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उज्जैन में दो मंजिला मकान भरभराकर ढहा, मलबे में दबकर किशोर की मौत; पांच गंभीर, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

 मध्य प्रदेश:  के उज्जैन जिले में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शहर के जीवाजीगंज थाना क्षेत्र स्थित हम्मालवाड़ी इलाके में एक दो मंजिला रिहायशी मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरते ही आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे में एक 15 वर्षीय किशोर की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह का समय होने के कारण मकान के भीतर कई लोग मौजूद थे। अचानक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत जमींदोज हो गई। मकान के गिरते ही आसपास रहने वाले लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय नागरिकों ने मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और राहत दल भी मौके पर पहुंच गए। जानकारी के अनुसार हादसे के समय मकान के भीतर कुल आठ लोग मौजूद थे। मकान के ढहने से सभी लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में 15 वर्षीय अरशान कुरैशी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं खुर्शीद बी, इकलाश, फरान नाज, शेर मोहम्मद और परवीन बी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। आसपास के लोगों का कहना है कि मकान के गिरने की घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर लोग घरों से बाहर निकल आए और मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गए। कई घंटों तक इलाके में लोगों की आवाजाही प्रभावित रही और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया। प्रारंभिक जांच में मकान ढहने के पीछे पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य को संभावित कारण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार समीप स्थित एक भवन का निर्माण कार्य जारी था, जिसके कारण प्रभावित मकान की नींव पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हादसे के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। विशेषज्ञों की टीम को भी घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए लगाया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई है। आसपास के अन्य मकानों की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी संभावित खतरे को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उज्जैन में हुए इस हादसे ने एक बार फिर पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा, निर्माण कार्यों की निगरानी तथा शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण संबंधी नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन राहत कार्य, घायलों के उपचार और घटना के कारणों की जांच पर प्राथमिकता से काम कर रहा है।

ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

 मध्य प्रदेश:  के खंडवा जिले स्थित ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में उस समय प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई जब ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण झूला पुल के लोडिंग तार की एक कड़ी क्षतिग्रस्त पाई गई। तकनीकी खराबी सामने आने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए पुल पर सभी प्रकार की आवाजाही को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुल के दोनों ओर स्थित प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए हैं तथा किसी भी व्यक्ति को पुल पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यह झूला पुल नर्मदा नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क माध्यम माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और पर्यटक इस पुल का उपयोग करते हैं। ऐसे में पुल के तार में आई तकनीकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए तत्काल प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पुल की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना उसे दोबारा चालू नहीं किया जाएगा। घटना की जानकारी मिलते ही तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पुल का विस्तृत निरीक्षण शुरू कर दिया। प्रारंभिक जांच में लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने की पुष्टि हुई है। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मरम्मत कार्य और सुरक्षा परीक्षण में लगभग तीन दिन का समय लग सकता है। इस दौरान पुल पूरी तरह बंद रहेगा। प्रशासन ने पुल के दोनों छोर पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी कर दी है ताकि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्गों के उपयोग की सलाह दी गई है। नर्मदा नदी पार करने के लिए पुराने पुल तथा नाव सेवा का उपयोग किया जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना सभी के हित में है। ओंकारेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां आने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में झूला पुल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह दोनों धार्मिक स्थलों के बीच सुगम संपर्क उपलब्ध कराता है। पुल के अस्थायी रूप से बंद होने से यात्रियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि नर्मदा नदी पर निर्मित यह झूला पुल वर्ष 2004 में लगभग 7.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। पिछले दो दशकों में यह पुल ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के बीच आवागमन का प्रमुख साधन बन चुका है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी पुल के एक तार में खराबी सामने आई थी, जिसके बाद आवश्यक मरम्मत कर इसे पुनः चालू किया गया था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पुल की व्यापक तकनीकी जांच की जाएगी। सभी सुरक्षा मानकों पर संतोषजनक रिपोर्ट मिलने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए दोबारा खोला जाएगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता पुल की संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना है।

सीहोर जिला जेल में बंद कैदी की संदिग्ध मौत से उठे गंभीर सवाल, परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग तेज

