CM MOHAN YADAV NEWS: CM मोहन यादव ने राज्यपाल से की मुलाकात, UCC को लेकर भी हुई चर्चा

CM MOHAN YADAV NEWS: भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी राज्यपाल को दी। UCC लागू करने कि तैयारी बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि UCC के संबंध में प्रदेशभर से 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। साथ ही, UCC को लेकर आगे की कार्ययोजना से भी राज्यपाल को अवगत कराया गया। टी20 सीरीज में आयरलैंड के हाथों 0-2 से पिटी भारतीय टीम, निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर निशाने पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की प्रगति की जानकारी देते हुए जल संरक्षण और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए भी जनकरी दी। इसके अलावा आगामी गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा के दौरान आयोजित किए जाने वाले शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी साझा की। बैठक के दौरान प्रदेश की चार कृषि उपजों को मिले जीआई (GI) टैग से किसानों को मिलने वाले लाभों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि इससे प्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। GWALIOR CYBER CRIME: 1.58 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में बड़ा खुलासा, नासिक से लोहा कारोबारी गिरफ्तार कईं परियोनाओं पर हुई बैठक मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार, एमएसएमई और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन, औद्योगिक निवेश बढ़ाने तथा रोजगार सृजन के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत की। बैठक में प्रदेश के समग्र विकास और भविष्य की योजनाओं पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।
यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच विपक्षी राजनीति में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि राज्य में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन होता है, तो कांग्रेस बराबरी की भागीदारी की अपेक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उत्तर प्रदेश में उसे सम्मानजनक तथा समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। राजेंद्र गौतम ने कहा कि कांग्रेस का देश के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मजबूत पहचान है। उनके अनुसार भारतीय जनता पार्टी का प्रभावी मुकाबला केवल एक मजबूत राष्ट्रीय दल ही कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय दलों की अपनी भूमिका है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति अलग है। इसी आधार पर उन्होंने संभावित गठबंधन में बराबरी की भागीदारी की बात कही। उन्होंने विपक्षी दलों के बीच व्यापक एकजुटता की भी वकालत की। उनका कहना था कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली सभी राजनीतिक शक्तियों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी सहित उन सभी दलों के साथ सहयोग की संभावना जताई जो भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के पक्षधर हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्यभर में अपने संगठन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने घोषणा की कि जुलाई से प्रदेशव्यापी दौरा शुरू किया जाएगा, जिसके दौरान कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के साथ संगठन विस्तार पर भी काम किया जाएगा। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाना प्राथमिकता होगी, ताकि चुनावी तैयारी प्रभावी ढंग से की जा सके। राजेंद्र गौतम ने राज्य सरकार पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और विभिन्न सरकारी निर्णयों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन का स्वरूप तय होता है, तो सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद साझा घोषणापत्र तैयार किया जाएगा। उनके अनुसार गठबंधन की राजनीति में सभी दलों की राय और प्राथमिकताओं को शामिल किया जाएगा, ताकि जनता के सामने एक साझा और स्पष्ट एजेंडा रखा जा सके। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के इस रुख को आगामी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सीट बंटवारे को लेकर दिए गए इस बयान के बाद विपक्षी दलों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिक गई हैं। आने वाले महीनों में गठबंधन की संभावनाएं, सीटों का फार्मूला और साझा चुनावी रणनीति प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बनने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर का 'धदकई' गांव बना भारत का 'साइलेंट विलेज', जेनेटिक म्यूटेशन के कारण सन्नाटे के साए में जीने को मजबूर हैं ग्रामीण

