन हादसों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और पुलिस विभाग लोगों से यातायात नियमों का पालन करने तथा निर्माण और कटाई जैसे कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने की अपील कर रहे हैं। सभी मामलों में जांच जारी है और दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
हॉकी में भारत का जलवा बरकरार: पाकिस्तान को 4-3 से हराकर फिर लहराया तिरंगा

नई दिल्ली ।एफआईएच प्रो लीग 2025-26 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया मुकाबला एक बार फिर हॉकी प्रेमियों के लिए यादगार बन गया। लंदन के ली वैली हॉकी एंड टेनिस सेंटर में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 4-3 से शिकस्त दी। कप्तान Harmanpreet Singh की अगुवाई में टीम इंडिया ने न केवल जीत दर्ज की बल्कि पिछले एक दशक से जारी अपने दबदबे को भी बरकरार रखा। ओलंपिक चैंपियन Netherlands पर जीत के बाद आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम मैदान में उतरी थी। हालांकि मुकाबले की शुरुआत भारत के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। पहले क्वार्टर के आठवें मिनट में पाकिस्तान के नदीम अहमद ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलते हुए अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने संयम नहीं खोया और लगातार पाकिस्तानी गोलपोस्ट पर दबाव बनाए रखा। दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। 22वें मिनट में अभिषेक ने रिबाउंड पर गोल दागकर भारत को बराबरी दिलाई। इसके केवल दो मिनट बाद नीलकांत शर्मा ने शानदार फील्ड गोल करते हुए भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी। हाफटाइम तक भारतीय टीम पूरी तरह लय में दिखाई दी और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाती रही। तीसरे क्वार्टर में भी भारत का आक्रमण जारी रहा। 40वें मिनट में सुखजीत सिंह ने बेहतरीन कौशल का प्रदर्शन करते हुए शानदार गोल दागा। उन्होंने गेंद को हवा में उछालकर ऐसा शॉट लगाया जिसे रोक पाना पाकिस्तानी गोलकीपर के लिए संभव नहीं था। इस गोल ने भारत की बढ़त 3-1 कर दी और मैच पर उसकी पकड़ मजबूत हो गई। चौथे क्वार्टर में मुकाबला और रोमांचक हो गया। 52वें मिनट में राजिंदर सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार गोल करते हुए भारत को 4-1 की मजबूत बढ़त दिलाई। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के सटीक पास का राजिंदर ने शानदार तरीके से फायदा उठाया। हालांकि पाकिस्तान ने हार नहीं मानी और अबू महमूद तथा मोइन शकील के गोलों की बदौलत स्कोर 4-3 तक पहुंचा दिया। अंतिम मिनटों में पाकिस्तान ने बराबरी की भरपूर कोशिश की लेकिन भारतीय डिफेंस ने मजबूती दिखाते हुए जीत सुनिश्चित कर ली। इस मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हाल के वर्षों में भारत हॉकी में पाकिस्तान पर लगातार हावी रहा है। दोनों देशों के बीच अब तक खेले गए मुकाबलों में पाकिस्तान ने कुल 82 और भारत ने 68 जीत दर्ज की हैं लेकिन पिछले दस वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इस दौरान भारत पाकिस्तान के खिलाफ 18 मुकाबलों में अपराजित रहा है जिसमें 16 जीत और दो ड्रॉ शामिल हैं। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने एफआईएच प्रो लीग अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत की है। 13 मुकाबलों में तीन जीत के साथ भारत सातवें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं पाकिस्तान की टीम लगातार 13 हार के साथ तालिका में सबसे नीचे बनी हुई है। अब भारतीय टीम की नजर अगले मुकाबलों पर होगी जहां उसे पाकिस्तान के खिलाफ एक और मैच तथा इंग्लैंड के खिलाफ दो महत्वपूर्ण मुकाबले खेलने हैं। यह जीत केवल अंक तालिका के लिहाज से ही नहीं बल्कि मनोबल के स्तर पर भी भारतीय टीम के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। हरमनप्रीत ब्रिगेड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में दबाव को कैसे अवसर में बदला जाता है।