मध्य प्रदेश:  के सीहोर जिले की जिला जेल में बंद एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान श्रीराम वर्मा के रूप में हुई है, जो मारपीट से जुड़े एक आपराधिक मामले में न्यायिक अभिरक्षा के तहत जेल में बंद था। बुधवार सुबह उसकी मौत की सूचना सामने आने के बाद परिजनों ने जेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली चर्चा के केंद्र में आ गई है। परिजनों का आरोप है कि श्रीराम वर्मा की तबीयत खराब होने के बावजूद जेल प्रशासन ने उनके उपचार को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने आरोप लगाया कि जेल के भीतर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया और आवश्यक इलाज नहीं कराया गया। मौत की खबर मिलते ही परिजन जेल पहुंचे और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की। घटना के बाद जेल प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और मृत्यु के कारणों की जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। जानकारी के अनुसार श्रीराम वर्मा अप्रैल 2026 में सामने आए एक हिंसक विवाद के मामले में आरोपी था। यह मामला जमीन संबंधी पुराने विवाद से जुड़ा हुआ था। शिकायत के अनुसार खेत पर मोटर चालू करने को लेकर शुरू हुआ विवाद बाद में दो पक्षों के बीच गंभीर झड़प में बदल गया था। आरोप था कि विवाद के दौरान गाली-गलौज, मारपीट और हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार विवाद बढ़ने पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। आरोपियों पर धारदार हथियार और लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप लगाया गया था। इस घटना में कई लोगों को चोटें आई थीं और एक बुजुर्ग व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने विभिन्न आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की थी। इसी मामले में श्रीराम वर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। अब जेल के भीतर हुई उनकी मौत ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। परिजन यह जानना चाहते हैं कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति क्या थी, उन्हें कब और किस प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई तथा उनकी तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए। उनका कहना है कि जेल प्रशासन को इस संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। घटना के बाद जेलों में बंद कैदियों की स्वास्थ्य सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक अभिरक्षा में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्रशासन पर होती है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और स्पष्ट तथ्य सामने आना बेहद आवश्यक होता है ताकि किसी भी तरह की आशंका या विवाद की स्थिति समाप्त हो सके। फिलहाल मृतक के परिजन निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि मामले की सभी परिस्थितियों की जांच की जाएगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कैदी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही की भूमिका रही है।

IPL में मेगा ट्रेड का महाधमाका: पंत की दिल्ली में वापसी, कुलदीप से मजबूत हुई लखनऊ की गेंदबाजी

नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के समापन के साथ ही क्रिकेट जगत में एक ऐसा ट्रेड सामने आया है जिसने प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच हुए हाई प्रोफाइल खिलाड़ी विनिमय में भारतीय क्रिकेट के दो बड़े नाम शामिल हैं। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत एक बार फिर दिल्ली कैपिटल्स की जर्सी में नजर आएंगे जबकि अनुभवी स्पिनर कुलदीप यादव अब लखनऊ सुपर जायंट्स की ओर से मैदान में उतरेंगे। इस सौदे को हाल के वर्षों का सबसे चर्चित और प्रभावशाली ट्रेड माना जा रहा है। ऋषभ पंत की दिल्ली कैपिटल्स में वापसी को सही मायनों में घर वापसी कहा जा सकता है। उन्होंने अपने आईपीएल करियर का सबसे महत्वपूर्ण दौर दिल्ली के साथ बिताया था। वर्ष 2016 से 2024 तक पंत दिल्ली कैपिटल्स के लिए सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने 111 मुकाबले खेलकर फ्रेंचाइजी के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड बनाया। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और आक्रामक कप्तानी के दम पर उन्होंने टीम को कई यादगार जीत दिलाईं और दिल्ली को प्लेऑफ तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। आईपीएल 2025 के मेगा ऑक्शन में लखनऊ सुपर जायंट्स ने ऋषभ पंत को 27 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर खरीदा था। यह आईपीएल इतिहास की सबसे बड़ी बोली में से एक थी। हालांकि लखनऊ के साथ उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं चला और केवल दो सीजन बाद ही उन्होंने फिर से अपने पुराने क्रिकेटिंग घर का रुख कर लिया। अब दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 15 करोड़ रुपये की फीस पर दोबारा अपनी टीम में शामिल कर लिया है। माना जा रहा है कि पंत की वापसी से दिल्ली की बल्लेबाजी को मजबूती मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता भी बढ़ेगी। आने वाले सीजन में वह कप्तानी के बड़े दावेदार भी माने जा रहे हैं। दूसरी तरफ कुलदीप यादव के लिए यह बदलाव एक नए अध्याय की शुरुआत है। दिल्ली कैपिटल्स के साथ उनका प्रदर्शन लगातार शानदार रहा। वर्ष 2022 में टीम से जुड़ने के बाद कुलदीप ने पांच सीजन में 65 मुकाबलों में 72 विकेट हासिल किए। अपनी चाइनामैन गेंदबाजी के दम पर उन्होंने कई बार मैच का रुख पलटकर दिल्ली को जीत दिलाई। वह टीम के सबसे भरोसेमंद मैच विनर गेंदबाजों में शामिल रहे। अब 13.50 करोड़ रुपये की कीमत पर कुलदीप यादव लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा बन गए हैं। लखनऊ को उम्मीद है कि कुलदीप की मौजूदगी टीम की स्पिन गेंदबाजी को नई धार देगी। मध्य ओवरों में विकेट निकालने की उनकी क्षमता विपक्षी टीमों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। फ्रेंचाइजी प्रबंधन का मानना है कि कुलदीप टीम को पहली बार आईपीएल खिताब दिलाने के मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस ट्रेड ने दोनों टीमों की रणनीति को नया स्वरूप दिया है। दिल्ली ने जहां एक अनुभवी बल्लेबाज और संभावित कप्तान को वापस हासिल किया है वहीं लखनऊ ने अपनी गेंदबाजी आक्रमण को मजबूत बनाने का बड़ा दांव खेला है। अब क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अगले आईपीएल सीजन पर टिकी हैं जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि ऋषभ पंत अपनी पुरानी टीम के लिए कितना प्रभाव छोड़ते हैं और कुलदीप यादव लखनऊ के लिए कितने बड़े मैच विनर साबित होते हैं।