नई दिल्ली। भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की सुदूर और बर्फीली पहाड़ियों के बीच बसा ‘धदकई’ गांव इन दिनों अपनी एक बेहद अनोखी और संवेदनशील भौगोलिक एवं चिकित्सीय स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव को देश में ‘द साइलेंट विलेज ऑफ इंडिया’ यानी भारत का शांत गांव कहा जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत दिखने वाले इस गांव की असल हकीकत यह है कि यहां की एक बहुत बड़ी आबादी जन्मजात रूप से न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है। इस छोटे से पर्वतीय क्षेत्र में पसरी यह खामोशी कोई प्राकृतिक सन्नाटा नहीं, बल्कि एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी का नतीजा है। भौगोलिक दृष्टि से यह गांव जम्मू से लगभग 260 किलोमीटर दूर दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित है, जहां मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से ताल्लुक रखने वाले गुज्जर मुस्लिम समुदाय के लोग निवास करते हैं। करीब 2,000 की कुल आबादी वाले इस गांव में वर्तमान में 90 से अधिक लोग पूरी तरह से मूक-बधिर हैं। गांव की सामाजिक संरचना के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां के कुल 105 परिवारों में से 55 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनके घर में कम से कम एक या उससे अधिक सदस्य इस शारीरिक अक्षमता के साथ जीने को मजबूर हैं। कई घरों में स्थिति इतनी गंभीर है कि सात में से छह बच्चे मूक-बधिर पैदा हुए हैं। इस अनोखी चुनौती से निपटने के लिए ग्रामीणों ने आपस में संवाद का एक अनूठा तरीका खोज निकाला है। धदकई गांव के लोगों ने अपनी एक स्थानीय सांकेतिक भाषा (लोकल साइन लैंग्वेज) विकसित कर ली है। खास बात यह है कि गांव के जो लोग सामान्य रूप से सुन और बोल सकते हैं, वे भी इस इशारों की भाषा में पूरी तरह पारंगत हैं। इसके चलते पूरा गांव बिना किसी बाहरी रुकावट या हिचकिचाहट के आपस में रोजमर्रा की बातें बेहद आसानी से साझा कर लेता है। स्थानीय रिकॉर्ड्स के अनुसार, गांव में मूक-बधिर बच्चे के जन्म का पहला आधिकारिक मामला वर्ष 1901 में दर्ज किया गया था, जो समय के साथ लगातार बढ़ता चला गया। लंबे समय तक स्थानीय समाज इस स्थिति को दैवीय अभिशाप या वहां की मिट्टी-पानी का दोष मानता रहा, लेकिन हालिया वर्षों में जब वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की विभिन्न टीमों ने इस पर व्यापक शोध किया, तो एक चौंकाने वाली चिकित्सीय वजह सामने आई। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ‘जेनेटिक क्लस्टर’ या ‘फाउंडर्स इफेक्ट’ कहा जाता है। अनुसंधान में पाया गया कि गुज्जर समुदाय के लोग सदियों से अपनी ही जनजाति और बेहद करीबी रिश्तेदारों के भीतर शादियां करते आ रहे हैं। इस सीमित जेनेटिक पूल (डीएनए संरचना) के कारण मानव शरीर के ‘ओटीओएफ’ (ओटोफर्लिन) नामक जीन में गंभीर विकृति आ गई है, जो कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल भेजने में असमर्थ हो जाता है। चिकित्सीय विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इस अनुवांशिक चक्रव्यूह को तोड़ने का एकमात्र व्यावहारिक उपाय यह है कि गांव की युवा पीढ़ी अपने रिश्तेदारों या अंतर्जातीय कम्युनिटी से बाहर शादियां करना शुरू करे। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने शादी से पहले जेनेटिक रिस्क की जांच के लिए ‘कलर-कोडेड कार्ड्स’ बनाने की वकालत की है। वर्तमान में भारतीय सेना और विभिन्न गैर-सरकारी सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस शांत वादी में उम्मीद की नई किरण जगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत यहां के युवाओं को ‘इंडियन साइन लैंग्वेज’ सिखाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम तेज कर दी गई है।
कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम दर्ज हुआ बेहद शर्मनाक रिकॉर्ड, आयरलैंड के हाथों क्लीन स्वीप के बाद कप्तानी और बल्लेबाजी पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली। आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतने के ठीक बाद भारतीय क्रिकेट टीम को एक ऐसा जख्म मिला है, जिसे प्रशंसक लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। चयनकर्ताओं द्वारा सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपने का फैसला पहले ही दौरे पर बेहद निराशाजनक साबित हुआ है। कप्तानी के अपने पहले विदेशी असाइनमेंट पर गए अय्यर के नेतृत्व में भारतीय टीम को आयरलैंड जैसी कमतर आंकी जाने वाली टीम के खिलाफ दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा है। इस करारी शिकस्त के साथ ही श्रेयस अय्यर के नाम एक बेहद अनचाहा और शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। इस संक्षिप्त श्रृंखला के दौरान भारतीय टीम को दोनों ही मुकाबलों में परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने पड़े। बेलफास्ट में शुक्रवार को खेले गए पहले मैच में मेजबान आयरलैंड ने भारत को 34 रनों के बड़े अंतर से पटखनी दी थी। इसके बाद रविवार को उसी मैदान पर खेले गए दूसरे बेहद रोमांचक मुकाबले में भी भारतीय टीम लक्ष्य से महज 1 रन दूर रह गई। इन दोनों लगातार पराजयों के कारण श्रेयस अय्यर भारतीय पुरुष क्रिकेट इतिहास में अपनी कप्तानी के शुरुआती दोनों टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच हारने वाले महज दूसरे कप्तान बन गए हैं। उनसे पहले जून 2022 में ऋषभ पंत ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में बतौर कप्तान अपने शुरुआती दो मैच गंवाए थे। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी को अपनी कप्तानी में फाइनल तक पहुंचाने का गौरव रखने वाले 31 वर्षीय श्रेयस अय्यर के लिए यह सीरीज व्यक्तिगत तौर पर भी किसी बुरे सपने जैसी रही। कप्तानी के दबाव के बीच उनका अपना बल्ला पूरी तरह खामोश नजर आया। पहले टी20 मैच में उन्होंने महज 3 रन बनाए, जबकि दूसरे मुकाबले में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरने के बाद वे सिर्फ 10 रनों का योगदान दे सके। कप्तान के इस लचर प्रदर्शन ने मध्यक्रम को पूरी तरह संकट में डाल दिया, जिसका सीधा असर टीम के नतीजों पर देखने को मिला। आयरलैंड के खिलाफ मिली यह शिकस्त ऐतिहासिक रूप से भी भारतीय टीम के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक धब्बा बन गई है। पहले मैच में मिली हार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में आयरलैंड के खिलाफ भारत की पहली पराजय थी। वहीं, दूसरे मैच में मिली एक रन की हार के साथ ही भारत ने इतिहास में पहली बार आयरलैंड के विरुद्ध कोई टी20 सीरीज गंवाई है। इस शर्मनाक प्रदर्शन के कारण भारतीय टीम का पिछले 29 महीनों से चला आ रहा लगातार 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीतने का अजेय रथ और शानदार लय भी पूरी तरह बिखर गई है। इस बेहद खराब शुरुआत के बाद अब श्रेयस अय्यर और भारतीय टीम प्रबंधन के सामने साख बचाने की बड़ी चुनौती है। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम अगले सप्ताह इंग्लैंड के दौरे पर रवाना होगी, जहां उसे 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 3 वनडे मैचों की सीरीज खेलनी है। टी20 सीरीज के लिए चयनकर्ताओं ने उसी स्क्वॉड को बरकरार रखा है और कमान अय्यर के हाथों में ही रहेगी। यह सीरीज 1 जुलाई से चेस्टर-ले-स्ट्रीट में शुरू होने जा रही है। इस बीच घरेलू क्रिकेट के 15 वर्षीय युवा धुरंधर वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने की मांग तेज हो गई है, जो इंग्लैंड दौरे पर अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू कर सकते हैं।
टी20 सीरीज में आयरलैंड के हाथों 0-2 से पिटी भारतीय टीम, निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर निशाने पर

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम को विदेशी सरजमीं पर एक बड़ा झटका लगा है, जहां आयरलैंड के खिलाफ खेली गई दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में उसे 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा है। इस चौंकाने वाली और निराशाजनक हार के बाद वैश्विक क्रिकेट जगत में भारतीय टीम के प्रदर्शन की भारी आलोचना हो रही है। इसी कड़ी में आइसलैंड क्रिकेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक बेहद तंजिया पोस्ट साझा की है, जिसने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों और प्रबंधन की चोट पर नमक छिड़कने का काम किया है। आइसलैंड क्रिकेट ने सीधे तौर पर भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की कोचिंग क्षमताओं पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस बयान में आइसलैंड क्रिकेट ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि उनकी अपनी कोचिंग टीम में गौतम गंभीर को नियुक्त करने की कोई योजना नहीं है। पोस्ट में आगे लिखा गया कि गंभीर में