2 करोड़ की जमीन के लिए 1000 किलोमीटर का सफर, ICU एंबुलेंस से इंदौर पहुंचीं बुजुर्ग महिला; बोलीं- मेरा प्लॉट वापस दिला दीजिए

मध्य प्रदेश: के इंदौर में आयोजित कलेक्टर जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौजूद लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उत्तर प्रदेश के बिजनौर से गंभीर रूप से बीमार एक बुजुर्ग महिला को उनके परिजन विशेष आईसीयू एंबुलेंस के जरिए करीब 1000 किलोमीटर का सफर तय कर इंदौर लेकर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि उनकी करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा कर लिया गया है और लंबे समय से शिकायतों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। परिजनों के अनुसार विवाद गांधीनगर क्षेत्र स्थित दो प्लॉटों को लेकर है, जो वर्ष 1969 में एक आवासीय सहकारी संस्था द्वारा बुजुर्ग महिला के नाम आवंटित किए गए थे। बाद में संबंधित संपत्तियों का नामांतरण भी विधिवत उनके नाम पर दर्ज किया गया था। परिवार का दावा है कि वे कई दशकों से इन जमीनों के वैध मालिक रहे हैं और सभी आवश्यक दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि वर्षों पहले जब वे बिजनौर में रहने चले गए थे, तब संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी कुछ रिश्तेदारों को सौंपी गई थी। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने कथित रूप से सोसायटी प्रबंधन के साथ मिलीभगत की और फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। परिवार का दावा है कि वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से विवादित संपत्ति की कीमत लगभग दो करोड़ रुपये है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि विभिन्न स्तरों पर आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे उन्हें न्याय के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रही बुजुर्ग महिला को आखिरकार परिवार विशेष चिकित्सा सुविधाओं से लैस आईसीयू एंबुलेंस में इंदौर लेकर पहुंचा। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी पूरी बात रखी और जमीन वापस दिलाने की मांग की। परिवार का कहना है कि यह केवल संपत्ति का विवाद नहीं, बल्कि कई वर्षों से चल रही कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का मुद्दा है, जिसने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है। जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने भी बुजुर्ग महिला की स्थिति और उनके संघर्ष को गंभीरता से देखा। लंबी दूरी तय कर स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद न्याय की उम्मीद में उनका इंदौर पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो उन्हें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। मामले में परिवार की ओर से प्रस्तुत आवेदन प्राप्त करने के बाद जिला प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और आरोपों की समीक्षा कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है। परिवार का कहना है कि अब उनकी अंतिम उम्मीद प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है और उन्हें भरोसा है कि निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी। यह मामला एक बार फिर संपत्ति विवादों, दस्तावेजों की सुरक्षा और लंबे समय तक लंबित रहने वाली शिकायतों को लेकर कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल परिवार प्रशासनिक जांच के परिणाम का इंतजार कर रहा है और उम्मीद जता रहा है कि वर्षों से चली आ रही उनकी परेशानी का समाधान जल्द निकलेगा।

इंडस्ट्री की चमक के पीछे का कड़वा सच कैरेक्टर आर्टिस्ट्स के साथ होता है भेदभाव

नई दिल्ली  । बॉलीवुड और टेलीविजन इंडस्ट्री की चमक दमक दूर से जितनी आकर्षक दिखाई देती है वास्तविकता उतनी ही अलग और कई बार चौंकाने वाली होती है। पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाले कई कलाकारों को पर्दे के पीछे सम्मान और सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। हाल ही में वेब सीरीज पंचायत में क्रांति देवी का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुईं अभिनेत्री सुनीता राजवार और अभिनेता जतिन नेगी ने इंडस्ट्री के इसी कड़वे सच को सामने रखा है। एक बातचीत के दौरान दोनों कलाकारों ने बताया कि फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कलाकारों के साथ उनकी भूमिका और लोकप्रियता के आधार पर व्यवहार किया जाता है। जतिन नेगी का कहना है कि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को तब तक पूरा सम्मान नहीं मिलता जब तक वे परेश रावल या अनुपम खेर जैसे बड़े नाम न बन जाएं। उन्होंने बताया कि बड़े कलाकारों को कई वैनिटी वैन और पूरा स्टाफ उपलब्ध कराया जाता है जबकि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को सीमित सुविधाएं मिलती हैं। कई बार उन्हें अन्य कलाकारों के साथ वैनिटी वैन साझा करनी पड़ती है। जतिन ने कहा कि छोटे और बैकग्राउंड कलाकारों की स्थिति और भी मुश्किल होती है। उन्हें कई कलाकारों के साथ एक ही वैन शेयर करनी पड़ती है और अक्सर बुनियादी सुविधाओं के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार कलाकारों को उनके काम का भुगतान 90 दिनों बाद मिलता है जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ जाती हैं। अभिनेत्री सुनीता राजवार ने भी सेट पर होने वाले भेदभाव को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यदि कोई कलाकार लीड रोल में होता है तो पूरा सेट उसी के इर्द गिर्द घूमता है। उसे बेहतर कमरे बेहतर सुविधाएं और पूरा सहयोग मिलता है। वहीं छोटे किरदार निभाने वाले कलाकारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार स्पॉटबॉय तक उन्हें महत्व नहीं देते। जतिन नेगी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब वह बैकग्राउंड रोल कर रहे थे और सेट पर उन्हें खाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में कलाकारों को ए बी और सी कैटेगरी में बांट दिया जाता है। वरिष्ठ और लोकप्रिय कलाकारों के लिए अलग भोजन व्यवस्था होती है जबकि जूनियर और बैकग्राउंड कलाकारों को अलग सेक्शन में खाना दिया जाता है। उन्होंने एक पुराना अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक शूटिंग के दौरान उन्हें उनके गेटअप की वजह से खाने के सेक्शन में प्रवेश नहीं दिया गया। काफी देर तक समझाने और प्रोडक्शन टीम से संपर्क करने के बाद उन्हें खाना मिला। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्हें समाज से अलग कर दिया गया हो। इतना ही नहीं अलग-अलग कैटेगरी के कलाकारों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता में भी बड़ा अंतर होता है। दोनों कलाकारों का मानना है कि इंडस्ट्री में यह भेदभाव केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है बल्कि सम्मान और व्यवहार में भी साफ दिखाई देता है। उनका कहना है कि प्रतिभा और मेहनत के आधार पर सभी कलाकारों को बराबरी का सम्मान मिलना चाहिए क्योंकि किसी भी फिल्म या शो की सफलता में हर कलाकार का योगदान महत्वपूर्ण होता है। इन खुलासों ने एक बार फिर मनोरंजन जगत की उस सच्चाई को सामने ला दिया है जिस पर अक्सर चर्चा कम होती है। दर्शकों के लिए पर्दे पर दिखने वाली भव्य दुनिया के पीछे कई ऐसे कलाकार हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष के साथ-साथ असमानता का भी सामना कर रहे हैं।

Morena news: एक चौकीदार के भरोसे चल रहा सरकारी दफ्तर, अधिकारी साल में सिर्फ दो बार आते हैं!