निश्चित रूप से एक अलग तरह की प्रतिभा है, क्योंकि स्टार खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम को लेकर आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ इस तरह के परिणाम देना वाकई एक असाधारण और विशिष्ट काबिलियत को दर्शाता है। इस तीखे कटाक्ष के बाद क्रिकेट गलियारों में भारतीय टीम के रणनीतिक स्तर और कोचिंग स्टाफ की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। श्रृंखला के घटनाक्रम की बात करें तो बेलफास्ट में खेले गए पहले मुकाबले में भारत को 34 रनों की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इसके बाद रविवार को खेले गए दूसरे और अंतिम मैच में, जो कि बारिश से प्रभावित रहा, आयरलैंड ने सूझबूझ का परिचय देते हुए भारतीय टीम को रोमांचक मोड़ पर महज एक रन से पराजित कर दिया। हालांकि पूरी सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजों ने अपेक्षाकृत अनुशासित और सराहनीय प्रदर्शन किया, लेकिन बल्लेबाजों के निराशाजनक रवैये ने टीम की लुटिया डुबो दी। दोनों ही मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजी क्रम पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह बिखरता नजर आया। इस सीरीज में टीम इंडिया की अगुवाई कर रहे कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर और हाल ही में समाप्त हुए टी20 विश्व कप 2026 में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन जैसे स्थापित खिलाड़ी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। पूरे दौरे पर इन प्रमुख बल्लेबाजों का बल्ला पूरी तरह खामोश रहा, जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। इस हार के साथ ही श्रेयस अय्यर भारत के ऐसे दूसरे कप्तान बन गए हैं, जिन्हें अपनी कप्तानी के शुरुआती दोनों टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में पराजय का स्वाद चखना पड़ा है। इस लचर प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं और टीम संयोजन पर भी सवाल उठने लगे हैं। इस करारी हार के झटके से उबरने के लिए भारतीय टीम के पास बेहद कम समय है, क्योंकि उसके सामने अगली बड़ी चुनौती इंग्लैंड की है। भारतीय दल इसी सप्ताह पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए इंग्लैंड का दौरा करने वाला है। इस दौरे का पहला मुकाबला 1 जुलाई को चेस्टर-ले-स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड पर खेला जाएगा। इसके बाद आगामी मैच क्रमशः 4, 7, 9 और 11 जुलाई को ओल्ड ट्रैफर्ड, नॉटिंघम, ब्रिस्टल और साउथेम्प्टन में आयोजित होने हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए इंग्लैंड का यह दौरा अपनी रणनीतियों को सुधारने और साख बचाने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है।
शादी से पहले मंसूर अली खान पटौदी संग लिव-इन में रहती थीं शर्मिला टैगोर, अंतरधार्मिक विवाह के कारण माता-पिता को टेलीग्राम पर मिलती थीं धमकियां

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नवाब मंसूर अली खान पटौदी का रिश्ता हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में एक साक्षात्कार में अभिनेत्री ने अपने इस ऐतिहासिक रिश्ते से जुड़े कई अनसुने और चौंकाने वाले पहलुओं को साझा किया है। शर्मिला टैगोर ने बताया कि वर्ष 1968 में विवाह बंधन में बंधने से पहले वे और मंसूर अली खान एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे। उस दौर के रूढ़िवादी सामाजिक ताने-बाने को देखते हुए एक शीर्ष अभिनेत्री और स्टार क्रिकेटर का शादी से पहले साथ रहना बेहद असाधारण और साहसिक कदम माना जाता था। इस अंतरधार्मिक और अंतर्जातीय रिश्ते को लेकर तत्कालीन समाज और कट्टरपंथियों में भारी आक्रोश था। अभिनेत्री ने खुलासा किया कि उनके इस फैसले के कारण उनके माता-पिता को लगातार धमकी भरे टेलीग्राम भेजे जाते थे, जिनमें जान से मारने और गोलियां चलाने की बातें लिखी होती थीं। इस वजह से उनके पूरे परिवार में लंबे समय तक डर और भारी मानसिक तनाव का माहौल बना रहा। इसके साथ ही फिल्म जगत और खेल जगत के कई करीबी मित्रों तथा शुभचिंतकों ने भी इस शादी को लेकर दोनों को गंभीर चेतावनी दी थी। मशहूर फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा, जो शर्मिला टैगोर के बेहद करीबी मित्र थे, उन्होंने भी शादी से पहले अभिनेत्री को सचेत किया था। यश चोपड़ा का मानना था कि नवाबों की जीवनशैली और प्रतिबद्धता पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए यह रिश्ता आगे चलकर असफल हो सकता है। समाज और मीडिया का भी दोनों परिवारों पर अत्यधिक दबाव था और कई लोगों ने तो शादी होने से पहले ही इस रिश्ते के विफल होने की घोषणा कर दी थी। इन तमाम सामाजिक बाधाओं और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे। लगातार मिल रही धमकियों और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए शादी के आयोजन स्थल को लेकर भी भारी अनिश्चितता बनी हुई थी। शुरुआत में यह तय किया गया था कि सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित जगह फोर्ट विलियम में विवाह संपन्न कराया जाएगा। हालांकि, अंतिम समय में अतिथियों की सूची और प्रशासनिक अनुमतियों को लेकर कुछ तकनीकी दिक्कतें आ गईं, जिसके कारण मिली हुई अनुमति रद्द कर दी गई। सुरक्षा खतरों के बीच आखिरी मौके पर विवाह का वेन्यू बदलना पड़ा और अंततः एक विदेशी राजदूत के आवास पर बेहद सुरक्षित माहौल में इस विवाह की रस्में पूरी की गईं। तमाम विरोधों, धमकियों और सामाजिक दबावों को दरकिनार कर हुआ यह विवाह आगे चलकर भारतीय फिल्म और खेल जगत के सबसे सफल वैवाहिक रिश्तों में से एक साबित हुआ। इस विवाह से उनके तीन बच्चे सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान हुए। आज शर्मिला टैगोर अपने नाती-पोतों के साथ एक सुखी और संतुष्ट जीवन व्यतीत कर रही हैं। उनका यह हालिया बयान दर्शाता है कि दशकों पहले भी अपनी मर्जी से जीवन जीने और जीवनसाथी चुनने के लिए फिल्मी सितारों को किस कदर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।
बॉलीवुड फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी से 20 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग, फोन पर जान से मारने की धमकी मिलने के बाद मुंबई पुलिस जांच में जुटी

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत के जाने-माने निर्देशक रोहित शेट्टी को एक बार फिर असामाजिक तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया है। शनिवार को उनके मुंबई स्थित कार्यालय में एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने बेहद आक्रामक लहजे में बात की। फोन करने वाले शख्स ने निर्देशक से सीधे तौर पर 20 करोड़ रुपये की मोटी रकम की मांग की है। धमकी देने वाले अपराधी ने साफ तौर पर कहा कि यदि समय रहते इस फिरौती की रकम का भुगतान नहीं किया गया, तो निर्देशक को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है। इस अचानक आई धमकी भरी कॉल के बाद फिल्म जगत और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। धमकी मिलने के तुरंत बाद रोहित शेट्टी की प्रबंधकीय टीम ने बिना कोई समय गंवाए सक्रियता दिखाई। टीम द्वारा इस पूरी घटना की लिखित जानकारी और शिकायत मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। मामले की संवेदनशीलता और वीआईपी सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। पुलिस ने रंगदारी और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अपनी तफ्तीश तेज कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से उस फोन नंबर को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे यह कॉल की गई थी। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में कॉल डेटा रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ वॉयस एनालिसिस तकनीक का भी सहारा ले रही हैं। संदिग्ध की आवाज और उसके बात करने के तरीके का मिलान पुराने धमकी भरे मामलों से किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक किसी भी आपराधिक संगठन ने आधिकारिक रूप से इस कृत्य की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन प्राथमिक संशयों के आधार पर जांच की सुई एक कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ घूमती नजर आ रही है। पुलिस अधिकारी सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर हर संभावित कूटनीति पर काम कर रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब रोहित शेट्टी को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले इसी वर्ष फरवरी महीने में दो अज्ञात हमलावरों ने उनके मुंबई स्थित आवास के बाहर अंधाधुंध हवाई फायरिंग की थी। उस समय हुई पुलिसिया कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का हाथ होने की बात पुख्ता हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए करीब 15 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा था। पुरानी कड़ियों को जोड़ते हुए सुरक्षा बल इस नए घटनाक्रम को उसी नेटवर्क से जोड़कर देख रहे हैं। सिनेमा उद्योग के दिग्गजों को इस तरह निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। रोहित शेट्टी से पहले बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और सलमान खान को भी इसी तरह के गिरोहों द्वारा लगातार धमकियां दी जा चुकी हैं। सलमान खान के आवास पर हुए हमले और लगातार मिल रहे इनपुट के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए गृह विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मुंबई पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही इस मामले के मुख्य आरोपी तक पहुंच जाएंगे और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।