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Morena news: मुरैना। जिले के भूजल एवं मृदा-जल संरक्षण विभाग के कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यालय में अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे कार्यालय का संचालन चौकीदार के भरोसे चलता नजर आ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, कार्यालय में पदस्थ सब इंजीनियर हरिशंकर शाक्य सालभर में केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर ध्वजारोहण के लिए ही कार्यालय पहुंचते हैं। इसके अलावा कार्यालय में उनकी उपस्थिति बेहद कम रहती है। Gwalior Cyber Crime: रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से 1.57 करोड़ ठगे, फर्जी IPS ने लगाया चुना बदहाल व्यवस्थाएं, टूटा पड़ा है फर्नीचर स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यालय की स्थिति भी काफी खराब है। परिसर में टूटी हुई कुर्सियां और मेजें पड़ी हुई हैं, जबकि कई जरूरी संसाधनों की भी कमी बताई जा रही है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण विभागीय कार्यों पर असर पड़ रहा है और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश बनी आफत: झारखंड में आकाशीय बिजली से 8 लोगों की मौत, मौसम विभाग का अलर्ट जारी जांच और कार्रवाई की मांग क्षेत्रवासियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा विभागीय व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कार्यालय की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

पुर्तगाल की पांच सितारा जीत रोनाल्डो के डबल अटैक ,से उज्बेकिस्तान पस्त

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में पुर्तगाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उज्बेकिस्तान को 5-0 से हराकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं। इस जीत के सबसे बड़े नायक रहे दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो जिन्होंने दो शानदार गोल दागकर न सिर्फ टीम को बड़ी जीत दिलाई बल्कि विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ दिया। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। 41 वर्षीय रोनाल्डो ने इस मुकाबले में ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो अब तक कोई खिलाड़ी नहीं बना सका था। वह दुनिया के पहले फुटबॉलर बन गए हैं जिन्होंने छह अलग-अलग फीफा वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में गोल करने का कारनामा किया है। यह उपलब्धि उनके लंबे और शानदार करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। मैच की शुरुआत से ही पुर्तगाल ने आक्रामक खेल दिखाया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार उज्बेकिस्तान के डिफेंस पर दबाव बनाया। रोनाल्डो ने अपने अनुभव और बेहतरीन फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे। उनके गोलों ने मैच का रुख पूरी तरह पुर्तगाल के पक्ष में मोड़ दिया। टीम के अन्य खिलाड़ियों ने भी शानदार तालमेल दिखाते हुए कुल पांच गोल किए और उज्बेकिस्तान को मुकाबले में वापसी का कोई मौका नहीं दिया। रोनाल्डो के लिए यह मुकाबला बेहद खास रहा क्योंकि पिछले मैच में वह अपनी छाप छोड़ने में सफल नहीं रहे थे। कांगो के खिलाफ खेले गए मुकाबले में पुर्तगाल को 1-1 की बराबरी से संतोष करना पड़ा था और उस मैच में रोनाल्डो गोल नहीं कर सके थे। इसके बाद कई फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे कि क्या उन्हें अब भी शुरुआती एकादश में जगह मिलनी चाहिए। हालांकि उज्बेकिस्तान के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया। गोल करने के बाद रोनाल्डो ने अपना मशहूर SIUUU सेलिब्रेशन किया जिसे देखकर स्टेडियम में मौजूद हजारों प्रशंसक उत्साह से झूम उठे। इसके बाद वह अपने साथियों के साथ बेंच की ओर दौड़े और जीत का जश्न मनाया। यह दृश्य मैच के सबसे यादगार पलों में शामिल रहा। इस जीत के साथ पुर्तगाल के ग्रुप चरण में चार अंक हो गए हैं और टीम की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं। अब पुर्तगाल का अगला और अंतिम ग्रुप मुकाबला कोलंबिया के खिलाफ होगा जो काफी अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर उज्बेकिस्तान की टीम अटलांटा में कांगो से भिड़ेगी और टूर्नामेंट में बने रहने के लिए उसे हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।इस बीच अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी लियोनेल मेसी भी टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। मेसी अब तक सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों को रोनाल्डो और मेसी के बीच एक और यादगार मुकाबले जैसी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। फिलहाल पूरे फुटबॉल जगत की नजरें रोनाल्डो पर टिकी हैं जिन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और महान खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से इतिहास लिखते हैं।

Gwalior Cyber Crime: रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से 1.57 करोड़ ठगे, फर्जी IPS ने लगाया चुना

Digital Arrest Scam

Gwalior Cyber Crime: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड 69 वर्षीय लैब टेक्नीशियन महिला से साइबर ठगों ने 1 करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपए ठग लिए। आरोपियों ने खुद दिल्ली पुलिस का आईपीएस अधिकारी बताया और महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद 33 दिनों तक अलग-अलग खातों से रकम ट्रांसफर करवाई गयी। महिला ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई और जांच की मांग की। 10 मई को आया था कॉल महिला ने क्राइम ब्रांच को बताया कि 10 मई को उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम पर एक मोबाइल नंबर और बैंक खाता गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद वीडियो कॉल पर पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। Gwalior Teacher Accused: महिला टीचर का आरोप; प्रिंसिपल ने कॉलेज में कपड़े फाड़े, रोती हुई शिक्षिका का वीडियो वायरल 33 दिनों में किये पैसे ट्रांसफर ठगों ने दावा किया कि उनके खाते से 6.80 करोड़ रुपए के अवैध लेनदेन हुए हैं और जांच पूरी होने तक उन्हें अपनी रकम सुरक्षित खातों में ट्रांसफर करनी होगी। डर और मानसिक दबाव में आकर महिला ने 33 दिनों में अलग-अलग बैंक खातों में 1.57 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में आरोपियों ने क्लीन चिट देने का भरोसा दिया, लेकिन कुछ दिन बाद सभी नंबर बंद हो गए। संदेह होने पर महिला ने जांच कराई तो साइबर ठगी का खुलासा हुआ। MP Politics: बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक साधे गए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण मामले की जांच कर रही पुलिस ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि साइबर सेल ने संबंधित बैंक खातों को होल्ड कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साइबर एक्सपर्ट और पुलिस की टीम मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जांच एजेंसी, पुलिस अधिकारी, सीबीआई या टेलीकॉम विभाग के नाम पर आने वाले कॉल से घबराएं नहीं। किसी भी संदिग्ध कॉल की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

ब्रिटेन की अदालत से नीरव मोदी को बड़ा झटका, बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

नई दिल्ली। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की हाईकोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में उन्हें व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर देनदार मानते हुए बकाया राशि और ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद नीरव मोदी पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी आ सकती है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने अपने आदेश में कहा कि नीरव मोदी द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी वैध और लागू करने योग्य है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन पर 4.1 मिलियन डॉलर (करीब 38.9 करोड़ रुपये) की मूल राशि बकाया है, जिस पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा।अदालत में नहीं दे सके ठोस जवाबसुनवाई के दौरान नीरव मोदी या उनकी कानूनी टीम की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण पेश नहीं किया गया। अपने बचाव में नीरव ने यह तर्क दिया था कि संबंधित गारंटी लागू नहीं की जा सकती और उन्हें बैंक की ओर से भेजी गई वैध मांगें प्राप्त नहीं हुई थीं। मामला वर्ष 2012 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को ऋण उपलब्ध कराया था। बाद में 3 अगस्त 2013 को नीरव मोदी ने इस ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी।पीएनबी घोटाले के बाद शुरू हुई वसूली प्रक्रियावर्ष 2018 में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले के सामने आने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने बकाया ऋण की वसूली की प्रक्रिया शुरू की। मार्च और अप्रैल 2018 में कंपनी और नीरव मोदी को नोटिस भेजे गए, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद 8 मार्च 2024 को बैंक को 4.1 मिलियन डॉलर की मूल राशि और उस पर लागू ब्याज की वसूली के लिए सारांश निर्णय प्राप्त हुआ। बैंक ने अक्टूबर 2025 में नीरव मोदी को एक और मांग नोटिस भी भेजा था। कोर्ट ने गारंटी को माना वैधफैसले में न्यायाधीश टिंकलर ने उल्लेख किया कि 17 फरवरी 2018 को नीरव मोदी ने बैंक को भेजे गए एक ईमेल में मीडिया में चल रही खबरों के कारण कारोबारी गतिविधियां प्रभावित होने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि समूह की कंपनियां बैंकों का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं। हालांकि नीरव मोदी ने अदालत में दावा किया कि उन्हें अप्रैल 2018 और अक्टूबर 2025 के नोटिस नहीं मिले, लेकिन न्यायाधीश ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि दोनों मांग पत्र उन्हें प्राप्त हुए थे। इसी आधार पर अदालत ने व्यक्तिगत गारंटी को पूरी तरह वैध और लागू करने योग्य माना।