GWALIOR CYBER CRIME: 1.58 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में बड़ा खुलासा, नासिक से लोहा कारोबारी गिरफ्तार

GWALIOR CYBER CRIME: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में साइबर ठगी के मामले आये दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला हालही में सामने आया है जहां 69 वर्षीय रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से 1.58 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी की गई। मामले में क्राइम ब्रांच को पहली बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से 19.50 लाख रुपये आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर ग्वालियर ला रही है, जहां उससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हो पायेगा। इराक दौरे पर अराघची ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की अहम वार्ता, ईरान-अमेरिका एमओयू, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज तनाव पर हुई व्यापक चर्चा 33 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट नेहरू पेट्रोल पंप के पास रहने वाली 69 वर्षीय मीनाक्षी नाखरे ने 23 जून को क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई कि 10 मई को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम से एक दूसरा मोबाइल नंबर चल रहा है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा रहा है। इसके बाद ठगों ने खुद को आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया और 33 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर कर रखा। इस दौरान डर और दबाव बनाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। जुलाई में OTT पर एंटरटेनमेंट का धमाका नेटफ्लिक्स से जियोहॉटस्टार तक रिलीज होंगी ये बड़ी फिल्में और सीरीज नासिक से लोहा कारोबारी गिरफ्तार जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा महाराष्ट्र के नासिक स्थित इकोब्राइट ग्रीन कंक्रीट इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के आईसीआईसीआई बैंक खाते में भेजा गया था। जांच के बाद पुलिस ने कंपनी के संचालक और लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि कारोबार में नुकसान होने के कारण वह इंटरनेट पर पर्सनल लोन की तलाश कर रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक म्यूल अकाउंट एजेंट से हुई, जिसने उसके बैंक खाते का इस्तेमाल कराया और बदले में 10 प्रतिशत कमीशन दिया। हालांकि, आरोपी का कहना है कि उसे इस रकम के साइबर ठगी से जुड़े होने की जानकारी नहीं थी। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है। महज 3 साल 9 महीने की जुड़वां बहनों ने रचा इतिहास दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर बनकर लंदन में जीता सम्मान मामले की जांच में क्राइम ब्रांच क्राइम ब्रांच का मानना है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का मामला है। जिन अन्य खातों में रकम भेजी गई थी, उनके खाताधारकों और म्यूल अकाउंट नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।
असम-अरुणाचल में बारिश बनी आफत, बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 60 साल पुराना रेलवे पुल ढहने से रेल सेवा ठप

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने असम और अरुणाचल प्रदेश में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। कई जिलों में आई बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। असम में हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा है तथा मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार राज्य के धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 22 हजार से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हो चुके हैं। सबसे अधिक असर धेमाजी जिले में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। बाढ़ का पानी दर्जनों गांवों तक पहुंच चुका है और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इस प्राकृतिक आपदा का असर पशुधन पर भी पड़ा है और हजारों मवेशी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसी बीच धेमाजी जिले में लगभग छह दशक पुराना रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होकर आंशिक रूप से ढह गया। बताया गया कि लगातार बारिश और नदी किनारे तेज कटाव के कारण पुल का एक पिलर कमजोर हो गया, जिससे उसका एक हिस्सा टूट गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय पुल से कोई ट्रेन नहीं गुजर रही थी, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पुल को नुकसान पहुंचने के बाद संबंधित रेलवे खंड पर ट्रेन सेवाएं एहतियातन रोक दी गई हैं और तकनीकी टीमें मरम्मत कार्य में जुट गई हैं। अरुणाचल प्रदेश में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हाल ही में बादल फटने की घटनाओं के बाद कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। लेकू नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सीमावर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। मौसम विभाग ने 1 जुलाई तक असम और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और आपदा प्रबंधन दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य सरकार से स्थिति की जानकारी लेकर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्य को तेज गति से आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगले कुछ दिन पूर्वोत्तर के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पहली पूजा के साथ सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत, 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत से पहले सोमवार को बाबा बर्फानी की पहली पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने पूजा-अर्चना कर यात्रा के सफल और सुरक्षित संचालन की कामना की। इस वर्ष पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा के लिए प्रशासन ने लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग दोनों से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना होंगे। प्रशासन के अनुसार 15 अप्रैल से अब तक चार लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। यात्रा का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया जाएगा। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया है। बालटाल और चंदनवाड़ी में बेस अस्पताल शुरू कर दिए गए हैं, जबकि दोनों यात्रा मार्गों पर चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का तुरंत उपचार मिल सके, इसके लिए डॉक्टरों और मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई है। प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्गों पर बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि महागणेश टॉप के पास जमी बर्फ को हटाने का कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में यह काम भी पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम हो सकेगी। यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को भी अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोड ओपनिंग पार्टी लगातार गश्त कर रही है। इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय कर पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी की जा रही है। पुलिस, अर्धसैनिक बलों और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर मॉक ड्रिल और सुरक्षा अभ्यास भी आयोजित किए गए हैं। यात्रा मार्ग और बेस कैंपों पर आने वाले श्रद्धालुओं तथा साधु-संतों की नियमित जांच भी की जा रही है। अमरनाथ यात्रा के लिए दो प्रमुख मार्ग निर्धारित किए गए हैं। पारंपरिक पहलगाम मार्ग लगभग 41 किलोमीटर लंबा है, जहां से पवित्र गुफा तक पहुंचने में सामान्यतः तीन से चार दिन का समय लगता है। यह मार्ग अपेक्षाकृत आसान माना जाता है और ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं बालटाल मार्ग करीब सात किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसकी चढ़ाई अधिक खड़ी और कठिन होने के कारण यह अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यात्रा शुरू होने से पहले जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रायल काफिले का सफल ड्राई रन भी किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का परीक्षण किया गया। ट्रायल काफिला तय समय के भीतर रामबन पहुंचा, जिससे प्रशासन ने यात्रा की तैयारियों पर संतोष जताया। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।